धरौदी का उद्धार: 10 साल की तबाही से सुनहरी हरियाली तक का सफर

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 जींद जिले की नरवाना तहसील का धरौदी गांव आज एक ऐसी विजय गाथा लिख रहा है जो इतिहास में दर्ज होगी। यह कहानी उस 10 साल पुराने सन्नाटे के खात्मे की है, जिसने हजारों किसानों की मुस्कुराहट निगल ली थी। आज धरौदी के खेत पानी में नहीं, बल्कि गेहूं की लहलहाती फसल में डूबे हैं।

10 साल का नर्क और सिस्टम की बेरुखी

धरौदी गांव की करीब 1500 से 1600 एकड़ जमीन पिछले एक दशक से 3-3 फुट पानी में डूबी हुई थी।

बर्बादी का मंजर: किसान सुखचैन बताते हैं कि हालात 1985 से ही खराब थे, लेकिन पिछले 10 साल नर्क जैसे बीते।

प्रशासन की बेरुखी: ग्रामीणों ने 10 बार प्रशासन के चक्कर काटे, मुख्यमंत्री से मिले, लेकिन मदद के नाम पर एक कील तक नहीं मिली।

कर्ज का बोझ: जमीन होते हुए भी किसान बाजार से अनाज खरीदने को मजबूर थे और कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे थे।

संत रामपाल जी महाराज का ऐतिहासिक आदेश

जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब गांव की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। महाराज जी ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने आदेश दिया कि आश्रमों में चल रहे सभी निर्माण कार्य तुरंत रोक दिए जाएं और वह सारा पैसा बाढ़ पीड़ित किसानों की सेवा में लगा दिया जाए।

मात्र 4 दिनों के भीतर राहत का काफिला धरौदी पहुंचा जिसमें 

धरौदी का पुनर्जन्म: 10 साल की जल-समाधि को संत रामपाल जी महाराज ने खुशहाली में बदला
  •  11,000 फुट 8-इंची पाइप।
  •  15 HP की दो विशाल मोटरें और पूरा हार्डवेयर।

निशुल्क सेवा: ग्रामीणों के लिए यह पूरी सहायता बिल्कुल मुफ्त प्रदान की गई।

यह भी पढ़ें: हरियाणा के देवरड़ गांव में बाढ़ के बाद फिर आई हरियाली: पशु बचाए, खेत लहलहाए  

चमत्कार: जब 10 साल पुराना पानी ‘हार’ गया

शक्तिशाली मोटरों ने दिन-रात काम किया और पानी को खेतों से कोसों दूर निकाल फेंका।

  •  10 साल बाद पहली बिजाई: आज धरौदी के 98% खेतों में गेहूं की बिजाई पूरी हो चुकी है।
  •  भविष्य की सुरक्षा: गांव वालों ने इन पाइपों को जमीन के नीचे स्थायी रूप से दबा दिया है, ताकि भविष्य में कभी भी गांव को दोबारा इस जल-प्रलय का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों का भावुक आभार

सुखचैन ने भावुक होकर कहा, “मैं 10 साल से इतने तनाव में था कि मुस्कुराना भूल गया था। आज पहली बार खुलकर हंसने का मन कर रहा है।” एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “सरकारें बजट का बहाना बनाती रहीं, लेकिन महाराज जी ने पिता की तरह हमारी लाज बचा ली।”

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