यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि रोहतक जिले के महम (वार्ड 1, 14 और 15) तथा झज्जर जिले के बादली, निमाणा और मातन गांवों की है, जिन्हें बाढ़ के विनाशकारी पानी ने पूरी तरह से बेबस कर दिया था। किसानों के खेतों में महीनों तक पानी भरा रहा, जिससे उनकी मेहनत की फसलें बर्बाद हो गईं और अगली बिजाई की उम्मीदें समाप्त हो चुकी थीं। जब प्रशासनिक स्तर पर हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी, तब इन टूट चुके ग्रामीणों ने आशा की अंतिम किरण के रूप में संत रामपाल जी महाराज की शरण ली। संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में चल रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत इन गांवों में एक ईश्वरीय चमत्कार हुआ। निस्वार्थ और निःशुल्क राहत सामग्री ने इनकी डूबती हुई दुनिया को फिर से आबाद कर दिया। यह लेख इस ऐतिहासिक बाढ़ राहत अभियान की पूरी सच्चाई को दर्शाता है।
गांव की वर्तमान स्थिति
बाढ़ ने इन गांवों में तबाही का ऐसा भयानक मंजर ला दिया था कि किसान मानसिक रूप से टूट चुके थे। खेतों में 5 से 8 फुट तक गहरा और बदबूदार पानी महीनों से जमा था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज के दिव्य हस्तक्षेप के बाद आज इन गांवों की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। नीचे दी गई तालिका में बाढ़ से पहले और संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई राहत के बाद की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है:
| गांव का नाम | जिला | बाढ़ से पहले की स्थिति (Before) | बाढ़ के बाद की स्थिति (After) |
| महम (वार्ड 1, 14, 15) | रोहतक | 700 एकड़ से ज्यादा जमीन 5-8 फुट पानी में डूबी, फसलें बर्बाद | पानी निकाला गया, खेतों में शत-प्रतिशत बिजाई सफल और हरियाली लौटी |
| बादली | झज्जर | करीब 52,000 बीघा जमीन पानी में जलमग्न | 90-95% जमीन पर सफल बिजाई, फसल लहलहा रही है |
| निमाणा | झज्जर | 300 एकड़ जमीन 5 फुट पानी में डूबी, किसान निराश | जल निकासी के बाद शत-प्रतिशत बिजाई पूरी |
| मातन | झज्जर | गांव की जमीन 6 फुट पानी में डूबी, भुखमरी की नौबत | पानी निकालकर शत-प्रतिशत बिजाई पूरी और किसान सुरक्षित |
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
जब महीनों तक जलभराव के कारण सरकार से कोई ठोस मदद नहीं मिली, तब इन गांवों की पंचायतों और समाजसेवियों ने संत रामपाल जी महाराज को प्रार्थना पत्र सौंपे। इन गांवों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित थीं:
- महम: ग्रामीणों और पार्षदों ने पानी निकालने के लिए बड़ी मोटरें और हजारों फुट लंबी पाइपलाइन की गुहार लगाई।
- बादली: गांव के समाजसेवी और पंचायत ने विशाल स्तर पर गांव को डूबने से बचाने के लिए भारी मोटरों और पाइपों का निवेदन किया।
- निमाणा: गांव के सरपंच और पंचायत ने जल निकासी के लिए हैवी-ड्यूटी मोटर व पाइपों की मांग रखी।
- मातन: पानी से गल चुकी फसलों को देखकर मातन के सरपंच और ग्रामीणों ने मोटरों और पाइपों की मार्मिक अरदास लगाई।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज ने इन सभी प्रार्थनाओं को बिना किसी देरी और बिना कागजी कार्रवाई के तुरंत स्वीकार किया। उनकी असीम कृपा से कुछ ही दिनों में निःशुल्क और स्थायी बाढ़ राहत सामग्री इन गांवों में पहुंचाई गई:
- महम (रोहतक): संत रामपाल जी महाराज ने वार्ड 1 के लिए 10 HP की 4 मोटरें व 22,000 फुट उच्च गुणवत्ता के पाइप भेजे। वार्ड 14 और 15 के लिए 5 शक्तिशाली मोटरें और 27,000 फुट पाइप निःशुल्क प्रदान किए।
- बादली (झज्जर): बादली में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए 10 विशाल मोटरें (पांच 20 HP और पांच 15 HP) तथा 32,000 फुट (लगभग 10 कि.मी.) हैवी-ड्यूटी पाइपलाइन पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से दी गई।
- निमाणा (झज्जर): संत रामपाल जी महाराज की दया से 10 HP की 6 शक्तिशाली मोटरें और 10,000 फुट (8 इंच) मजबूत ड्रेनेज पाइप मय इलेक्ट्रिक उपकरणों के स्थायी रूप से सौंपे गए।
- मातन (झज्जर): 15 HP की 4 विशाल मोटरें और 14,500 फुट पाइप के साथ स्टार्टर, हांडी, बैंड, फिक्स वाल्व, नट-बोल्ट और पाइप चिपकाने वाला एसआर गोंद तक निःशुल्क पहुंचाया गया, ताकि किसानों को एक कील भी बाहर से न लानी पड़े।
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सभी गांवों में यह सभी सहायता को हर एक छोटी से छोटी आवश्यक वस्तु के साथ निःशुल्क प्रदान किया गया था ताकि पानी निकासी का कार्य तुरंत प्रभाव से शुरू किया जा सके।
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ग्रामीणों की आवाज़
इन गांवों के निवासियों ने संत रामपाल जी महाराज को ईश्वर तुल्य मानते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की:
- महम के किसान कुलदीप वैद ने स्थिति बयान करते हुए उनका मानना था कि, ‘बिल्कुल डूबा खड़ा था जी कम से कम 4-चार फुट पांचप फुट पानी था लेकिन संत रामपाल जी महाराज की शक्ति से जो काम हुआ इसपर सभी अभी तक आश्चर्यचकित है।’
- बादली के सरपंच आनंद गुलिया ने कहा और माना, ‘करीब 52000 बीघे जमीन है बादली में और करीब 90% जमीन पर पानी भरा हुआ था लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने उनके।दुख को अपना दुख समझ कर सहायता की’
- निमाणा के सरपंच प्रतिनिधि मलखान सिंह ने संत रामपाल जी महाराज का आभार जताते हुए बताया, ‘तकरीबन 300 एकड़ जमीन में पानी था उसमें से 250 एकड़ जमीन हमारी बिजाई हो चुकी है सिर्फ और सिर्फ संत रामपाल जी महाराज की दया से’
- मातन के एक भावुक किसान पप्पी जी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “अगर जब मदद नहीं मिलती संत जी से तो हमारे गेहूं नहीं होती, यहां इसमें सारे ऊपर तक पानी भरा हुआ है”
ट्रैक्टर काफिले द्वारा भव्य स्वागत
जब संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से यह सहायता इन गांवों में पहुंची, तो ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता था। महम में लोग अपनी बाइक और स्कूटी लेकर गांव के बाहर खड़े थे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ राहत सामग्री का भव्य स्वागत किया गया। वहीं बादली में भी गाड़ियों और ट्रकों का विशाल काफिला जब मुख्य बाजार से गुजरा, तो ग्रामीणों ने छतों पर चढ़कर इस दृश्य को देखा। यह केवल राहत सामग्री नहीं थी, बल्कि ईश्वर द्वारा भेजा गया एक जीवनदान था, जिसका ग्रामीणों ने भारी उत्सव के रूप में सम्मान किया।
जवाबदेही और पारदर्शिता
‘अन्नपूर्णा मुहिम’ की एक सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी कड़ी जवाबदेही और पारदर्शी प्रणाली है। संत रामपाल जी महाराज के स्पष्ट निर्देश थे कि राहत सामग्री का उपयोग पूरी निष्ठा से किया जाए और पानी निकालकर अगली फसल की बुवाई सामूहिक रूप से सुनिश्चित की जाए। पूरी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बाढ़ के दौरान, पानी निकलने के बाद और नई फसल लहलहाने के समय ड्रोन वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। यह पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि संत रामपाल जी महाराज के दिव्य नेतृत्व में किया गया हर कार्य और योगदान पूर्ण रूप से मानवता के कल्याण में लग रहा है।
सच्चे किसान मसीहा: जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
वर्तमान समय में जहां सरकारी व्यवस्थाएं कागजों और झूठे वादों तक सीमित रह जाती हैं, वहीं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने एक सच्चे ‘किसान मसीहा’ और ‘विश्व उद्धारक’ की भूमिका निभाई है। कबीर परमेश्वर के एकमात्र सच्चे प्रतिनिधि के रूप में, वे बिना किसी स्वार्थ या भेदभाव के समाज के पीड़ित लोगों तक राहत पहुंचा रहे हैं। उनका यह विशाल निस्वार्थ सेवा कार्य प्रमाणित करता है कि एकमात्र पूर्ण संत के संरक्षण में कोई भी समस्या बड़ी नहीं है। उनकी बताई गई सत्य भक्ति का मार्ग अपनाकर ही संसार का वास्तविक कल्याण हो सकता है और प्रत्येक इंसान को उनकी शरण में आकर अपना मोक्ष सुनिश्चित करना चाहिए।



