झज्जर (हरियाणा) के जर्दकपुर, कुकड़ोला, लुक्सर और लडरावण गाँवों में मसीहा बनकर आए संत रामपाल जी महाराज, बदल दी हजारों किसानों की तकदीर

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प्राकृतिक आपदाएं जब किसी क्षेत्र को अपनी चपेट में लेती हैं, तो वह केवल फसलों को नहीं बल्कि वहां के निवासियों के सुनहरे सपनों, आजीविका और भविष्य को भी मटियामेट कर देती हैं। कुछ ऐसा ही भयावह मंजर हरियाणा के झज्जर जिले के अंतर्गत आने वाले चार गांवों—जर्दकपुर, कुकड़ोला, लुक्सर और लडरावण में देखने को मिला। महीनों से खेतों में ठहरा विनाशकारी बाढ़ का पानी किसानों की बेबसी का मज़ाक उड़ा रहा था। प्रशासनिक स्तर पर हर दरवाजा खटखटाने के बाद जब केवल निराशा और झूठे आश्वासन ही हाथ लगे, तब इन गांवों की अंतिम आशा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बने। संत जी के दिव्य आशीर्वाद और उनके द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत हुए त्वरित हस्तक्षेप ने इन चारों गांवों को तबाही के दलदल से निकालकर खुशहाली के एक नए युग में प्रवेश कराया है।

गांवों की पूर्व एवं वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक विवरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए गए इस ऐतिहासिक बाढ़ राहत सेवा अभियान के अंतर्गत चारों गांवों में आए क्रांतिकारी बदलाव को इस तालिका के माध्यम से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:

गांव का नामबाढ़ राहत से पूर्व की भयावह स्थिति राहत कार्य के बाद की सुखद स्थिति
जर्दकपुर
(तहसील बादली)
* 3000 बीघे (200-300 एकड़) से अधिक कृषि भूमि 6 से 7 फुट गहरे सड़े हुए काले पानी में डूबी थी
* बच्चों को स्कूल जाने के लिए गंदे पानी से गुजरना पड़ता था
* खरीफ फसल पूरी तरह नष्ट और अगली बुवाई असंभव लग रही थी
* 100% भूमि से पानी निकालकर समय पर गेहूं व सरसों की बुवाई संपन्न हुई
* खेतों में खेतों की गूंज और लहलहाती हरी-भरी फसलें दिखाई दे रही हैं
* हजारों परिवारों को भुखमरी और भारी आर्थिक संकट से मुक्ति मिली
कुकड़ोला
(तहसील बादली)
* पिछले 3-4 सालों से 400-450 एकड़ खेत लगातार जलभराव की चपेट में थे
* हनुमान ईंट भट्टा पूरी तरह जलमग्न होने से करीब 350 मजदूर बेरोजगार हो गए थे
* भट्टा मालिक को अकेले ही करीब 2 करोड़ रुपये के भारी नुकसान की आशंका थी
* खेतों का पानी निकलने से 300 एकड़ से अधिक भूमि पर तत्काल फसल लहलहाने लगी
* ईंट भट्टा दोबारा सुचारू रूप से चालू हुआ और सभी 350 मजदूरों को दोबारा रोजगार मिला
* पड़ोसी गांवों (मुनीमपुर और बामडोला) को मिलाकर कुल 800 एकड़ भूमि जलमुक्त हुई
लुक्सर
(तहसील बादली)
* भौगोलिक स्थिति झील जैसी होने के कारण 8-10 गांवों का पानी यहीं जमा था
* 1200 एकड़ में से 1000 एकड़ भूमि समुद्र जैसी जलमग्न थी, जहां 10 से 15 फुट तक गहरा पानी भरा था
* पीने के पानी का सिस्टम ठप था, स्कूल-अस्पताल डूबे थे और किसानों का 30 करोड़ का नुकसान हो चुका था
* मशीनों द्वारा दिन-रात जल निकासी करके 99% से अधिक भूमि को खेती योग्य बनाया गया
* क्षेत्र के लगभग 5 गांवों को मिलाकर व्यापक हरियाली लौटी और जनजीवन पूर्णतः सामान्य हो गया
* संत जी द्वारा उपकरण स्थायी रूप से सौंपे जाने के बाद भविष्य के लिए सुरक्षा ढांचा तैयार हुआ
लडरावण
(तहसील बहादुरगढ़)
* ईंट भट्टों के कारण पानी का प्राकृतिक रास्ता बंद होने से करीब 200 एकड़ कृषि भूमि झील बन चुकी थी
* खेतों में 4 से 5 फुट गहरा गंदा पानी भरा होने से वर्षों पुरानी जलभराव की गंभीर समस्या थी
* किसान कर्ज में डूब रहे थे और ठेके पर जमीन लेने वाले पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर थे
* 85% से अधिक क्षेत्र का पानी निकालकर गेहूं की शत-प्रतिशत बिजाई पूरी कर ली गई
* ग्रामीणों ने पाइपलाइनों को भूमिगत (Underground) दबाकर सिंचाई और जल निकासी का परमानेंट समाधान किया
* गांव का पानी सुरक्षित रूप से दूर ड्रेन और नहरों तक पहुंचा दिया गया

ग्रामीणों की मार्मिक मांग

सभी प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारों और बड़ी कंपनियों के आगे गुहार लगाने के बाद जब इन गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं आया, तब पंचायतों ने संत रामपाल जी महाराज के बरवाला स्थित कार्यालय में राहत सामग्री हेतु लिखित अर्जी प्रेषित की। ग्रामीणों द्वारा अपनी दयनीय स्थिति को देखते हुए निम्नलिखित न्यूनतम मांगें रखी गई थीं:

  • जर्दकपुर गांव द्वारा: 10 हॉर्स पावर की 6 मोटरें और 3000 फीट ड्रेनेज पाइपलाइन।
  • कुकड़ोला गांव द्वारा: 10 हॉर्स पावर क्षमता की मोटरें एवं आवश्यक पाइप।
  • लुक्सर गांव द्वारा: जल निकासी हेतु आवश्यक हेवी-ड्यूटी मोटरें तथा पाइपलाइन की मांग।
  • लडरावण गांव द्वारा: पानी निकालने हेतु कुशल मोटरें एवं ड्रेनेज पाइप की व्यवस्था।

यह भी पढ़ें: 10 साल से डूबे खेतों में जगी उम्मीद: राजस्थान के समधरा गांव में जब राहत बनकर पहुंची संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई दिव्य सहायता

जैसे ही दीनदयाल संत रामपाल जी महाराज के चरणों में इन किसानों की मार्मिक पुकार पहुंची, पूज्य संत जी ने बिना किसी कागजी औपचारिकताओं या सिफारिश के, मात्र कुछ ही दिनों के भीतर राहत सामग्री से भरे विशाल काफिले रवाना कर दिए। सबसे विस्मयकारी बात यह रही कि महाराज जी ने गांवों की मांग से बढ़कर और दोगुनी ताकत की सामग्रियां पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से प्रदान कीं:

  • जर्दकपुर गांव को प्राप्त सामग्री: 10 हॉर्स पावर की 6 शक्तिशाली मोटरें, 3000 फीट उच्च गुणवत्ता के 8 इंची पाइप, विद्युत स्टार्टर, मजबूत केबल्स और संचालन हेतु समस्त छोटा-बड़ा फिटिंग सामान।
  • कुकड़ोला गांव को प्राप्त सामग्री: मांगी गई 10 HP के स्थान पर दोगुनी क्षमता वाली 20 हॉर्स पावर की 2 अत्यंत शक्तिशाली हैवी-ड्यूटी मोटरें और 5400 फीट लंबी 8 इंची पाइपलाइन।
  • लुक्सर गांव को प्राप्त सामग्री: कुल 6 विशाल मोटरें (जिनमें गहरे पानी के लिए 3 15 HP पनडुब्बी/सबमर्सिबल मोटरें तथा 3 ओपन 20 HP की भारी मोटरें शामिल थीं), 5500 फीट लंबे 8 इंची पाइप, और 500 फीट मजबूत बिजली के तार।
  • लडरावण गांव को प्राप्त सामग्री: कुल 4 विशाल मोटरें (दो 20 HP और दो 10 HP की), 12,500 फीट लंबे 8 इंची ड्रेनेज पाइप और स्टार्टर से लेकर सुंडिया-निप्पल तक का संपूर्ण सेट।

विशेष ध्यातव्य: संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में भेजी गई राहत इतनी मुकम्मल थी कि पाइप जोड़ने वाले फेविकोल/एडहेसिव से लेकर सबसे छोटे नट-बोल्ट तक आश्रम की ओर से मुफ्त भेजे गए, ताकि पीड़ित किसानों को बाजार से एक कील भी न खरीदनी पड़े।

अद्भुत उत्सव: ढोल-नगाड़ों और ट्रैक्टर रैलियों से ऐतिहासिक स्वागत

जब इन गांवों में राहत सामग्री से लदे दर्जनों ट्रकों और वाहनों का काफिला पहुंचा, तो वहां का दृश्य दिवाली और होली जैसे पावन उत्सव में तब्दील हो गया। कुकड़ोला और लडरावण गांवों के निवासी अपने सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उमड़ पड़े। ट्रैक्टरों पर डीजे बज रहे थे, पूज्य संत जी की महिमा के भक्तिपूर्ण गीत गूंज रहे थे और पूरे रास्ते ग्रामीणों द्वारा संत रामपाल जी महाराज के पवित्र स्वरूप पर पुष्प-वर्षा कर भावभीना अभिनंदन किया गया। लुक्सर गांव में भी प्रसिद्ध भजन गायकों और समूची पंचायत ने इस अलौकिक मदद का झूमते हुए ऐतिहासिक स्वागत किया।

ग्रामीणों की आवाज़: साक्षात बयां की गई आपबीती

इन चारों गांवों के सरपंचों, नंबरदारों, सेना के रिटायर्ड जवानों और आम किसानों ने वीडियो कैमरों के सामने जो कृतज्ञता व्यक्त की, वह उनके अंतर्मन की गहराइयों से निकली ईश्वर के प्रति सच्ची पुकार है:

  • मनजीत कुमार (सरपंच, जर्दकपुर): “खुशहाली तो जी संत रामपाल जी महाराज की दया से हो रही है। हम गवर्नमेंट के पास जाते थे मोटर नहीं मिलती थी, कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था… रामपाल जी महाराज ने हमें ये सहायता प्रदान करी। मुश्किल घड़ी में इतनी मदद करी, कोई नहीं करेगा, कोई अपना भी नहीं करेगा… रामपाल जी महाराज तो भगवान हैं जो हमें इतनी मदद कर दी।”
  • धर्मवीर सिंह (जर्दकपुर): “हमारे यहां गांव में बुरा हाल था… चारों तरफ चार-चार पांच-पांच फुट पानी भरा हुआ था। ये तो रामपाल जी महाराज की मदद हो गई… अगर ये मदद नहीं मिलती तो गांव की तीन हिस्से जमीन पानी में डूबे रहती… संत रामपाल जी महाराज का आशीर्वाद ही नजर आ रहा है।”
  • जयवीर (सरपंच एवं भट्टा मालिक, कुकड़ोला): “हमारा भठा बिल्कुल एकदम चारों तरफ से पानी में तीन-तीन चार-चार फुट पानी खड़ा हो गया था… अगर ये पानी नहीं निकलता तो डेढ़ करोड़ 2 करोड़ का नुकसान होना था। यह गुरु जी महाराज की तरफ से हमारे को पाइप दिए गए और मोटर दी गई… हम गुरु जी का आभार करते हैं।”
  • सुभाष (पूर्व सरपंच, मुनीमपुर): “शुरुआत में तो शायद ही हमारे खेतों में आठ से सात फुट पानी था… प्रशासन से मदद मांगनी चाही, रिलायंस कंपनी से मांगी लेकिन कोई मदद मिल नहीं पाई… महाराज जी ने तुरंत शायद ही तीन या चार दिन में वो पाइप और मोटरें हमें उपलब्ध कराएं… ऐसे संत महात्मा हमने तो पहली बार देखे जो ऐसे गांव में किसानों की मदद कर रहे हैं।”
  • विजय कुमार (सरपंच, लुक्सर): “हम रामपाल महाराज जी को पूरे गांव की ओर से नमन करते हैं… गुरु जी ने जैसे एक भगवान और परमात्मा जैसे किसानों को सहारा देती है, वो काम रामपाल जी ने करा है। यह तो भगवान नहीं कर सकता कोई जो 500-400 गांव के खेती बवा दी… सरकार को हमने 20 दरखास्त लगाई, 50 आदमी धक्के खाते हैं… रामपाल महाराज गुरु जी ने हमारे 32 के 32 गांवों को बहुत अच्छी राहत पहुंचाई है।”
  • कमलेश (महिला ग्रामीण, लुक्सर): “बहुत अच्छा करा बेटा उसने पानी कड़वा दिया… हमारे गेहूं बगे, अगली खाने की समस्या खत्म हो गई… हम बहुत मुसीबत में थे अब राहत है पूरी।”
  • वजीर (जमींदार, लडरावण): “वे रामपाल जी महाराज ने… हमारा ऐसा काम कर दिया कि जमींदारा की जमीन भगी… हम तो गांव की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद, उसके पवारी रहेंगे सारी उम्र।”
  • संजय (ग्रामीण, लडरावण): “मैं तो यही चीज कहूंगा भगवान भी ऐसा काम नहीं कर सकता जो रामपाल महाराज जी ने करा है… पूरा एक तरीके से जीवन दान दिया है जी गांव के लिए।”
  • राजकुमार (25 किल्ले के जमींदार, लडरावण): “इसमें इतना पानी खड़ा था… करीब-करीब 4.5 फुट… रामपाल महाराज जी की जो हमने मदद मिली उससे हमने 25 के 25 किलिया में बिजाई कर दी… हम तो ये कहते हैं रामपाल महाराज जी ने जो किया हम तो भगवान के समान मानते हैं… ऐसे महाराज हों तो धरती ही स्वर्ग बन जाएगी।”

जवाबदेही और पारदर्शिता: अन्नपूर्णा मुहिम की अद्वितीय व्यवस्था

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जा रही यह सहायता केवल तात्कालिक उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक अत्यंत अनुशासित, पारदर्शी और दूरदर्शी जवाबदेही प्रणाली कार्य करती है। महाराज जी के कड़े निर्देशों के अनुसार, राहत सामग्री के सदुपयोग को प्रमाणित करने के लिए ड्रोन कैमरों के माध्यम से तीन अलग-अलग चरणों में अनिवार्य रूप से वीडियो फुटेज दर्ज की जाती है:

  1. प्रथम चरण: सहायता पहुंचने से पहले जब खेतों में भयानक पानी भरा होता है।
  2. द्वितीय चरण: जल निकासी के पूर्ण होने के बाद जब भूमि साफ हो जाती है।
  3. तृतीय चरण: जब गेहूं या अन्य फसलें पूरी तरह उगकर लहलहाने लगती हैं।

इन सभी चरणों के प्रामाणिक वीडियो सतलोक आश्रमों की समस्त शाखाओं में दानदाताओं और आम जनता के समक्ष प्रदर्शित किए जाते हैं। इसके साथ ही पंचायतों को सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि यदि आलस्य या लापरवाही के कारण पानी नहीं निकाला गया, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा कोई मदद नहीं दी जाएगी, जिससे गांवों में आत्मनिर्भरता और अनुशासन की सामूहिक भावना सुदृढ़ होती है।

सच्चे किसान मसीहा और विश्व उद्धारक: संत रामपाल जी महाराज

आज संपूर्ण भारतवर्ष के सैकड़ों बाढ़ग्रस्त गांवों के लिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज साक्षात ‘भाग्य विधाता’, ‘किसान रक्षक’ और ‘युग पुरुष’ बनकर उभरे हैं। जहां बड़ी-बड़ी सरकारें और धन-लोलुप संगठन आपदा के समय हाथ खड़े कर देते हैं, वहां स्वयं एक किसान परिवार से संबंध रखने वाले संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के मानवता की निःस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। पूज्य संत जी का मूल उद्देश्य केवल भौतिक उपकरण पहुंचाना नहीं, बल्कि समस्त मानव समाज को पवित्र शास्त्रों (वेद, गीता, कुरान, बाइबल) पर आधारित परमेश्वर कबीर साहेब का सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करना और समाज से नशा, दहेज व पाखंड जैसी कुरीतियों को समूल नष्ट करना है।

जैसा कि लडरावण और लुक्सर के किसानों ने भावुक होकर स्वीकार किया कि जो कार्य कलयुग के साधारण मनुष्यों के बस का नहीं है, उसे पूर्ण संत अपनी शब्द शक्ति और दिव्य करुणा से सहज ही संपन्न कर देते हैं। इस घोर तकनीकी और स्वार्थी युग में यदि कोई सच्चा मानवता का संबल है, तो वे एकमात्र संत रामपाल जी महाराज ही हैं।

पूज्य संत जी के दिव्य आध्यात्मिक प्रवचनों को श्रवण करने के लिए उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल ‘Sant Rampal Ji Maharaj’ से अवश्य जुड़ें, अथवा उनके द्वारा लिखित अमूल्य पुस्तक “ज्ञान गंगा” की निःशुल्क प्रति प्राप्त करने के लिए उनकी आधिकारिक वेबसाइट www.jagatgururampalji.org पर आज ही विज़िट करें।

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