World Press Freedom Day 2026 [Hindi]: अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस पर जानिए कैसे है पत्रकार पर्यावरण संकट से उभारने में मददगार!

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Last Updated on 21 April 2026 IST | World Press Freedom Day in Hindi | अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस दुनियाभर की सरकारों को 1948 के मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करने और उसे बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है। इसका विषय है “Shaping a Future at Peace: Promoting Press Freedom for Human Rights, Development, and Security।” इसका मतलब है कि स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता समाज को जागरूक, सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाती है। पत्रकार सही जानकारी लोगों तक पहुँचाते हैं और गलत काम करने वालों को जवाबदेह बनाते हैं।  यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। 

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World Press Freedom Day 2026 Theme (अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्‍वतंत्रता दिवस थीम)

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस 2026: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026 की थीम है:

 “शांतिपूर्ण भविष्य को आकार देना: मानवाधिकारों, विकास और सुरक्षा के लिए प्रेस स्वतंत्रता को बढ़ावा देना” “Shaping a Future at Peace: Promoting Press Freedom for Human Rights, Development, and Security.”

यह थीम जाम्बिया की राजधानी लुसाका (Lusaka, Zambia) में आयोजित होने वाले वैश्विक सम्मेलन का मुख्य केंद्र है। 2025 में ब्रुसेल्स में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष का उद्देश्य यह समझना है कि पत्रकारिता, नई तकनीक (AI सहित) और मानवाधिकार किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हैं।

इसका लक्ष्य सूचना के प्रवाह को शांति, न्याय और सतत विकास का आधार बनाना है। AI के प्रभाव के साथ-साथ, 2026 का यह दिवस डिजिटल गवर्नेंस, पत्रकारों की सुरक्षा और सूचना की सत्यता (Information Integrity) की रक्षा जैसे वैश्विक लक्ष्यों पर केंद्रित है।

AI जहाँ एक ओर मीडिया के काम को आसान बना रहा है, वहीं गलत सूचनाओं (Misinformation) और एल्गोरिदम आधारित सेंसरशिप जैसी चुनौतियाँ भी पेश कर रहा है। यह दिवस इसी तकनीकी बदलाव और मौलिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा देता है ताकि सूचना एक ‘पब्लिक गुड’ बनी रहे।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026 को इस वर्ष विशेष रूप से “शांतिपूर्ण भविष्य को आकार देना” (Shaping a Future at Peace) की थीम पर मनाया जाएगा। यह दिन पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया की भूमिका और वैश्विक लोकतंत्र की रक्षा में तकनीक, मानवाधिकार और सूचना की सत्यता की आवश्यकता को रेखांकित करेगा।

इस दिन को मनाने के लिए दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र (UNESCO) के नेतृत्व में कई गतिविधियाँ और आयोजन किए जाएंगे, जिनमें शामिल होंगे:

  1. यूनेस्को द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ग्लोबल कॉन्फ्रेंस)
    • स्थान: जाम्बिया की राजधानी लुसाका (Mulungushi International Conference Centre)
    • तारीख: 4-5 मई, 2026 (इसे RightsCon 2026 के साथ मिलकर आयोजित किया जा रहा है)
    • विषय: पत्रकारिता, नई तकनीक (AI) और मानवाधिकारों का समन्वय
  2. विश्वविद्यालयों और मीडिया संस्थानों में कार्यक्रम
    • लुसाका विश्वविद्यालय (University of Zambia) और अन्य वैश्विक संस्थानों में अकादमिक सम्मेलन।
    • मीडिया साक्षरता वर्कशॉप और पत्रकारिता छात्रों के लिए डिजिटल सुरक्षा और AI नैतिकता पर व्याख्यान।
    • प्रेस स्वतंत्रता पर लेखन और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन प्रतियोगिताएँ।
  3. डिजिटल और सोशल मीडिया अभियान
    • #WorldPressFreedomDay के साथ-साथ #InformationAsAPublicGood जैसे हैशटैग का उपयोग।
    • एल्गोरिदम आधारित सेंसरशिप और फेक न्यूज़ के खिलाफ वैश्विक सोशल मीडिया एक्टिविज़्म।
  4. पत्रकारों को सम्मानित करने के कार्यक्रम
    • UNESCO/Guillermo Cano World Press Freedom Prize 2026 का वितरण (यह पुरस्कार उन पत्रकारों को दिया जाता है जिन्होंने खतरे के बावजूद उत्कृष्ट कार्य किया हो)।
    • जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वतंत्र मीडिया संगठनों और डिजिटल राइट्स एडवोकेट्स को सहयोग।
  5. विशेष रिपोर्ट और डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण
    • ‘World Trends in Freedom of Expression and Media Development 2022/2025’ जैसी विशेष रिपोर्टों पर आधारित चर्चा।
    • समाचार चैनलों और OTT प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप, तकनीकी जासूसी और स्वतंत्र प्रेस पर बनी डॉक्यूमेंट्रीज़ का प्रसारण।
  6. नीति संवाद (Policy Dialogues) और आपदा तैयारी
    • ‘मॉडल डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस एंड रिस्पांस प्लान’ जैसे विशेष सत्रों के माध्यम से मीडिया संस्थानों की सुरक्षा पर चर्चा।
    • सरकार, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज (Civil Society) के बीच संवाद, ताकि AI का उपयोग प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने के बजाय उसे सशक्त बनाने के लिए किया जा सके।

भारत में आयोजन

भारत में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, और मीडिया विश्वविद्यालयों द्वारा विशेष कार्यक्रम, पैनल चर्चा और वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी। कई राज्यों में स्थानीय पत्रकार संघ रैलियाँ, संगोष्ठियाँ और स्मरण सभाएं आयोजित करेंगे।

इस दिन को मनाना न केवल मीडिया कर्मियों को सम्मानित करने का अवसर है, बल्कि समाज को यह याद दिलाने का दिन भी है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता ही लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है।

प्रेस की स्वतंत्रता क्या है? 

संविधान, अनुच्छेद 19 के तहत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जो वाक् स्वतंत्रता इत्यादि के संबंध में कुछ अधिकारों के संरक्षण से संबंधित है। प्रेस की स्वतंत्रता को भारतीय कानून प्रणाली द्वारा स्पष्ट रूप से संरक्षित नहीं किया गया है, लेकिन यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के तहत संरक्षित है, जिसमें कहा गया है – “सभी नागरिकों को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार होगा”।

■ Read in English | World Press Freedom Day: Journo’s Life Safety Is Guaranteed by Sat-Bhakti

वर्ष 1950 में रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि सभी लोकतांत्रिक संगठनों की नींव प्रेस की स्वतंत्रता पर आधारित होती है। हालांकि प्रेस की स्वतंत्रता भी असीमित नहीं होती है। कानून इस अधिकार के प्रयोग पर केवल उन प्रतिबंधों को लागू कर सकता है, जो अनुच्छेद 19 (2) के तहत आते है।

कैसे मनाया जाता है वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे 

यूनेस्को द्वारा 1993 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज़ दिया जाता है। यह पुरस्कार उस व्यक्ति अथवा संस्था को दिया जाता है, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय, व प्रशंसनीय कार्य किया हो।

साथ ही स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थानों और अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रेस की आजादी पर वाद-विवाद, निबंध लेखन प्रतियोगिता और क्विज़ का आयोजन होता है। लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार से अवगत कराया जाता है।

क्यों मनाया जाता है World Press Freedom Day?

प्रेस की आजादी के महत्व के लिए दुनिया को आगाह करने वाला ये दिन बताता है कि लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उसे बहाल करने में मीडिया कितनी अहम भूमिका निभाता है। इस कारण सरकारों को पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए और इसके लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

  • इस दिवस का उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना और साथ ही ये दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसका सम्मान करने की प्रतिबद्धता की बात करता है ।
  • दुनियाभर में पत्रकारों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सऊदी पत्रकार ख़ाशग़्जी, भारतीय पत्रकार गौरी लंकेश और उत्तरी आयरलैंड की पत्रकार लायरा मक्की की हत्याओं ने प्रेस की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया।

दुनियाभर में पत्रकारों और प्रेस को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। अगर कोई मीडिया संस्थान सरकार की मर्ज़ी से नहीं चलता तो उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है। मीडिया संगठनों को बंद करने तक के लिए मजबूर किया जाता है। पत्रकारों के साथ मारपीट की जाती है और उन्हें धमकियां तक दी जाती हैं। यही ऐसी चीजें हैं जो अभिव्यक्ति की आजादी में बाधाएं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये दिन मनाया जाता है।

World Press Freedom Day in Hindi | वर्तमान में मीडिया की हालत? 

जैसा कि हम जानते हैं आजकल आम जनता भी मीडिया को बिकाऊ और पालतू कहने में बिल्कुल भी नहीं हिचकती है। इसका सीधा सा कारण यह है की मीडिया अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। मीडिया का समाज में बहुत बड़ा योगदान है। एक देश के लिए यह चौथा स्तंभ है किंतु फिर भी जिस प्रकार से बिना किसी जानकारी को जांचे परखे सिर्फ अपनी टीआरपी को बढ़ाने के लिए मीडिया द्वारा एक झूठ का बवंडर तैयार किया जाता है और जिसे देखकर आम जन को ऐसा लगता है जैसे वह कोई न्यूज़ नहीं, बल्कि मसालेदार राजनीतिक फिल्म देख रहे हों। जिसका नतीजा यह निकला रहा है कि आजकल मीडिया पर लोगों का विश्वास कम हो चुका है।

आए दिन हम देखते हैं राजनीतिक दबाव की वजह से मीडिया सच्चाई दिखाना बंद कर चुकी है और अब बहुत ही कम और अच्छे पत्रकार बचे हैं कारण यह है कि अब अच्छे पत्रकारों की कोई पूछ नहीं होती। एक आम खबर को बहुत ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है और यदि कोई सच्ची न्यूज़ हो और वह सरकार के खिलाफ हो या प्रशासन के खिलाफ हो तो उसको बिल्कुल भी दिखाया नहीं जाता। मीडिया की यह हालत बहुत ही गंभीर स्थिति को दर्शाती है यह एक बहुत ही गंभीर और चिंतनीय विषय है ।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026: पत्रकारों की सुरक्षा और वैश्विक स्थिति

दुनिया भर के पत्रकारों के लिए जोखिम भरे हालात 2026 में भी चिंता का विषय बने हुए हैं। आँकड़ों के अनुसार, सन 2000 से अब तक 1,900 से अधिक पत्रकार और मीडियाकर्मी अपनी जान गँवा चुके हैं। यह दुखद आँकड़ा युद्ध क्षेत्रों, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग के खतरों को दर्शाता है।

यूनेस्को के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पत्रकारों के लिए अब कोई भी स्थान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हालिया वर्षों के रुझान बताते हैं कि लगभग 80% हत्याएं न्यूज़-रूम के बाहर—जैसे उनके घरों, रास्तों या वाहनों में की गईं। कई पत्रकारों को उनके परिवारों के सामने ही निशाना बनाया गया। साल 2025 मीडिया के लिए काफी घातक रहा, जिसमें संघर्ष क्षेत्रों और लक्षित हमलों में 128 से अधिक मौतें दर्ज की गईं।

2026 में, UNESCO इन खतरों से निपटने के लिए ‘डिजिटल सुरक्षा’ और ‘एआई-आधारित निगरानी’ से बचाव हेतु नए नियम लागू कर रहा है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का मूल सिद्धांत आज भी वही है: उन साहसी पत्रकारों को सशक्त बनाना जो अपनी जान जोखिम में डालकर सच को दुनिया के सामने लाते हैं।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026: भारत की रैंकिंग और वैश्विक स्थिति

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार, भारत की रैंकिंग अभी भी आदर्श नहीं है। यहाँ इसका विवरण दिया गया है:

  • रैंक: 180 देशों में से 151वीं [RSF विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक]
  • स्कोर: 32.96 (कम स्कोर प्रेस स्वतंत्रता पर अधिक प्रतिबंधों को दर्शाता है)
  • परिवर्तन: यह 2023 की तुलना में 10 स्थानों के सुधार को दर्शाता है, जब भारत 161वें स्थान पर पहुँच गया था। हालाँकि, यह अभी भी 2022 की 150वीं रैंक से नीचे बना हुआ है।

यह रैंकिंग भारत को उन देशों में बनाए रखती है जहाँ प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति को RSF द्वारा “बहुत गंभीर” माना जाता है।

हर साल सभी देशों की सूची रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा तैयार की जाती है। यह पेरिस स्थित एक एनजीओ है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना रैंकिंग तैयार करने का काम करता है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की रैंक निराशाजनक बनी हुई है, जबकि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक सरकार पत्रकारों की सुरक्षा का वादा करती है।

नागरिक इसकी रैंकिंग को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं, जिसने पत्रकारों, सरकारों, राजनीतिक दलों और नौकरशाहों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। प्रतिक्रिया में, भारत सरकार ने इन रैंकिंग को लगातार खारिज किया है और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा संकलित जानकारी की सत्यता पर सवाल उठाए हैं।

World Press Freedom Day in Hindi [2026] | क्या होती है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ होने की जिम्मेदारी?

  • जैसा कि हम जानते हैं मीडिया देश का चौथा स्तंभ माना जाता है मीडिया को सच्ची – स्पष्ट और जितनी न्यूज़ होती है उतनी ही दिखानी चाहिए, उसे बढ़ा चढ़ाकर फिल्मों की तरह पेश नहीं करना चाहिए। यह बात जरूर है कि सच्ची और स्पष्ट न्यूज़ दिखाने वालों को समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है किंतु जीत भी उन्हीं की होती है जो सच का साथ थामे रखते हैं और एक दिन इतिहास में ऐसे पत्रकारों का नाम दर्ज होता है और सम्मान के साथ में उनका नाम लिया जाता है।
  • मीडिया को चाहिए कि जो भी उन्होंने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के बारे में गलत खबर दिखाई थी और जैसे दिखाई थी उसी तरीके से संत रामपाल जी महाराज जी के अच्छे कार्यों उनके उद्देश्यों को देश और दुनिया के सामने रखना चाहिए, और जब उन पर लगाए हुए आरोप गलत हैं तो इस सच्चाई को बताने में क्या परेशानी है?
  • मीडिया को यह बात याद रखनी चाहिए कि परमात्मा का काम न्याय देना होता है और जब संत स्वयं ही परमात्मा रूप में पृथ्वी पर मौजूद हैं तो उन्हें तो परमात्मा से डर कर काम करना चाहिए।  संत रामपाल जी महाराज यह कह चुके हैं कि आज नहीं तो कल मीडिया को अपने चैनलों पर सत्संग दिखाना ही पड़ेगा नहीं तो यह टीवी चैनल काम करना बंद कर देंगे
  • इससे पहले कि ऐसी स्थिति बने मीडिया को अपनी भूल सुधार करनी चाहिए और देश और दुनिया को अपने न्यूज़ चैनलों पर तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के अनमोल सत्संगों को दिखाना चाहिए। संत रामपाल जी महाराज गारंटी देते हैं कि सत्संग के माध्यम से भी वह लोगों की किसी भी प्रकार की बीमारी और कष्ट को खत्म कर सकते हैं। जल्द से जल्द संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को देश और दुनिया के सामने मीडिया को रखना चाहिए,  इसमें बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए ।

कौन हैं तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज और क्या है उनका उद्देश्य?

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज विश्व विजेता संत हैं। पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता, पवित्र कुरान शरीफ, पवित्र बाइबल और पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब में से उन्होंने प्रमाणित करके बताया है कि परमात्मा साकार है उसका नाम कबीर है और वह पूजा के योग्य है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोग उनके अनुयायी हैं। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज विश्व की सभी धार्मिक पुस्तकों को समझाने वाले आध्यात्मिक अध्यापक हैं और वे विश्व के सभी धर्म गुरुओं को ज्ञान चर्चा में पराजित कर चुके हैं।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य पृथ्वी को स्वर्ग बनाना है और लोगों से पूर्ण परमात्मा कबीर साहब, अल्लाह कबीर, कबीर देव, ऑलमाइटी कबीर, हक्का कबीर, अल खिज्र, की भक्ति करवा कर सतलोक/अमरलोक ले जाना है जहां पर गए हुए प्राणी हमेशा के लिए सुखी हो जाते हैं, उनको अविनाशी जन्नत प्राप्त होती है ।

सभी भाई बहनों से विनम्र निवेदन  

आप सभी भाइयों बहनों से प्रार्थना है कि तत्वदर्शी  बाख़बर संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग आप यूट्यूब चैनल “सतलोक आश्रम पर जाकर देखें, उनसे नाम दीक्षा लें, भक्ति करके अपना कल्याण करवाएं। संत रामपाल जी महाराज कहते है कि उनकी बताई भक्ति से  जब तक आप इस पृथ्वी पर रहेंगे सुखी रहेंगे और जब आपका शरीर छूटेगा तो, आपको हमेशा हमेशा के लिए अमरलोक यानी अमरधाम मिलेगा।

FAQs about World Press Freedom Day [Hindi]

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस कब मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस प्रति वर्ष 3 मई को मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस कब मनाना शुरू किया गया?

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस यूनेस्को द्वारा 1993 से मनाना शुरू किया गया था।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस पत्रकारिता के मुद्दे की ओर लोगों को जागरूक करने, इससे जुड़ी परेशानियों, जोखिमों तथा पत्रकारिता के दायित्वों को याद दिलाने और राजनैतिक इच्छाशक्ति आकृष्ट करने के लिए किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस किसके द्वारा आरंभ किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस यूनेस्को द्वारा आयोजित किया गया है।

यूनेस्को का हेडक्वार्टर (मुख्यालय) कहां है?

यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस पर यूनेस्को द्वारा कौन सा अवार्ड दिया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस पर यूनेस्को द्वारा पत्रकारों को गिलेरमो कानो वर्ल्ड फ्रीडम प्राइज दिया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस का 2026 का विषय (Theme) क्या है?

इस वर्ष 2026 की थीम है “शांतिपूर्ण भविष्य को आकार देना: मानवाधिकारों, विकास और सुरक्षा के लिए प्रेस स्वतंत्रता को बढ़ावा देना” “Shaping a Future at Peace: Promoting Press Freedom for Human Rights, Development, and Security.”

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