तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की जल निकासी सहायता के बाद हिसार के सिवाड़ा गांव में फिर शुरू हुई गेहूं की बिजाई

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हरियाणा के हिसार जिले के सिवाड़ा गांव का बड़ा हिस्सा लगभग पांच महीनों तक बाढ़ के पानी में डूबा रहने के बाद अब दोबारा खेती की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। जिन खेतों में पहले तीन से चार फुट तक पानी भरा हुआ था, वहां अब किसानों ने फिर से गेहूं की बिजाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों के अनुसार जलभराव की स्थिति ने फसलों, मकानों और दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया था, जबकि गांव में बीमारियां भी फैलने लगी थीं। बाद में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मोटरें, पाइपलाइन और संपूर्ण संचालन सामग्री उपलब्ध कराकर प्रभावित खेतों से पानी निकलवाने में सहायता की, जिसके बाद स्थिति में सुधार आने लगा।

ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय तक जलभराव और खेती को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच गांव के लोग प्रार्थना लेकर संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार गांव की पंचायत ने 8,000 फुट पाइपलाइन और दो मोटरों की मांग रखी थी, हालांकि उन्हें इस बात को लेकर संशय था कि इतनी सहायता वास्तव में मिलेगी या नहीं। बाद में ग्रामीणों ने कहा कि जो सहायता मांगी गई थी, वह पूरी मात्रा में गांव तक पहुंचाई गई।

सिवाड़ा बाढ़ राहत अभियान की प्रमुख बातें

  • हिसार का सिवाड़ा गांव लगभग पांच महीने तक जलभराव की चपेट में रहा
  • करीब 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही
  • कई खेतों में पानी का स्तर 3 से 4 फुट तक पहुंच गया था
  • ग्रामीणों के अनुसार ठहरे हुए पानी के कारण गांव में बीमारियां फैलने लगी थीं
  • संत रामपाल जी महाराज द्वारा उपलब्ध कराई गई सहायता:
    • दो 15 एचपी मोटरें
    • 8,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
    • संपूर्ण संचालन सामग्री
  • करीब 1,000 से 1,200 एकड़/किले क्षेत्र में दोबारा खेती संभव हुई
  • बड़े हिस्से में गेहूं की बिजाई फिर शुरू हुई
  • जलभराव के कारण कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा

पानी में डूबे खेतों में फिर दिखने लगी खेती

सिवाड़ा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति ने खेती को लगभग ठप कर दिया था। ग्रामीणों के अनुसार गांव के लगभग सभी कृषि क्षेत्र महीनों तक पानी में डूबे रहे, जिससे किसानों के सामने यह संकट खड़ा हो गया था कि क्या इस सीजन में दोबारा खेती संभव हो पाएगी या नहीं।

गांव की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऐसे बड़े खेत दिखाई दिए जहां पानी निकलने के बाद गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि जो खेत पहले तालाब जैसे दिखाई दे रहे थे, वहां अब गेहूं के छोटे-छोटे पौधे उगने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के कई हिस्सों में पानी का स्तर चार फुट तक पहुंच गया था, जबकि कुछ किसानों ने अपने खेतों में पांच से सात फुट तक पानी भरे होने की बात कही।

प्रशासनिक दौरों के बाद पंचायत ने मांगी सहायता

ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान डीसी, विधायक और तहसीलदार सहित कई अधिकारी गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सिंचाई विभाग की ओर से भी प्रयास किए जा रहे थे। हालांकि ग्रामीणों के अनुसार महीनों तक संकट बना रहा और खेती को लेकर अनिश्चितता खत्म नहीं हुई।

यह भी पढ़ें:  बाढ़ के पानी से लहलहाते खेतों तक: खेड़ी आसरा गाँव में संत रामपाल जी महाराज ने किया चमत्कार

ग्रामीणों ने बताया कि बाद में गांव पंचायत ने अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जा रही राहत सहायता के बारे में जानकारी मिलने पर मदद लेने का निर्णय लिया।

गांव के प्रतिनिधि सरपंच विजेंद्र नंबरदार दास ने बताया कि गांव की ओर से दो मोटरें और 8,000 फुट पाइपलाइन की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि सहायता पूरी मात्रा में गांव तक पहुंची और इससे चारों ओर भरे पानी को बाहर निकालने में मदद मिली।

उपलब्ध कराई गई राहत सामग्रीग्रामीणों द्वारा साझा जानकारी
मोटरेंदो 15 एचपी मोटरें
पाइपलाइन8,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
अतिरिक्त सामग्रीसंपूर्ण संचालन उपकरण
उद्देश्यजलभराव वाले खेतों से पानी निकालना

ग्रामीणों ने कहा—सिस्टम चालू करने के लिए बाज़ार से एक नट तक नहीं खरीदना पड़ा

ग्रामीणों के अनुसार सहायता केवल बड़ी मशीनों तक सीमित नहीं थी। जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के एक निर्देश पर उनके शिष्यों ने पूरे सिस्टम को संचालित करने के लिए आवश्यक सभी सामान उपलब्ध कराया। इसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैसकेट, फेवीकोल जैसे चिपकाने वाले पदार्थ और छोटे से छोटे स्टील नट-बोल्ट तक शामिल थे।

ग्रामीणों ने कहा, “सिस्टम को चालू करने के लिए हमें बाजार से एक नट तक नहीं खरीदना पड़ा।” ग्रामीणों के अनुसार यह सामग्री सूर्यास्त के बाद रात के समय गांव पहुंची और तुरंत जल निकासी कार्य शुरू किया गया।

किसानों ने बताई फसल नुकसान और फिर शुरू हुई खेती की कहानी

कई किसानों ने लगातार बारिश और लंबे समय तक जलभराव के कारण हुई फसल बर्बादी के बारे में जानकारी दी। एक किसान ने बताया कि उनके परिवार के पास लगभग 11 किले जमीन है और गांव में सबसे अधिक नुकसान झेलने वालों में उनका परिवार भी शामिल था।

किसान के अनुसार पहले कपास की फसल अधिक बारिश के कारण खराब हो गई। बाद में धान लगाया गया, लेकिन वह फसल भी पानी में डूब गई। ग्रामीणों ने बताया कि कई किसान परिवार खेती और भविष्य की आय को लेकर उम्मीद खोने लगे थे।

हालांकि जल निकासी कार्य शुरू होने के बाद गांव में दोबारा बिजाई शुरू हुई। किसानों के अनुसार करीब 1,000 से 1,200 किले/एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बिजाई की जा चुकी थी। ग्रामीणों ने हैंडपंप और खेतों के पास बने पानी के निशानों को दिखाते हुए बताया कि पहले यहां कितना अधिक पानी भरा हुआ था।

ग्रामीणों ने कहा, मकानों पर भी मंडरा रहा था खतरा

खेती को हुए नुकसान के अलावा ग्रामीणों ने बताया कि सिवाड़ा गांव में कुछ मकानों को भी जलभराव से नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कई गरीब परिवारों के मकान चारों ओर से पानी से घिर गए थे।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क किनारे से पाइपलाइन बिछाकर मोटरों की सहायता से पानी को ड्रेन के जरिए बाहर निकाला गया। बाद में ग्रामीणों ने कहा कि गांव के अधिकांश खेत सूख चुके हैं और कई खेतों में गेहूं के पौधे निकलने लगे हैं।

युवाओं और किसानों ने राहत कार्य पर दी प्रतिक्रिया

गांव में बातचीत के दौरान कई युवाओं और किसानों ने इस सहायता को कठिन समय में मिली बड़ी राहत बताया। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें इतनी बड़ी सहायता मिलने की उम्मीद नहीं थी।

ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से जुड़ी सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें नशा मुक्ति अभियान शामिल है। ग्रामीणों का कहना था कि बाढ़ राहत सहायता ने उन्हें यह विश्वास दिया कि महीनों की अनिश्चितता के बाद अब दोबारा खेती संभव हो सकेगी।

कई ग्रामीणों ने सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे खेती दोबारा शुरू करने में मदद मिली और भविष्य के नुकसान को लेकर बनी आशंका कम हुई।

महीनों बाद सिवाड़ा के खेतों में लौटी हरियाली

ग्रामीणों के अनुसार राहत सहायता गांव पहुंचने के करीब दो महीने बाद अब उन खेतों में फिर से गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है जो पहले लंबे समय तक पानी में डूबे रहे थे। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जल निकासी में इस्तेमाल की गई पाइपलाइन को भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।

सिवाड़ा गांव के कई परिवारों के लिए खेती का दोबारा शुरू होना महीनों तक चली बाढ़, फसल नुकसान और अनिश्चितता के बाद सामान्य जीवन की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

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