डीग (राजस्थान): कौंरेर गांव के किसानों के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

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राजस्थान के डीग जिले का कौंरेर गांव पिछले पांच वर्षों से एक अत्यंत गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा था। गांव और इसके आसपास के क्षेत्रों की हजारों बीघा उपजाऊ जमीन एक अंतहीन झील में तब्दील हो चुकी थी। इस स्थायी जलभराव के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थीं और अन्नदाता स्वयं अन्न के एक-एक दाने के लिए तरस रहा था। ग्रामीणों को अपने परिवार का भरण-पोषण करने और पशुओं के लिए चारा खरीदने के लिए पूरी तरह से बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा था।

लगातार पांच वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय विधायकों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद गांव वालों को कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई। यह दयनीय स्थिति किसानों को आत्महत्या की कगार और अत्यधिक निराशा की ओर धकेल रही थी।

​विनाशकारी जलभराव: कौंरेर गांव की 5 साल की पीड़ा

​राजस्थान के डीग जिले का कौंरेर गांव पिछले पांच वर्षों से एक अंतहीन झील में तब्दील हो चुका था। उपजाऊ जमीन होने के बावजूद यहाँ के किसान दाने-दाने को तरस रहे थे। स्थिति इतनी भयावह थी कि किसानों को परिवार पालने के लिए बाजार से अनाज और पशुओं के लिए चारा खरीदना पड़ रहा था। प्रशासन, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते-काटते लोगों की उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं। 5 साल का लंबा इंतजार किसानों को आत्महत्या की कगार पर धकेल रहा था।

​हताश ग्रामीणों ने लगाई संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी

​जब सरकारी तंत्र मौन हो गया, तब गांव की पंचायत ने एक आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई। गांव के सरपंच ने बताया कि भरतपुर ऑफिस में प्रार्थना देने के मात्र 4 दिनों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला कौंरेर की दहलीज पर खड़ा था। मशीनों और पाइपों का इतनी तेजी से पहुँचना ग्रामीणों के लिए किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं था।

​महाराज जी द्वारा भेजी गई विस्तृत राहत सामग्री:

 कौंरेर (डीग) में संत रामपाल जी की ऐतिहासिक बाढ़ राहत सेवा
  • ​8 इंची पाइप: 10,100 फुट (उच्च गुणवत्ता वाले मजबूत पाइप)
  • ​विद्युत मोटरें: 05 भारी मोटरें (किर्लोस्कर/क्रॉम्पटन कंपनी की 10 HP और 15 HP)
  • ​ट्रैक्टर पंखा: 02 शक्तिशाली सेट (भारी जल निकासी हेतु)
  • ​सहायक उपकरण: प्रत्येक मोटर के साथ स्टार्टर, 20-20 फुट तार और फ्लैक्सिबल पाइप।
  • ​अतिरिक्त किट: एयर वॉल, निपल, फुटबॉल, नट-बोल्ट और पाइप चिपकाने हेतु भारी मात्रा में सोल्यूशन।
  • ​ऊर्जा व्यवस्था: बिजली न होने की स्थिति में जनरेटर का किराया और डीजल का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा देय।

​”एक नट-बोल्ट भी बाहर से नहीं खरीदना पड़ा”

​संत रामपाल जी महाराज की करुणा का प्रमाण यह है कि उन्होंने आदेश दिया था कि पंचायत को एक रुपया भी बाहर खर्च न करना पड़े। सेवादारों ने छोटे से छोटा स्टील का नट-बोल्ट भी साथ पहुँचाया ताकि काम में कोई बाधा न आए।

यह भी पढ़ें: ​जब सिस्टम ने पल्ला झाड़ा, तब संत रामपाल जी महाराज बने दुल्हेड़ा का सहारा

​ग्रामीणों की भावुक प्रतिक्रियाएं (सीधे संवाद):

  • ​”हमने सुना था कि भगवान राम के समय काम जल्दी होते थे, लेकिन महाराज जी ने 4 दिन में ही चमत्कार कर दिया।” – गांव के बुजुर्ग
  • ​”अब हमारे बच्चे भूखे नहीं सोएंगे, महाराज जी ने हमें नया जीवन दिया है।” – एक स्थानीय किसान
  • ​”5 साल से जिस समस्या को प्रशासन ने नहीं सुना, महाराज जी ने बिना मांगे हमारी झोली भर दी।” – गांव की महिलाएं
  • ​”यह केवल सेवा नहीं, साक्षात कुबेर का भंडार है जो हमारे गांव में उतरा है।” – पंचायत सदस्य

​संत रामपाल जी महाराज के विशेष निवेदन पत्र की मुख्य शर्तें

राहत सामग्री सौंपते समय आश्रम की ओर से एक विशेष निवेदन पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें महाराज जी के सख्त निर्देश शामिल थे:

  • ​सदुपयोग की शर्त: यदि दी गई सामग्री के बावजूद समय पर पानी नहीं निकला और फसल की बिजाई समय पर नहीं हुई, तो भविष्य में संत रामपाल जी महाराज के आदेश अनुसार ट्रस्ट उस गांव की कोई मदद नहीं करेगा।
  • ​प्रमाणिकता हेतु ड्रोन सर्वे: गांव की जलभराव वाली स्थिति का ड्रोन वीडियो बना लिया गया है। पानी निकलने के बाद और फसल लहलहाने पर भी वीडियो बनाया जाएगा ताकि दानदाताओं को पता चले कि उनके पैसे का सदुपयोग हुआ है।
  • ​सामग्री की वापसी नहीं: यह सारी सामग्री गांव की स्थाई संपत्ति है, इसे कभी वापस नहीं लिया जाएगा।
  • ​सामूहिक प्रयास: महाराज जी ने निवेदन किया कि 36 बिरादरी के लोग मिलकर जल्द से जल्द पानी निकालें ताकि गांव का जीवन पुनः पटरी पर लौट सके।

परमार्थ का अनूठा उदाहरण और कथावाचकों को सीख

​जहाँ बड़े-बड़े कथावाचक लाखों रुपए लेकर केवल उपदेश देते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज दान का एक-एक पैसा जनसेवा में लगाते हैं। संत रामपाल महाराज जी स्वयं एक किसान परिवार से हैं, इसलिए वे किसानों का दर्द बखूबी समझते हैं। उनका ध्येय है- “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान-हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान।”

कौंरेर पंचायत ने ली संकल्प की शपथ

​पत्र सुनने के बाद सरपंच और ग्राम पंचायत के मौजिज लोगों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए और महाराज जी को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया। गांव ने संकल्प लिया कि वे अगले 3-4 दिनों के भीतर पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर देंगे ताकि गेहूं की बुवाई समय पर हो सके। ग्रामीणों ने महाराज जी के पास साक्षात ‘कुबेर का भंडार’ बताया जो कभी खाली नहीं होगा।

​गरीबों और किसानों के मसीहा: जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज

संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई यह सेवा केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास की वापसी है जो आम आदमी का मानवता से उठ चुका था। कौंरेर गांव आज महाराज जी के आशीर्वाद से एक नई सुबह देख रहा है। यह सिद्ध हो चुका है कि जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब पूर्ण परमात्मा ही जरिया बनकर आते हैं। महाराज जी के इन प्रयासों से न केवल किसानों के घर का चूल्हा जलेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र खुशहाली की ओर बढ़ेगा।

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