संत रामपाल जी महाराज ने किसान और मज़दूर बचाओ अभियान के फेज़ 2 में कोहला गांव को दी राहत

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हरियाणा राज्य के सोनीपत जिले के अंतर्गत आने वाले गोहाना तहसील का गांव कोहला पिछले 10 से 12 वर्षों से गंभीर भौगोलिक जलभराव की समस्या का सामना कर रहा था। पड़ोसी गांव बड़ौदा की जमीन का स्तर कोहला गांव की तुलना में काफी ऊंचा है। इस ऊंचे भौगोलिक स्तर के कारण प्रत्येक मानसूनी वर्षा का पानी ढलान से नीचे उतरकर सीधे कोहला और बनवासा गांव की सीमाओं पर आकर जमा हो जाता था। कोहला गांव के इस प्रभावित क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 60 से 70 एकड़ का हिस्सा है, जहां पानी इस प्रकार फंस जाता था कि उसकी प्राकृतिक निकासी का कोई अन्य मार्ग उपलब्ध नहीं था। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण कोहला और बनवासा गांव के निवासियों के बीच आपसी मनमुटाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न होने लगी थी।

फसलों को होने वाली क्षति और प्रशासनिक उपेक्षा

कोहला गांव के किसानों के समक्ष खरीफ और रबी दोनों फसलों के नष्ट होने का संकट बना हुआ था। कम वर्षा की स्थिति में किसान खेतों में किसी प्रकार फसल बोने का प्रयास करते थे, परंतु अत्यधिक वर्षा होने पर संपूर्ण फसल पानी में गलकर नष्ट हो जाती थी। जलभराव के कारण खेतों में जमा पानी यदि 10 दिनों के भीतर नहीं निकाला जाए, तो पौधों की जड़ें गल जाती हैं और दोबारा पौध लगाने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। किसानों द्वारा विगत 4 वर्षों से लगातार सरकारी दफ्तरों और प्रशासन के समक्ष लिखित व मौखिक शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा हर बार केवल आगामी सत्र में समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया, परंतु धरातल पर एक भी पाइप नहीं बिछाया गया।

धनाना धाम में पंचायत की अर्जी और त्वरित सर्वे

प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई न होने के पश्चात गांव कोहला की पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया। गांव के वर्तमान सरपंच सुनील कुमार के नेतृत्व में 15 से 20 ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल हरियाणा के धनाना धाम आश्रम पहुंचा। पंचायत ने वहां जाकर अपनी समस्या के निवारण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। ग्रामीणों द्वारा प्रारंभिक तौर पर 4200 फीट पाइप और एक पानी खींचने वाली मोटर प्रदान करने की मांग रखी गई थी। प्रतिनिधिमंडल जब तक धनाना धाम से वापस अपने गांव कोहला भी नहीं पहुंच पाया था, उससे पूर्व ही शाम को कोहला गांव में तकनीकी सर्वे टीम पहुंच गई। इस सर्वे टीम ने खेतों की ढलान, जलभराव के केंद्र और पानी की अंतिम निकासी के मार्ग का गहन प्राविधिक निरीक्षण किया। सर्वे में यह निष्कर्ष निकला कि जलभराव स्थल से ड्रेन (नाले) तक की कुल दूरी 1 किलोमीटर है, जिसके लिए कुल 3300 फीट लंबी पाइपलाइन बिछाने की आवश्यकता थी।

24 घंटे के भीतर राहत सामग्री का वितरण

धनाना धाम में अर्जी लगाने के ठीक 24 घंटे के भीतर, सुबह 9:00 बजे पाइपों से लदे दो भारी मालवाहक ट्रक गांव कोहला की सीमा पर पहुंच गए। संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के अंतर्गत गांव की चौपाल पर समस्त आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई। वितरित की गई सामग्रियों का विवरण इस प्रकार है:

  • पाइप की कुल लंबाई: 3300 फीट लंबी पाइपलाइन (8 इंच व्यास के पाइप)
  • संबद्ध सामग्री: पाइपों को आपस में जोड़ने के लिए फेविकोल (सॉल्वेंट) और आवश्यक सहायक जोड़ (फिटिंग्स) जो ग्रामीणों द्वारा नहीं मांगे गए थे, उन्हें भी स्वतः संज्ञान लेकर भेजा गया।
  • शर्त और आगामी प्रक्रिया: संत रामपाल जी महाराज ने निर्देश दिया है कि ग्रामीण सर्वप्रथम इस 3300 फीट लंबी पाइपलाइन को भूमिगत (जमीन के नीचे) दबाने का कार्य पूर्ण करेंगे। इसके उपरांत तकनीकी सर्वे टीम दोबारा आकर भौतिक सत्यापन करेगी कि पाइपलाइन सही ढंग से स्थापित हो चुकी है या नहीं। सत्यापन सफल होने के पश्चात एक शक्तिशाली मोटर भी प्रदान कर दी जाएगी।

कोहला जलभराव निवारण परियोजना सारांश

विवरण घटकपरियोजना संबंधी तथ्य एवं आंकड़े
प्रभावित क्षेत्र एवं जिलागांव कोहला, तहसील गोहाना, जिला सोनीपत (हरियाणा)
समस्या की अवधिपिछले 10 से 12 वर्षों से निरंतर
प्रभावित कृषि भूमिलगभग 60 से 70 एकड़ का क्षेत्र
प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखसुनील कुमार (गांव सरपंच) एवं सुरेंद्र सिंह (स्थाई निवासी)
प्रारंभिक मांग बनाम स्वीकृत सामग्रीमांग: 4200 फीट पाइप | स्वीकृत: 3300 फीट पाइप (8 इंच)
कार्यवाही का समयअर्जी देने के 24 घंटे के भीतर सामग्री की आपूर्ति
निकासी का अंतिम बिंदु1 किलोमीटर दूर स्थित ड्रेन (नाला)

भूमिगत पाइपलाइन स्थापना की समय-सीमा और भावी प्रभाव

गांव कोहला के सरपंच सुनील कुमार और स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, जोगिंदर तथा दयाराम ने संयुक्त रूप से समस्त राहत सामग्री प्राप्त की। पंचायत और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से संकल्प लिया है कि वे आगामी एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर इस 1 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को खेतों के सबसे निचले स्तर से लेकर ड्रेन तक भूमिगत करने का कार्य पूर्ण कर लेंगे। 

कार्य पूर्ण होने की सूचना तत्काल आश्रम को दी जाएगी ताकि द्वितीय चरण के तहत मोटर की स्थापना कराई जा सके। इस 8 इंच चौड़ी पाइपलाइन और मोटर के क्रियाशील होने के पश्चात, अत्यधिक वर्षा की स्थिति में भी संपूर्ण 60-70 एकड़ क्षेत्र का पानी अधिकतम 10 दिनों के भीतर ड्रेन में फेंक दिया जाएगा, जिससे पौधों के गलने की समस्या पूर्णतः समाप्त हो जाएगी और किसानों की फसलें डूबने से बच जाएंगी।

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