प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का प्रभार, जानिए कौन हैं और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

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नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शनिवार को बड़ा फेरबदल देखने को मिला जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्देश दिया। जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए अगले आदेश तक शिक्षा मंत्रालय की भी देखरेख करेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार आधिकारिक बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार, उनके मौजूदा विभाग के अतिरिक्त, सौंपा जाए।”

दस दिनों की उथल-पुथल के बाद इस्तीफे का फैसला

धर्मेंद्र प्रधान का यह इस्तीफा दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। X (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है और यह मामला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं है। उन्होंने लिखा, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी स्थिति का लाभ राष्ट्रविरोधी तत्व न उठा सकें, देश एकजुट रहे और भारत के छात्र कानूनी उलझनों में फंसने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”

अपने त्यागपत्र में प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें भावुक कर दिया है। उन्होंने कहा, “यह मेरा संकल्प है कि हम देश की युवा शक्ति को असमंजस के जाल में फंसने नहीं देंगे। जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में उत्पन्न स्थिति का दुरुपयोग राष्ट्रविरोधी शक्तियों द्वारा नहीं होना चाहिए।”

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जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन और वापसी की घोषणा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा होते ही CJP ने ऐलान किया कि सरकार द्वारा उसकी शेष सभी मांगें मान लिए जाने के बाद वह अपना आंदोलन वापस ले रही है। इन मांगों में नीट पेपर लीक मामले के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना शामिल था। सीजेपी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि शिक्षा मंत्री ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और नारा दिया, “छात्र शक्ति जिंदाबाद।” 

संगठन के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने कहा, “डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें बाकी हैं।”

कौन हैं प्रल्हाद जोशी, जानिए उनका राजनीतिक सफर

प्रल्हाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक (तत्कालीन मैसूर राज्य) के विजयपुरा (जिसे पहले बीजापुर कहा जाता था) में हुआ था। उनके पिता वेंकटेश जोशी रेलवे कर्मचारी थे और माता का नाम मालतीबाई है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से और हाई स्कूल की पढ़ाई हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने हुबली के श्री कड़सिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से बी.ए (B.A) की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले जोशी पेशे से उद्योगपति रहे हैं। उनका विवाह 26 नवंबर 1992 को ज्योति जोशी से हुआ और दंपति की तीन संतानें हैं।

जोशी की सक्रिय राजनीति की शुरुआत 1992 से 1994 के बीच हुबली के इदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन से हुई, जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। वे ‘राष्ट्रध्वज होराटा समिति’ के संचालक थे और इस आंदोलन ने उन्हें पूरे कर्नाटक में बड़ी पहचान दिलाई। इसी दौर में उन्होंने “सेव कश्मीर मूवमेंट” का भी नेतृत्व किया, जिसने उन्हें कर्नाटक के इस हिस्से में एक पहचान दिलाई। बाद में वे भाजपा (BJP) की धारवाड़ जिला इकाई के अध्यक्ष चुने गए।

जोशी ने पहली बार 2004 के लोकसभा चुनाव में धारवाड़ उत्तर (Dharwad North) सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बी.एस. पाटिल (B.S. Patil) को हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद वे लगातार 2009, 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में इसी सीट से विजयी हुए। 

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2019 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के विनय कुलकर्णी को 2 लाख से अधिक मतों (2,05,072 वोट) के भारी अंतर से हराया था।

मंत्री पद की जिम्मेदारियां

30 मई 2019 को प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Parliamentary Affairs) के साथ-साथ कोयला और खान मंत्रालय (Ministry of Mines) की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2024 के आम चुनाव के बाद मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का दायित्व दिया गया, जिसे वे अब तक संभाल रहे हैं। भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री होने के नाते, वे पदेन (Ex-officio) अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) की असेंबली के अध्यक्ष (President) भी हैं।

Courtesy: NewsX Live

बीस वर्षों से अधिक के संसदीय अनुभव के साथ जोशी को भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है।

व्यक्तिगत रुचियों की बात करें तो जोशी को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सुनना, साहित्यिक पुस्तकें पढ़ना और शतरंज, बैडमिंटन तथा कैरम खेलना पसंद है।

धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल और विवाद

धर्मेंद्र प्रधान ने 7 जुलाई 2021 को रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के स्थान पर शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला था और जून 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी यह जिम्मेदारी बरकरार रखी थी। उनके कार्यकाल में नीट-यूजी (NEET-UG) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके चलते राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को भंग करने और प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी था।

शिक्षा जगत के सामने चुनौतियां

प्रल्हाद जोशी अब अतिरिक्त प्रभार के तहत एनटीए (NTA) में सुधार, लंबित परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और छात्रों के भरोसे को बहाल करने जैसी चुनौतियों का सामना करेंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था अस्थायी है या आगे स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर गहमागहमी का माहौल बना हुआ है और आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय की दिशा को लेकर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार मिलने से जुड़े FAQs

Q1. प्रल्हाद जोशी कौन हैं?


उत्तर: प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वे केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

Q2. प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार क्यों दिया गया?


उत्तर: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा।

Q3. क्या प्रल्हाद जोशी पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री बने हैं?


उत्तर: फिलहाल उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

Q4. प्रल्हाद जोशी वर्तमान में कौन-कौन से मंत्रालय संभाल रहे हैं?


उत्तर: वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

Q5. प्रल्हाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?


उत्तर: छात्रों का भरोसा बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, एनटीए से जुड़े सुधार लागू करना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना उनकी प्रमुख चुनौती होगी।

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