नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा NEET-UG पेपर लीक और CBSE ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन में गड़बड़ियों को लेकर पिछले करीब दो महीने से जंतर-मंतर पर चल रहे “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के तेज़ छात्र आंदोलन के बाद आया है। प्रधान ने खुद X पर एक चिट्ठी पोस्ट करते हुए बताया, “मैंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।” हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से अभी तक इस्तीफे को मंज़ूरी नहीं मिली है।
यह घटना हाल के सालों में भारत में छात्रों की सबसे बड़ी लामबंदी मानी जा रही है, जिसने राजधानी दिल्ली को दो हफ्ते से ज़्यादा वक्त तक लगभग छावनी बना दिया।
कैसे शुरू हुई “कॉकरोच जनता पार्टी”
पूरे आंदोलन की जड़ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की एक टिप्पणी से जुड़ी है। 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” से कर दी थी।
अगले ही दिन आम आदमी पार्टी से जुड़े रह चुके पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट अभिजीत दीपके ने X पर “सभी कॉकरोचों के लिए एक मंच” बनाने का ऐलान कर दिया। शर्त रखी गई—बेरोज़गार हों, आलसी हों, हर वक्त ऑनलाइन रहते हों और गुस्सा निकालने में माहिर हों। 16 मई 2026 को “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) की वेबसाइट “Voice of the Lazy & Unemployed” टैगलाइन के साथ लॉन्च हुई। शुरुआत में यह बस एक मज़ाकिया सोशल मीडिया कैंपेन था, लेकिन देखते-ही-देखते यह पूरे देश में फैला एक बड़ा, बिना नेतृत्व वाला युवा आंदोलन बन गया।
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जंतर-मंतर बना आंदोलन का अड्डा, 6 जून से शुरू हुआ धरना
CJP के झंडे तले छात्र संगठनों—स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के साथ मिलकर 6 जून 2026 से जंतर-मंतर पर धरना शुरू हुआ। मुख्य मांग थी—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार हों।
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आंदोलन को तब और ताकत मिली जब मशहूर शिक्षाविद् और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। फिल्म “3 इडियट्स” के “फुनसुख वांगड़ू” किरदार की प्रेरणा रहे वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लंबी भूख हड़तालें कर चुके हैं। इस बार उनकी हड़ताल 26 दिन तक चली।
आंदोलन की चिंगारी असल में दो परीक्षा विवादों से भड़की—पहला, 3 मई 2026 को हुई NEET-UG मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा का पेपर लीक होना, और दूसरा, CBSE के ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन और रीवैल्यूएशन में गड़बड़ियां, जिसकी वजह से हज़ारों छात्र अपने रिज़ल्ट को लेकर परेशान थे। पेपर लीक के बाद 20 से ज़्यादा छात्रों की आत्महत्या की खबरों ने आग में घी का काम किया।
“चलो संसद” मार्च और लाठीचार्ज, दिल्ली बनी छावनी
20 जुलाई 2026 को हालात और बिगड़ गए जब CJP समर्थकों ने “चलो संसद” मार्च निकालकर संसद भवन की तरफ बढ़ने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस और RAF ने भारी बैरिकेडिंग और बल-प्रयोग से मार्च को रोका, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस चलाई गई। दिल्ली पुलिस ने हालांकि “बल-प्रयोग” की बात से इनकार किया। इस पर राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और प्रधानमंत्री मोदी को “युवा-विरोधी प्रधानमंत्री” बताया, और कहा कि सही मुद्दे उठा रहे छात्रों को घसीटा गया और पीटा गया।
इसके बाद हालात लगातार खराब होते गए। सुरक्षा की वजह से DMRC को केंद्रीय दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशन लगातार तीन दिन बंद करने पड़े। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा फिर भी चालू रही। नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को भी अगले आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया गया।
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कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में दिल्ली पुलिस ने अपने सभी कर्मियों की छुट्टियां तुरंत रद्द कर दीं। आदेश में साफ कहा गया कि कैज़ुअल लीव और अर्न्ड लीव समेत किसी भी तरह की रूटीन छुट्टी अगले आदेश तक नहीं मिलेगी, सिर्फ जांच के बाद असली इमरजेंसी में ही छूट दी जाएगी।
सुरक्षाबलों की भारी तैनाती
आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजधानी में सुरक्षाबलों की जबरदस्त तैनाती की। गृह मंत्रालय के आदेश पर मंगलवार रात CRPF की 20 कंपनियां कोलकाता से एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजी गईं। इसके बाद शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर से 10 और कंपनियां रायपुर से एयरलिफ्ट कर लाई गईं।
इस नई तैनाती के साथ दिल्ली में कुल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संख्या 55 कंपनियों तक पहुंच गई—इसमें CRPF की 34 कंपनियां, इसकी दंगा-रोधी शाखा RAF की 15 कंपनियां, BSF की 3, SSB की 2 और ITBP की 1 कंपनी शामिल है। भारी बारिश के बावजूद हज़ारों CJP समर्थक धरना स्थल पर डटे रहे।
सरकार-CJP बातचीत: नड्डा और जितेंद्र सिंह बने मध्यस्थ
आंदोलन सुलझाने के लिए सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना। शुक्रवार, 24 जुलाई को दिल्ली के विट्ठलभाई पटेल हाउस में सरकार और CJP के बीच बातचीत हुई। सरकार की तरफ से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और PMO राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पहुंचे, जबकि CJP की तरफ से राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और एक और युवा प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा कि उनकी मांगें वही हैं, बस एक नई मांग जुड़ी है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कोई केस दर्ज न हो। प्रवक्ताओं के मुताबिक सरकार ने अभी तक कोई ठोस भरोसा नहीं दिया था और जवाब देने के लिए शनिवार तक का वक्त मांगा था। प्रधान के इस्तीफे की मांग पर नड्डा ने बैठक में कुछ नहीं कहा।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म
इसी बातचीत के दौर में बड़ी राहत की खबर आई—सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल तोड़ दी। वांगचुक ने नड्डा और जितेंद्र सिंह राणा को लिखे पत्र में कहा कि अगर सरकार साफ भरोसा दे कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों-युवाओं पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो वे अनशन खत्म कर देंगे। यह भरोसा मिलने के बाद उन्होंने अनशन तोड़ा, लेकिन साफ कहा कि जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट भी सक्रिय
पुलिस कार्रवाई को लेकर अदालतों में भी हलचल रही। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पुलिस ज़्यादती के आरोप वाली दो अलग याचिकाओं पर 27 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई। यह मामला CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहन की बेंच के सामने रखा गया। वरिष्ठ वकील श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने इसका ज़िक्र किया।
साथ ही जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद करने के खिलाफ दायर एक PIL पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई, जो चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने रखी गई।
विपक्ष का हमला: सोनिया गांधी और जयराम रमेश का तीखा वार
इस्तीफे से पहले कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर रही। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों ने जवाबदेही और सुधार मांगे, लेकिन मोदी सरकार ने उनके साहस का जवाब “कायरता और बेवजह की क्रूरता” से दिया और उन्हें भविष्य का वारिस नहीं बल्कि “देश का दुश्मन” माना। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बिगाड़ रही है और देश के छात्रों ने मोदी सरकार का झूठ सबके सामने ला दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी के देर रात आए वीडियो संदेश पर तंज कसते हुए कहा कि “हताश और परेशान दिख रहे” प्रधानमंत्री ने आखिरकार पेपर लीक पर अपनी करीब दो महीने की चुप्पी तोड़ी, लेकिन इसमें छात्र आंदोलन या उन पर हुई कथित ज़्यादती का कोई ज़िक्र न होना उनकी जवाबदेही की कमी दिखाता है। रमेश ने X पर लिखा कि किसी भी हल के पहले कदम साफ हैं—”मंत्री प्रधान को हटाओ, छात्रों को पीटने वालों को सज़ा दो, माफी मांगो।” उन्होंने याद दिलाया कि मोदी सरकार लंबे समय से NEET-UG 2026 में पेपर लीक होने से इनकार करती रही है।
राहुल गांधी ने भी कहा था कि सिर्फ मंत्री का विभाग बदल देना काफी नहीं होगा, उन्हें हटाया ही जाना चाहिए।
बॉलीवुड और सेलिब्रिटी जगत का साथ
आंदोलन को फिल्म जगत से भी काफी समर्थन मिला। अभिनेत्री ज्योतिका ने बॉलीवुड में आम तौर पर बरती जाने वाली सतर्क चुप्पी तोड़ते हुए खुलकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, वहीं डायरेक्टर शेखर कम्मुला ने जेन-ज़ी की जिद और एकजुटता की तारीफ की।
अभिनेत्री नोरा फतेही ने भी छात्रों के साथ खड़े होकर उनके साहस की तारीफ की। इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा, “हर छात्र, हर परिवार और अनिश्चितता का बोझ ढो रहे हर इंसान के लिए मेरा दिल दुखता है। पढ़ाई सिर्फ मार्क्स की बात नहीं, यह एक त्याग है। देर रात तक पढ़ने वाला हर छात्र और अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसों की तंगी झेलने वाला हर परिवार, इंसाफ और भरोसे का हकदार है।” उन्होंने कहा कि किसी रिज़ल्ट या सिस्टम की कीमत किसी की जान नहीं होनी चाहिए।
केरल में भी आंदोलन की गूंज सुनाई दी, जहां कोच्चि के पनमपिल्ली नगर में रैपर वेदान (हिरनदास मुरली) ने CJP आंदोलन के समर्थन में गाने गाए। इस कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने बिना इजाज़त के आयोजन और ट्रैफिक रोकने का केस आयोजक और करीब 200 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया।
किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी का साथ
आंदोलन को किसान संगठनों का भी सपोर्ट मिला। किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी तीसरी बार जंतर-मंतर पहुंचे और CJP आंदोलन को समर्थन दिया। CJP प्रवक्ता दीपक बालियान ने बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे गुरनाम चढ़ूनी जैसे किसान नेता भी उनके आंदोलन में शामिल होंगे।
फर्जी खबरों का बाज़ार गर्म, पुलिस की सफाई
आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर कई झूठी खबरें भी फैलीं, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने खारिज किया। एक दावे में कहा गया कि जंतर-मंतर पर चोटिल हुई एक गर्भवती महिला पुलिसकर्मी का मिसकैरेज हो गया, और वह चार महीने की गर्भवती थीं। पुलिस ने इसे “पूरी तरह झूठा और भ्रामक” बताते हुए साफ किया कि ये तस्वीरें भगदड़ जैसी हालत में चोटिल हुई अधिकारी की हैं। पुलिस ने कहा, “वह न शादीशुदा हैं न गर्भवती, और फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं।” पुलिस ने लोगों से बिना जांचे-परखे खबरें न फैलाने की अपील की।
एक और फर्जी अखबार की कतरन भी वायरल हुई, जिसमें CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की मौत का झूठा दावा किया गया था। पुलिस ने इसे भी फर्जी बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और लिखा, “दीपके की मौत का दावा फर्जी है। वे बिल्कुल ठीक, सुरक्षित और स्वस्थ हैं। यह जानबूझकर की गई हरकत है और ऐसा फर्जी कंटेंट बनाने-फैलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।”
मोदी की चुप्पी टूटी, देर रात वीडियो संदेश
करीब दो महीने की चुप्पी के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक मुद्दे पर पहली बार सार्वजनिक रूप से कुछ कहा। विपक्ष ने इसे नाकाफी बताया और कहा कि इसमें छात्र आंदोलन या प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित ज़्यादती का कोई ज़िक्र नहीं था।
प्रधान का इस्तीफा पत्र: क्या लिखा

शनिवार, 25 जुलाई 2026 दोपहर धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा अपना इस्तीफा पत्र X पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि वे छात्रों के भले के लिए इस्तीफा दे रहे हैं ताकि देश का युवा “उलझन में न फंसे।”
पत्र में प्रधान ने अपने चार दशक से ज़्यादा लंबे शिक्षा से जुड़े सफर का ज़िक्र करते हुए लिखा, “चार दशकों से ज़्यादा समय से मैं छात्रों, टीचरों और शिक्षा सुधार से जुड़ा रहा हूं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक मज़बूत, सबको साथ लेकर चलने वाली और आगे की सोच रखने वाली शिक्षा व्यवस्था ही एक मज़बूत देश की नींव होती है।” उन्होंने 3 मई 2026 की NEET-UG परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार ने फौरन कार्रवाई की।
उन्होंने आगे लिखा कि इस दौरान “जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने रुकावटें खड़ी कीं और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिसने मुझे बहुत दुखी किया।” प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए निजी इज़्ज़त का मामला नहीं है, बल्कि उनका संकल्प है कि देश की युवा शक्ति उलझन में न फंसे। उन्होंने लिखा, “पिछले 10 दिनों में जो हुआ, उसने मुझे दुखी किया है।”
प्रधान ने बताया कि गड़बड़ी सामने आते ही सरकार ने जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और नई तारीख तय की। साथ ही अगले साल से परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड (CBT) मोड में कराने का फैसला हुआ। 20 लाख से ज़्यादा छात्रों की दोबारा परीक्षा शांति से कराना उनकी प्राथमिकता रही, जिसके लिए राज्य सरकारों और खासकर ज़िला प्रशासन ने अहम भूमिका निभाई। छात्रों और परिवारों के सहयोग से यह परीक्षा 21 जून 2026 को पूरी हो गई।
उन्होंने लिखा, “पहले दिन से मैंने इसकी ज़िम्मेदारी ली और कभी पीछे नहीं हटा। मेरा संकल्प था कि किसी भी काबिल छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के हाथों बर्बाद नहीं होने देंगे, न किसी छात्र के साथ नाइंसाफी होने देंगे।” प्रधान ने यह भी कहा कि चल रहे प्रदर्शनों का फायदा “राष्ट्र-विरोधी ताकतें” न उठाएं, और छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान लगाने का मौका मिलना चाहिए।
CJP संस्थापक दीपके की प्रतिक्रिया: “यह सबूत है”
इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न जैसा माहौल बन गया। PTI से बात करते हुए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। यह इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, अगर आप इसके आगे नहीं झुकते…” दीपके का यह बयान आंदोलन की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
इसी बीच धरना स्थल के “कॉकरोच इज़ बैक” नाम के सोशल मीडिया हैंडल से एक अपील भी आई, जिसमें जंतर-मंतर के टॉलस्टॉय रोड गेट पर खाना भेजने की गुज़ारिश की गई, ताकि प्रदर्शनकारियों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी हो सकें।
आगे क्या: मंज़ूरी बाकी, आंदोलन अब भी जारी
ध्यान देने की बात है कि प्रधान का इस्तीफा प्रधानमंत्री मोदी को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी इसे मंज़ूरी नहीं मिली। दूसरी तरफ, CJP प्रवक्ताओं के मुताबिक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल भले खत्म हो गई हो, लेकिन जंतर-मंतर का धरना और बड़ा आंदोलन फौरन खत्म नहीं होने वाला। आंदोलनकारियों की दो बड़ी मांगें अब भी बाकी हैं—प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज कोई भी केस वापस लिया जाए, और परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट में पुलिस ज़्यादती से जुड़ी याचिकाओं पर 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर भी सबकी नज़र है।
धर्मेंद्र प्रधान 2021 से शिक्षा मंत्री का पद संभाल रहे थे और इससे पहले पेट्रोलियम-गैस, इस्पात तथा कौशल विकास मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी भी निभा चुके हैं। ओडिशा के संबलपुर से लोकसभा सांसद प्रधान BJP के सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि मोदी इस्तीफा मंज़ूर करते हैं या नहीं, और शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे मिलती है।



