22 जून कबीर प्रकट दिवस 2024 [Hindi] पर जाने पूर्ण परमेश्वर कबीर से जुड़े रहस्यों को, जिनसे आप अभी तक अनजान है

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Last Updated on 23 May 2024 | आज हम आप को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के कबीर प्रकट दिवस (Kabir Sahib Prakat Diwas 2024 in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे। 627 वा कबीर प्रकट दिवस इस वर्ष 22 जून को मनाया जाएगा। समाज में तत्वज्ञान के अभाव में श्रद्धालु शंका व्यक्त करते हैं कि कबीर साहेब जी काशी वाला जुलाहा (धाणक) पूर्ण परमात्मा कैसे हो सकता है? लेकिन सत्य तो यही है कि वेदों में कविर्देव यही काशी वाला जुलाहा (धाणक) पूर्ण परमात्मा है। श्रद्धालुओं से निवेदन है कि कृपया सच्चाई को समझें।

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Table of Contents

कबीर साहेब जी का कलयुग में प्रकट होना

कबीर साहेब जी कलयुग में भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब में ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रम संवत 1455 (सन् 1398) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे। 

नीरू नीमा को मिले कबीर परमात्मा

प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में नीरू, नीमा नामक पति-पत्नी लहरतारा तालाब पर स्नान करने जाते थे। एक बार नीरू, नीमा जिनके कोई संतान नहीं थी स्नान करने जा रहे थे और नीमा रास्ते में भगवान शंकर से प्रार्थना कर रही थी कि हे दीनानाथ! आप अपने दासों को भी एक बच्चा दें दें। आप के घर में क्या कमी है। प्रभु! हमारा भी जीवन सफल हो जाएगा। दुनिया के व्यंग्य सुन-सुन कर आत्मा दुखी हो जाती है। मुझ पापिन से ऐसी कौन सी गलती किस जन्म में हुई है जिस कारण मुझे बच्चे का मुख देखने को तरसना पड़ रहा है। हमारे पापों को क्षमा करो प्रभु! हमें भी एक बालक दे दो।

यह कह कर नीमा फूट-फूट कर रोने लगी तब नीरू ने धैर्य दिलाते हुए कहा हे नीमा! हमारे भाग्य में संतान नहीं है यदि भाग्य में संतान होती तो प्रभु शिव अवश्य प्रदान कर देते। आप रो-रो कर आंखें खराब कर लोगी। आप का बार-बार रोना मेरे से देखा नहीं जाता। यह कह कर नीरू की आंखें भर आईं। इसी तरह प्रभु की चर्चा व बालक प्राप्ति की याचना करते हुए दोनो लहरतारा तालाब पर पहुंच गए। प्रथम नीमा ने स्नान किया, उसके पश्चात नीरू ने स्नान करने को तालाब में प्रवेश किया। सुबह का अंधेरा शीघ्र ही उजाले में बदल जाता है। जिस समय नीमा ने स्नान किया था। उस समय तक तो अंधेरा था।

कमल के फूल पर बालक

जब नीमा कपड़े बदल कर पुनः तालाब पर कपड़ो को धोने के लिए गई, जिसे पहन कर स्नान किया था, उस समय नीरू तालाब में प्रवेश करके गोते लगा-लगा कर मल-मल कर स्नान कर रहा था। नीमा की दृष्टि एक कमल के फूल पर पड़ी जिस पर कोई वस्तु हिल रही थी। प्रथम नीमा ने जाना कोई सर्प हैं। उसने सोचा कहीं यह सर्प मेरे पति को न डस ले लेकिन जब नीमा ने उसे ध्यानपूर्वक देखा तो उसने पाया कि वह सर्प नहीं कोई बालक था जिसने एक पैर अपने मुख में ले रखा था तथा दूसरे को हिला रहा था।

कबीर प्रकट दिवस 2024 (Kabir Prakat Diwas in Hindi) | नीमा ने अपने पति से ऊंची आवाज में कहा देखो जी! एक छोटा बच्चा कमल के फूल पर लेटा है। वह जल में डूब न जाए। नीरू स्नान करते-करते उसकी ओर न देख कर बोला,” नीमा! बच्चों की चाह ने तुझे पागल बना दिया है। अब तुझे जल में भी बच्चे दिखाई देने लगे हैं।” नीमा ने अधिक तेज आवाज में कहा,” मैं सच कह रही हूं, देखो सचमुच एक बच्चा कमल के फूल पर, वह रहा, देखो।”

नीमा की आवाज में परिवर्तन व अधिक कसक जानकर नीरू ने उस ओर देखा। कमल के फूल पर एक नवजात शिशु को देखकर नीरू ने झपट कर कमल के फूल सहित बच्चा उठाकर अपनी पत्नी को दे दिया। नीमा ने बालक को सीने से लगाया, मुख चूमा, पुत्रवत प्यार किया। जिस परमेश्वर की खोज में ऋषि-मुनियों ने जीवन भर शास्त्र विरूद्ध साधना की, उन्हें वह नहीं मिला। वहीं परमेश्वर नीमा की गोद में खेल रहा था। उस समय जो शीतलता व आनन्द का अनुभव नीमा को हो रहा होगा उसकी कल्पना नहीं की जा सकती हैं।

कैसे होगा कबीर प्रकट दिवस समारोह 2024 आयोजन?  

प्रत्येक कबीर प्रकट दिवस पर, संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी कबीर प्रकट दिवस (Kabir Prakat Diwas in Hindi) मनाते हैं। उनके द्वारा कबीर प्रकट दिवस समारोह उत्सव में 3 दिन तक गरीबदास जी महाराज की अमर वाणी का अखंड पाठ और विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। लाखों की संख्या में अनुयायी और श्रद्धालु शामिल होकर सतज्ञान अर्जित करते हैं। नए भक्त संत रामपाल जी के सानिध्य में नाम दीक्षा भी लेते हैं। 

इस वर्ष कबीर प्रकट दिवस पर 20-22 जून तक भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों के सतलोक आश्रमों जैसे रोहतक (हरियाणा), कुरुक्षेत्र (हरियाणा), भिवानी (हरियाणा), मुंडका (दिल्ली), शामली (उत्तर प्रदेश), खमाणों (पंजाब), धुरी (पंजाब), सोजत (राजस्थान), इंदौर (मध्य प्रदेश), बैतूल (मध्य प्रदेश), तथा जनकपुर (नेपाल) में भी संत गरीबदास जी की अमृत वाणी का अखंड पाठ किया जाएगा। व्यक्तिगत रूप से आश्रम में आने में असमर्थ भक्तों के लिए पाठ प्रकाश का सीधा प्रसारण यूट्यूब चैनलों और फेसबुक के माध्यम से किया जाएगा। विशेष सत्संग का प्रसारण साधना टीवी पर सुबह 9:20 से दोपहर 12:20 बजे तक किया जाएगा। आप सभी अनमोल सत्संग को देखने के लिए आमंत्रित हैं। इस अवसर पर नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण कराएं।

कबीर दास जी का यथार्थ जीवन परिचय (Kabir Das Biography in Hindi)

पूरा नामसंत कबीर दास
उपनामकबीर, कबीर दास, कबीर परमेश्वर, कबीर साहेब
जन्म (प्रकट दिवस)सन 1398
प्रकट स्थानलहरतारा तालाब, काशी, उत्तर प्रदेश, भारत
प्रस्थान सन 1518
प्रस्थान स्थानमगहर, उत्तर प्रदेश, भारत
प्रसिद्धिकवि, संत
धर्ममानव धर्म (न हिन्दू, न मुसलमान)    
रचनाकबीर बीजक, ग्रन्थावली, शब्दावली, साखी संग्रह, अनुराग सागर इत्यादि

ये “कबीर प्रकट दिवस” है या “कबीर जयंती”?

बहुत से लोग कबीर प्रकट दिवस या कबीर जयंती जैसे शब्दों से भ्रमित हो जाते हैं। सच तो यह है कि कबीर परमेश्वर काशी में 600 वर्ष से अधिक पहले सशरीर प्रकट हुए थे। उन्होने किसी माँ के गर्भ से जन्म नहीं लिया था। इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि उनके प्रकट दिवस को जयंती (जन्मदिन) कहकर मनाना अनुचित है। परमेश्वर कबीर पृथ्वी पर काशी के लहरतारा तालाब में कमल पुष्प पर शिशु रूप में प्रकट हुए इसलिए इस अवतरण के पावन अवसर को उनके प्रकट दिवस (कबीर प्रकट दिवस 2024) मनाया जाना ही उचित है।

शिशु रूप में कबीर साहेब जी को देखने आए नगर के लोग

बालक को लेकर नीरू तथा नीमा अपने घर जुलाहा मोहल्ला में आए। जिस भी नर व नारी ने नवजात शिशु रूप में परमेश्वर कबीर जी को देखा वह देखता ही रह गया। परमेश्वर का शरीर अति सुन्दर था। आंखें जैसे कमल का फूल हो, घुंघराले बाल, लम्बे हाथ, लम्बी-लम्बी उंगलियां, शरीर से मानों नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अद्भुत बालक नहीं था। जो भी देखता वहीं अन्य को बताता कि नूर अली को एक बालक तालाब पर मिला है आज ही उत्पन्न हुआ शिशु है। डर के मारे लोक लाज के कारण किसी विधवा ने डाला होगा। बालक को देखने के पश्चात उसके चेहरे से दृष्टि हटाने को दिल नहीं करता, आत्मा अपने आप खींची जाती है। पता नहीं बालक के मुख पर कैसा जादू है?

कबीर प्रकट दिवस 2024: पूरी काशी परमेश्वर के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। स्त्री-पुरुष झुण्ड के झुण्ड बना कर मंगल गान गाते हुए नीरू के घर बच्चे को देखने को आए। बच्चे (कबीर परमेश्वर) को देखकर कोई कह रहा था, यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। ऊपर अपने-अपने लोकों से श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी, तथा श्री शिवजी झांक कर देखने लगे। बोले कि यह बालक तो किसी अन्य लोक से आया है। इस के मूल स्थान से हम भी अपरिचित हैं परन्तु बहुत शक्ति युक्त कोई सिद्ध पुरुष हैं।

कबीर प्रकट दिवस 2024 [Hindi] : शिशु रूप में कबीर परमेश्वर जी का नामकरण

कबीर साहेब के पिता नीरू (नूर अली) तथा माता नीमा पहले हिन्दू ब्राह्मण ब्राह्मणी थे इस कारण लालच वश ब्राह्मण लड़के का नाम रखने आए। उसी समय काजी मुसलमान अपनी पुस्तक कुरान शरीफ को लेकर लड़के का नाम रखने के लिए आ गए। काजियों ने कहा लड़के का नामकरण हम मुसलमान विधि से करेंगे। अब ये मुसलमान हो चुके हैं। यह कहकर आए हुए काजियों में से मुख्य काजी ने क़ुरान शरीफ़ पुस्तक को कही से खोला। उस पृष्ठ पर प्रथम पंक्ति में प्रथम नाम “कबीरन्” लिखा था। काजियों ने सोचा “कबीर” नाम का अर्थ बड़ा होता है। इस छोटे जाति (जुलाहे अर्थात धाणक) के बालक का नाम कबीर रखना शोभा नहीं देगा। यह तो उच्च घरानों के बच्चों के रखने योग्य है। शिशु रूपधारी परमेश्वर, काजियों के मन के दोष को जानते थे।

यह भी पढें: कलयुग में किस किस को मिले कबीर परमेश्वर? 

काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों पर भी कबीर-कबीर-कबीर अक्षर ही लिखा था। काजियों ने पूरी कुरान का निरीक्षण किया तो उनके द्वारा लाई गई कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मंत्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला। तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले हे काशी के काजियों। मैं कबीर अल्लाह अर्थात अल्लाहु अकबर हूं। मेरा नाम “कबीर” ही रखो। काजियों ने अपने साथ लाई कुरान को वहीं पटक दिया तथा चले गए।

शिशु रूप में कबीर देव जी का 25 दिन तक दूध न पीना

बालक कबीर जी को दूध पिलाने की कोशिश नीमा ने की तो परमेश्वर ने मुख बंद कर लिया। सर्व प्रयत्न करने पर भी नीमा तथा नीरू बालक को दूध पिलाने में असफल रहे। 25 दिन तक बालक को निराहार बीत गए तो माता-पिता अति चिंतित हो गए। 24 दिन से नीमा रो-2 कर विलाप कर रही थी। सोच रही थी कि यह बच्चा कुछ भी नहीं खा रहा हैं, यह मरेगा, मेरे बेटे को किसी की नजर लग गई है। 24 दिन से लगातार स्त्री-पुरुषों द्वारा बताई नजर उतारने की भिन्न-भिन्न विधि प्रयोग करके थक गई। कोई लाभ नहीं हुआ। आज पच्चीसवां दिन उदय हुआ।

कबीर प्रकट दिवस 2024 (Kabir Prakat Diwas in Hindi) | माता नीमा रात्रि भर जागती रही तथा रोती रही कि पता नहीं यह बच्चा कब मर जाएगा। बालक कबीर जी का शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ था तथा ऐसे लग रहा था जैसे बच्चा प्रतिदिन एक किलोग्राम (एक सेर) दूध पीता हो। परन्तु नीमा को डर था कि बिना कुछ खाए पिए यह बालक जीवित रह ही नहीं सकता। यह सोच कर वह फूट-फूट कर रोने लगी तभी भगवान शिव कबीर साहेब की प्रेरणा से, एक ब्राह्मण (ऋषि) का रूप बना कर नीरू की झोपड़ी के सामने खड़े हुए तथा नीमा से रोने का कारण जानना चाहा, नीमा ने सर्वकथा बतायी।

शंकर जी की बालक रुपी कबीर परमात्मा से मुलाक़ात

साधु रूप धारी भगवान शंकर ने कहा आप का बालक मुझे दिखाइए। नीमा ने बालक को ऋषि के समक्ष प्रस्तुत किया दोनों प्रभुओं की आपस में दृष्टि मिली। भगवान शंकर जी ने शिशु कबीर जी को अपने हाथों में ग्रहण किया तथा मस्तिष्क की रेखाएं व हस्त रेखाएं देख कर बोले नीमा आप के बेटे की लम्बी आयु है यह मरने वाला नहीं है। देख कितना स्वस्थ हैं। कमल जैसा चेहरा खिला हैं। नीमा ने कहा हे विप्रवर! बनावटी सांत्वना से मुझे संतोष होने वाला नहीं है। बच्चा दूध पीएगा तो मुझे सुख की सांस आएगी।

पच्चीस दिन के बालक का रूप धारण किए परमेश्वर कबीर जी ने शिवजी से कहा आप इन्हें कहो एक कुंवारी गाय लाएं। आप उस कुंवारी गाय पर अपना आशीर्वाद भरा हस्त रखना, वह दूध देना प्रारम्भ कर देगी। मैं उस कुंवारी गाय का दूध पीऊंगा और उस दूध से मेरी परवरिश होगी।

कबीर प्रकट दिवस 2024 (Kabir Prakat Diwas in Hindi) | कुंवारी गायों से परवरिश

शिवजी ने नीमा नीरू से कहां एक कुंवारी गाय लाओ उसके दूध को यह बालक पीयेगा। नीरू कुंवारी गाय ले आया तथा साथ में कुम्हार के घर से एक छोटा घड़ा भी ले आया। परमेश्वर कबीर जी के आदेशानुसार विप्र रूप धारी शिव जी ने उस कुंवारी गाय की पीठ पर हाथ मारा जैसे कि थपकी लगाते हैं। गौ माता के थन लंबे-लंबे हो गए तथा थनों से दूध की धार बह चली। नीरू को पहले ही वह घड़ा पात्र थनों के नीचे रखने का आदेश दे रखा था। दूध का पात्र भरते ही थनों से दूध निकलना बंद हो गया। वह दूध शिशु रुपधारी कबीर परमेश्वर जी ने पिया।

इसी बात की गवाही ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 देता है कि जब पूर्ण परमात्मा शिशु रूप धारण करके पृथ्वी पर आता है तो उसका पालन पोषण कुंवारी गाय से होता है।

अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनव: शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।

शिशु अवस्था में कबीर देव जी के आशीष से नीरू को धन की प्राप्ति

बालक की प्राप्ति से पूर्व दोनों जने (नीरू-नीमा) मिलकर कपड़ा बुनते थे। 25 दिन बच्चे की चिंता में कपड़ा बुनने का कोई कार्य न कर सके। जिस कारण से कुछ कर्ज नीरू को हो गया। कर्ज मांगने वाले भी उसी पच्चीसवें दिन आ गए तथा बुरी भली कह कर चले गए। कुछ दिन तक कर्ज ना चुकाने पर यातना देने की धमकी सेठ ने दे डाली। दोनों पति-पत्नी अति चिंतित हो गए। माता-पिता को चिंतित देख बालक बोला हे माता-पिता ! आप चिंता न करो। आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गौ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा। यह क्रिया एक वर्ष तक चलती रही।

शिशु कबीर की सुन्नत करने का असफल प्रयत्न

शिशु रूपधारी कबीर देव की सुन्नत करने का समय आया तो पूरा जन समूह सम्बंधियों का इकट्ठा हो गया। नाई जब शिशु कबीर जी के लिंग को सुन्नत करने के लिये कैंची लेकर गया तो परमेश्वर ने अपने लिंग के साथ एक लिंग और बना लिया। फिर उस सुन्नत करने को तैयार व्यक्ति की आंखों के सामने तीन लिंग औऱ बढ़ते दिखाए कुल पांच लिंग एक बालक के देखकर वह सुन्नत करने वाला आश्चर्य में पड़ गया। तब कबीर जी शिशु रूप में बोले भईया एक ही लिंग की सुन्नत करने का विधान है ना मुसलमान धर्म में। बोले शेष चार की सुन्नत कहाँ करानी है ? जल्दी बोलो! शिशु को ऐसे बोलते सुनकर तथा पांच लिंग बालक के देखकर नाई ने अन्य उपस्थित व्यक्तियों को बुलाकर वह अद्भुत दृश्य दिखाया।

सर्व उपस्थित जनसमूह यह देखकर अचंभित हो गया। आपस में चर्चा करने लगे कि यह अल्लाह का कैसा कमाल है, एक बच्चे के पांच लिंग। यह देखकर सुन्नत करने वाला बिना सुन्नत किये ही चला गया। तब शिशु रूपधारी परमेश्वर बोले हे भोले लोगों! आप लड़के का लिंग किसलिए काटते हो? क्या लड़के को बनाने में अल्लाह (परमेश्वर) से चूक रह गई जिसे आप ठीक करते हो। क्या आप परमेश्वर से भी बढ़कर हो? यदि आप लड़के के लिंग की चमड़ी काट कर (सुन्नत करके) उसे मुसलमान बनाते हो तो लड़की को मुसलमान कैसे बनाओगे। यदि मुसलमान धर्म के व्यक्ति अन्य धर्मों के व्यक्तियों से भिन्न होते तो परमात्मा ही सुन्नत करके लड़के को जन्म देता।

■ Read in English: Kabir Prakat Diwas (Kabir Jayanti): Untold Truth About God Kabir Sahib JI

हे भोले इंसानों! परमेश्वर के सर्व प्राणी हैं। कोई मुसलमान समुदाय में जन्मा है तो वह मृत्यु उपरांत हिन्दू या ईसाई धर्म में जन्म ले सकता हैं। ये धर्म की दीवारें खड़ी करके आपसी भाईचारा नष्ट मत करो। यह सर्व काल ब्रह्म की चाल है। कलयुग से पहले अन्य धर्म नहीं थे। केवल एक मानव धर्म (मानवता धर्म) था। अब कलयुग में काल ब्रह्म ने आपको भिन्न-भिन्न धर्मों में बांट कर मानव की शांति समाप्त कर दी है। सुन्नत के समय उपस्थित व्यक्ति बालक मुख से सद् उपदेश सुनकर दंग रह गए। माता-नीमा ने बालक के मुख पर कपड़ा ढक दिया तथा बोली घना मत बोल। काजी सुन लेंगे तो तुझे मार डालेंगे वो बेरहम हैं बेटा। परमेश्वर कबीर जी माता के ह्रदय के कष्ट से परिचित होकर सोने का बहाना बनाकर खराटे भरने लगे। छः महीने की आयु में परमेश्वर कबीर देव पैरों चलने लगे।

ऋषि रामानन्द स्वामी को गुरु बना कर शरण में लेना

स्वामी रामानन्द जी अपने समय के सुप्रसिद्ध विद्वान कहे जाते थे। वे द्राविड़ से काशी नगर में वेद व गीता ज्ञान के प्रचार हेतु आये थे। स्वामी रामानन्द जी की आयु 104 वर्ष थी उस समय कबीर देव जी के लीलामय शरीर की आयु 5 (पांच) वर्ष थी। स्वामी रामानन्द जी का आश्रम गंगा दरिया से आधा किलोमीटर दूर स्थित था। स्वामी रामानंद जी प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व गंगा नदी के तट पर बने पंचगंगा घाट पर स्नान करने जाते थे। पांच वर्षीय कबीर देव ने अढ़ाई ( 2 वर्ष छः माह) वर्ष के बच्चे का रूप धारण किया तथा पंच गंगाघाट की पौड़ियों (सीढ़ियों) में लेट गए। स्वामी रामानन्द जी प्रतिदिन की भांति स्नान करने गंगा दरिया के घाट पर गए। अंधेरा होने के कारण स्वामी रामानन्द जी बालक कबीर देव को नहीं देख सके। स्वामी रामानन्द जी के पैर की खड़ाऊ (लकड़ी का जूता) सीढ़ियों में लेटे बालक कबीर देव के सिर में लगी।

बालक कबीर देव लीला करते हुए रोने लगे जैसे बच्चा रोता है। स्वामी रामानन्द जी को ज्ञान हुआ कि उनका पैर किसी बच्चे को लगा है जिस कारण से बच्चा पीड़ा से रोने लगा हुआ है। स्वामी जी बालक को उठाने तथा चुप करने के लिए शीघ्रता से झुके तो उनके गले की माला (एक रुद्राक्ष की कंठी माला) बालक कबीर देव के गले में डल गयी। जिसे स्वामी रामानंद जी नहीं देख सके। स्वामी रामानन्द जी ने बच्चे को प्यार से कहा बेटा राम-राम बोल राम नाम से सर्व कष्ट दूर हो जाता है। ऐसा कह कर बच्चे के सिर को सहलाया। आशीर्वाद देते हुए सिर पर हाथ रखा। बालक कबीर परमेश्वर अपना उद्देश्य पूरा होने पर पौड़ियों (सीढ़ियों) पर बैठ गए तथा एक शब्द गाया और चल पड़े :- 

गुरु रामानंद जी समझ पकड़ियो मोरी बाहीं।

जो बालक रुन झुनियां खेलत सो बालक हम नाहीं।।

हम तो लेना सत का सौदा हम ना पाखंड पूजा चाहीं।

बांह पकड़ो तो दृढ़ का पकड़ बहुर छुट न जाई।।

जो माता से जन्मा वह नहीं इष्ट हमारा।

राम-कृष्ण मरै विष्णु साथै जामण हारा।।

तीन गुण हैं तीनों देवता, निरंजन चौथा कहिए।

अविनाशी प्रभु इस सब से न्यारा, मोकूं वह चाहिए।।

पांच तत्व की देह न मेरी, ना कोई माता जाया।

जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।

राम-राम और ओम् नाम यह सब काल कमाई।

सतनाम दो मोरे सतगुरु, तब काल जाल छुटाई।।

सतनाम बिन जन्में-मरें परम शान्ति नाहीं।

सनातन धाम मिले न कबहुं, भावें कोटि समाधि लाई।।

सार शब्द सरजीवन कहिए, सब मन्त्रन का सरदारा।

कह कबीर सुनो गुरु जी या विधि उतरें पारा।।

स्वामी रामानन्द जी ने विचार किया कि वह बच्चा रात्रि में रास्ता भूल जाने के कारण यहां आकर सो गया होगा। इसे अपने आश्रम में ले जाऊंगा। वहां से इसे इनके घर भिजवा दूंगा ऐसा विचार करके स्नान करने लगे। परमेश्वर कबीर देव जी वहां से अंतर्ध्यान हुए तथा अपनी झोंपड़ी में सो गए। कबीर परमेश्वर ने इस प्रकार स्वामी रामानन्द जी को गुरु धारण किया। वास्तव में ये सिर्फ एक लीला थी बाद में सत ज्ञान से परिचित होकर रामानंद जी ने कबीर साहेब को गुरु बनाया था। तब उनका कल्याण हुआ था। जानने के लिए देखे संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन में ये प्रकरण।

कौन है वर्तमान में कबीर साहेब जैसा सतगुरु?

आज इस पूरी पृथ्वी पर सिर्फ संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण सतगुरु है जो कि कबीर परमेश्वर जी का ज्ञान सभी आत्माओं को पहुंचा सकते हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सतभक्ति करने से मनुष्य का पूर्ण मोक्ष हो सकता है तथा परमात्मा प्राप्ति हो सकती है। कबीर साहेब जी की आगे की लीलाओं को जानने के लिए कृपया संत रामपाल जी महाराज का सत्संग अवश्य देखें इन चैनलों पर 👇

  • साधना चैनल पर शाम 07:30 बजे
  • ईश्वर चैनल पर सुबह 6:00 बजे
  • श्रद्धा चैनल पर दोपहर 02:00 बजे

संत रामपाल जी महाराज द्वारा सभी धर्म ग्रंथों से प्रमाणित लिखित ज्ञान गंगा पुस्तक Pdf घर बैठे डाउनलोड कर अवश्य पढ़ें।

Frequently Asked Questions (FAQ) About Kabir Prakat Diwas Hindi (Kabir Jayanti)

कबीर साहेब का प्रकट दिवस कब मनाया जाता है?

कबीर साहेब ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455 ( सन् 1398) सोमवार ब्रह्म मुहूर्त के समय काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सतलोक से आकर शिशु रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म किसी माता के गर्भ से नहीं हुआ। वर्ष 2024 में कबीर जी का प्रकट दिवस (कबीर जयंती) 22 जून को है।

कबीर प्रकट दिवस कहां और कैसे मनाते है?

भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब में ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455 (सन्1398) ब्रह्म मुहूर्त में कबीर साहेब जी कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे। उनका जन्म किसी माता के गर्भ से नहीं हुआ। उनका प्रकट दिवस काशी, मगहर सहित पूरे भारत वर्ष और सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। विशेष तौर पर संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में इस वर्ष कबीर प्रकट दिवस पर 20-22 जून तक भारतवर्ष सहित नेपाल में स्थित सतलोक आश्रमों जैसे रोहतक (हरियाणा), कुरुक्षेत्र (हरियाणा), भिवानी (हरियाणा), मुंडका (दिल्ली), शामली (उत्तर प्रदेश), खमाणों (पंजाब), धुरी (पंजाब), सोजत (राजस्थान), बैतूल, और जनकपुर नेपाल में संत गरीबदास जी की अमृत वाणी का अखंड पाठ किया जाएगा। व्यक्तिगत रूप से आश्रम में आने में असमर्थ भक्तों के लिए पाठ प्रकाश का सीधा प्रसारण यूट्यूब चैनलों और फेसबुक के माध्यम से किया जाएगा। विशेष सत्संग का प्रसारण साधना टीवी पर सुबह 9:20 से दोपहर 12:20 बजे तक किया जाएगा।

कबीर जी की रचनाओं का संग्रह क्या है?

कबीर बीजक, कबीर ग्रंथावली, कबीर शब्दावली, कबीर साखी संग्रह, श्रीगुरुग्रंथ साहिब (आंशिक), गरीब दास जी की अमृत वाणी (आंशिक), कबीर सागर इत्यादि मुख्य ग्रंथों में कबीर साहेब की रचनाओं का संग्रह है। संत रामपाल जी ने कबीर साहेब की वाणियों का सरल अर्थ ज्ञान गंगा, जीने की राह, कबीर सागर का सरलार्थ, कबीर परमेश्वर, गीता तेरा ज्ञान अमृत, आध्यात्मिक ज्ञान गंगा, मुक्ति बोध, गहरी नजर गीता में, भक्ति से भगवान तक, अंध श्रद्धा भक्ति खतरा ए – जान और कबीर पंथ परिचय इत्यादि पुस्तकों में दिया है।

कबीर जी की भाषा कौन सी है?

कबीर दास जी की भाषा सधुक्कड़ी एवं पंचमेल खिचड़ी हैं। इनकी भाषा में हिंदी भाषा की सभी बोलियों के शब्द सम्मिलित हैं। अवधी, ब्रजभाषा, खड़ी बोली, राजस्थानी, हरियाणवी, पंजाबी, और गुजराती के शब्दों की बहुलता है।

कबीर दास जी का जन्म कब और कहां हुआ था?

कबीर साहेब ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455 ( सन् 1398) सोमवार ब्रह्म मुहूर्त के समय काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सतलोक से आकर शिशु रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म किसी माता के गर्भ से नहीं हुआ।

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