Eid e Milad India 2021 [Hindi]: ईद उल मिलाद पर जानिए वर्तमान समय में कौन है अंतिम पैगंबर और बाखबर?

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Last Updated on 19 October 2021, 5:00 PM IST: Eid Milad-un-Nabi 2021 (Eid e Milad in Hindi): प्रत्येक मजहब और धर्म में अलग-अलग तरह से अल्लाह की इबादत और पूजा की जाती है । उसकी इबादत और पूजा को शुरू करने वाले अवतार पैगंबर पीर फकीर होते हैं। प्रत्येक धर्म में उन अवतारों, पैगंबरों, फकीरों, फरिश्तों, व संतो के जन्मदिन को उस धर्म के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। उन महापुरुषों से जुड़ी हुई कुछ घटनाएं एक याद के स्वरूप में स्थापित हो जाती है जो एक त्योहार का स्वरूप ले लेती है।

इसी प्रकार मुस्लिम धर्म जिसे इस्लाम धर्म भी कहा जाता है उनका एक महत्वपूर्ण त्योहार है ईद उल मिलाद। यह मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। विश्व के इस्लामिक देशो में इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मिलाद उन नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों के कई वर्गों में एक प्रमुख त्योहार है। इस शब्द का मूल मौलिद (mawlid) है जिसका अर्थ अरबी भाषा मे “जन्म” होता है। अरबी भाषा में ‘मौलिद-उन-नबी’ का मतलब है हज़रत मुहम्मद का जन्म दिन है।

ईद उल मिलाद (Eid e Milad India) कब मनाई जाती है?

ईद उल मिलाद का त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रबी अव्वल के तीसरे महीने की 12 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान हजरत मुहम्मद जी के जन्म का जश्न मनाते है। ईद उल मिलाद के दिन सभी मुस्लिम धर्म के लोग अपने घर और मस्जिद में अल्लाह की इबादत करते है। इस साल 2021 में ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ईद मिलाद-उन-नबी 18 अक्टूबर से 19 अक्टूबर की शाम तक मनाई जाएगी।

ईद उल मिलाद या मौलिद का अर्थ ह.मुहम्मद के जन्म दिन भी है, और इस शुभ अवसर पर संकीर्तन पठन या गायन को भी “मौलिद” कहा जाता है, जिसमें सीरत और नात भी पढ़ी जाती हैं। इस पर्व को इन नामों से भी पुकारा और पहचाना जाता है।

इस्लाम धर्म के अनुसार ईद उल मिलाद क्यों मनाई जाती है?

इतिहासकारों के अनुसार हज़रत मुहम्मद जी के जन्म की सही तारीख अज्ञात है, पर मुस्लिमों का मानना है कि उनका जन्म वर्ष 570 ईस्वी में हुआ था। मुस्लिम समुदायों शिया ओर सुन्नी में हमेशा ईद उल मिलाद त्योहार को मनाने में अपना अलग अलग मतभेद है जो आज भी बना हुआ है। शिया मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्योहार को इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन पैगंबर मुहम्मद ने हज़रत अली को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। जिसके कारण उनका ज्ञान पीड़ियों से चलता हुआ आया है।

Eid e Milad in Hindi (Eid-e-Milad-un-nabi): परन्तु दूसरी ओर सुन्नी समुदाय इसको एक मातम के रूप में मनाते है। क्योकि उनका मानना था कि इस्लाम धर्म के नबी हजरत मोहम्मद खुदा के रसूल थे। जिन्होंने तरह-तरह की मनमुखी साधना अर्थात इबादत को बंद कराकर एक खुदा की बंदगी करने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने अपने अनुयायियों को कलमा रोजा और बंग अजान आदि बंदगी के लिए प्रेरित किया। पैगंबर मोहम्मद मुस्लिम धर्म के एक आखिरी अध्यात्मिक गुरु थे तथा उनकी उस दिन मृत्यु हुई थी। जिस कारण से सुन्नी समुदाय ईद उल मिलाद को अपने अंतिम नबी की मृत्यु की याद में मनाया जाता है। ऐसा मुस्लिम धर्म गुरुओं का मानना है।

ईद उल मिलाद का इतिहास (Eid e Milad History)

सऊदी अरब के मक्का में जन्में पैगंबर हजरत मोहम्मद जी को आज पूरी दुनिया हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाम से जानती है। मोहम्मद साहब के पिताजी का नाम अब्दुल्लाह और माताजी का नाम अमीना बीबी था। माना जाता है की मोहम्मद जी को अल्लाह ने कुरान का ज्ञान दिया था। इसके बाद ही उन्होंने पवित्र कुरान शरीफ/मजीद के संदेश का प्रचार प्रसार किया। 11वीं शताब्दी में इजिप्ट के शासक कबीले द्वारा मौलिद (mawlid) को मनाया गया था। 

Read in English: Eid ul-Milad 2021: Know on Eid Milad-un-Nabi who is the last Prophet at 

इस पूरे दिन अल्लाह की इबादत और प्रार्थना की जाती है। कबीले के नेता भाषण देते है और पवित्र कुरान की आयतें पढ़ते है। इस दिन के पालन का सबसे हालिया रूप 12वीं शताब्दी में शुरू हुआ, जब सीरिया, तुर्की, मोरक्को और स्पेन जैसे देशों ने इसका पालन करना शुरू किया। इस्लाम के दो प्रमुख संप्रदाय सुन्नी और शिया एक ही महीने में अलग-अलग दिनों में इस अवसर को मनाते हैं। सुन्नी महीने की 12 तारीख को दिन मनाते हैं, जबकि शिया इसे 17 तारीख को मनाते हैं। 

Eid e Milad in Hindi (Eid-e-Milad-un-nabi): क्या कुरान शरीफ में ईद उल मिलाद मानने का जिक्र किया गया है?

पैगंबर हजरत मोहम्मद जी, खुदा के सच्चे ज्ञान को अपने अनुयायियों तक पहुचाने वाले एक पाक नबी थे। जिन्होंने इस्लाम धर्म को एक नया आयाम दिया। उन्होंने खुदा की इबादत करने के लिए लोगो को प्रेरित किया। क्योकि खुदा ने अपना अध्यात्मिक ज्ञान हजरत मोहम्मद साहब के जरिए कुरान के माध्यम से दिया। कुरान में अल्लाह की बंदगी के लिए एक ऐसा इशारा किया गया है जिसे समझे बिना आप कुरान शरीफ में अल्लाह की प्राप्ति नही कर सकते।

गौर करने वाली बात यह है कि आज हम कुरान शरीफ को सर्वोपरी मानते है लेकिन क्या हम हजरत मोहम्मद के आदेशो का पालन कर रहे है?

  • क्या हम सभी हज़रत मुहम्मद जी द्वारा दिये इस्लाम धर्म का पालन कर रहे है ?
  • वर्तमान में हम जो इबादत कर रहे है क्या उससे अल्लाह की प्राप्ति हो सकती है?

ये कुछ ऐसे सवाल है जिसके जवाब देने से हम हमेशा से बचते रहे है। क्योकि कुरान शरीफ में कही ईद उल मिलाद मनाने का अल्लाह का आदेश नही। कुरान शरीफ की किसी भी आयतों में ईद उल मिलाद मनाने का प्रमाण नही है। इसमें हमे रुड़ीवादी नही, अपितु विचारशील होना चाहिये। हज़रत मुहम्मद जी स्वयं बोल रहे है कि जिस अल्लाह की तुम भक्ति कर रहे हो वह वास्तव में अल्लाह हु अकबर है या नही, यह जरूर पता करो।  पवित्र कुरान शरीफ सूरत इखलास में स्पष्ट है कि उस अल्लाह का न तो जन्म होता है और ना ही उसकी मृत्यु होती है वो तो अमर है। फिर हम सभी किस आधार से ईद उल मिलाद मनाते है और अल्लाह को बेचून मानते है।

■ यह भी पढ़ें: Bakrid [Hindi]-बकरीद (ईद-उल-अजहा): कुरान में कुर्बानी देने का आदेश अल्लाह का नहीं है 

पूर्ण परमात्मा लगभग 14 शताब्दी में काशी में 120 वर्ष तक लीला करने सशरीर आये थे और फिर सशरीर गये थे। वह अविनाशी अल्लाह हु अकबर और कोई नही  बल्कि कबीर परमात्मा है। उन्होंने किसी भी माता के गर्भ से जन्म नही लिया। इसी का प्रमाण हिन्दू धर्म के सभी पवित्र चारों वेदों और पुराणों में वर्णित है।

Eid e Milad in Hindi (Eid-e-Milad-un-nabi) Special info: अल्लाह ने अपना अध्यात्मिक ज्ञान हजरत मोहम्मद साहब के जरिए कुरान के माध्यम से दिया है। कुरान शरीफ सूरत फुरकान 25 आयत 52 से 59 मे कहा है कि खुदा की इबादत की सही विधि किसी बाखबर अर्थात इल्म वाले जो खुदा की जानकारी रखता हो तथा सभी धर्मों के पवित्र सदग्रंथों के आधार से ज्ञान प्रदान कराता हो उससे पूछो।

खुदा की इसी वास्तविकता को संत गरीब दास जी महाराज ने अपनी अमृत वाणी में कहा है

अर्श कुर्स पर अलह तखत है, खालिक बिन नहीं खाली।

वह पैगंबर पाक पुरुष थे, साहिब के अब्दाली।।

हम ही अलख अल्लाह है, कुतुब गौस और पीर।

गरीबदास खालिक धनी, हमारा नाम कबीर।।

जिसको हिन्दू धर्म में तत्वदर्शी संत कहा है, जिसका प्रमाण गीता ज्ञान दाता ने अध्याय 4 के श्लोक 34 में दिया गया है जिसका अर्थ यह है कि उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ, उसको दण्डवत प्रणाम करने से कपट छोड़ कर सरलतापूर्वक प्रसन्न करने से वह संत तुझे परमात्म ज्ञान का उपदेश करेंगे। इनका सभी का तात्पर्य यह है कि तत्वदर्शी संत और बाख़बर एक ही है, जो ख़ुदा के पाने का सही रास्ता प्रमाण सहित बताता है।

वर्तमान समय में कौन है अंतिम पैगंबर व बाखबर?

वर्तमान समय मे वेदों तथा सभी शास्त्रों के अनुसार वो बाख़बर व अंतिम पैगंबर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज है। जिनकी गवाही बहुत से भविष्यवक्ताओ ने अपनी भविष्यवाणियो तथा कुछ महान संतो ने अपनी वाणियो में दी है। ऐसा इसलिए है क्योकि विश्व के सभी भविष्यवक्ताओ, इतिहास के प्रसिद्ध महान संतो और सभी धर्मों के पवित्र सदग्रंथों आदि का ज्ञान उजागर करने का काम संत रामपाल जी महाराज जी ने ही सटीकता से किया है।

Eid Milad-un-Nabi 2021 (Eid e Milad in Hindi): प्रत्येक मजहब और धर्म में अलग-अलग तरह से अल्लाह की इबादत और पूजा की जाती है । उसकी इबादत और पूजा को शुरू करने वाले अवतार पैगंबर पीर फकीर होते हैं। प्रत्येक धर्म में उन अवतारों, पैगंबरों, फकीरों, फरिश्तों, व संतो के जन्मदिन को उस धर्म के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। उन महापुरुषों से जुड़ी हुई कुछ घटनाएं एक याद के स्वरूप में स्थापित हो जाती है जो एक त्योहार का स्वरूप ले लेती है। जैसे पवित्र कुरान शरीफ आयात 25:52 से 59 में कहा गया है कि उस अल्लाह की जानकारी उस बाख़बर से पूछो जो ब्रह्मांड के रहस्य और विस्तार की जानकारी पूरी तरह से जानता हो। वह ऐसा महापुरुष होगा जो अल्लाह की स्थिति से पूर्णरूप से अवगत होगा। इसकी जानकारी संत रामपाल जी महाराज जी ने अपने ज्ञान द्वारा तथा अपनी लिखी पुस्तकों आदि में  मानव कल्याण हेतु बताई है। वे एक मात्र संत है जो परमात्मा प्राप्ति का सच्चा उपाय बताते है।

उन्होंने सभी धर्म गुरुओं से भिन्न ज्ञान हमारे सभी ग्रंथो को दिखा कर बताया है जो आज तक किसी भी धर्म गुरु तथा मुल्ला काज़ी के मुख से नही सुना। उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के आधार से बताया है कि हम एक पिता की संतान है। हम सभी जीव एक बहुत भयंकर गलती के कारण अपने भगवान अर्थात कबीर परमात्मा से दूर हो गये है। हम एक ऐसे स्थान से आये है जहाँ की वस्तुएं कभी भी समाप्त नही होती। वहाँ सभी चीज़ अमर होती है। जिसे सतलोक कहा जाता है जो हमारा मूल स्थान है।

संत रामपाल जी महाराज जी ने बताई सच्चे अल्लाह की सच्ची इबादत।

संत रामपाल जी महाराज कहते है कि सभी धर्मों के ग्रंथ एक ही परमात्मा अर्थात अल्लाह की ओर संकेत कर रहे है, जो हम सब का पिता है। वह केवल एक अविनाशी भगवान कबीर परमात्मा है। जिसका प्रमाण इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक फजाइले आमाल के फजाईले जिक्र की आयात 1ए, 2ए, 3ए, 6, और 7 में भी मिलता है। हम सभी विभिन्न धर्मों में होने के कारण आपस मे विभाजित है। परंतु संत रामपाल जी महाराज जी के आध्यात्मिक ज्ञान से हम सभी पुनः एक होंगे, और कबीर जी की सतभक्ति करके एक सभ्य समाज का निर्माण करके मोक्ष प्राप्त करेंगे।

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