राजस्थान के डीग जिले के नगला दांदू गांव को ‘किसान मज़दूर बचाओ अभियान के Phase II’ के तहत अतिरिक्त जल निकासी सहायता प्राप्त हुई है। नवीनतम सहायता के अंतर्गत गांव की शेष जलभराव प्रभावित कृषि भूमि के लिए 8 इंच व्यास की 4,800 फीट लंबी पाइपलाइन उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र लगभग 70 वर्षों से जलभराव की समस्या से प्रभावित रहा है। इससे पहले तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता प्रदान कर प्रभावित भूमि के बड़े हिस्से से पानी निकलवाने में सहयोग किया था। Phase II का उद्देश्य अब शेष क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल निकासी समाधान विकसित करना है।
ग्रामीणों ने बताया कि वे सतलोक आश्रम धनाना धाम पहुंचे और शेष जलभराव प्रभावित भूमि के लिए सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद एक सर्वे टीम गांव पहुंची और अतिरिक्त जल निकासी अवसंरचना की आवश्यकता का आकलन किया।
नगला दांदू गांव के लिए Phase II सहायता: प्रमुख बिंदु
- नगला दांदू गांव लगभग 70 वर्षों से जलभराव की समस्या से प्रभावित रहा।
- ग्रामीणों के अनुसार लगभग 300 से 400 बीघा भूमि प्रभावित थी।
- तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने पहले अन्नपूर्णा मुहिम के तहत सहायता प्रदान की थी।
- प्रारंभिक सहायता में 13,000 फीट पाइपलाइन और दो 20 एचपी मोटरें शामिल थीं।
- बाद में दो ट्रैक्टर कपलिंग सेट भी उपलब्ध कराए गए।
- जल निकासी के बाद लगभग 200 बीघा भूमि पर खेती संभव हुई।
- ग्रामीणों ने लगभग 20 मण प्रति बीघा गेहूं उत्पादन की जानकारी दी।
- लगभग 100 बीघा भूमि में अब भी जलभराव बना हुआ था।
- सर्वे में अतिरिक्त 4,800 फीट 8 इंच पाइपलाइन की आवश्यकता बताई गई।
- किसान मजदूर बचाओ अभियान के Phase II के तहत 4,800 फीट पाइपलाइन उपलब्ध कराई गई।
शेष जलभराव प्रभावित भूमि के लिए ग्रामीणों ने मांगी सहायता
ग्रामीणों के अनुसार प्रारंभिक जल निकासी कार्यों से प्रभावित कृषि भूमि के बड़े हिस्से से पानी निकाला गया था। हालांकि, अत्यधिक जलभराव और बुवाई के लिए सीमित समय के कारण लगभग 100 बीघा भूमि अब भी पानी में डूबी हुई रह गई।
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शेष क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए नगला दांदू के ग्रामीण सतलोक आश्रम धनाना धाम पहुंचे और तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की। ग्रामीणों ने बताया कि वे स्थायी जल निकासी व्यवस्था चाहते थे ताकि बची हुई कृषि भूमि भी खेती योग्य बन सके।
सर्वे टीम ने किया स्थिति का आकलन
प्रार्थना प्राप्त होने के बाद एक टीम गांव पहुंची और विस्तृत सर्वे किया।
सर्वे में दो प्रमुख जल निकासी बिंदुओं की पहचान की गई:
| जल निकासी बिंदु | आवश्यक पाइपलाइन लंबाई |
| मंदिर बिंदु | 1,640 फीट |
| स्कूल से मंदिर बिंदु | 3,160 फीट |
| कुल | 4,800 फीट |
सर्वे टीम के अनुसार जल निकासी तंत्र को नहर से जोड़ने और पानी की निकासी सुनिश्चित करने के लिए कुल 4,800 फीट 8 इंच पाइपलाइन की आवश्यकता थी।
ग्रामीणों ने दो सिंगल-फेज़ मोटरों की भी मांग की क्योंकि गांव में वर्तमान में बड़ी मोटरों को चलाने के लिए पर्याप्त थ्री-फेज विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं है।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा पहले मिली थी सहायता

ग्रामीणों ने बताया कि गांव को इससे पहले संत रामपाल जी महाराज द्वारा सहायता प्राप्त हुई थी। ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार पूर्व सहायता में शामिल थे:
| सहायता | विवरण |
| पाइपलाइन | 13,000 फीट (8 इंच) |
| मोटरें | दो 20 एचपी मोटरें |
| अतिरिक्त सहायता | जनरेटर किराया और डीजल खर्च |
| बाद की सहायता | दो ट्रैक्टर कपलिंग सेट |
ग्रामीणों का कहना है कि इस सहायता से लगभग 200 बीघा कृषि भूमि से पानी निकाला जा सका, जो लंबे समय से प्रभावित थी। कई ग्रामीणों ने बताया कि पानी निकलने के बाद खेती फिर से शुरू हुई और पुनः खेती योग्य बनी भूमि पर लगभग 20 मण प्रति बीघा गेहूं उत्पादन हुआ।
किसानों ने साझा किए कृषि सुधार के अनुभव
ग्राउंड रिपोर्ट में शामिल कई किसानों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में प्रभावित भूमि के कुछ हिस्सों पर कभी खेती होते नहीं देखी थी।
ग्रामीणों के अनुसार लगातार जलभराव के कारण कृषि गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित थीं। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि इसका असर आजीविका, आवास, शिक्षा और रोजगार पर पड़ा, जबकि अन्य ने कहा कि खेती संभव न होने के कारण गांव से पलायन भी बढ़ा। किसानों ने बताया कि भूमि के बड़े हिस्से से पानी निकलने के बाद खेती संभव हुई और परिवारों ने अपने खेतों में उगा अनाज प्राप्त किया।
Phase II के तहत पहुंची अतिरिक्त अवसंरचना
किसान मज़दूर बचाओ अभियान के Phase II के अंतर्गत राहत सामग्री लेकर एक काफिला नगला दांदू गांव पहुंचा। सर्वे रिपोर्ट और ग्रामीणों की आवश्यकता के अनुसार नवीनतम सहायता में शामिल हैं:
- 8 इंच व्यास की 4,800 फीट पाइपलाइन
- पाइपलाइन स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण
- पाइपलाइन बिछाने के बाद दो 5 एचपी सिंगल-फेज मोटर उपलब्ध कराने का आश्वासन
प्रतिनिधियों ने बताया कि पहले पाइपलाइन को ज़मीन के नीचे स्थापित किया जाएगा। स्थापना कार्य पूरा होने के बाद जल निकासी प्रणाली को संचालित करने के लिए दो मोटरें उपलब्ध कराई जाएंगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था भविष्य में मानसून के दौरान भी पानी निकालने में सहायक होगी।
ग्रामीणों ने साझा किए धनाना धाम यात्रा के अनुभव
विनोद कुमार सहित कई ग्रामीणों ने सतलोक आश्रम धनाना धाम की अपनी यात्रा के बारे में बताया। ग्रामीणों ने कहा कि वहां उन्हें मानसिक शांति का अनुभव हुआ और उन्होंने महाराज जी से गांव की जल निकासी संबंधी समस्याओं पर चर्चा की।
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68 वर्षीय विनोद कुमार और उनके भाई ने आश्रम की यात्रा के बाद हुक्का छोड़ने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने इसे कृषि सहायता के साथ हुए व्यक्तिगत बदलाव के रूप में देखा।
दीर्घकालिक जल प्रबंधन की ओर बढ़ता गांव
गांव के प्रतिनिधियों का कहना है कि शेष 100 बीघा प्रभावित भूमि के लिए अब स्थायी जल निकासी समाधान की दिशा में रास्ता तैयार हो गया है। उन्होंने बताया कि नई पाइपलाइन को कुछ दिनों के भीतर स्थापित कर नियोजित जल निकासी बिंदुओं से जोड़ा जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भविष्य में बड़ी मोटरों के संचालन के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से थ्री-फेज़ बिजली सुविधा की मांग की है।
लगभग सात दशकों से जलभराव की समस्या झेल रहे इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए दूसरे चरण के तहत मिली नवीनतम सहायता कृषि गतिविधियों की पुनर्बहाली और जल प्रबंधन अवसंरचना को मज़बूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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