रोहतक के मसूदपुर के खेतों से 20 साल पुराना समंदर कैसे सूखा, कैसे लहलहाने लगी फसल ?

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हरियाणा के रोहतक जिले का मसूदपुर गांव आज एक नई उम्मीद की किरण के साथ जाग रहा है। पिछले दो दशकों से जलभराव की मार झेल रहे किसानों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि उनकी 4000 बीघा जमीन, जो कभी पानी में डूबी रहती थी, आज गेहूं की हरी फसल से लहलहा रही है।

सरकारी तंत्र की विफलता और ग्रामीणों की आखिरी उम्मीद

मसूदपुर की करीब 80% खेती योग्य जमीन पिछले 20 वर्षों से 3 से 4 फीट पानी के नीचे दबी हुई थी। स्थानीय प्रशासन और सरकारी योजनाओं के कई प्रयासों के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। किसानों की स्थिति इतनी दयनीय थी कि वे कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या तक का विचार करने लगे थे। समस्या से समाधान तक की कहानी को निम्न बिंदुओं से समझिए:

  • 20 साल का इंतजार: मसूदपुर गांव 20 साल से जलभराव की समस्या से जूझ रहा था।
  • विशाल सहायता: संत रामपाल जी महाराज ने 5260 फुट लंबी 8 इंची पाइपलाइन और 10 HP की दो शक्तिशाली मोटरें प्रदान कीं।
  • अन्नपूर्णा मुहिम: इस सहायता के बाद मात्र कुछ ही दिनों में 4000 बीघा जमीन से पानी निकाल दिया गया।
  • 99.9% बिजाई सफल: जहाँ किसान अपनी फसल खो चुके थे, अब वहाँ लगभग पूरी जमीन पर गेहूं की बिजाई हो चुकी है और फसल लहलहा  रही है । 
  • सम्मान समारोह: गांव की 36 बिरादरी ने संत रामपाल जी महाराज जी को ‘किसान गौरव सम्मान’ देकर सम्मानित भी किया । 

यह भी पढ़ें: बाढ़ में डूबे सीसर खास गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने किया हथेली पर सरसों उगाने जैसा चमत्कार

संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी और त्वरित समाधान

जब चारों तरफ अंधेरा दिखा, तब ग्राम पंचायत मसूदपुर ने और जिला पार्षद जयदेव डागर ने संत रामपाल जी महाराज के आश्रम में अपनी व्यथा पहुंचाई। संत रामपाल जी महाराज के आश्रम में अपनी अर्जी लगाने के पश्चात उनके मन में एक उम्मीद जागी । संत रामपाल जी महाराज जी ने तुरंत स्थिति का संज्ञान लिया और ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत तुरंत प्रभाव से राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया।

गाड़ियों का काफिला और ग्रामीणों का स्वागत

जैसे ही पाइप और मोटरों से लदे ट्रक गांव पहुंचे, ग्रामीणों का उत्साह देखने लायक था। ढोल-नगाड़ों और फूलों की वर्षा के साथ इस काफिले का स्वागत किया गया और पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए 36 बिरादरी की सांझा पगड़ी भेंट की।

किसानों और सरपंच की जुबानी: बदहाली से खुशहाली तक की कहानी

गांव के सरपंच भगवत दयाल और अन्य किसानों ने बताया कि स्थिति कितनी गंभीर थी। सरपंच के अनुसार, यदि यह सहायता न मिलती तो 4000 बीघा जमीन खाली रह जाती और किसानों को करोड़ों का नुकसान होता।

सरपंच भगवत दयाल के विचार

सरपंच ने भावुक होते हुए कहा, हमारे लिए तो भगवान यही हैं। जहाँ प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए थे, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया ।

बड़े जमींदारों की व्यथा

100 एकड़ जमीन पर खेती करने वाले विजेंद्र जैसे किसानों ने बताया कि वे लाखों के कर्ज में डूबे थे। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसमें से 70 एकड़ जमीन उन्होंने दूसरों से ₹40,000-45,000 प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके (lease) पर ले रखी है। बाढ़ के कारण उनके 30 किले (एकड़) के धान खराब हो गए थे और बाकी 70 एकड़ में बिजाई नहीं हो पा रही थी। ट्रैक्टर की किस्तें और बच्चों की स्कूल फीस देना नामुमकिन था, लेकिन इस सहायता ने उन्हें फांसी के फंदे से बचा लिया।

भविष्य की सुरक्षा: अब हर साल नहीं डूबेगी फसल

महाराज जी द्वारा दी गई यह सहायता केवल एक बार के लिए नहीं है। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार इन मोटरों और पाइपलाइन को स्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा ताकि भविष्य में कभी भी जलभराव की स्थिति पैदा न हो।

यह भी पढ़ें: मसूदपुर में सरकारी तंत्र फेल, संत रामपाल जी महाराज ने 5260 फुट पाइपलाइन से बदली किसानों की तकदीर

सांप्रदायिक एकता का प्रतीक

मसूदपुर गांव में सभी जातियों और वर्गों (36 बिरादरी) ने एक साथ आकर संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त किया है।

संत रामपाल जी कर रहे हैं मानवता की सच्ची सेवा

यह घटना सिद्ध करती है कि जब आध्यात्मिक शक्ति और जनसेवा का मिलन होता है, तो 20 साल पुरानी समस्याओं का समाधान भी दिनों में संभव है। मसूदपुर के खेतों की हरियाली आज संत रामपाल जी महाराज की अपार दया की गवाही दे रही है। यही मानवता की सच्ची सेवा है, इसी की सीख संत रामपाल जी महाराज सभी को दे रहे हैं।

वो स्वयं भी इसी रास्ते पर चलकर हमें ये संदेश दे रहे हैं कि हम खुद चाहे किसी भी हालत में हो, हमें हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना चाहिए। कलयुग में सतयुग की शुरुआत हो चुकी है, हर रोज संत रामपाल जी महाराज इसमे एक नया अध्याय जोड़ते जा रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज की पुस्तक ज्ञान गंगा मँगवाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। 

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