सत यानि कि अविनाशी, लोक यानी कि रहने का स्थान। सतलोक वह स्थान है जिसका कभी नाश नहीं होता। वह अविनाशी है। इसकी रचना कबीर परमात्मा द्वारा की गई है। कबीर परमात्मा समय समय पर अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा उन्हें सतलोक दिखाकर…