हरियाणा के देवरड़ गांव में बाढ़ के बाद फिर आई हरियाली: पशु बचाए, खेत लहलहाए  

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हरियाणा राज्य के जींद जिले के गांव देवरड़, तहसील जुलाना के अंतर्गत हाल ही में कुदरत ने अपना कहर बरपाया था। यहां 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र 6 फीट गहरे स्थिर बाढ़ के पानी में डूब गया था। पशुओं का चारा पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे मवेशी भूख से तड़प-तड़पकर मरने लगे। किसान अपने प्यारे पशुओं को, जिन्हें उन्होंने बच्चों की तरह पाला था, मजबूरन बेचने को विवश हो गए थे। कई मकान भी पानी की मार से क्षतिग्रस्त हो गए। किसानों की मेहनत की कमाई एक पल में बर्बाद हो गई और पूरा गांव हताशा की चपेट में आ गया।  

मुश्किल की घड़ी में प्रशासनिक गुहार भी विफल

ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के दरवाजे खटखटाए, कई बार गुहार लगाई, लेकिन सिवाय खोखले आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। प्रशासन ने पानी निकालने का कोई ठोस समाधान नहीं दिया और बिजली कनेक्शन में भी देरी की। किसान और पशुपालक पूरी तरह टूट चुके थे। वे मान चुके थे कि हरियाणा की इस जमीन पर फिर से कभी हरियाली नहीं लौटेगी और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया था।

एक प्रार्थना और स्थाई समाधान 

निराश ग्रामीणों ने बारवाला आश्रम में प्रार्थना की। संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल संकल्प लिया और आश्रमों में चल रहे समस्त निर्माण कार्य रोककर सारा धन देवरड़ के किसानों और पशुओं को बचाने में लगा दिया। उन्होंने आदेश दिया कि देवरड़ के डूबते किसानों को बचाओ। मात्र 5 दिनों के अंदर राहत सामग्री से लदा विशाल काफिला गांव पहुंच गया।  

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत सामग्री में शामिल था:  

देवरड़ की जल-समाधि का अंत: संत रामपाल जी महाराज ने बचाई किसानों की लाज
  • 10,000 फीट हाई प्रेशर 8 इंची पाइपलाइन, 
  • 20 हॉर्स पावर की शक्तिशाली मोटर, 
  • स्टार्टर, 
  • विद्युत केबल, 
  • नट-बोल्ट, 
  • पीवीसी ग्लू और फेविकॉल सहित हर छोटी-बड़ी जरूरी चीज।  

यह भी पढ़ें: 80% डूबे जींद जिले के देवरड़ गांव को मिली संजीवनी: संत रामपाल जी महाराज ने पहुंचाई 10,000 फुट पाइप और भारी मोटर

संत के परोपकारी कार्य से खेतों में आई हरियाली 

संत रामपाल जी महाराज जी का स्पष्ट संकल्प था कि पशुओं को भूख से मरने नहीं देंगे और खेतों को फिर से हरा-भरा बनाकर ही रहेंगे, ताकि किसान दोबारा फसल बो सकें। संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सहायता का परिणाम आज धरातल पर स्पष्ट दिखाई देता है। 6 फीट गहरे पानी का वह समुद्र पूरी तरह गायब हो गया है। लगभग 250-300 एकड़ प्रभावित भूमि में से पानी निकाल लिया गया है। खेतों में चारे की फसल उग आई है और गेहूं की बिजाई लगभग 100 प्रतिशत हो चुकी है। चारों तरफ हरियाली लौट आई है, किसान अब खेतों में सिंचाई कर रहे हैं और पशु भी फिर से स्वस्थ हो रहे हैं।  

देवरड़ के किसानों ने राहत सामग्री (पाइपलाइन) को जमीन में दबाकर भविष्य सुरक्षित कर लिया है। अब आने वाली पीढ़ियों को कभी बाढ़ का डर नहीं सताएगा।

संत के उपकार की कहानी: ग्रामीणों की मुख जुबानी 

देवरड़ गांव के लोग और सभी किसान संत रामपाल जी महाराज जी को अपना रक्षक, मसीहा और भगवान से भी ऊपर मान रहे हैं। पढ़िए उनकी प्रतिक्रियाएँ जो इस प्रकार हैं:  

“हमने हर तरफ से हार मान ली थी। लगता था कि इस देवरड़ गांव की जमीन पर कभी हरियाली नहीं दिखेगी। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने आश्रम का काम रोककर हमें बचा लिया। आज हमारे खेतों में चारा उग आया है और गेहूं लहलहा रहा है। यह उनकी ही कृपा है।” – देवरड़ के किसान  

“पशु भूखे मर रहे थे, सरकार ने कुछ नहीं किया। गुरुजी संत रामपाल जी महाराज जी ने हमारी इतनी मदद की है कि हम मरते-मरते बच गए। वे हमारे लिए भगवान स्वरूप हैं, किसी मुख्यमंत्री से भी बेहतर हैं।” – स्थानीय ग्रामीण  

“महात्मा जी ने बहुत मेहनत की है। जो मदद संत रामपाल जी महाराज ने दी है, वह बहुत बड़ा काम है। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।” – किसान प्रतिनिधि  

एक संत ने सुनी किसानों की दुःख भरी पीड़ा 

भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां लाखों किसान और पशुपालक प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। बाढ़ जैसी आपदा आने पर उनका आर्थिक नुकसान सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। देवरड़ के किसानों को भारी नुकसान हुआ और उनकी पीड़ा को अनदेखा कर दिया गया।

केवल संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे संत निकले जिन्होंने तुरंत ध्यान दिया, आश्रम का काम रोककर करोड़ों रुपये की राहत दी और ठोस कार्रवाई की। उनके इन कार्यों ने दान, सेवा और भक्ति की परिभाषा को बदल दिया है।  

बाढ़ का कहर और संत रामपाल जी महाराज की राहत

बाढ़ के पानी ने देवरड़ के सपनों को डुबो दिया था, लेकिन संत रामपाल जी महाराज तारणहार बनकर आए। जहां सरकार ने आंखें मूंद ली थीं, वहां उन्होंने समस्या का स्थायी समाधान प्रदान किया। आज देवरड़ बाढ़ मुक्त, हरा-भरा और खुशहाल खड़ा है, जो संत जी की दया, शक्ति और अन्नपूर्णा मुहिम का जीता-जागता प्रमाण है। 

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