​राजस्थान के डीग स्थित अवार गांव की 13000 बीघा जलमग्न भूमि को संत रामपाल जी महाराज ने उबारा

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राजस्थान के डीग जिले की रार तहसील का अवार गांव पिछले दो वर्षों से एक भयानक त्रासदी का सामना कर रहा था। गांव की करीब 70 प्रतिशत उपजाऊ भूमि, जो लगभग 13,000 बीघा है, एक अंतहीन झील में तब्दील हो चुकी थी। जहां किसानों की फसलें लहलहानी चाहिए थीं, वहां सिर्फ गंदा पानी भरा हुआ था और बीमारियां पनप रही थीं। हालात इतने लाचार हो चुके थे कि किसान अनाज के एक-एक दाने के लिए तरस रहे थे।

पूरी फसल बर्बाद होने के कारण पशुओं के लिए भी चारा नहीं बचा था, जिसके कारण किसानों को बाहर से मोल चारा खरीदना पड़ रहा था। जलभराव के कारण डिस्पेंसरी बंद हो गई थी और स्कूलों में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षा भी पूरी तरह से बाधित हो गई थी।

मुख्य अंश:

  • ​राजस्थान के डीग जिले की रार तहसील के अवार गांव में लगभग 13000 बीघा जमीन पिछले दो वर्षों से पूरी तरह जलमग्न थी।
  • ​सरकारी प्रशासन और नेताओं से पूर्ण निराशा मिलने के बाद ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 3 से 4 दिनों के भीतर गांव की दहलीज पर विशाल राहत सामग्री का काफिला पहुंचा दिया।
  • ​राहत सामग्री में 6150 फुट पाइप, दो 10 एचपी मोटरें, चार शक्तिशाली ट्रैक्टर कपलिंग सेट और अन्य सभी आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
  • ​गांव में बिजली की कमी को देखते हुए जनरेटर का किराया और डीजल का संपूर्ण खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा वहन किया जा रहा है।
  • ​ग्राम पंचायत अवार और समस्त किसानों ने ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ संत रामपाल जी महाराज का भव्य स्वागत किया।

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​ग्रामीण कैसे पहुंचे संत रामपाल जी महाराज की शरण में

सरपंच और ग्रामीणों ने अपनी इस दयनीय स्थिति के समाधान के लिए कलेक्टर, एसडीएम और स्थानीय नेताओं के कई चक्कर काटे, लेकिन सरकारी तंत्र ने पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए। किसी भी अधिकारी या नेता ने उन्हें यह भरोसा नहीं दिया कि उनके बच्चों की भूख का समाधान होगा। जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब गांव के कुछ लोगों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्य स्थानों पर किए जा रहे राहत कार्यों के बारे में सुना। इसके बाद गांव के चार व्यक्ति भरतपुर स्थित आश्रम के ऑफिस गए और वहां अपनी अर्जी लगाई। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों के माध्यम से यह प्रार्थना उन तक पहुंची और उन्होंने तुरंत इस अर्जी को स्वीकार कर लिया।

​मात्र तीन से चार दिनों में राहत सामग्री का आगमन

संत रामपाल जी महाराज के दरबार में प्रार्थना लगने के बाद सहायता पहुंचने की गति किसी चमत्कार से कम नहीं थी। ग्रामीणों के अनुसार, अर्जी देने के मात्र तीन से चार दिनों के भीतर ही राहत सामग्री से भरा एक विशाल काफिला गांव की दहलीज पर खड़ा था। बिना किसी लंबी कागजी कार्रवाई या लालफीताशाही के, गांव को इस दो साल पुराने जल संकट से निकालने के लिए त्वरित कदम उठाए गए।

​राहत सामग्री का विस्तृत विवरण

गांव से पानी निकालने के लिए एक अत्यंत व्यापक और तकनीकी रूप से सक्षम व्यवस्था भेजी गई। इस सामग्री को जोड़ने के लिए छोटे से छोटे उपकरण का भी ध्यान रखा गया, ताकि ग्राम पंचायत को अपनी तरफ से एक भी रुपया खर्च न करना पड़े।

​प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण:

राजस्थान के डीग जिले के अवार गांव में संत रामपाल जी महाराज ने दूर किया जलसंकट
क्रम संख्यासामग्री का नाममात्रा / विवरण
16 इंची पाइप4650 फुट
28 इंची पाइप1500 फुट
3कुल पाइप की लंबाई6150 फुट
4पानी की मोटर (स्टार्टर सहित)2 (10 हॉर्स पावर / HP क्षमता)
5ट्रैक्टर कपलिंग सेट (पंखे)4
6फ्लैक्सिबल पाइप (मोटर के लिए)20-20 फुट (प्रत्येक मोटर के साथ)
7फ्लैक्सिबल पाइप (पंखों के लिए)50 फुट (प्रत्येक पंखे के साथ, कुल 200 फुट)
8मोटर की तार20-20 फुट (मोटर और स्टार्टर के बीच के लिए)
9अन्य आवश्यक फिटिंग का सामानबैंड, 8/4 की असेंबली, निपल, फुटबॉल (Foot valve), स्टील के नट-बोल्ट और फेविकोल
10ईंधन और बिजली व्यवस्थाजनरेटर

जनरेटर और डीजल के खर्च का पूर्ण वहन

संत रामपाल जी महाराज की करुणा केवल सामग्री भेजने तक सीमित नहीं रही। जब उन्हें अवगत कराया गया कि अवार गांव में बिजली मात्र छह घंटे आती है, तो उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि मशीनों को निर्बाध रूप से चलाने के लिए जनरेटर की व्यवस्था की जाए। जनरेटर का किराया, उसमें डलने वाला डीजल और ट्रैक्टरों को चलाने के लिए आवश्यक डीजल का सारा खर्च भी संत रामपाल जी महाराज की तरफ से ही दिया जा रहा है।

​ग्राम पंचायत और ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत

राहत सामग्री पहुंचने पर अवार गांव में खुशियों का ऐसा माहौल था मानो कोई बड़ा त्योहार लौट आया हो। युवाओं ने मोटरसाइकिलों पर सवार होकर और डीजे बजाकर काफिले का भव्य स्वागत किया। डीजे पर संत रामपाल जी महाराज के गीत बज रहे थे। बड़े-बुजुर्गों, माताओं और पंचायत के प्रतिनिधियों ने संत जी के स्वरूप पर फूल मालाएं अर्पित की और उनके चरणों में वंदन किया। ग्राम पंचायत द्वारा पूर्ण सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप को पगड़ी भी भेंट की गई।

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​ग्रामीणों की जुबानी उनका असीम दर्द और आभार

किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके हालात इतने खराब थे कि भगवान ने भी उनका साथ छोड़ दिया था और प्रशासन ने मुंह मोड़ लिया था। ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि संत रामपाल जी महाराज साक्षात भगवान और गरीबों के मसीहा बनकर उनके बीच आए हैं। यह सहायता उनके लिए एक ऐसा एहसान है जिसके वे जीवन भर ऋणी रहेंगे। किसानों का मानना है कि यदि यह पानी निकल गया तो वे पुनः खेती कर सकेंगे और उनके परिवारों का भरण-पोषण हो सकेगा।

​एक सख्त हिदायत और पंचायत के साथ समझौता

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह सारी सामग्री पंचायत को हमेशा के लिए निःशुल्क दी गई है, लेकिन इसके साथ एक सख्त शर्त भी रखी गई है। पंचायत को एक आधिकारिक पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर भी किए। शर्त यह है कि इस सामग्री का उपयोग करके तुरंत पानी निकाला जाए और फसल की बिजाई की जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा उस गांव की कोई मदद नहीं की जाएगी।

​पारदर्शिता और दान का सदुपयोग

इस अभियान में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। कार्य शुरू होने से पहले ड्रोन द्वारा जलमग्न गांव की वीडियो बनाई गई है। पानी निकलने के बाद दूसरी वीडियो बनाई जाएगी, और फसल लहलहाने पर तीसरी वीडियो तैयार होगी। इन तीनों वीडियो को सभी सतलोक आश्रमों में प्रोजेक्टर पर चलाकर संगत को दिखाया जाएगा, ताकि दान करने वालों को यह विश्वास रहे कि उनके पैसे का कोई दुरुपयोग नहीं होता और इसका सीधा लाभ जरूरतमंदों को मिल रहा है।

​बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के पूर्ण परमार्थ

संत रामपाल जी महाराज का यह कार्य पूर्णतः निस्वार्थ है। उन्हें कोई राजनीति नहीं करनी है, कोई चुनाव नहीं लड़ना है और न ही कोई वोट चाहिए। वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं, इसलिए वे किसानों का दर्द भली-भांति समझते हैं। इस राहत कार्य से गांव की 36 बिरादरी के लोगों को फायदा होगा। किसान के घर चूल्हा जलेगा तो मजदूर के घर भी रोटी बनेगी।

​कथावाचकों की कार्यप्रणाली और असली संत की पहचान

वर्तमान में समाज में ऐसे कई कथावाचक हैं जो कथा करने के नाम पर लाखों रुपये लेते हैं, लेकिन जब समाज पर कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो वे कोई आर्थिक सहायता नहीं करते। इसके विपरीत, संत रामपाल जी महाराज के पास जो भी दान का पैसा आता है, वह सारा जनसेवा और परमार्थ के कार्यों में लगाया जाता है।

​संत रामपाल जी महाराज: कलयुग में साक्षात परमेश्वर का स्वरूप

वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में शामिल है और स्वार्थ चरम पर है, तब संत रामपाल जी महाराज का यह परमार्थ कार्य उन्हें साक्षात ईश्वर का स्वरूप सिद्ध करता है। प्रशासन और सरकारों की सीमाओं के पार जाकर उन्होंने जिस गति और संवेदनशीलता के साथ डीग जिले के किसानों की पीड़ा को हरने का कार्य किया है, वह यह प्रमाणित करता है कि सच्चे संत का हृदय नवनीत के समान होता है। उनके इस कार्य से न केवल किसानों को आर्थिक संबल मिला है, बल्कि उनमें जीवन के प्रति खो चुकी उम्मीद भी पुनः जागृत हुई है।

राजस्थान की धरती पर अवार गांव के लिए संत रामपाल जी महाराज का यह योगदान स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। 13000 बीघा जमीन का डूबना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होता है। मात्र तीन दिन के भीतर इस समस्या का समाधान निकालकर उन्होंने एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और नीयत साफ हो, तो बड़ी से बड़ी आपदा को भी हराया जा सकता है। अवार गांव की आने वाली पीढ़ियां उनके इस उपकार को कभी नहीं भूलेंगी।

संत रामपाल जी महाराज की इस अपार दया के कारण अब अवार गांव के खेतों में सड़ा हुआ पानी नहीं, बल्कि खुशहाली की नई फसल लहलहाएगी। किसानों का आत्मसम्मान जो बेबसी की लहरों में कहीं खो गया था, वह उन्हें वापस मिल गया है। यह केवल एक जल निकासी का प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि यह उस फरिश्ते के प्रति अटूट विश्वास की कहानी है जिसने अंधकार को मिटाकर जीवन में नया सवेरा ला दिया। उनकी इस महान पहल से पूरे राष्ट्र को यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

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