10 साल से डूबे खेतों में जगी उम्मीद: राजस्थान के समधरा गांव में जब राहत बनकर पहुंची संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम

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राजस्थान के डीग जिले की जुरहरा तहसील का छोटा सा गांव समधरा पिछले कई वर्षों से एक ऐसी त्रासदी झेल रहा था, जिसने यहां के किसानों की जिंदगी को भीतर तक तोड़ दिया था। खेत थे, लेकिन खेती नहीं थी। जमीन थी, लेकिन उस पर अन्न नहीं उगता था। गांव के बच्चे स्कूल तो जाते थे, लेकिन स्कूलों में भरे पानी के कारण पढ़ाई नहीं हो पाती थी। हर तरफ पानी ही पानी था, लेकिन पीने और जीने की राहत कहीं नहीं थी।

करीब 8 से 10 वर्षों से गांव के लगभग 500 बीघा खेत गंदे और ठहरे हुए पानी में डूबे पड़े थे। किसान अपनी ही जमीन को बेबस नजरों से देखते थे। हालात इतने खराब हो चुके थे कि जिन खेतों से कभी परिवारों का पेट भरता था, उन्हीं परिवारों को अब बाजार से महंगा अनाज खरीदकर गुजर-बसर करनी पड़ रही थी।

गांव वालों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। बड़े अधिकारियों से लेकर स्थानीय स्तर तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। धीरे-धीरे लोगों की उम्मीद टूटने लगी। गांव में यह भावना घर कर गई थी कि शायद अब यह समस्या कभी खत्म नहीं होगी।

जब प्रशासनिक रास्ते बंद हो गए, तब गांव ने खोजी इंसानियत की राह

समधरा गांव के लोगों ने आसपास के गांवों में हो रहे राहत कार्यों के बारे में सुना। उन्हें पता चला कि कई जगहों पर बाढ़ और जलभराव की समस्याओं को संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से चल रही अन्नपूर्णा मुहिम के तहत दूर किया जा रहा है। यही बात गांव वालों के मन में उम्मीद की एक छोटी सी किरण बनकर जगी। ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने मिलकर निर्णय लिया कि वे भी अपनी समस्या लेकर संत रामपाल जी महाराज के दरबार में जाएंगे।

गांव के सरपंच अख्तर हुसैन बताते हैं कि वे कई सालों से परेशान थे। खेतों में पानी भरा रहता था और फसल नहीं होती थी। उन्होंने हर जगह कोशिश की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर उन्होंने पड़ोसी गांवों में सेवा कार्य देखा और वहां से प्रेरणा लेकर अर्जी लगाई। वे आगे बताते हैं कि उन्होंने उम्मीद भी नहीं थी कि इतनी जल्दी मदद मिल जाएगी।

ग्रामीणों के अनुसार, अर्जी देने के कुछ ही दिनों के भीतर राहत सामग्री का विशाल काफिला गांव में पहुंच गया। गांव वालों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

8300 फुट पाइप और दो बड़ी मोटरों ने बदल दी गांव की तस्वीर

समधरा गांव को जलभराव से बाहर निकालने के लिए जो सहायता भेजी गई, वह केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूरी तरह व्यावहारिक और स्थायी समाधान की दिशा में थी। गांव को लगभग 8300 फुट लंबी 8 इंच की मजबूत पाइप लाइन दी गई। इसके साथ दो 20 हॉर्स पावर की बड़ी मोटरें भी उपलब्ध कराई गईं, ताकि खेतों और गांव में जमा पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सके।

इतना ही नहीं, मोटरों को चलाने के लिए जरूरी स्टार्टर, तार, फ्लेक्सिबल पाइप, स्टील के नट-बोल्ट, पाइप जोड़ने का सामान, लगभग 40 किलो पाइप चिपकाने वाला केमिकल और हर छोटी-बड़ी जरूरत का सामान भी साथ भेजा गया। गांव में बिजली की भारी समस्या थी। ग्रामीणों ने बताया कि यहां केवल कुछ घंटों के लिए ही बिजली आती है और थ्री-फेज कनेक्शन भी उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति को देखते हुए डीजल जनरेटर की व्यवस्था भी करवाई गई। जनरेटर का किराया और डीजल का खर्च भी सेवा के तहत उठाया गया ताकि काम बीच में न रुके।

गांव में राहत काफिले के पहुंचते ही उमड़ पड़ा पूरा समधरा

जिस दिन राहत सामग्री गांव में पहुंची, उस दिन समधरा का माहौल किसी बड़े पर्व जैसा दिखाई दे रहा था। गांव की गलियों में लोग घरों से बाहर निकल आए। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं—हर कोई इस राहत को देखने और स्वागत करने पहुंचा। सेवादारों ने गांव में पहुंचकर मंगलाचरण किया। उसके बाद राहत सामग्री पंचायत को सौंपी गई। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और गांव में एक भावुक वातावरण बन गया।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा कि 10 साल से हम इस पानी में घुट रहे थे। आज ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने हमारे शरीर से कांटा निकाल दिया हो। गांव के कई लोगों की आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।

सरकार जहां नहीं पहुंची, वहां पहुंची सेवा की ताकत

गांव के सरपंच अख्तर हुसैन ने भावुक होकर कहा कि वे मुसलमान हैं और यह पूरा इलाका मुस्लिम बस्ती वाला है। लेकिन यहां किसी ने धर्म नहीं देखा। हमारी समस्या देखी गई। जो काम सरकार वर्षों में नहीं कर पाई, वह आज हो गया। हम बहुत शुक्रगुजार हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से खेतों में पानी भरा रहने के कारण खेती पूरी तरह बंद हो चुकी थी। कम से कम 500 बीघा जमीन पानी में डूबी हुई थी। किसान बर्बाद हो गए थे। अब उम्मीद जगी है कि फिर से खेतों में फसल होगी। 

गांव के एक अन्य ग्रामीण जान मोहम्मद ने कहा कि जो सरकार नहीं कर पाई, वह काम यहां करके दिखाया गया। यह बहुत बड़ी मदद है। अब हमारे बच्चे भूखे नहीं सोएंगे। एक अन्य ग्रामीण मशरूफ ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि यह ऐसा है, जैसे शरीर में फंसा कांटा निकल जाए। किसान के लिए खेत ही सब कुछ होता है। जब खेत ही डूब जाएं तो आदमी अंदर से टूट जाता है।

स्कूल, आंगनबाड़ी और गांव की रोजमर्रा जिंदगी भी हो चुकी थी प्रभावित 

समधरा की समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं थी। गांव के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पानी भर जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। कई परिवारों को रोजमर्रा के कामों में भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। गांव के लोगों ने बताया कि बरसात आते ही पूरे इलाके में डर का माहौल बन जाता था। घरों के आसपास पानी जमा हो जाता था। पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा हो जाती थी।

फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने दोहरी मार थी—एक तरफ आय बंद हो गई थी और दूसरी तरफ परिवार का खर्च बढ़ता जा रहा था। राहत सामग्री के साथ मिला जिम्मेदारी का संदेश भी राहत सामग्री सौंपने के दौरान ग्राम पंचायत को एक विशेष निवेदन पत्र भी दिया गया। इसमें कहा गया कि गांव वाले मिलकर जल्द से जल्द पाइप और मोटरें लगाकर पानी निकालें ताकि अगली फसल समय पर बोई जा सके।

ग्रामीणों से कहा गया कि यह केवल सहायता नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। यदि समय रहते पानी नहीं निकाला गया, तो नुकसान गांव का ही होगा। गांव के प्रतिनिधियों ने इस पर हस्ताक्षर कर भरोसा दिलाया कि वे मिलकर जल्द से जल्द काम पूरा करेंगे।

धर्म और जाति से ऊपर उठकर दिखाई इंसानियत

समधरा गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां सेवा के दौरान धर्म या जाति की कोई दीवार दिखाई नहीं दी। मुस्लिम बहुल गांव होने के बावजूद जिस तरह गांव वालों ने स्वागत किया और जिस तरह राहत पहुंची, उसने इंसानियत की एक नई तस्वीर सामने रख दी। कार्यक्रम के दौरान बार-बार यही संदेश दिया गया कि इंसान की पहचान उसके धर्म से नहीं बल्कि उसके दुख और जरूरत से होती है।

ग्रामीण आरिफ ने कहा कि आज के समय में लोग जात-पात और धर्म में बंटे हुए हैं। लेकिन यहां बिना किसी भेदभाव के मदद की गई। यही असली इंसानियत है।

किसानों के दर्द को समझने वाली सेवा की मिसाल

किसान के लिए खेत केवल जमीन नहीं होता, वह उसकी जिंदगी होता है। जब खेत बर्बाद होते हैं तो पूरा परिवार टूट जाता है। समधरा के किसानों ने वर्षों तक यही दर्द झेला। इसी दर्द को समझते हुए जो राहत पहुंचाई गई, उसने गांव वालों के मन में नया भरोसा पैदा किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते यह मदद नहीं मिलती, तो शायद आने वाले वर्षों में गांव के कई परिवार खेती छोड़ने को मजबूर हो जाते। अब गांव वालों को भरोसा है कि अगली फसल की बुवाई समय पर होगी और खेतों में फिर से हरियाली लौटेगी।

सेवा और करुणा की मिसाल बने संत रामपाल जी महाराज

समधरा गांव में आज सबसे ज्यादा चर्चा उस सेवा भावना की हो रही है, जिसमें बिना किसी स्वार्थ के लोगों की मदद की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि जब हर तरफ से निराशा मिली, तब यह सहायता उम्मीद बनकर सामने आई।

गांव वालों के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज केवल धार्मिक प्रवचन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के दुख-दर्द में भी साथ खड़े दिखाई देते हैं। बाढ़ राहत, गरीब परिवारों की सहायता, जरूरतमंदों के लिए भोजन और अन्य सामाजिक कार्यों की चर्चा गांव-गांव में हो रही है। ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि सेवा का असली अर्थ वही है जिसमें बिना भेदभाव के दुखी इंसान का हाथ पकड़ा जाए।

अब समधरा के खेतों में फिर लौटेगी हरियाली

गांव के लोगों की आंखों में अब डर नहीं बल्कि उम्मीद दिखाई दे रही है। जहां कभी सड़ा हुआ पानी भरा रहता था, वहां अब किसान आने वाली फसल के सपने देख रहे हैं। बच्चों के परिवारों को उम्मीद है कि अब स्कूलों में पानी नहीं भरेगा। पशुपालकों को भरोसा है कि चारे की समस्या कम होगी। खेतों में पानी निकलेगा तो गांव की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे पटरी पर लौटेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पाइप और मोटर की कहानी नहीं है, बल्कि यह टूट चुकी उम्मीदों के फिर से जिंदा होने की कहानी है।

जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब सच्ची सेवा उम्मीद बनकर आती है

समधरा गांव की यह कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा केवल खेत नहीं डुबोती, वह इंसान के मनोबल को भी तोड़ देती है। लेकिन ऐसे समय में यदि कोई हाथ थाम ले, तो जिंदगी फिर से खड़ी हो सकती है। आज समधरा के लोग यही महसूस कर रहे हैं कि जब उनकी आवाज कहीं नहीं सुनी गई, तब सेवा और मानवता का एक रास्ता उनके गांव तक पहुंचा।

यह कहानी सिर्फ राहत सामग्री की नहीं है। यह कहानी उस भरोसे की है कि समाज में आज भी ऐसे लोग और संस्थाएं मौजूद हैं, जो बिना भेदभाव के दुखी इंसानों के साथ खड़ी होती हैं। यही वह पल होता है जब लोगों को महसूस होता है कि जब समाज चुप हो जाता है, तब सच्ची सेवा और भगवान का सहारा सामने आ जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड कर सकते हैं।

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