Indian Air Force Day 2020 (इंडियन एयरफोर्स डे): इंडियन एयरफोर्स डे है आज। 8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना का गठन हुआ था। इस दिन करेगा एयरफोर्स अपने खास जवानों और खास विमानों का करतब पेश। जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।

Indian Air Force Day (इंडियन एयरफोर्स डे) के मुख्य बिंदु

  • भारतीय वायुसेना दिवस आज। 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी भारतीय वायुसेना की स्थापना। आज 88वां स्थापना दिवस समारोह है।
  • समारोह में ख़ास विमान और जवान दिखाते हैं करतब। आज के समारोह में राफेल लड़ाकू विमान जगुआर के साथ विजय, सुखोई और तेजस समारोह में शामिल।
  • शक्तिशाली और विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना, भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध में दिया था योगदान। भारतीय वायुसेना को आर्मी से आजाद कराने का श्रेय है भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ, एयर मार्शल सर थॉमस डब्ल्यू एलमहर्स्ट को।
  • भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य “नभः स्पृशं दीप्तम” जो कि लिया है श्रीमद्भागवत गीता से।

भारतीय वायुसेना के इतिहास (History Of Indian Air Force Hindi)

भारतीय वायुसेना का गठन 8 अक्टूबर 1932 को हुआ था। भारतीय वायुसेना की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इंडियन एयरफोर्स के वायुयान ने अपनी पहली उड़ान 1 अप्रैल 1933 को भरी थी। भारतीय वायुसेना की स्थापना ब्रिटिश साम्राज्य की वायु सेना की एक इकाई के तौर पर हुई थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इसके नाम में रॉयल शब्द जोड़ा गया था और तब भारतीय वायु सेना ने यानी रॉयल इंडियन एयरफोर्स (RIAF) ने एक अहम भूमिका युद्ध मे निभाई थी। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात सन 1950 मे रॉयल शब्द निकाल दिया गया था।

भारतीय वायुसेना दिवस पर होता है समारोह

भारतीय वायुसेना अपने स्थापना दिवस पर प्रतिवर्ष गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर समारोह आयोजित करती है जिसमें अपने मुख्य विमानों और जवानों का करतब पेश करती है। इस वर्ष राफेल, तेजस और सुखोई विमान समारोह में शामिल हैं। इस मौके पर शानदार परेड और एयर शो का आयोजन किया जाता है। इस बार राफेल आकर्षण का केंद्र है जो 4.5 जेनेरेशन का विमान है जिसमे राडार से बच निकलने की महारत हासिल है। यह विमान दो इंजनों वाला बहुद्देश्यीय विमान है। यह 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम है।

चार युद्धों में कर चुकी है भारतीय वायुसेना कार्यवाही

आजादी के बाद से चार युद्धों में भारतीय वायुसेना कार्यवाही कर चुकी है जिनमें तीन युद्ध पाकिस्तान के खिलाफ और एक चीन के खिलाफ लड़े गए।

भारतीय वायुसेना के प्रमुख ऑपरेशन:

  • द एनेक्सेशन ऑफ गोआ
  • ऑपरेशन मेघदूत
  • ऑपरेशन कैक्टस
  • ऑपरेशन पूमलाई
  • सर्जिकल स्ट्राइक
  • बालाकोट एयर स्ट्राइक
  • इनके अतिरिक्त भारतीय वायुसेना संयुक्त राष्ट्र शान्ति के स्थापना कार्यों में सहयोग दे चुकी है।

Indian Air Force Day 2020: भारतीय वायुसेना की ताकत

  • भारतीय वायुसेना में सुखोई-30 MKI
  • मिराज 2000
  • मिग-29
  • मिग-27
  • मिग-21 और जगुआर फाइटर जेट हैं।
  • इसके अलावा हेलीकॉप्टर श्रेणी में वायुसेना के पास MI- 25/35, MI-26, MI-17, चेतक और चीता हेलीकॉप्टर हैं।
  • ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में सी-130 जे, सी-17 ग्लोबमास्टर, IL-76, AA-32 और बोइंग 737 जैसे प्लेन शामिल हैं।

वायुसेना का आदर्श वाक्य- गीता अध्याय 11 के श्लोक 24 से

वायुसेना का आदर्श वाक्य “नभः स्पृशं दीप्तम” गीता के अध्याय 11 के श्लोक 24 से लिया गया है। इस श्लोक का अर्थ है कि अर्जुन गीता ज्ञानदाता के काल रूप को देखकर भयभीत होकर कहता है कि “क्योंकि हे विष्णो आकाश को स्पर्श करने वाले देदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाये हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अंतःकरण वाला मैं धीरज और शांति नहीं पाता हूँ।” यह गीता ज्ञानदाता के काल रूप से भयभीत होकर अर्जुन ने कहा था। यह काल रूप विष्णु का नहीं बल्कि ज्योति निरंजन ब्रह्म का था। नकली धर्मगुरुओं ने कभी सत्य नहीं बताया इनके लिए ही कबीर साहेब ने कहा है-

वेद पढ़ें पर भेद ना जानें, बांचे पुराण अठारा |
पत्थर की पूजा करें, भूले सिरजनहारा ||

मानव अंधी दौड़ में भूला अपना लक्ष्य

आज वैज्ञानिक तरक्की के बाद, ढेरों लड़ाकू विमान बनाने के बाद, परमाणु बमों में सफलता हासिल करने के बाद हम कोरोना से हारे हैं। हम नहीं पूरा विश्व इसके आगे घुटने टेक चुका है। आज कोरोना की दवा आ भी जाये तब भी यह बात नहीं भुलाई जा सकती कि एक बड़ा जन मानस, रोजगार, धन और शिक्षा कोरोना महामारी ने निगल लिया है। शांति और भाईचारा असली मानवता का संदेश है। मानव ज्यों ही सभ्य कहलाया उसने सबसे पहले सीमाएं बनाकर धरती को बांट दिया उसके बाद उसमें कमज़ोर पर विजय पाने और शक्तिशाली कहलाने की प्रवृत्ति प्रबल हुई। और उसने हथियार जोड़ने शुरू कर दिए।

ये हथियार कभी बचाव के उपलक्ष्य में एकत्रित किए गए तो कभी आक्रमण के लिए। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे तरक्की हासिल हुई मानव ने अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा बम, परमाणु शक्तियाँ बनाने, लड़ाकू विमान बनाने सेना इकट्ठी करने में लगाया। मानव विज्ञान की अंधी दौड़ में ऐसे दौड़ा कि उसने अध्यात्म रूपी तत्व जिसके लिए उसका जन्म हुआ था, उसे पीछे छोड़ दिया। मानव अपने मूल उद्देश्य मोक्ष को भूलता गया और अंततः उसका पतन शुरू हो गया। ये पतन आज जारी है बलात्कार, डकैती, युद्ध, महामारियों के रूप में जो तब तक जारी रहेगा जब तक मानव परमात्मा की ओर उन्मुख नहीं होता।

सृष्टि के रचनहार से बड़ी नहीं कोई ताकत

सारी सृष्टि को रचने वाले कबीर परमात्मा से बड़ा कोई तत्व, कोई विमान, कोई देव नहीं है। वही सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान, सर्वसक्षम, दयालु परमात्मा है जिसके बराबर कोई अन्य नहीं।

गरीब, पानी से पैदा नहीं , श्वासा नहीं शरीर |
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर ||

सभी देव एवं तीन गुणयुक्त देव मात्र अपने कार्य पूर्ण करने के लिए नियुक्त किए गए हैं जो केवल कर्मफल देने के लिए बाध्य हैं। इनकी भक्ति भाग्य से अधिक लाभ नहीं दे सकती। उस सर्वशक्तिमान परमात्मा के अंश हैं हम जो अपनी गलती का फल इस लोक में पा रहे हैं। हम स्वयं अपनी इच्छा से इस काल लोक में आये हैं। 84 लाख योनियों में हम सभी भटक रहे हैं।

कबीर हरि के नाम बिन, राजा रषभ होय |
मिट्टी लदे कुम्हार के, घास न नीरै कोए ||


फिर पीछे तू पशुआ कीजै, दीजै बैल बनाए |
चार पहर जंगल में डोले, तो नहीं उदर भराय ||

5 तत्व के शरीर मे मुक्ति सम्भव है। मनुष्य शरीर को देवता भी तरसते हैं। मनुष्य भूल गया है कि उसे भक्ति करके मोक्ष प्राप्त कर अपने निजधाम सतलोक में जाना है। वह सांसारिक दौड़, युद्ध, माया जोड़ने में लगा रहता है। अंत में मृत्यु को प्राप्त होकर 84 लाख योनियों में कीड़ी-कुंजर के जन्म प्राप्त करके दुःख उठाता है। सही आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करें किसी तत्वदर्शी सन्त से। गीता में भी अध्याय 4 श्लोक 34 में तत्वदर्शी सन्त ढूंढने के लिए कहा है। वही तत्वज्ञान देगा और गीता अध्याय 17 के श्लोक 23 के अनुसार सही मन्त्र जाप बताएगा जिनसे मानव की मुक्ति सम्भव है। पूरे विश्व मे इस समय केवल सन्त रामपाल जी महाराज ही पूर्ण तत्वदर्शी सन्त हैं उनसे नामदीक्षा लेकर जीवन को सफल बनायें। अधिक जानकारी के लिए सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल विज़िट करें