संत रामपाल जी महाराज जी सर्व धर्मों के पवित्र शास्त्रों पर आधारित ज्ञान देते हैं। गीता, वेद, क़ुरान, गुरुग्रंथ साहिब तथा बाईबल आदि हमारे सदग्रंथ हैं। संत रामपाल जी महाराज सबके प्रति नेक व्यवहार करना सिखाते हैं। वासुदेव कुटुम्बकम सारा विश्व एक परिवार है। सभी प्राणी परमेश्वर के बच्चें है। जाति भेद भाव से परे हैं।

संत रामपाल जी महाराज जी का मार्ग क्या है?

ईमानदारी से कार्य करना। किसी को ठगना नहीं।

कबीर परमेश्वर जी की वाणी है –

कबीरा आप ठगाइए और न ठगिए कोई।
आप ठगाए सुख होत है, और ठगे दुःख होई।।

सन्त रामपाल जी ने दिया कड़ा संदेश:

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।

उन्होंने जाति, धर्म व उच्च पद से मुक्त मार्ग बताया है। संत रामपाल जी के यहाँ चाहे कोई भी जाति, धर्म, किसी भी उच्च पोस्ट (पद) प्राप्त भाई बन्धु जाए। वे सभी से प्यार और समभाव से पेश आते हैं। वहां न किसी को अपनी जाति का अभिमान होता है, न ही धर्म का और न किसी उच्च पद का। कबीर पंथी – जो कबीर जी के बताए मार्ग पर चले

कबीर पंथी के क्या गुण (Quality) होते हैं?

कबीर पंथी शास्त्रानुकूल भक्ति करते हैं,जो कि शास्त्रों से प्रमाणित होती है। शास्त्रविरुद्ध पूजा नहीं करते हैं तथा श्राद्ध पूजा, पिण्ड दान, माता मसानी की पूजा तथा प्रेतों की पूजा आदि नहीं करते। सतभक्ति मार्ग पर चलते हैं।

क्या आपको पता है संत रामपाल जी कौन हैं?

संत रामपाल जी महाराज कबीर पंथी संत हैं। उनका जन्म 08 सितम्बर 1951 को गाँव धनाना, जिला सोनीपत, (हरियाणा प्रान्त) भारत वर्ष में हुआ। संत रामपाल जी महाराज सर्वगुण सम्पन्न संत हैं वे एक सच्चे सतगुरु भी हैं जो परमेश्वर के विषय में सच्चा ज्ञान बताते हैं।

संत रामपाल जी ही असली जगतगुरु हैं

संत रामपाल जी ही जगतगुरु हैं ,जो सारे संसार को भक्ति का सच्चा मार्ग प्रशस्त करते हैं। वे वही तत्वदर्शी सन्त भी हैं जिनके विषय में पवित्र गीता जी में बताया गया है। वे विश्वविजेता संत भी हैं जिन्होंने विश्व के सभी संतों, गुरुओं, शंकराचार्यों एवं धर्मगुरुओं को ज्ञान चर्चा में निरुत्तर किया है। वे धरती पर अवतार भी हैं वे स्वयं कबीर परमेश्वर जी के अवतार हैं। वे जगत के सभी दु:खों एवं जन्म मृत्यु के दीर्घ रोग से मुक्त कराने वाले/तारने वाले तारणहार भी हैं।

संत रामपाल जी का मूल उद्देश्य

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य क्या है? संत रामपाल जी का उद्देश्य है कि सभी मानव, एक सर्वोच्च ईश्वर (Supreme God) कबीर जी की पूजा करें और हमारे मूल निवास सतलोक (सचखंड, अनन्त) की ओर वापस लौटें। सर्वोच्च ईश्वर कबीर जी की उपासना करने वाला कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक नेता (Spiritual Leader) जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से उनकी जाति, पंथ, रंग, आस्था या धर्म से बेपरवाह होकर नाम (दीक्षा) ले सकता है क्योंकि ईश्वर ने प्रत्येक मानव को समान बनाया है।

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज समाज सुधारक संत हैं

संत रामपाल जी ने प्रमाणित सत्य भक्ति साधना देने के साथ साथ समाजहित के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं, वे चाहते हैं कि समाज में कोई भी प्राणी किसी भी कारण दुःखी न हो। उनकी हर समस्या का समाधान हो। समाज बुराईयों रहित बने। मनुष्यों पर कोई भी आपदा न आए और धरती स्वर्ग समान बन जाए। संत रामपाल जी महाराज जी का एक ही सपना है दहेज़, नशा, पाखंड, भ्रष्टाचार, छुआछूत, रिश्वत खोरी से मुक्त हो भारत अपना।

संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य समाज का सुधार करना है

  • आध्यात्मिक मार्ग में फैले पाखंडवाद को समाप्त कर सभी प्रमाणित धर्मग्रंथों की तुलनात्मक समीक्षा करके शास्त्रानुकूल भक्ति जन सधारण तक पहुंचाना
  • समाज में व्याप्त कुरीतियों का समूल नाश करना
  • दहेज प्रथा, मुत्युभोज, भ्रूण हत्या, छुआछूत, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार आदि से मुक्त समाज का निर्माण करना है
  • नशा मुक्त भारत बनाना। समाज में मानव धर्म का प्रचार, भ्रूण हत्या पूर्ण रूप से बंद करना
  • छुआ-छूत रहित समाज का निर्माण
  • समाज से पाखंडवाद को खत्म करना
  • भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण करना
  • समाज से जाति-पाति के भेद को मिटाना
  • समाज से हर प्रकार के नशे को दुर करना
  • समाज में शांति व भाईचारा स्थापित करना
  • विश्व को सतभक्ति देकर मोक्ष प्रदान करना
  • युवाओं में नैतिक और आध्यात्मिक जागृति लाना
  • समाज से दहेज रूपी कुरीति को जड़ से खत्म करना
  • सामाजिक बुराईयों को समाप्त करके स्वच्छ समाज तैयार करना
  • समस्त धार्मिक ग्रंथों के प्रमाण के आधार पर शास्त्र अनुकूल साधना समाज को देना ।

संघर्ष और विवाद

सन्त रामपाल जी महाराज भारतवर्ष में विवादित संत माने जाते हैं। लेकिन वे एक ऐसे महापुरुष हैं जिनके विषय में अधिकांश को सही जानकारी नहीं है जैसा कि आप सबको पता है कि संत रामपाल जी महाराज इस समय केंद्रीय जेल हिसार (हरियाणा) में झूठे केस में बंद हैं। जिन्होंने सभी धर्म के शास्त्रों से यह प्रमाणित कर दिया है कि कबीर जी भगवान हैं। उन्होंने सत्संगों में प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रमाण भी दिखाए हैं। सन्त रामपाल जी के अनुयायी उन्हें भगवान के तुल्य मानते हैं।

सन्त रामपाल जी के साथ विवाद क्यों हुआ?

वर्ष 2006 में संत रामपाल जी महाराज जी करौंथा आश्रम, जिला रोहतक स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग कर रहे थे उस दौरान संत रामपाल जी और उनके अनुयायियों को आर्य समाज के प्रतिनिधि सभा के नेतृत्व में कुछ आपराधिक लोगों ने घेर लिया।
संत रामपाल जी महाराज जी के संघर्ष की कहानी उस समय की है जब सतलोक आश्रम करौंथा में लगभग 5 से 6 हजार अनुयायी मौजूद थे, हजारों की तादाद में उप्रदवी लोगों ने हथियारों के साथ आश्रम को बाहर से घेर रखा था। इसके पीछे कारण था पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश और उसमें लिखित त्रुटियां।

“आर्य प्रतिनिधि सभा”, दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने वाली संस्था है जो पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश को अपना आधार मानती है और इस विवाद की मुख्य जड़ यही पुस्तक थी। वही त्रुटियां आज भी सत्यार्थ प्रकाश में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज जी ने जब जाना कि कबीर ही भगवान हैं तो उन्होंने लोगों को समझाने के लिए वेदों का अध्ययन करना शुरू किया, वे चाहते थे कि लोगों को प्रमाण देकर समझाने से श्रद्धालुओं का विश्वास कबीर जी में दृढ़ होगा, चूंकि हरियाणा में हिंदू संत महात्माओं ने अपने अधूरे ज्ञान से कबीर जी को केवल एक कवि ,संत और भक्त तक ही सीमित किया हुआ था।

इसलिए भी वेदों से प्रमाणित करना अनिवार्य था, वेदों का अध्य्यन करते करते संत रामपाल जी ने सोचा क्यों न वेदों का सार माने जाने वाले सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ा जाए, क्योंकि वेदों का अनुवाद और सत्यार्थ प्रकाश की रचना दयानंद सरस्वती ने ही की थी, इसलिए सत्यार्थ प्रकाश को वेदों का सार मानते हुए जब संत रामपाल जी महाराज जी ने पढ़ा तो उनको बड़ी हैरानी हुई। आखिर ऐसा क्या पढ़ लिया था संत रामपाल जी ने जो उनको इतनी हैरानी हुई, तो चलिए जानते हैं।

आइए जानें सत्यार्थ प्रकाश किताब की सच्चाई क्या है?

दयानंद सरस्वती जी वेदों को आधार मानते थे लेकिन सत्यार्थ प्रकाश में उन्होंने वेदों के विपरीत लिखा हुआ था, सत्यार्थ प्रकाश वेदों के विपरीत होने के साथ साथ बेहूदी बातों से भरा पड़ा है जो कि सामाज को तहस नहस कर सकता था। सत्यार्थ प्रकाश के चौथे समुल्लास में अत्यंत शर्मनाक बातें लिखी हुई हैं। वेदों में और सत्यार्थ प्रकाश में ज़मीन आसमान का अंतर है और सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक को आम सभ्य नागरिक के सामने बता पाना भी मुश्किल है।

इसके अलावा महापुरुषों पर अभद्र और जातिगत टिप्पणी करना, सूर्य पर जीवन बताना जैसी बहुत सी अनर्गल बातों को पढा तो संत रामपाल जी महाराज जी ने सत्यार्थ प्रकाश में लिखी इन बेहूदी बातों पर आपत्ति व्यक्त की और आर्य प्रतिनिधि सभा से निवेदन किया कि सत्यार्थ प्रकाश में जो लिखा है वो वेदों के विरुद्ध है, इस पुस्तक से समाज में अराजकता और अंधविश्वास फैल रहा है, कृपया इस पुस्तक में जो त्रुटियां है उन्हें ठीक करें।

आर्य समाजियों का आश्रम पर हमला

आर्य प्रतिनिधि सभा ने संत रामपाल जी से नाराज़ होते हुए, समाचार पत्र के माध्यम से उनके विषय में निराधार आरोप लगाते हुए त्रुटियों को ठीक करने से इन्कार कर दिया और सत्यार्थ प्रकाश को सही बताते हुए उसे आर्य समाज की रीढ़ की हड्डी घोषित किया। इसके पश्चात संत रामपाल जी महाराज ने भी समाचार पत्र के माध्यम से लोगों को सत्यार्थ प्रकाश में लिखी त्रुटियों को बताना शुरू कर दिया। संत रामपाल जी का ऐसा करना आर्य प्रतिनिधि सभा को रास नहीं आया। संत रामपाल जी महाराज और उनके आश्रम को खत्म करने की नियत से कानून का सरेआम मज़ाक बनाते हुए हज़ारों की तादाद में शरारती तत्वों के साथ मिलकर आर्य प्रतिनिधि सभा ने सतलोक आश्रम करौंथा पर हमला बोल दिया। 

जिसमें गुरुकुल में पढ़ने वाले छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे, उनके माता पिता तक को नहीं पता था कि गुरुकुल में शिक्षा प्राप्ति के लिए भेजे गए उनके बच्चे किसी के आश्रम पर हमला करने गए हैं। आश्रम पर हमला करने आई भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें और फिर हवाई फायर भी किए , लेकिन हिंसक भीड़ को आर्य प्रतिनिधि सभा ने इस कदर भड़काया हुआ था कि भीड़ पुलिस के ऊपर पथराव करने लगी। पुलिस ने भी जवाबी कार्यवाही की। इस दौरान एक सोनू नाम के लड़के की मौत हो गई। सोनू झज्जर के बागपत गांव का रहने वाला था।

इस पूरे विवाद में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भूमिका भी प्रमुख थी। बड़ी हैरानी की बात है कि जिस लड़के की मौत पुलिस के साथ हिसंक झड़प में हुई उसकी मौत का ज़िम्मेदार संत रामपाल जी को बना दिया गया और ये मामला कहीं न कहीं हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा की सहमति पर ही संत रामपाल जी पर बनाया गया।

सर्वविदित है की मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा अपने आपको पिछली कई पीढ़ियों से आर्य समाजी मानते हैं। बात केवल यही नहीं है बल्कि अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए खुद मुख्यमंत्री ने एक संत के खिलाफ इस तरह का बर्ताव किया। सतलोक आश्रम करौंथा के ऊपर हमला करने वाले उन उपद्रवियों को हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा ने 50 – 50 हज़ार रुपए का इनाम भी दिया। मतलब साफ है हिंसा करने वालों को तथा पुलिस पर पथराव करने वालों को इनाम दिया गया।

इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला जब आप किसी के घर पर हमला करने के लिए जाएं, वहां गोलियां चलाएं, उन पर पथराव करें इस सब में यदि आपको चोट लगती है तो 50 हज़ार और मौत होती है तो 5 लाख का इनाम हरियाणा सरकार से पाएं। इस तरह की बेहूदगी भरी हरकत एक निर्दोष संत के साथ हरियाणा सरकार ने की और एक निर्दोष संत को और उनके 37 भक्तों को 21 महीने तक जेल में रखा गया। कोर्ट में आने वाले उनके अनुयायियों को पीटा गया। 21 महीने बाद जब संत रामपाल जी महाराज जी की ज़मानत होती है तो उसके बाद फिर से वैसा ही घिनौना कार्य हरियाणा सरकार ने किया।

संत रामपाल जी महाराज के जीवन के संघर्ष का दौर अभी थमा नहीं था ये तो शुरुआत भर थी, क्योंकि संत रामपाल जी महाराज ने जो आवाज़ सत्यार्थ प्रकाश में लिखी अज्ञानता के खिलाफ उठाई थी उस आवाज को दबाने के लिए हर वो ताकत संत रामपाल जी के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई जो झूठ की बुनियाद पर अपना धंधा चलाने में लगे थे, उसमें चाहे खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री हों, या तत्कालीन समाचार पत्र या न्यूज़ चैनल सभी ने मिलकर झूठ का ऐसा पुलिंदा बनाया कि लोग संत रामपाल जी को घृणा की दृष्टि से देखने लगे क्योंकि तत्कालीन समाचार पत्रों की हैडलाइन देखकर कोई भी व्यक्ति सच को जानने की हिम्मत ही नहीं कर पाया और जो मीडिया ने दिखाया वो ही सच लगने लगा।

अखबार के मुख्य पेज पर सूत्रों के हवाले से ऐसी ऐसी खबरें छापी गईं जिसका कोई आधार नहीं था। झूठ जब हद से ज़्यादा छपने लगा तो SP रोहतक ने मीडिया को इस पर रोक लगाने के लिए कहा। 15 दिन तक मीडिया जब पूरी तरह लोगों में संत रामपाल जी की छवि को बदनाम कर चुका था तब अखबार के बीच एक कोने में खबर छपी कि SP रोहतक के अनुसार सतलोक आश्रम में कोई भी अवैध वस्तु नहीं मिली। लेकिन ये अपने आप में एक मज़ाक था उन लोगों के साथ जो मीडिया की खबरों को पढ़कर ये मान चुके थे कि संत रामपाल जी अपराधी हैं।

लगातार 21 महीने संत रामपाल जी जेल में सलाखों के पीछे संघर्ष करते रहे और उनके अनुयायी रोहतक कोर्ट के बाहर सड़कों पर आर्य समाज के कुछ गुंडो की गुंडई के खिलाफ संघर्ष करते रहे। सरकार को किसी भी तरह से संत के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, यहां तक कि FSL रिपोर्ट में भी ये साफ हो गया कि संत रामपाल जी का सोनू की हत्या में कोई हाथ नहीं है, न संत रामपाल जी को सोनू की हत्या में सीधा दोषी ठहराया जा सकता है।

यहां तक कि आश्रम में एक भी गैर लाइसेंसी हथियार नहीं मिला, बावजूद इसके संत रामपाल जी को 21 महीने जेल में रखा गया, आप खुद अंदाजा लगाएं की देश और समाज हित के लिए आवाज़ उठा कर संत ने क्या गुनाह किया था? लेकिन अपनी गंदी राजनीति को चमकाने के लिए संत रामपाल जी पर अत्याचार किये गए। उसके बाद 21 महीने जेल में रहने के बाद हाइकोर्ट से संत रामपाल जी महाराज जी को ज़मानत मिली। संत रामपाल जी महाराज के मानने वालों की संख्या पहले से ज़्यादा हो चुकी थी, लोग भी समझने लगे थे कि मीडिया ने उन्हें गुमराह किया है। भारत देश की मीडिया झूठी है किसी के विषय में गलत ख़बरें छाप देती है। भारत की मीडिया No.1 गुलाम मीडिया है। जिसने तारणहार संत के विषय में गलत बोला है।

वर्तमान समय में पूर्ण व आधिकारिक गुरु जगतगुरु कौन है?

वर्तमान समय में पूर्ण व आधिकारिक गुरु जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं। जिन्होंने सर्व पवित्र धर्मों के पवित्र शास्त्रों से पवित्र ज्ञान सर्व भक्त समाज के समक्ष कर दिया है। पूर्ण गुरु की शरण में जाने से वास्तविक भक्ति, पूर्ण मोक्ष और सर्वकामनाएं पूर्ण होती हैं। तो देर न करें आज ही अविलंब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा लें और अपना कल्याण करवाएं।

संत रामपाल जी महाराज एक मात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने ऐसा काम करके दिखा दिया जिसको आज तक कोई भी संत, महंत और महात्मा नहीं कर सके। उन्होंने परमेश्वर का यथार्थ ज्ञान सभी धर्मों के शास्त्रों से खोज कर सबके समक्ष पेश कर दिया है। वर्तमान में ऐसा कोई ज्ञानवान नहीं है जो संत रामपाल जी से ज्ञान चर्चा कर सके क्योंकि वे कई धर्मगुरुओं को ज्ञान चर्चा में निरुत्तर कर चुके हैं और बता चुके हैं कि तुम्हारा ज्ञान गलत, तुम्हारी साधना गलत। आप अपना भी नाश कर रहे हो और भोली आत्माओं को भगवान से दूर करके पाप के भागी और बन रहे हो। अगर उनके पास कोई उत्तर होता तो उधमस तार देते ये नकली धर्मगुरु क्योंकि इनके हाथ में पैसे, मीडिया, राजनेता लोग हैं। क्या पता संत रामपाल जी के बारे में क्या क्या बकवास कर देते टीवी पर, परंतु अब सबकी सांस थम गई है।

संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा ले। आपको अपने घर बैठे ही निःशुल्क नाम दीक्षा मिल जाएगी। अधिक जानकारी के लिए पवित्र शास्त्रों के गूढ़ रहस्यों को जानने के लिए प्रतिदिन अवश्य देखिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन। सर्व पवित्र धर्मों के पवित्र शास्त्रों के आधार पर “साधना चैनल” पर शाम 7:30pm (IST).