जब सबने छोड़ा साथ, तब संत रामपाल जी महाराज बने सहारा: सोरखी में अन्नपूर्णा मुहिम की मिसाल

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हरियाणा के हिसार जिले की हांसी तहसील के अंतर्गत आने वाला गाँव सोरखी इन दिनों एक भयानक त्रासदी का सामना कर रहा था। भारी जल-भराव के कारण गाँव और खेतों में पानी भर गया था, जिससे किसानों की लगभग 75% फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी थीं। गाँव वालों में निराशा का माहौल व्याप्त था, और उन्हें दूर-दूर तक कोई उम्मीद की किरण नज़र नहीं आ रही थी। सरकारी सहायता और अन्य धार्मिक संस्थाओं की उपेक्षा से हताश, सोरखी ग्राम पंचायत ने अपनी अंतिम उम्मीद के साथ जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के पास मदद की गुहार लगाई।

‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत तत्काल सहायता

ग्राम पंचायत सोरखी के सरपंच रामचंद्र (सनोपा अमर सिंह) ने गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज के चरणों में गांव की गंभीर स्थिति को दर्शाते हुए एक लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। संत जी ने एक ही पुकार पर, बिना किसी विलम्ब के, तत्काल प्रभाव से सहायता भेजने का आदेश दिया। संत रामपाल जी महाराज का बाढ़ राहत काफिला सूर्य ढलने के बाद, अंधेरे में भी, गाँव सोरखी के लिए एक नए सूरज की तरह पहुँचा। यह सहायता पूरी तरह से निःशुल्क थी, जिसका एक भी पैसा ग्रामीणों को नहीं देना पड़ा।

उपलब्ध कराई गई सामग्री और सेवा का विवरण

बाढ़ग्रस्त जल निकासी के लिए सोरखी गांव को विशेष रूप से राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसने ग्रामीणों के लिए एक स्थाई समाधान का मार्ग प्रशस्त किया। दी गई सामग्री में 6500 फुट लंबा 8 इंची पाइप और 10 हॉर्स पावर (एचपी) की दो मोटरें शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, दो स्टार्टर, केबल और अन्य सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी प्रदान की गईं। 

यह कार्य लोक दिखावा न होकर, जमीनी स्तर पर सेवा करने के सतगुरुदेव संत रामपाल जी महाराज के स्पष्ट आदेश के तहत किया गया। उनके निर्देशानुसार, अब तक हरियाणा में 300 से भी अधिक बाढ़ पीड़ित गांवों में यह सेवा पूरी की जा चुकी है, और यह अभियान लगातार जारी है।

सरकार और अन्य संस्थाओं की उपेक्षा

गाँव सोरखी के गणमान्य व्यक्तियों और सरपंच ने इस विपत्ति के समय सरकार या किसी अन्य धार्मिक संस्था से कोई सहायता न मिलने पर गहरी निराशा व्यक्त की। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि किसी विधायक, सांसद या मुख्यमंत्री ने उनकी सुध नहीं ली। एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, “ना कोई एमएलए, ना कोई एमपी, ना सीएम काम आया, मारे तो रामपाल महाराज काम आया है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की निस्वार्थ और निःशुल्क सेवा केवल या तो शिव, विष्णु, ब्रह्मा जैसे भगवान ने की होगी, या फिर आज तक किसी ने नहीं की। यह सहायता ग्रामीणों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी, जिसने उन्हें ‘मरने से बचा लिया’।

भगवान का अवतार और किसानों का शुभचिंतक

सोरखी के ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज की इस दयालुता और तत्परता की तुलना सीधे भगवान के अवतार से कर दी। उन्होंने कहा कि ऐसे संत ही विपत्ति के समय लोगों की सेवा के लिए पैदा होते हैं। संत रामपाल जी महाराज स्वयं किसान परिवार से हैं, और इसलिए वे किसानों का दर्द भली-भांति समझते हैं। उनका मानना है कि किसान के घर चूल्हा जलेगा तभी मजदूर के घर चूल्हा जलेगा।

अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से, संत रामपाल जी न केवल किसानों को अगली फसल की बिजाई के योग्य बना रहे हैं, बल्कि गरीब को रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान भी उपलब्ध कराकर संपूर्ण समाज का कल्याण कर रहे हैं।

स्थाई समाधान हेतु गुरुदेव का सख्त आदेश

सामग्री प्रदान करने के साथ ही, संत रामपाल जी महाराज की ओर से ग्राम पंचायत सोरखी को एक विशेष निवेदन पत्र दिया गया। यह एक सख्त आदेश था कि प्रदान की गई पाइप और मोटर को ग्रामीण अपनी ज़मीन में दबाकर बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करें। उन्होंने कहा कि यह सामग्री उनके लिए ‘वरदान सिद्ध होगी’ और भविष्य में कितना भी पानी आए, वह साथ के साथ निकल जाएगा।

Also Read: हरियाणा के जीतपुरा गांव का बाढ़ संकट: संत रामपाल जी महाराज ने बचाई 90% से अधिक कृषि भूमि

गुरुदेव का सख्त आदेश था कि यदि ग्रामवासी मिलकर इस राहत सामग्री का सदुपयोग करते हुए पानी को निर्धारित समय पर गांव से बाहर नहीं निकालते और अगली फसल की बिजाई नहीं करते, तो भविष्य में उनके गांव की कोई मदद नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि निस्वार्थ सेवा में दिए गए दान का कोई दुरुपयोग न हो और किसानों को जीवन-दान मिले। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए, आश्रम द्वारा गांव के जल-भराव और फसल लहलहाने के बाद की वीडियो बनाकर सभी समागमों में दिखाई जाएगी, ताकि संगत का दान करने का हौसला बना रहे।

संत रामपाल जी महाराज की निस्वार्थ अन्नपूर्णा मुहिम ने जीते दिल

जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ समाज सेवा के क्षेत्र में निस्वार्थ परमार्थ की एक अद्वितीय मिसाल है। यह केवल बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को संवार रही है। जहाँ एक ओर लाखों रुपए कथा करने वाले कथावाचक दान का पैसा हजम कर जाते हैं, वहीं दूसरी ओर संत रामपाल जी महाराज दान की संपूर्ण राशि जन सेवा और परमार्थ में लगाते हैं। यह सेवा किसानों और मजदूरों को जीवन दान देकर राष्ट्र हित के लिए किया जा रहा एक महान पुण्य का काम है। 

सोरखी गाँव को मिली यह सहायता सिद्ध करती है कि संत रामपाल जी महाराज जी वास्तव में 36 बिरादरी के जान-माल के शुभचिंतक हैं, जो मानवता की सेवा के लिए दिन-रात अथक प्रयास कर रहे हैं। गाँव सोरखी आज पूरी तरह से खुश है और संत रामपाल जी महाराज तथा उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त करता है।

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