​जब सिस्टम ने पल्ला झाड़ा, तब संत रामपाल जी महाराज बने दुल्हेड़ा का सहारा

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​एक किसान के लिए उसकी फसल ही उसके जीवन की पूंजी होती है। लेकिन हरियाणा के झज्जर जिले (तहसील बहादुरगढ़) के दुल्हेड़ा गाँव के किसानों की यह पूंजी पिछले 3 महीनों से बाढ़ के गंदे पानी में सड़ रही थी। बेमौसम की लगातार बारिश ने गाँव के 200 एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र और आवासीय हिस्से को जलमग्न कर दिया था। खरीफ (धान) की फसल 100% बर्बाद हो चुकी थी।

​गाँव के मास्टर जी ने दर्द बयां करते हुए बताया, “एक किसान फसल बोता है इस उम्मीद से कि पैदावार बेचकर बेटी की शादी करेगा या मकान बनाएगा। लेकिन बारिश ने सब तबाह कर दिया।” गाँव के ही एक किसान महेंद्र ने 200 एकड़ ज़मीन ठेके पर लेकर धान बोया था, जिसमें से 125 एकड़ फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। उनका लाखों रुपये का नुकसान हो गया। पानी इतना ज़्यादा था कि अगली रबी (गेहूं) की फसल बोने की उम्मीद भी खत्म होती जा रही थी।

​प्रशासन की बेरुखी और एक आखिरी उम्मीद

​इस प्राकृतिक आपदा में गाँव वालों ने प्रशासन से गुहार लगाई। लेकिन उन्हें जो जवाब मिला, उसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। एक ग्रामीण ने बताया कि सरकार और प्रशासन ने साफ हाथ खड़े कर दिए थे और कहा, “यह प्राकृतिक आपदा है, अपनी रक्षा स्वयं करो।” सरकार ने जो थोड़े-बहुत पाइप दिए थे, वे इस विशाल जलभराव को निकालने के लिए नाकाफी थे।

​जब सिस्टम ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया, तब दुल्हेड़ा की पंचायत ने सच्चे भगवान के रूप में संत रामपाल जी महाराज का दरवाज़ा खटखटाया। उन्होंने बरवाला स्थित मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के ऑफिस में जाकर अपनी अर्जी लगाई।

​रात के अंधेरे में पहुंची उम्मीद की रोशनी

​संत रामपाल जी महाराज की दयालुता का कोई समय नहीं होता। अर्जी देने के अगले ही दिन, रात के 9 बज चुके थे, चारों ओर अंधेरा था, लेकिन दुल्हेड़ा गाँव की सड़कों पर एक विशाल काफिला दाखिल हुआ। यह काफिला ट्रकों और लोडिंग गाड़ियों का था, जो गाँव वालों के लिए जीवनदान लेकर आया था।

"मेरी 125 एकड़ फसल डूब गई थी": दुल्हेड़ा (झज्जर) के किसानों का दर्द संत रामपाल जी ने किया दूर

​संत रामपाल जी महाराज ने गाँव को जलभराव से मुक्त करने के लिए भेजा:

  • 5000 फुट लंबी पाइप: 8 इंच चौड़ी शानदार क्वालिटी की पाइप।
  • तीन विशाल मोटरें: 15-15 हॉर्स पावर की हैवी-ड्यूटी मोटरें।
  • पूरा फिटिंग का सामान: स्टार्टर, केबल, बैंड, और यहाँ तक कि छोटे से छोटा नट-बोल्ट भी साथ भेजा गया ताकि पंचायत को एक रुपया भी खर्च न करना पड़े।

​सरपंच मोनू ने गदगद होकर कहा, “हम कल ही अर्जी लगाकर आए थे और आज रात को ही सारा सामान आ गया। संत रामपाल जी महाराज ने जो व्यवस्था की है, वह दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिल सकती। आज हमारी अगली फसल बच गई है।”

यह भी पढ़ें: धरौदी का उद्धार: 10 साल की तबाही से सुनहरी हरियाली तक का सफर

​”इतनी फिक्र तो सगा बाप भी नहीं करता”

​जब यह करोड़ों रुपये का सामान बिना किसी स्वार्थ के गाँव को सौंपा गया, तो ग्रामीणों की आँखें भर आईं। एक ग्रामीण ने दिल को छू लेने वाली बात कही: “यह तो सगा बाप भी नहीं करता, जो संत रामपाल जी महाराज हमारे लिए कर रहे हैं।”

​125 एकड़ फसल का नुकसान झेलने वाले किसान महेंद्र ने कहा, “पूरे हरियाणा में किसी ने भी किसानों की इतनी बढ़िया मदद नहीं की है। गुरुजी ने हमें बहुत बड़ी राहत दी है, अब हम गेहूं बो सकेंगे और हमारे बच्चों का गुज़ारा हो जाएगा।”

​एक ‘परमानेंट’ समाधान और पगड़ी भेंट कर सम्मान

​सेवादारों ने स्पष्ट किया कि यह लाखों का सामान अब हमेशा के लिए दुल्हेड़ा गाँव की धरोहर (परमानेंट) है। इसके बदले में आश्रम की ओर से केवल एक ही शर्त रखी गई, ‘जल्द से जल्द पानी निकालकर खेतों में अगली फसल की बिजाई की जाए, ताकि देश का अन्नदाता कर्ज में न डूबे।’

​इस असीम उपकार के लिए, ग्राम पंचायत दुल्हेड़ा ने संत रामपाल जी महाराज के सम्मान में सेवादारों को पगड़ी और मोमेंटो भेंट किया। हरियाणा की संस्कृति में पगड़ी भेंट करने का अर्थ है अपना शीश और पूरा मान-सम्मान किसी के चरणों में रख देना।

​इंसानियत की मिसाल

​दुल्हेड़ा गाँव की यह कहानी सिर्फ 5000 फुट पाइप की कहानी नहीं है। यह उस अपनेपन और फिक्र की कहानी है जो खून के रिश्तों से भी गहरी साबित हुई। जब सरकार ने मुँह मोड़ लिया था, तब संत रामपाल जी महाराज ने दुल्हेड़ा को गले लगाया। आज मोटरें चल रही हैं, पानी निकल रहा है, और किसान के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। सच ही कहा गया है, जो मुसीबत में काम आए, वही असली भगवान है।

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