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आज हम आपको इस ब्लॉग के माध्यम गुरु रविदास जयंती 2020 (Guru Ravidas Jayanti 2020) के अवसर पर संत रविदास जी महाराज के जीवन परिचय व उनके गुरु कौन थे के hindi में बताएँगे. हम निम्नलिखित बिन्दुओ पर चर्चा करेंगे.

Table of Content

गुरु रविदास जयंती 2020-Guru Ravidas Jayanti

Guru Ravidas Jayanti 2020: भारतदेश को शैशवकाल से ही ऋषि मुनियों, संत-महंत और महापुरुषों की पावन धरती कहा जाता है । भक्तिभाव को मानव के अंतःकरण में जीवित रखने में ये सभी महापुरुष सहायक हुए हैं । संत महात्माओं की अटूट भक्ति को देखकर जनसाधारण के भीतर भी आस्था और श्रद्धा प्रस्फुटित होती है। इसी श्रेणी में एक महापुरुष संत रविदास जी भी है, जिन्होंने खुद भी पूर्ण परमात्मा की भक्ति की और संसार को भी सतभक्ति के मार्ग पर प्रशस्त किया । कई संतों ने Guru Ravidas के ज्ञान और सतभक्ति की प्रशंसा की है । कबीर साहेब ने भक्ति भाव में ध्रुव प्रह्लाद के बराबर का दर्जा देकर संत रविदास जी को अपना प्रिय माना है: –

ध्रू प्रह्लाद भाभीखन पीया, और पीया रैदासा।
प्रेमहि संत सदा मतवाला, एक नाम की आसा।
कहै कबीर सुनो भाई साधो, मिटि गई भव की बासा।

■ संत पीपा जी कहते हैं रविदास और कबीर नहीं होते तो कलियुग भक्ति का घोर पाटन हो जाता : –

जे काली रैदास कबीर न होते।
लोक वेद अरु कलिजुग मिलि कर भगती रसातल देते॥

■ संत नाभादास जातियों और आश्रमों के अभिमान को तज कर रविदास की वंदना करते हैं : –

वर्णाश्रम अभिमान तज, पद राज बंदहि जासू की ।
संदेह ग्रन्थि खंडन निपुण, वाणी विमल रैदास की ॥

संत रविदास जयंती 2020 में कब है?

इस वर्ष 643 वी संत रविदास जयंती अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार 09 फरवरी 2020 को मनायी जाएगी।

संत रविदास जी का जीवन परिचय

संत (गुरु) रविदास जी का जन्म चंद्रवंशी (चँवर) चर्मकार जाति में बनारस के समीप गाँव में हुआ था। जन्म तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद है परंतु परंपरागत अनुश्रुति और रविदासियों में मान्यताप्राप्त संत कर्मदास जी का दोहा प्रचलित है जिसके अनुसार इनकी जन्म तिथि रविवार माघ पूर्णिमा 1433 वि.स. मानी गई है

चौदह सै तैंतीस की, माघ सुदी पंदरास।
दुखियों के कल्याण हित, प्रगटे श्री रविदास॥

संत रविदास जी की माता जी का नाम कलसा देवी और पिता का नाम संतोष दास था । चर्मकार जाति में अवतरित रविदास जी ने अपने चमार होने का वर्णन निःसंकोच बार बार किया है:-

कहै रविदास खलास चमारा।।
जो हम सहरी सो मीत हमारा।

संत रविदास जी द्वारा सामाजिक ऊंच-नीच का प्रखर विरोध

संत रविदास जी ने वर्ण व्यवस्था, छुआछूत, जातपात, एवं ब्राह्मणी सर्वोच्चता के विरोध में स्वर प्रखर किया।

रैदास एक ही बूंद से, भयो जगत विस्तार ।
ऊँच नींच केहि विधि भये, ब्राह्मण और चमार॥

संत रविदास जी महाराज को माता गंगा के द्वारा सोने का कंगन देना

एक समय की बात है संत रविदास जी महाराज को एक ब्राह्मण ने अपने जूते गठवाने के बदले एक कौड़ी दे दिया और नीच जाति का समझकर व्यंग करते हुए कहा कि चलो रविदास गंगा स्नान के लिए चलते हैं क्योंकि उस समय उनको अछूत माना जाता था और अछूतो का गंगा स्नान बन्द कर रखा था।

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रविदास जी ने कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा और प्रार्थना की कि आप मेरी एक ये कौड़ी ले जाइए और माता गंगा को दे दीजिएगा और साथ में यह भी कहा कि माता गंगे को बोलना कि हे माता गंगे यह संत रविदास जी (guru ravidas ji) की कौड़ी है उन्होंने आपके लिए भेजी है। अगर माता गंगा अपना हाथ बाहर निकालकर कौड़ी नहीं लें तो आप यह कौड़ी वापस लेकर आ जाइएगा। ब्राह्मण ने सोचा कि चलो देखते हैं यह रविदास कितना बढ़ा चमत्कारी है और कौड़ी लेकर गंगा स्नान के लिए चला गया।

■ Guru Ravidas Jayanti story in Hindi: ब्राह्मण स्नान स्थल पर पहुंचा और स्नान करने के बाद संत रविदास जी के बताए अनुसार हाथ में कौड़ी लेकर बोला कि हे माता गंगे! यह संत रविदास जी की कौड़ी है उन्होंने आपके लिए भेजी है। इतना सुनते ही माता गंगा अपने दोनों हाथ बाहर निकालकर ब्राह्मण से बोली कि आज मैं धन्य हो गयी जो एक महापुरुष ने मेरे लिए कौड़ी भेजी है और अपने दूसरे हाथ से एक सोने का कंगन देते हुए बोली कि उस पूजनीय आदरणीय संत रविदास जी को यह सोने का कंगन दे देना और कहना कि उनकी कौड़ी पाकर मैं धन्य हो गयी।

■ Guru Ravidas Jayanti in Hindi: यह सब देखने के बाद ब्राह्मण आश्चर्य में पड़ गया कि एक नीच की कौड़ी के लिए माता गंगा ने अपने दोनों हाथ फैलाए। परंतु माता गंगा के दिए सोने के कंगन (जो कि बहुत ही सुंदर था) से आकर्षित होकर ब्राह्मण ने सोचा कि क्यों ना मैं इसे राजा को दे दूं इसके बदले मुझे राजा से धन मिल सकता है यह सोचकर ब्राह्मण ने राजमहल में जाकर राजा को वह कंगन दे दिया। राजा ने अपनी रानी को वह कंगन भिजवा दिया। रानी ने आदेश दिया कि इसी तरह का 15 दिनों के अंदर एक और कंगन चाहिए।

रानी का आदेश ब्राह्मण तक पहुंचा, राजा ने ब्राह्मण से कहा कि ऐसा एक और सोने का कंगन ला देना, आपको मुंह मांगी कीमत दे दी जाएगी और अगर 15 दिनों के अंदर में नहीं ला पाया तो आपको परिवार सहित सूली पर चढ़ा दिया जाएगा। ब्राह्मण 10 दिनों तक इधर-उधर सभी सुनारों के पास जाकर घूमता रहा परंतु किसी भी सुनार से वह कंगन नहीं बन पाया। ब्राह्मण शोक में डूब गया और 14वें दिन घर आकर अपनी ब्राह्मणी को अपनी आप बीती बतायी।

Read in English: Guru Ravidas Jayanti 2020: Who was the Guru of Saint Ravidas?

ब्राह्मणी ने कहा कि अपना अभिमान त्याग कर संत रविदास जी के पास जाइए और उनसे माफी मांग कर इस समस्या का समाधान बताने को कहिए। ब्राह्मण अपनी पत्नी की बात मानकर संत रविदास जी के पास गया और चरणों में गिर गया और अपनी सारी आपबीती बतायी। संत रविदास जी ने ब्राह्मण को अपने चरणों से उठाकर बिठाया और कहा कि ब्राह्मण जी इस दुनिया में कोई नीच या उच्च नहीं है परमात्मा ने सबको एक बनाया है और ब्राह्मण को अपने चाम धोने वाले बर्तन में हाथ डालकर एक कंगन निकालने को कहा। उसमें बहुत सारे वैसे ही कंगन थे।

ब्राह्मण जी ने एक कंगन बाहर निकाला। उन्होंने वह कंगन रानी को ले जा कर दे दिया। रानी को पता था कि इस कंगन के पीछे कोई न कोई राज है तो उन्होंने ब्राह्मण से पूछा कि मुझे उस सुनार का नाम बताओ जिसके पास से आपने यह कंगन बनवाए हैं ताकि भविष्य में अगर मुझे कंगन बनवाना होगा तो मैं उसी के पास से कंगन बनवाऊं। ब्राह्मण ने मौत की सजा से घबराते हुए अपनी सारी आपबीती रानी को भी बतायी। रानी ने संत रविदास के चमत्कारों से प्रभावित होकर संत रविदास जी से नाम दीक्षा ली व सत भक्ति करने लगी।

संत रविदास जी महाराज के द्वारा 700 ब्राह्मणों को शरण में लेना

रानी संत रविदास जी महाराज की शिष्या हो गई। उसके बाद रानी ने एक दिन 700 ब्राह्मणों को भोजन भंडारा के लिए आमंत्रित किया। साथ में अपने गुरु जी संत रविदास जी को भी आमंत्रित किया। भोजन भंडारे में 700 ब्राह्मण आए हुए थे तो उन्होंने देखा कि हमारे साथ में एक नीच जाति के संत रविदास जी बैठे हुए हैं जो कि हमारे सम्मान के विरुद्ध है, तो उन्होंने रानी से कहा कि जब तक यहां रविदास हमारे साथ बैठा है हम भोजन नहीं करेंगे। यह नीच जाति का व्यक्ति हैं। इसको बाहर निकालो।

रानी ने गुरु का अपमान सुनते ही कहा कि आप को भोजन भंडारा करना है तो करो वरना चले जाओ। मैं अपने गुरु जी को नहीं भेज सकती क्योंकि गुरुजी भगवान होते हैं। यह सुनते ही संत रविदास जी ने कहा कि ब्राह्मणों का ऐसे अपमान नहीं करते बेटी। मैं नीच जाति का हूं। मेरा स्थान इनके चप्पलों पर है। इतना कहने के बाद संत रविदास जी महाराज उनके चप्पल रखने के स्थान पर जाकर बैठ कर भोजन भंडारा करने लगे।

■ गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas Jayanti) 2020): सभी ब्राह्मण अपना भोजन करने लगे। उन्होंने यह चमत्कार देखा कि सभी के साथ बैठकर संत रविदास जी भोजन कर रहे हैं। वे सभी एक दूसरे को कहने लगे कि तुम नीच व्यक्ति के साथ भोजन कर रहे हो, तुम अछूत हो गए हो। यह सब सुनने के बाद संत रविदास जी ने कहा कि क्यों मुझ पर लांछन लगाते हो ब्राह्मणों मैं तो आपके चप्पलों के स्थान पर बैठा हूं। यह सब देखने के बाद सभी ब्राह्मण आश्चर्य में पड़ गए। संत रविदास जी महाराज ने कहा कि आप लोग तो सूत की जनेऊ पहनते हो और मैं सोने का।

संत रविदास जी ने अपने शरीर में (खाल के अंदर) सोने का जनेऊ दिखाया व कहा कि वास्तव में संत वह है जिनके पास वास्तविक नाम का जनेऊ हो। इतना सुनते ही सभी ब्राह्मणों ने अपना सिर झुका दिया और सभी ने हाथ जोड़कर संत रविदास जी महाराज से माफी मांगा। संत रविदास जी महाराज ने परमात्मा की अमर वाणी से सत्संग किया। उस चमत्कार और सत्संग से प्रभावित होकर 700 ब्राह्मणों ने संत रविदास जी को गुरु बना कर उनसे नाम दीक्षा ली और अपना कल्याण करवाया।

इस संदर्भ में संत गरीबदास जी महाराज कहते हैं कि अन्य भक्ति करने वाले ब्राह्मण पेट के भरने के नियोजन से आडंबर बनाकर घर घर घूमा करते हैं जबकि सतभक्ति करने वाले संत रविदास ने तो सोने का जनेऊ अपने शरीर से निकालकर दिखा दिया है.

Guru Ravidas Jayanti Quotes in Hindi

गरीब, द्वादश तिलक बनाये कर, नाचै घर घर बाय।
कंनक जनेयू काड्या, सत रविदास चमार।

रैदास ब्राह्मण मत पूजिये, जो होवै गुणहीन ।
पूजिय चरन चंडाल के, जो हौवे गुन परवीन ॥

Guru Ravidas Jayanti 2020-संत रविदास जी की शिष्या मीराबाई

■ Guru Ravidas Jayanti 2020: चित्तौड़ की राजपूत घराने की रानी मीराबाई जी ने संत रविदास जी को अपना गुरु बनाया । संत रविदास जी से नाम उपदेश लेकर कृष्ण भक्ति छोड़ सतभक्ति ग्रहण कर पूर्ण मोक्ष प्राप्त किया । सतभक्ति में मस्त मीरा कहती हैं गुरु रैदास ने सतज्ञान भक्ति प्रदान की है अब मैं उनकी शरण में रहूँगी:-

गुरु मिलिया रैदास जी, दीनहई ज्ञान की गुटकी ।
परम गुरां के सारण मैं रहस्यां, परणाम करां लुटकी॥

यों मन मेरो बड़ों हरामी, ज़्यूं मदमातों हाथी।
सतगुरु हाथ धरौ सिर ऊपर, आंकुस दै समझाती॥

रविदास जी के गुरू कौन थे, उनको वास्तविक मंत्र और भक्ति विधि कैसे प्राप्त हुई?

लोग हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहते है की आखिर संत गुरु रविदास जी के गुरु कौन थे? लोगो के बीच अनेको भ्रांतियां फैली हुई है. लोगो की मान्यताओं के अनुसार लोग गुरु नानक जी को संत रविदास जी का गुरु मानते है. परन्तु सच्चाई यह है की संत रविदास जी के गुरु पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी थे. यह सर्व विदित है कि कबीर साहेब ने स्वामी रामानंद जी को सतज्ञान से परिचित कराया था और सतलोक की यात्रा भी कराई थी । कबीर साहेब ने संत रविदास जी को भी सतज्ञान के तत्व भेद से परिचित कराया । संत रविदास जी को पूर्ण विश्वास हुआ कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा है । सांकेतिक प्रमाण उनकी इस वाणी में है :-

निर्गुण का गुण देखो आई ।
देही सहित कबीर सियाई ।।

■ पीपा, धन्ना, स्वामी रामानंद जी और संत रविदास जी के भी गुरु कबीर साहेब ही थे। लेकिन गुरू परम्परा का महत्व बनाए रखने के लिए उन्होंने रामानंद जी को उनका गुरू बनने का अभिनय करने के लिए कहा और पीपा,धन्ना और रविदास जी को रामानंद जी को गुरू बनाने के लिए कहा। लेकिन वास्तव में सबके ऊपर कबीर साहेब की ही कृपा दृष्टि थी। संत रविदास जी की वाणी बताती है कि:-

रामानंद मोहि गुरु मिल्यौ, पाया ब्रह्म विसास ।
रामनाम अमी रस पियौ, रविदास हि भयौ षलास ॥

गरीबदास जी महाराज भी कबीर साहेब रविदास और मीराबाई के संबंध बड़े जोरदार तरीके से कहते हैं :-

गरीब, रैदास खवास कबीर का, जुगन जुगन सतसंग ।
मीरां का मुजरा हुआ, चढ़त नवेला रंग ।।

संत रविदास जी ने आन उपासना से भी मना किया

संत रविदास जी ने पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के अतिरिक्त किसी अन्य देवी देवता की पूजा करने से मना किया है और कहा कि ऐसा करने वाले नरक में जाते हैं:-

हरि सा हीरा छाड़ कै, करै आन की आस ।
ते नर दोजख जाएंगे, सत्य भाखै रविदास ।।

संत रविदास नाम की महिमा बताते हुए कहते हैं जब सुरत शब्द से मिलकर एकाकार हो जाती है परम आनंद की प्राप्ति होती है । उस समय अंतर में ज्ञान दीपक प्रज्वलित होता है और घट में ब्रह्मानन्द की अनुभूति होती है। सब प्रकार के प्राणायाम छूट जाते है:-

सुरत शब्द जऊ एक हों, तऊ पाइहिं परम अनंद।
रविदास अंतर दीपक जरई, घट उपजई ब्रह्म अनंद॥

इड़ा पिंगला सुसुम्णा, बिध चक्र प्रणयाम।
रविदास हौं सबहि छाँड़ियों, जबहि पाइहु सत्तनाम॥

■ संत रविदास जी ने जिस पूर्ण परमात्मा की भक्ति की और जिन वास्तविक मंत्रों का उन्होंने जाप किया वही वास्तविक सतभक्ति बंदीछोड़ परमेश्वर कबीर साहेब और गरीबदास जी महाराज की गुरु शिष्य प्रणाली में वर्तमान में इस ब्रह्मांड में एकमात्र तत्वदर्शी संत जगतगुरु रामपाल जी महाराज दे रहे हैं। आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे।

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