हरियाणा के झज्जर जिले का गांव सिलानी लंबे समय से बरसाती पानी के जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। हर वर्ष बारिश के मौसम में गांव के आसपास के खेतों में पानी भर जाता था और यह पानी कई-कई दिनों तक निकासी के अभाव में जमा रहता था। इसका सबसे बड़ा असर उन किसानों पर पड़ता था जिनकी जीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। खेतों में खड़ी फसलें खराब हो जाती थीं, बीज और खाद पर लगाया गया पैसा डूब जाता था और किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता था।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या कोई नई नहीं थी। वर्षों से गांव में स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग उठती रही, लेकिन समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हो पाया। धीरे-धीरे यह समस्या पूरे गांव के विकास और किसानों की आजीविका के लिए चुनौती बन गई। ऐसे में गांव के लोगों ने एक ऐसे समाधान की उम्मीद की, जो केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी राहत देने वाला हो।
ग्राम पंचायत ने समाधान की उम्मीद में की प्रार्थना
गांव सिलानी की ग्राम पंचायत ने किसानों की परेशानियों को देखते हुए किसान मजदूर बचाओ अभियान के अंतर्गत जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष इस समस्या को रखा। ग्रामीणों की मांग थी कि गांव को ऐसी व्यवस्था मिले जिससे खेतों में जमा बरसाती पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और किसानों को बार-बार होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। समस्या की गंभीरता को देखते हुए सर्वे टीम को गांव भेजा गया। टीम ने मौके पर जाकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया, जलभराव की स्थिति को समझा और तकनीकी रूप से आवश्यक समाधान का अध्ययन किया। विस्तृत सर्वे के बाद गांव के लिए लगभग 13,500 फीट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन स्वीकृत की गई, ताकि बरसाती पानी को खेतों से बाहर निकालने की व्यवस्था बनाई जा सके।
यह गांव के लिए एक बड़ी राहत की शुरुआत थी। ग्रामीणों ने इसे केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना।
13,500 फीट पाइपलाइन से शुरू हुआ बदलाव का सफर
सर्वे रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद गांव सिलानी को आवश्यक पाइपलाइन और अन्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। इसके बाद ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने मिलकर पाइपलाइन को निर्धारित स्थानों पर भूमिगत करने का कार्य शुरू किया। गांव के लोगों ने बताया कि यह केवल सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया। पाइपलाइन दबाने का कार्य पूरा होने के बाद सर्वे टीम ने दोबारा मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण में दो पाइपलाइनें निर्धारित मानकों के अनुसार भूमिगत पाई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की निगरानी और चरणबद्ध प्रक्रिया ने उन्हें विश्वास दिलाया कि काम केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा।
दूसरे चरण में गांव पहुंचीं दो हैवी ड्यूटी 10 एचपी मोटरें
निरीक्षण रिपोर्ट के बाद किसान मजदूर बचाओ अभियान के दूसरे चरण (Phase-2) के अंतर्गत गांव सिलानी को दो हैवी ड्यूटी 10 एचपी मोटरें उपलब्ध करवाई गईं। इसके साथ जल निकासी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी सामग्री भी ग्राम पंचायत को सौंपी गई।
इस सहायता में 2020 फीट की सुंडी, एल एंड टी कंपनी के स्टार्टर, केबल वायर, पीवीसी पाइप, लोहे के बैंड, पीवीसी प्लेट, एयर वाल्व, रिड्यूसर, जॉइंट, स्टील के नट-बोल्ट, क्लिप और फिटिंग में उपयोग होने वाली अन्य सभी आवश्यक ब्रांडेड सामग्री शामिल रही। ग्रामीणों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार्य के लिए जरूरी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई, जिससे आगे किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।
“इतनी मदद तो सरकार से भी नहीं मिली” – ग्रामीणों और सरपंच ने व्यक्त किया आभार
गांव के सरपंच महावीर ने भावुक होकर कहा कि उनके गांव की समस्या बहुत पुरानी थी। बरसात के समय खेतों में पानी भर जाता था और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। उन्हें पूरा विश्वास है कि यह व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। 13,000 फीट से अधिक पाइपलाइन मिली और अब दो मोटरें भी पहुंच गई हैं। गांव के लिए यह बहुत बड़ा काम है।
एक अन्य ग्रामीण ने कहा,
“सरकार से भी हमें इतनी सहायता नहीं मिली जितनी आज गांव को मिल रही है। अगर ये व्यवस्था पूरी तरह चालू हो जाती है तो किसानों को बहुत फायदा होगा और खेतों में पानी खड़ा नहीं रहेगा।”
गांव के बुजुर्ग किसान भी अपनी खुशी छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि बरसों से वह इस परेशानी को झेल रहे थे। फसलें खराब होती थीं, मेहनत बेकार चली जाती थी। अब उम्मीद है कि आने वाले समय में हालात बदलेंगे।
खेतों में जमा पानी की निकासी से किसानों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों और ग्रामीणों का मानना है कि जल निकासी व्यवस्था के सुचारू रूप से चालू होने के बाद गांव की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को सीधा लाभ मिलेगा। खेतों में पानी लंबे समय तक जमा नहीं रहेगा, जिससे फसलों की जड़ें सुरक्षित रहेंगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। किसानों को दोबारा बुवाई या फसल खराब होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। इससे खेती की लागत कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। गांव के युवाओं का कहना है कि यदि खेती लाभदायक बनेगी तो गांव से पलायन भी कम होगा और आने वाली पीढ़ियां खेती को अपनाने के लिए प्रेरित होंगी।
संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों ने ग्रामीणों में जगाई नई आशा और विश्वास
गांव सिलानी के लोगों ने विशेष रूप से जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं को समझते हुए जिस प्रकार चरणबद्ध तरीके से सहायता पहुंचाई जा रही है, उसने लोगों के मन में विश्वास पैदा किया है। ग्रामीणों के अनुसार केवल सामग्री उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि समस्या का सर्वे, योजना बनाना, कार्य की निगरानी करना और आवश्यकता के अनुसार आगे की सहायता उपलब्ध कराना एक संवेदनशील सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। गांव के कई लोगों ने कहा कि ऐसे प्रयास समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को नई उम्मीद देते हैं। किसानों के जीवन में राहत पहुंचाने, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को ग्रामीणों ने करुणा, मानवता और जनकल्याण का उदाहरण बताया।
गांव में दिखने लगा सकारात्मक बदलाव
गांव में पहुंची सहायता के बाद लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें लगता है कि उनकी समस्या का स्थायी समाधान संभव है। किसान भविष्य को लेकर पहले की तुलना में अधिक आशावादी दिखाई दे रहे हैं।
ग्राम पंचायत का कहना है कि शेष पाइपलाइन कार्य पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी। इससे पूरे प्रोजेक्ट का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सकेगा। गांव के लोगों का मानना है कि जब समाज मिलकर किसी समस्या के समाधान के लिए आगे आता है तो बदलाव संभव होता है। सिलानी में चल रहा यह कार्य उसी सोच का एक उदाहरण बनकर सामने आया है।
सिलानी के किसानों के लिए राहत, विश्वास और नई शुरुआत की कहानी
झज्जर के गांव सिलानी में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में उठाए गए कदम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। पाइपलाइन बिछाने से लेकर मोटरों और तकनीकी सामग्री उपलब्ध कराने तक की यह प्रक्रिया किसानों के लिए केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि उनके संघर्षों से जुड़ी उम्मीद है। ग्रामीणों का विश्वास है कि जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह शुरू होने के बाद खेतों में जमा बरसाती पानी से राहत मिलेगी, फसलें सुरक्षित रहेंगी और किसानों की मेहनत का पूरा फल उन्हें प्राप्त होगा। गांव के लोगों के चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का संकेत है कि जब संवेदनशील प्रयास जमीन पर उतरते हैं, तो बदलाव केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि लोगों के जीवन में महसूस भी किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।



