समधरा बाढ़ राहत: राजस्थान के डीग में वर्षों बाद किसानों ने फिर शुरू की खेती

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राजस्थान के डीग जिले के समधरा गांव में वर्षों तक कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा ठहरे हुए गंदे पानी में डूबा रहा, जिससे खेती, शिक्षा और ग्रामीण जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बंजर हो चुकी थी और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। स्थिति तब बदलनी शुरू हुई जब गांव के लोग तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की कमेटी के पास सहायता की प्रार्थना लेकर पहुंचे। अन्नपूर्णा मुहिम के तहत उपलब्ध कराई गई जल निकासी संबंधी सहायता के बाद लंबे समय से जलभराव से प्रभावित जमीन पर किसानों ने दोबारा खेती शुरू कर दी।

समधरा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पड़ोसी गांवों में इसी प्रकार की सेवा कार्य देखकर वे तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के पास सहायता की प्रार्थना लेकर पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार उनकी प्रार्थना तुरंत स्वीकार कर ली गई और कुछ ही दिनों के भीतर राहत सामग्री गांव पहुंचनी शुरू हो गई।

समधरा बाढ़ राहत अभियान की प्रमुख बातें

  • राजस्थान के डीग जिले का समधरा गांव करीब 8–10 वर्षों से गंभीर जलभराव की समस्या से जूझ रहा था।
  • लगभग 400–500 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि गंदे और ठहरे हुए पानी में डूबी हुई थी।
  • ग्रामीणों के अनुसार स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी जलभराव से प्रभावित थे।
  • लोगों का कहना है कि प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं हुआ।
  • संत रामपाल जी महाराज जी की टीम ने  अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जल निकासी की व्यवस्था करवाई।
  • करीब 8,300 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन और दो 20 हॉर्स पावर की मोटरें उपलब्ध कराई गईं।
  • जनरेटर, डीजल, केबल, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेविकोल और स्टील फिटिंग सहित अन्य ज़रूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
  • ग्रामीणों के अनुसार पहले जलमग्न रही बड़ी कृषि भूमि पर अब दोबारा खेती शुरू हो चुकी है।

वर्षों के जलभराव ने समधरा में खेती और जनजीवन को प्रभावित किया

राजस्थान के डीग जिले का समधरा गांव कई वर्षों से गंभीर जलभराव की समस्या का सामना कर रहा था। ग्रामीणों ने स्थिति को बेबसी और अनिश्चितता से भरा बताया। ग्रामीणों के अनुसार करीब 400 से 500 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि गंदे और सड़े हुए पानी के तालाब में बदल चुकी थी, जिसके कारण बड़े हिस्से में खेती पूरी तरह बंद हो गई थी।

ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या करीब 8–10 वर्षों से बनी हुई थी, जबकि कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि कुछ हिस्सों में 20–25 वर्षों से पानी भरा हुआ था। किसानों का कहना था कि अपनी ज़मीन होने के बावजूद उन्हें बाजार से अनाज खरीदकर गुज़ारा करना पड़ रहा था क्योंकि खेतों में खेती संभव नहीं रह गई थी।

इस समस्या का असर केवल खेती तक सीमित नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के आसपास भी पानी जमा हो गया था, जिससे बच्चों की पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।

ग्रामीणों द्वारा बताई गई समस्यास्थिति
जलमग्न कृषि भूमिकरीब 400–500 बीघा प्रभावित
जलभराव की अवधिग्रामीणों के अनुसार करीब 8–10 वर्ष
खेती पर प्रभावबड़े पैमाने पर खेती बाधित
शैक्षणिक संस्थानस्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र प्रभावित
आजीविका पर असरकिसानों को बाजार से अनाज खरीदना पड़ा

ग्रामीणों ने कहा, प्रशासन से गुहार के बावजूद नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों और सरपंच अख्तर हुसैन के अनुसार समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी विभागों से कई बार संपर्क किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कई ग्रामीणों ने बताया कि साल-दर-साल खेतों में पानी भरा रहने से धीरे-धीरे लोगों की उम्मीद टूटने लगी थी। कुछ लोगों ने इस स्थिति को ऐसा संकट बताया जिसने खेती पर निर्भर परिवारों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया था।

यह भी पढ़ें:  राजस्थान के डीग स्थित अवार गांव की 13000 बीघा जलमग्न भूमि को संत रामपाल जी महाराज ने उबारा

समधरा गांव के निवासी खालिद ने बताया कि गांव वालों ने सरकार से भी मदद की अपील की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को उम्मीद नहीं थी कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या इतनी जल्दी दूर हो जाएगी।

जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत करवाई राहत व्यवस्था

ग्रामीणों के अनुसार स्थिति में बदलाव तब शुरू हुआ जब ग्राम पंचायत ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की कमेटी से सहायता मांगी। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के प्रतिनिधियों द्वारा खेतों की स्थिति बताने के तुरंत बाद उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली गई।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की टीम ने गांव से ठहरा हुआ पानी निकालने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की। ग्रामीणों के अनुसार समधरा गांव में जल निकासी के लिए करीब 8,300 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन और दो 20 हॉर्स पावर की मोटरें भेजी गईं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली की आपूर्ति केवल करीब छह घंटे ही रहती थी और थ्री-फेज कनेक्शन भी उपलब्ध नहीं था। स्थिति की जानकारी मिलने के बाद संत रामपाल जी महाराज जी ने जनरेटर किराया और डीजल खर्च की व्यवस्था करने के निर्देश दिए ताकि मशीनें लगातार चलती रहें।

सहायता केवल बड़े उपकरणों तक सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज जी के एक निर्देश पर उनके अनुयायियों ने सिस्टम को चालू रखने के लिए जरूरी हर सामान उपलब्ध कराया, जिसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेविकोल और छोटे से छोटे स्टील नट-बोल्ट तक शामिल थे। ग्रामीणों के शब्दों में, “हमें सिस्टम चलाने के लिए बाजार से एक नट तक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।”

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि करीब 40 किलो फेविकोल और अन्य स्टील फिटिंग सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

पहले जलमग्न रहे खेतों में किसानों ने फिर शुरू की खेती

ग्रामीणों के अनुसार उपलब्ध कराए गए उपकरणों से लगातार जल निकासी का कार्य होने के बाद गांव की स्थिति में सुधार शुरू हुआ। लोगों ने बताया कि जिन खेतों में पहले करीब सात फुट गहरा सड़ा हुआ पानी भरा रहता था, वे धीरे-धीरे दोबारा खेती योग्य बनने लगे।

ग्राउंड रिपोर्ट में उन क्षेत्रों को दिखाया गया जहां ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से बंजर पड़ी जमीन पर अब ट्रैक्टर चलते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पहले कुछ स्थानों पर पानी सड़क तक पहुंच गया था।

किसानों के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में से करीब 300 बीघा भूमि पर दोबारा खेती शुरू हो चुकी है। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि बोवाई में देरी होने के कारण करीब 70 से 100 बीघा ज़मीन पर खेती नहीं हो पाई।

ग्रामीणों ने गांव के मौजूदा माहौल को सकारात्मक और उम्मीदों से भरा बताया। लोगों का कहना है कि वर्षों बाद गांव के खेतों में फिर से हरियाली दिखाई देने लगी है।

ग्रामीणों ने राहत कार्य को गांव के लिए बड़ा बदलाव बताया

गांव में बातचीत के दौरान कई ग्रामीणों ने समधरा में दी गई सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज जी का धन्यवाद किया। ग्रामीणों ने कहा कि इस राहत कार्य से खेती दोबारा शुरू हो सकी और कृषि पर निर्भर परिवारों को राहत मिली।

कुछ लोगों ने इस सहायता को समय पर मिली मदद बताया, जिसने खेतों और आजीविका दोनों को बचाने में भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि खेती दोबारा शुरू होने से लोगों के साथ-साथ पशुओं को भी लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें: अन्नपूर्णा मुहिम: जब सेवा बनी संजीवनी और रोहतक के एक टूटते परिवार को मिला नया जीवन

ग्रामीणों का कहना था कि यह सहायता ऐसे समय में पहुंची जब उन्हें अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्या का कोई दूसरा समाधान दिखाई नहीं दे रहा था।

राहत कार्य से समधरा के किसानों में फिर जगी उम्मीद

समधरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि खेती दोबारा शुरू होने से गांव का माहौल वर्षों बाद बदलता दिखाई दे रहा है। लोगों ने बताया कि जो खेत कभी गंदे पानी में डूबे रहते थे, वहां अब खेती के संकेत दिखाई दे रहे हैं। किसानों ने इस बदलाव को खेती पर निर्भर परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। ग्रामीणों के अनुसार जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के मार्गदर्शन में मिली सहायता ने लंबे समय से संकट झेल रहे गांव में फिर से उम्मीद जगाई है।

Website: www.jagatgururampalji.org
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