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Spiritual Stories

संत रामपाल जी महाराज द्वारा रानीसर, नोहर, हनुमानगढ़ में 200 क्विंटल चारा वितरित

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के अंतर्गत आने वाले रानीसर गांव में स्थित श्री कृष्णा गौशाला में संत रामपाल जी महाराज के गौ सुरक्षा अभियान के तहत 200 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ी) वितरित किया गया। रानीसर गांव में लगभग 200 घर हैं...

संत रामपाल जी महाराज द्वारा हंसावास कलां, चरखी दादरी में 450 क्विंटल चारा वितरित

हरियाणा के चरखी दादरी जिले के अंतर्गत आने वाले हंसावास कलां गांव में स्थित श्री श्याम बरनाला गौशाला में संत रामपाल जी महाराज ने गौ सुरक्षा अभियान के तहत 450 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ी) वितरित किया गया। गौशाला वर्ष 2018 से पंजीकृत एवं संचालित...

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परमेश्वर कबीर जी द्वारा अजामिल (अजामेल) और मैनका का उद्धार

अजामेल (अजामिल) की कथा: काशी शहर में एक अजामेल (अजामिल) नामक व्यक्ति रहता था। वह ब्राह्मण कुल में जन्म था फिर भी शराब पीता था। वैश्या के पास जाता था। वैश्या का नाम मैनका था, वह बहुत सुंदर थी। परिवार तथा समाज के समझाने पर भी अजामेल नहीं माना तो उन दोनों को नगर से निकाल दिया गया। वे उसी शहर से एक मील (1.7 किमी.) दूर वन में कुटिया बनाकर रहने लगे। दोनों ने विवाह कर लिया। अजामेल स्वयं शराब तैयार करता था। जंगल से जानवर मारकर लाता और मौज-मस्ती करता था। गरीब दास जी महाराजजी हमे बताते है कि

कैसे हुआ गंगा नदी का उद्गम, क्या है इसका इतिहास, आखिर क्यों गंगाजल खराब नहीं होता?

गंगा एक ऐसी नदी जिसका पानी विश्व की किसी भी अन्य नदी से अलग है। गंगा एक ऐसी नदी है जो केवल पृथ्वी पर ही नहीं बल्कि जनमानस की अभिव्यक्ति में भी लोकोक्तियों एवं मुहावरों के रूप में बहती है। अपनी इसी लोकप्रियता एवं अद्वितीय रूप में बहने के कारण यह लगातार जन्म मृत्यु के उपरांत किये जाने वाले कर्मकांड का हिस्सा बनी। आइए जानें क्या है गंगा जल का रहस्य? कैसे आई गंगा पृथ्वी पर और क्यों है यह अतुलनीय।

ऋषि मुनीन्द्र, हनुमान जी और नल-नील की कथा [कहानी]

Last Updated on 21 July 2024 IST: Munindra Rishi Story in Hindi: लाखो साल...

मीरा बाई (Meera Bai) ने श्री कृष्ण जी की भक्ति करनी क्यों छोड़ी और किस भक्ति से वे मूर्ति में समाई?

मीरा बाई (Meera Bai) सिर्फ़ एक नाम नहीं है मीरा बाई भक्ति की तरंग, आस्था की लहर और श्रद्धा की गरिमा है। मीरा बाई श्री कृष्ण जी की अनन्य भक्त थीं। बचपन में ही वह कृष्ण जी के प्रति आसक्त हो गईं थीं। मीरा बाई को लोग कृष्ण भक्त मानते हैं परंतु मीरा बाई के गुरु कबीर साहेब जी थे यह लोग नहीं जानते। आज हम इस लेख के माध्यम से आपको मीरा बाई के जीवन से जुड़ी कई सच्ची जानकारियां देंगे कि कैसे मीरा बाई ने तीन लोक के स्वामी विष्णु जी उर्फ श्री कृष्ण जी की त्रिगुणमयी भक्ति त्याग कर कौनसी सतभक्ति करनी आरंभ की थी। इसके बारे में संक्षेप में बताएंगे जिसे जानने के बाद आप यह निर्णय खुद कर सकेंगे कि मनुष्य जीवन में सतभक्ति करनी कितनी ज़रूरी है।

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शास्त्रार्थ का शंखनाद किस्त 3: सृष्टि रचना और वेदों के अनसुने रहस्य | संत रामपाल जी महाराज

भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी में हम अक्सर अपनी रोजमर्रा की उलझनों, करियर और...

शास्त्रार्थ का शंखनाद किस्त 2: परमात्मा का परिचय और सृष्टि रचना का रहस्य

शास्त्रार्थ का शंखनाद किस्त 2: मनुष्य सदियों से कई ऐसे प्रश्नों का उत्तर ढूंढता...