रोहतक के किलोई स्टेडियम में बदली तस्वीर: जहाँ कभी खिलाड़ियों को होती थी परेशानी, आज वहीं दिख रही है नई उम्मीद और नई चमक

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हरियाणा के रोहतक जिले के गाँव किलोई में इन दिनों सिर्फ खेल या बास्केटबॉल टूर्नामेंट की चर्चा नहीं हो रही, बल्कि एक ऐसी सेवा भावना की मिसाल दी है जिसने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है। शिवकुमार मेमोरियल स्टेडियम, जहाँ हर साल देशभर से खिलाड़ी ऑल इंडिया बास्केटबॉल टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुँचते हैं, वहाँ वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी थी। खिलाड़ियों को रहने, खाने, शौचालय और स्नान जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। संत रामपाल जी महाराज की दया से इस स्टेडियम का ऐसा पुनर्निर्माण हुआ है जिसे देखकर गाँव के बुजुर्ग से लेकर खिलाड़ी तक सभी भाव विभोर नजर आए। डेढ़ महीने के बेहद कम समय में यहाँ नया हॉल, बरामदा, किचन, स्टोर रूम, 12 नए शौचालय, 12 बाथरूम और पुराने शौचालय और बाथरूमों की मरम्मत का काम पूरा कर दिया गया। आज शिवकुमार मेमोरियल स्टेडियम में सिर्फ नई इमारतें ही नहीं है, बल्कि लोगों की आँखों में संतोष, खुशी और सम्मान भी साफ दिखाई दे रही है।

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वर्षों पुरानी समस्याओं से जूझ रहा था किलोई का यह प्रसिद्ध स्टेडियम

शिवकुमार मेमोरियल स्टेडियम कोई साधारण खेल मैदान नहीं है। यह गाँव किलोई की पहचान है। यहाँ से कई खिलाड़ी सेना, रेलवे, पुलिस और विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की टीमों तक पहुँचे हैं। गाँव के लोग इसे “बास्केटबॉल की नर्सरी” कहते हैं।

लेकिन इतनी प्रसिद्धि के बावजूद स्टेडियम की हालत बेहद खराब थी। खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त बाथरूम नहीं थे। पुराने शौचालय टूट चुके थे। बाहर से आने वाली टीमों को कई बार रोहतक शहर में रुकवाना पड़ता था। गाँव की कमेटी ने कई बार प्रशासन और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।

कोच और ट्रेजरर विजेंद्र हुड्डा बताते हैं,

“हम पिछले तीन-चार साल से यहाँ ऑल इंडिया टूर्नामेंट करवा रहे हैं। देश की बड़ी-बड़ी टीमें यहाँ आती हैं। एयरफोर्स, नेवी, रेलवे और आर्मी की टीमें भी पहुँचती हैं। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी शौचालय और बाथरूम की थी। खिलाड़ी परेशान हो जाते थे। कई बार शर्मिंदगी महसूस होती थी।”

वह आगे कहते हैं,

“हमने सरकार तक से मदद माँगी, लेकिन काम नहीं हुआ। आखिर में हमने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई और जो काम सालों में नहीं हुआ, वो डेढ़ महीने में पूरा हो गया।”

डेढ़ महीने में तैयार हुआ नया परिसर, गाँव वाले देखकर रह गए हैरान

गाँव के लोगों के अनुसार जिस गति से यह काम हुआ, उसे देखकर हर कोई हैरान था। जहाँ सामान्य परिस्थितियों में इतना बड़ा निर्माण कार्य कई महीनों तक चलता, संत रामपाल जी महाराज जी की असीम दया से दिन-रात एक करके इसे बहुत कम समय में पूरा कर दिया गया।

स्टेडियम परिसर में अब एक बड़ा हॉल बनाया गया है जिसके सामने बरामदा है। पीछे आधुनिक रसोई बनाई गई है। साथ में स्टोर रूम, नए बाथरूम और शौचालय भी तैयार किए गए हैं। सिर्फ नया निर्माण ही नहीं, बल्कि पुराने टूटे हुए शौचालयों और बाथरूमों की भी मरम्मत करवाई गई।

गाँव के बुजुर्ग रामकरण भावुक होकर कहते हैं,

“हमने तो सोचा भी नहीं था कि इतना बढ़िया काम हो जाएगा। ऐसा हॉल, ऐसी रसोई, ऐसे बाथरूम हमने बड़े शहरों में भी नहीं देखे। हमारे गाँव के बच्चों के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है।”

वहीं एक अन्य ग्रामीण ने हँसते हुए कहा,

“हमने तो सिर्फ छोटी-सी माँग रखी थी, लेकिन गुरुजी ने उससे कहीं ज्यादा दे दिया।”

खिलाड़ियों को अब नहीं होगी परेशानी, पूरे देश से आने वाली टीमों को मिलेगा बेहतर माहौल

इस स्टेडियम में हर साल राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट होता है। ऐसे में बाहर से आने वाले खिलाड़ियों के लिए सुविधाएँ बेहद जरूरी थीं। पहले स्थिति यह थी कि खिलाड़ियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

कोच विजेंद्र हुड्डा बताते हैं,

“टूर्नामेंट के दौरान यहाँ सैकड़ों खिलाड़ी आते हैं। पूरे साल करीब 200 खिलाड़ी यहाँ अभ्यास करते हैं। पहले बाथरूमों की हालत इतनी खराब थी कि हम खुद डरते थे किसी को यहाँ रुकवाने से। लेकिन अब सब बदल गया है।” उन्होंने नई इमारत की गुणवत्ता की भी तारीफ की।

“मैं यहाँ एसी लगवाने वाले व्यक्ति की बात बता रहा हूँ। उसने कहा कि 20 साल में इतनी मजबूत दीवार नहीं देखी। इससे अंदाजा लगाइए कि कितना बढ़िया मटेरियल लगाया गया है।”

अब खिलाड़ियों के लिए रहने, खाने और मीटिंग करने की सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे आने वाले वर्षों में टूर्नामेंट का स्तर और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सेवा सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं, हर साल होता है विशाल भंडारा

गाँव वालों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से पिछले कई वर्षों से यहाँ ऑल इंडिया टूर्नामेंट के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। देशभर से आने वाले खिलाड़ियों और गाँव के लोगों के लिए भोजन की पूरी व्यवस्था की जाती है।

कोच विजेंद्र हुड्डा कहते हैं,

“हमने सिर्फ खिलाड़ियों के खाने की व्यवस्था के लिए अर्जी लगाई थी। लेकिन गुरुजी ने हर साल तीन दिन तक सभी खिलाड़ियों के भोजन की जिम्मेदारी उठाई। आसपास के गाँवों के लिए भी भंडारा होता है।” गाँव के लोगों का कहना है कि यह सेवा किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि समाजहित की भावना से की जा रही है।

गाँव वालों की आँखों में खुशी, हर कोई कर रहा सेवा की सराहना

जब स्टेडियम में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद चाबी गाँव कमेटी को सौंपी गई तो वहाँ मौजूद कई लोग भावुक हो गए। बुजुर्ग, खिलाड़ी, पंचायत सदस्य और ग्रामीण लगातार संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते नजर आए। जगबीर फौजी कहते हैं,

“इतने कम समय में इतनी बढ़िया बिल्डिंग तैयार करना आसान बात नहीं है। गाँव वाले बहुत खुश हैं। पहले खिलाड़ी परेशान होते थे। अब उनका पूरा ध्यान खेल पर रहेगा। हमने देखा कि संत रामपाल जी महाराज जी की असीम दया से दिन-रात मेहनत करके स्टेडियम का कार्य पूर्ण कराया गया। हर कोई सेवा में लगा हुआ था।”

गाँव की कमेटी के सदस्य भी मानते हैं कि अगर यह काम उन्हें खुद करना पड़ता तो शायद कई साल लग जाते।

बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया निर्माण कार्य

सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा किया गया यह कार्य सिर्फ भवन निर्माण नहीं था, बल्कि इसे बच्चों और खिलाड़ियों के भविष्य से जोड़कर देखा गया।

एक सेवादार ने बताया,

“यह गाँव बास्केटबॉल की नर्सरी है। यहाँ से देश के लिए खिलाड़ी निकलते हैं। इसलिए संत रामपाल जी महाराज ने इसे अन्नपूर्णा मुहिम से जोड़कर खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध करवाईं।”

उन्होंने बताया कि निर्माण में उच्च गुणवत्ता का सामान इस्तेमाल किया गया। मजबूत चौखटें, बड़े रोशनदान, बेहतर वेंटिलेशन और टिकाऊ निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया ताकि आने वाले कई वर्षों तक खिलाड़ियों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

संत रामपाल जी महाराज की सेवा भावना ने लोगों के दिलों को छुआ

गाँव के लोगों की बातचीत में एक बात बार-बार सुनाई दी — “ऐसी सेवा बहुत कम देखने को मिलती है।”

कई ग्रामीणों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज सिर्फ धार्मिक प्रवचन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग की मदद के लिए आगे आते हैं। कहीं गरीबों के लिए मकान बनवाए जा रहे हैं, कहीं लाइब्रेरी बनाई जा रही है, तो कहीं किसानों और खिलाड़ियों के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

गाँव के एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा,

“जब कोई हमारी सुनवाई नहीं कर रहा था, तब गुरुजी ने हमारी परेशानी समझी। यह सिर्फ ईंट-पत्थर का काम नहीं है, यह लोगों के दिल जीतने का काम है।”

ग्रामीणों का कहना है कि इस सेवा ने गाँव में एक नई सकारात्मक सोच पैदा की है। अब लोग अपने बच्चों को खेलों के लिए और ज्यादा प्रोत्साहित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें बेहतर सुविधाएँ मिल रही हैं।

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना किलोई का यह स्टेडियम

आज गाँव किलोई का यह स्टेडियम आसपास के गाँवों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग यहाँ आकर नई बिल्डिंग, हॉल, रसोई और बाथरूम देख रहे हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि इतनी अच्छी गुणवत्ता का काम उन्होंने बड़े शहरों में भी कम देखा है।

गाँव के लोगों का मानना है कि संत रामपाल जी महाराज जी की इस अमूल्य सहायता से सिर्फ स्टेडियम नहीं बदला, बल्कि पूरे इलाके का मनोबल बढ़ा है। अब यहाँ और बड़े टूर्नामेंट होने की उम्मीद है। खिलाड़ियों को बेहतर माहौल मिलेगा और गाँव की पहचान पूरे देश में और मजबूत होगी।

“टूटी दीवारों से नई उम्मीद तक” — जब सच्ची सेवा ने बदल दी पूरे गाँव की तस्वीर

गाँव किलोई की यह कहानी सिर्फ एक स्टेडियम के पुनर्निर्माण की कहानी नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है जो तब जन्म लेता है जब कोई बिना स्वार्थ लोगों के बीच खड़ा होता है। यह उन खिलाड़ियों की मुस्कान की कहानी है जिन्हें अब सम्मानजनक सुविधाएँ मिलेंगी। यह उन बुजुर्गों की खुशी की कहानी है जिन्होंने वर्षों बाद अपनी माँग पूरी होते देखी।

जब समाज और व्यवस्था किसी समस्या को लंबे समय तक अनदेखा कर देते हैं, तब कहीं न कहीं लोगों का भरोसा टूटने लगता है। लेकिन किलोई गाँव में संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई यह सेवा इस बात का संदेश देती है संत रामपाल जी महाराज जी जैसे परम हितैषी संत अगर समाज में हो, तो असंभव दिखने वाले काम भी बहुत कम समय में संभव हो जाते हैं।

आज शिवकुमार मेमोरियल स्टेडियम की नई दीवारें सिर्फ सीमेंट और ईंटों से नहीं बनीं, बल्कि उनमें गाँव वालों की उम्मीदें, खिलाड़ियों के सपने और सेवा की भावना भी जुड़ी हुई है। और शायद यही वजह है कि किलोई गाँव के लोग आज एक ही बात कहते नजर आ रहे हैं — “यह सिर्फ संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा स्टेडियम नवनिर्माण नहीं, बल्कि नई उम्मीद का जन्म है।”

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