डूबे हुए खेतों से लहलहाती फसलों तक: संत रामपाल जी महाराज की बाढ़ राहत ने जमालपुर-2, बोहल, बलियाली और खेदार को कैसे बचाया

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हरियाणा में आई विनाशकारी बाढ़ कृषि प्रधान ग्रामीण समुदायों के लिए एक अभूतपूर्व त्रासदी लेकर आई थी। भिवानी जिले के जमालपुर-2, बोहल, बलियाली और हिसार जिले के खेदार गाँव में लगातार बढ़ते पानी ने उपजाऊ कृषि भूमि को संकट के गहरे समंदर में बदल दिया था। जब किसानों की आजीविका पूरी तरह दांव पर थी और सरकारी सहायता प्रशासनिक देरी की भेंट चढ़ चुकी थी, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एकमात्र निर्णायक शक्ति बनकर उभरे। उन्होंने अपने ईश्वरीय अभियान ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से तत्काल, नि:स्वार्थ और व्यापक सहायता प्रदान कर न केवल विनाशकारी बाढ़ के पानी को निकाला, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन और उनकी उम्मीदों को पुनर्जीवित कर दिया।

बाढ़ राहत से पहले गाँवों की स्थिति

संत रामपाल जी महाराज के मानवीय हस्तक्षेप से पहले, इन चारों गाँवों की स्थिति अत्यंत दयनीय और निराशाजनक थी:

  • चारों गाँवों की हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि 2.5 फीट से लेकर 12 फीट तक गहरे, गंदे और ठहरे हुए पानी में पूरी तरह डूब चुकी थी।
  • खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी (90% से 100% तक का नुकसान) और आगामी रबी सीजन की गेहूं बुवाई का समय भी हाथ से निकलता जा रहा था।
  • बाढ़ का पानी केवल खेतों तक सीमित नहीं था; सड़कें नदियां बन चुकी थीं, घरों की दीवारों में दरारें आ गई थीं और खेदार जैसे बड़े गाँव में तो 500 से अधिक ढाणियों (झोपड़ियों) के परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी।
  • आय का कोई साधन न होने और भारी कर्ज के बोझ तले दबे किसान खून के आंसू रो रहे थे और खुद को प्रशासन द्वारा पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे थे।

ग्रामीणों द्वारा की गई भावपूर्ण प्रार्थना

जब प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी कोई रास्ता नहीं सूझा, तो इन गाँवों की ग्राम पंचायतों ने पड़ोसी क्षेत्रों में हो रहे राहत कार्यों को देखकर संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी अंतिम उम्मीद लगाई। ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार महाराज जी के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • जमालपुर-2 (भिवानी): ग्राम पंचायत ने 1,500 एकड़ जलमग्न खेतों और डूबे हुए घरों से पानी बाहर निकालने के लिए भारी क्षमता वाली जल निकासी मोटरों और हजारों फीट लंबे पाइपों की तत्काल मांग की।
  • बोहल (भिवानी): 500-600 एकड़ डूबी हुई भूमि को बचाने के लिए ग्रामीणों ने विशेष रूप से 6,000 फीट लंबे (8 इंच मोटे) जल निकासी पाइप और दो 15 HP की मोटरों की मांग उठाई।
  • बलियाली (भिवानी): गाँव के खेल स्टेडियम (जो 10-12 फीट गहरे तालाब में बदल चुका था) और 600 एकड़ खेतों में जमा पानी को निकालने के लिए पंचायत ने बरवाला ट्रस्ट कार्यालय जाकर 4,400 फीट लंबे (8 इंच मोटे) पाइप और एक 15 HP की मोटर की गुहार लगाई।
  • खेदार (हिसार): 5,000 एकड़ के विशाल क्षेत्र में जमा पानी और बेघर हुई 500 ढाणियों की विकट स्थिति को देखते हुए पंचायत ने 44,000 फीट लंबे (8 इंच मोटे) जल निकासी पाइप, पांच 15 HP की हैवी-ड्यूटी मोटरें और आवश्यक विद्युत केबलों की मांग की।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई त्वरित सहायता

संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में, इन गाँवों की प्रार्थनाओं पर अत्यंत तीव्र और अभूतपूर्व कार्रवाई की गई। प्रत्येक गाँव की आवश्यकता के अनुसार बिना किसी देरी के राहत सामग्री के बड़े काफिले भेजे गए और यह पूरी सामग्री बिना किसी शुल्क (पूर्णतः नि:शुल्क) के गाँव की स्थायी संपत्ति के रूप में प्रदान की गई:

  • जमालपुर-2 में राहत: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाराज जी ने एक नहीं बल्कि दो बार राहत सामग्री भिजवाई ताकि जल निकासी पूरी तरह सफल हो सके। इसके तहत कुल 28,800 फीट उच्च गुणवत्ता वाला जल निकासी पाइप, चार बड़ी हैवी-ड्यूटी मोटरें (15 HP और 20 HP) और स्टार्टर-केबल सहित सभी सहायक उपकरण दिए गए। 
  • बोहल में राहत: कुछ ही दिनों के भीतर गाँव में दो उच्च क्षमता वाली 15 HP की हैवी-ड्यूटी मोटरें, 6,000 फीट लंबा 8-inch का प्रीमियम पाइप और संपूर्ण इलेक्ट्रिकल सामान पहुँचाया गया, जिससे किसानों को बाजार से एक पेंच भी नहीं खरीदना पड़ा। 
  • बलियाली में राहत: इस गाँव को उनकी मांग के अनुसार तत्काल एक 15 HP की हैवी-ड्यूटी मोटर, 4,400 फीट लंबा 8-inch का प्रीमियम जल निकासी पाइप और सभी आवश्यक फिटिंग्स व इंस्टॉलेशन एक्सेसरीज नि:शुल्क प्रदान की गईं। 
  • खेदार में राहत: एक अद्भुत प्रबंधकीय मिसाल पेश करते हुए, महाराज जी ने प्रार्थना के मात्र 24 घंटे के भीतर राहत सामग्री भिजवा दी। गाँव को रिकॉर्ड 44,000 फीट लंबा 8-inch का पाइप, पांच शक्तिशाली 15 HP की हैवी-ड्यूटी मोटरें, 600 मीटर इलेक्ट्रिकल केबल और सभी जरूरी नट-बोल्ट व सॉल्यूशन उपलब्ध कराए गए। 

बदलाव की रूपरेखा: संत रामपाल जी महाराज की राहत से पहले और बाद की स्थिति

विशेषतासंत रामपाल जी महाराज की राहत से पहलेसंत रामपाल जी महाराज की राहत के बाद
कृषि भूमि7,500 एकड़ से अधिक संयुक्त उपजाऊ भूमि गहरे पानी में डूबी थी।पानी पूरी तरह निकाला गया; खेतों में 100% सफल गेहूं की बुवाई पूरी हुई।
आवास व बुनियादी ढांचा500 से अधिक परिवार बेघर थे; घरों में दरारें थीं और रास्ते बंद थे।स्थिति सामान्य हुई; सभी परिवार सम्मानपूर्वक घरों को लौटे; रास्ते सुचारू हुए।
किसानों की स्थितिगहरी निराशा, फसल का शत-प्रतिशत नुकसान और कर्ज का भारी डर।खेती फिर से शुरू हुई; खेतों में हरियाली लौटी और किसानों के चेहरों पर मुस्कान आई।
भविष्य की सुरक्षाजल निकासी के लिए कोई भी स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।भविष्य में पानी भराव की समस्या से निपटने के लिए गाँवों में स्थायी भूमिगत पाइप सिस्टम स्थापित हुआ।

ग्रामीणों की जुबानी: कृतज्ञता की आवाजें

इन चारों गाँवों में आए इस बड़े सकारात्मक बदलाव की गवाही वहाँ के स्थानीय निवासियों और प्रतिनिधियों ने अपने शब्दों में दी है:

  • जमालपुर-2: स्थानीय निवासियों ने कहा, “संत रामपाल जी महाराज ने हमें नया जीवन दिया है। अगर यह मदद समय पर नहीं मिलती, तो किसान कर्ज के दलदल में डूबकर बर्बाद हो जाते।” गाँव के एक प्रतिनिधि ने भावुक होकर कहा, “उन्होंने वह किया जो कोई और नहीं कर सका, उन्होंने हमारे दुख को अपना दुख समझा।”
  • बोहल: महाराज जी की दया से अभिभूत होकर ग्रामीणों ने कहा, “सरकार भी इस स्तर की सहायता की तुलना नहीं कर सकती। हमारे खेतों में 3-4 फीट पानी था और महाराज जी से एक बार गुहार लगाते ही हमें पूरी सुविधाएं मिल गईं। उन्होंने पूरे गाँव को डूबने से बचाकर स्वर्ग जैसा बना दिया है।”
  • बलियाली: स्थानीय किसान चेतन प्रकाश ने बताया, “यहाँ 90% से 100% फसल का नुकसान था और 2.5 से 3 फीट तक पानी जमा था। संत रामपाल जी महाराज ने ग्राम पंचायत को पाइप और मोटर भेजी, जिससे डेढ़ महीने में पूरा पानी निकाल दिया गया।” एक अन्य ग्रामीण सुरेद्र ने कहा, “बालीयाली के किसानों और मजदूरों के लिए संत रामपाल जी महाराज रक्षक और भगवान के रूप में प्रकट हुए हैं।”
  • खेदार: गाँव के सरपंच ने आभार जताते हुए कहा, “वहाँ 5 फीट पानी खड़ा था… हमने संत रामपाल जी महाराज से अपील की और उन्होंने तुरंत पाइप और मोटरें भिजवा दीं”। पूर्व चेयरमैन ने आपदा की गंभीरता बताते हुए कहा कि 500 ढाणियों को खाली कराना पड़ा था, जबकि एक पंचायत सदस्य ने अगले ही दिन हुई डिलीवरी की सराहना की। पूरे गाँव ने एक सुर में कहा, “संत रामपाल जी महाराज आज हमारे लिए साक्षात भगवान का रूप बनकर आए हैं”।

यह भी पढ़ें: वर्षों से बाढ़ की मार झेल रहे नौगावां गाँव को संत रामपाल जी के आशीर्वाद से मिली नई उम्मीद

जवाबदेही और पारदर्शिता

संत रामपाल जी महाराज के दिव्य सानिध्य में संचालित होने वाले इस राहत कार्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुदृढ़ जवाबदेही और पूर्ण पारदर्शिता है। चारों गाँवों की पंचायतों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे इन उपकरणों का उपयोग पूरी निष्ठा के साथ तुरंत जल निकासी के लिए करें। यह भी साफ कहा गया था कि यदि संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया गया या फसल नहीं बोई गई, तो आगे कोई सहायता नहीं दी जाएगी।

पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तीन महत्वपूर्ण चरणों में ड्रोन फुटेज अनिवार्य की गई थी:

  1. जब खेत पूरी तरह जलमग्न थे।
  2. जब जल निकासी का कार्य चल रहा था।
  3. जब खेतों में नई फसलें पूरी तरह से लहलहा उठीं।

इन दृश्यों को सतलोक आश्रमों में प्रदर्शित किया जाता है, जिससे दानकर्ताओं को यह पूरा भरोसा रहता है कि उनके द्वारा दी गई सेवा राशि का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से किया जा रहा है। आज ग्रामीणों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इन पाइपों को स्थायी रूप से जमीन के नीचे दबा दिया है, जिससे वे भविष्य की सिंचाई के लिए भी इसका उपयोग कर पा रहे हैं।

जगत उद्धारक: संत रामपाल जी महाराज

हरियाणा के जमालपुर-2, बोहल, बलियाली और खेदार गाँवों का यह ऐतिहासिक पुनरुद्धार इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि सच्चे ‘किसान मसीहा’ और ‘जगत उद्धारक’ हैं। जब चारों तरफ प्रशासनिक उपेक्षा और स्वार्थ का माहौल था, तब उनकी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ मानवता के लिए एक अटूट सहारा बनकर खड़ी हुई। वे इस धरा पर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के एकमात्र वास्तविक प्रतिनिधि हैं, जो न केवल सांसारिक आपदाओं से मनुष्यों की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि आत्माओं को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कराने के लिए सत्य साधना का मार्ग भी दिखा रहे हैं।

कबीर परमात्मा की शक्ति का यह एक जीवंत प्रमाण है कि जिन गांवों में ऐसा पानी निकालने में कई सालों का समय लग जाता लेकिन परमात्मा की शक्ति से यह काम महीनों में हो गया और आज वहां बिजाई भी संत रामपाल जी महाराज की दया से संपूर्ण हो गई है।

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