‘दीनानाथ’ बनकर आए संत रामपाल जी महाराज: मथुरा के फोडर गांव में लौटा खुशहाली का सवेरा

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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील में स्थित गांव फोडर और इसके आस-पास के करीब 10 गांवों की कहानी आज हर किसी की आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद भर देने वाली है। कल्पना कीजिए उस किसान की, जिसकी हजारों बीघा जमीन पिछले 3 साल से बरसाती पानी में डूबी हो। जहां कभी फसलों की खुशबू महकती थी, वहां आज सड़ा हुआ पानी और सन्नाटा पसरा था। यह सन्नाटा इतना गहरा था कि गांव के किसान लाचारी में आत्महत्या करने तक का विचार करने लगे थे। नेता आते थे, झूठे आश्वासन देते थे और चले जाते थे, लेकिन धरातल पर पानी जस का तस खड़ा था। ऐसे अंधेरे वक्त में, जब सरकारी तंत्र के वादे खोखले साबित हुए, तब इन ग्रामीणों के लिए संत रामपाल जी महाराज एक ‘मसीहा’ और ‘दीनानाथ’ बनकर सामने आए।

तबाही का मंजर: जब बंजर हुई हजारों बीघा जमीन

गांव फोडर और नगला अजीत जैसे क्षेत्रों की समस्या केवल जलभराव नहीं थी, बल्कि यह हजारों परिवारों के अस्तित्व का सवाल था। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 3 सालों से बरसाती पानी निकासी का रास्ता बंद होने के कारण लगभग 1000 बीघा जमीन बंजर पड़ी थी। किसानों के पास न नौकरी थी और न ही फसल उगाने का साधन। घर के बच्चों को पालने की चिंता ने किसानों को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। लोग खेती छोड़कर भागने या महात्मा बन जाने की बात करने लगे थे।

अर्जी लगाते ही संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 5 दिन भेजी राहत

जब चारों तरफ से रास्ते बंद दिखे, तो गांव की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में एक अर्जी लगाई। मदद की रफ्तार किसी चमत्कार से कम नहीं थी—अर्जी देने के मात्र 5 दिनों के भीतर ग्रामीणों को संदेश मिल गया कि उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली गई है। संत जी ने बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के, निस्वार्थ भाव से करोड़ों रुपये की राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया।

राहत सामग्री का विवरण (अन्नपूर्णा मुहिम)

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत गांव फोडर और नगला अजीत के लिए भेजी गई सामग्री की सूची नीचे दी गई है:

क्रम संख्यासामग्री का नामविवरण / मात्रा
1कुल पाइप (8 इंची)7600 फुट
2नगला अजीत हेतु पाइप4800 फुट
3फोडर गांव हेतु पाइप2800 फुट
4पानी की मोटर (विशाल)3 मोटर्स (20 HP की प्रत्येक)
5सहायक सामग्रीस्टार्टर, केबल, सुंडिया, निप्पल, फुटबॉल
6अन्य छोटे उपकरणफेविकोल (SR 998), नट-बोल्ट, एयर वॉल, क्लैंप
7कॉपर तारकुल 350 फीट (150′ + 200′)

विशेष नोट: संत जी के आदेशानुसार, पंचायत को एक कील भी बाहर से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। पूरा सामान ब्रांडेड (किर्लोस्कर व क्रॉम्पटन) और स्थाई तौर पर दिया गया है। 

सेवादारों का जज्बा और संत जी की सेवा का संकल्प

जब सेवादारों का लंबा काफिला गांव पहुँचा, तो नजारा किसी त्योहार जैसा था। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने स्पष्ट किया कि महाराज जी स्वयं एक किसान परिवार से हैं, इसलिए वे किसानों की पीड़ा को भली-भांति समझते हैं। महाराज जी का आदेश सख्त है: “दिखावा नहीं, धरातल पर काम होना चाहिए।”

सेवादारों ने ग्रामीणों को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें यह संकल्प लिया गया कि यदि इस सामग्री से पानी नहीं निकला, तो ट्रस्ट आगे मदद नहीं करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण एकजुट होकर जल्द से जल्द पानी निकालें ताकि रबी की फसल की बिजाई समय पर हो सके। महाराज जी ने ड्रोन से गाँव की स्थिति की रिकॉर्डिंग करवाई है और फसल लहलहाने के बाद फिर से वीडियो बनाने का निर्देश दिया है, ताकि दुनिया देख सके कि दान के पैसे का सही उपयोग कैसे होता है।

बाद की स्थिति में दिखी उम्मीदों की नई फसल

आज गांव फोडर के किसानों के चेहरे पर जो मुस्कान है, वह संत रामपाल जी महाराज की दया का प्रमाण है। किसान जिला अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधियों ने महाराज जी को ‘भगवान की पदवी’ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जो मुसीबत में काम आए और जो हमारे लिए अन्न पैदा करने का जरिया बने, वही असली भगवान है। सम्मान स्वरूप, पूरी पंचायत ने महाराज जी को ‘किसानों की आन-बान-शान’ यानी पगड़ भेंट की।

संत रामपाल जी महाराज की यह पहल साबित करती है कि मानवता की सेवा के लिए सत्ता या चुनाव की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक संवेदनशील हृदय की आवश्यकता होती है। जहां बड़े-बड़े कथावाचक करोड़ों रुपये दान में लेकर डकार जाते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज उस दान को ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के जरिए समाज के उत्थान, शिक्षा, चिकित्सा और किसान कल्याण में लगा रहे हैं।

आज फोडर गांव के खेतों में सिर्फ पाइप नहीं बिछे हैं, बल्कि हजारों किसानों का टूटा हुआ भरोसा फिर से स्थापित हुआ है। महाराज जी के इस परोपकारी कार्य ने हजारों जिंदगियों को आत्महत्या के मुहाने से वापस खींच लिया है। वास्तव में, “जीना तो उसी का है, जो दूसरों के काम आए।

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