जाखौदा में 30 साल पुराने जलभराव की समस्या के बीच संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत पहुंचाई राहत सामग्री

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हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ तहसील क्षेत्र का जाखौदा गांव इन दिनों एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है, जिसने यहां के किसानों की खेती और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों को प्रभावित किया है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1995 में आई बाढ़ के बाद गांव और आसपास की कृषि भूमि के बड़े हिस्से में जलभराव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि कई वर्षों से खेतों में पानी जमा रहने के कारण खेती प्रभावित होती रही और उन्हें अपनी जरूरत का अनाज तक बाजार से खरीदना पड़ा।

इसी समस्या को लेकर ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की ओर से कई स्तरों पर प्रयास किए जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले सरकारी स्तर पर मोटर और बिजली कनेक्शन जैसी व्यवस्थाएं की गईं, लेकिन समय के साथ वे व्यवस्थाएं स्थायी रूप से काम नहीं कर सकीं। ऐसे में जलनिकासी की समस्या गांव के लिए लंबे समय से चिंता का विषय बनी रही। इसी बीच, ग्रामीणों की ओर से संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत सहायता के लिए प्रार्थना किए जाने की बात सामने आई। प्रार्थना के बाद सर्वे टीम ने गांव पहुंचकर जलभराव वाले क्षेत्रों का जायजा लिया और इसके बाद पाइपलाइन तथा अन्य सामग्री गांव पहुंचाई गई।

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तीन दशक से खेतों में जमा पानी ने किसानों की खेती पर डाला असर

जाखौदा के ग्रामीण बताते हैं कि जलभराव की समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि वर्ष 1995 की बाढ़ के बाद से लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, कई खेतों में लंबे समय तक पानी खड़ा रहने के कारण धान और गेहूं जैसी फसलों को नुकसान होता रहा।

एक ग्रामीण ने बातचीत के दौरान बताया कि गांव में पहले भी पानी निकालने के लिए मोटर लगाई गई थी। कुछ समय तक व्यवस्था चली, लेकिन बाद में मोटर और अन्य उपकरण हटा लिए गए। बिजली कनेक्शन और स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की कोशिश भी हुई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों के अनुसार, हालात इतने कठिन हो गए कि कुछ किसानों को अपने परिवार के लिए अनाज तक बाजार से खरीदना पड़ा। एक किसान ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि जलभराव के कारण उसकी अपनी जमीन से अपेक्षित उत्पादन नहीं हो पाया और उसे गेहूं बाहर से खरीदकर लाना पड़ा। यह समस्या केवल खेत तक सीमित नहीं रही। ग्रामीणों का कहना है कि पानी और गंदगी के कारण गांव का वातावरण भी प्रभावित होता रहा। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह रही कि जमीन मौजूद होने के बावजूद उसका पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा था।

30 साल पुराने जलभराव संकट का अंत: जाखौदा गांव में बिछी मुफ्त पाइपलाइन और मोटरें

बहादुरगढ़, झज्जर: हरियाणा के झज्जर जिले की बहादुरगढ़ तहसील स्थित जाखौदा गांव के किसान पिछले 30 वर्षों (1995 से) से जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। क्षेत्र में अत्यधिक मिट्टी खुदाई और जल निकासी के उचित प्रबंध न होने से बारिश का पानी खेतों में भर जाता था, जिससे हर साल करोड़ों रुपये की फसलें बर्बाद हो जाती थीं।

सर्वेक्षण और बुनियादी ढांचे की स्वीकृति

इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान’ के तहत तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से मदद की प्रार्थना की। 

संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर सर्वे टीम ने गांव का निरीक्षण कर कुल 19,200 फीट 8-इंच पाइपलाइन तथा 5 मोटरों (एक 20 एचपी व चार 10 एचपी) की स्वीकृति दी।

सामग्री हस्तांतरण एवं निशुल्क समाधान

ग्राम पंचायत द्वारा तीन पाइपलाइनों को भूमिगत करने के बाद सर्वे टीम ने पुनः निरीक्षण कर कार्य को मानकों के अनुरूप पाया। 

इसके पश्चात, संत रामपाल जी महाराज के आदेश से एक 20 एचपी व दो 10 एचपी मोटरें, एलएंडटी स्टार्टर, केबल, एयर वाल्व व सभी आवश्यक सामग्री गांव में निशुल्क उपलब्ध करवा दी गई। 

गांव के सरपंच व किसानों ने महाराज जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस 30 साल पुरानी समस्या का हल कहीं नहीं मिला, उसका स्थाई समाधान बिना किसी खर्च के हो गया।

ग्रामीणों ने रखी जलनिकासी की मांग, सर्वे टीम ने लिया मौके का जायजा

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष जलभराव की समस्या को रखा। इसके बाद सर्वे टीम ने जाखौदा पहुंचकर अलग-अलग स्थानों का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान गांव के लोगों से यह समझने की कोशिश की गई कि पानी किन क्षेत्रों में अधिक जमा रहता है, उसे किस दिशा में निकाला जा सकता है और कितने पाइप तथा मोटर की आवश्यकता होगी।

ग्रामीणों की ओर से बताया गया कि पानी को गांव से बाहर एक निर्धारित स्थान तक पहुंचाने के लिए लंबी पाइपलाइन की आवश्यकता थी। सर्वे के बाद लगभग 12,700 फीट पाइप की आवश्यकता बताए जाने का उल्लेख ट्रांसक्रिप्ट में है। बाद में गांव में करीब 13,000 फीट 8 इंच व्यास की पाइपलाइन सामग्री पहुंचने की बात कही गई।

इसके साथ ही पांच मोटरों की आवश्यकता भी बताई गई। हालांकि ट्रांसक्रिप्ट में मोटरों की क्षमता का स्पष्ट और एक समान विवरण नहीं मिलता, इसलिए इसे केवल पांच मोटरों की प्रस्तावित सहायता के रूप में ही देखा जाना उचित है।

सर्वे के अगले दिन गांव पहुंची पाइपलाइन और जोड़ने की सामग्री

जाखौदा के ग्रामीणों के लिए सबसे खास बात यह रही कि सर्वे के तुरंत बाद राहत सामग्री गांव पहुंचने की बात सामने आई। ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, पाइपलाइन के साथ पाइप जोड़ने के लिए आवश्यक सामग्री, एयर वॉल, एसआर तथा फेविकोल जैसी सामग्री भी भेजी गई।

ग्रामीणों का कहना था कि सामग्री गांव तक पहुंचाने का खर्च भी संत रामपाल जी महाराज द्वारा उठाया गया और उनसे इसके लिए कोई राशि नहीं ली गई। ग्रामीणों और प्रतिनिधियों को सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई।

गांव में ट्रकों के पहुंचने के बाद माहौल भी बदलता दिखाई दिया। जहां लंबे समय से जलभराव और खेती की समस्या को लेकर चिंता थी, वहीं ग्रामीण राहत सामग्री पहुंचने पर एकत्र हुए। कई स्थानों पर स्वागत किया गया और ट्रैक्टरों के साथ काफिला निकाला गया। ग्रामीणों की भावनाएं केवल सामग्री मिलने तक सीमित नहीं थीं। उनके लिए यह उम्मीद का क्षण था कि यदि पाइपलाइन निर्धारित स्थानों तक बिछा दी जाती है और पानी की निकासी शुरू होती है, तो आने वाले समय में खेतों को फिर से खेती के योग्य बनाया जा सकता है।

गांव की गलियों से गुजरा काफिला, ग्रामीणों ने किया स्वागत

राहत सामग्री पहुंचने के दौरान जाखौदा में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। पाइपों से लदे ट्रक, ट्रैक्टर और ग्रामीणों का काफिला गांव और बाजार से होकर कार्यक्रम स्थल की ओर गया। कई ग्रामीण हाथों में फूलों की मालाएं लेकर स्वागत के लिए खड़े दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र पर मालाएं अर्पित कीं और फूल बरसाए। ट्रैक्टरों के साथ ग्रामीण काफिले में शामिल हुए। ग्रामीणों के लिए यह आयोजन केवल स्वागत कार्यक्रम नहीं था। लंबे समय से चली आ रही समस्या के बीच राहत सामग्री का गांव तक पहुंचना उनके लिए उम्मीद का संकेत था।

एक स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा कि गांव में पानी निकालने का रास्ता नहीं था और नहर या नाले तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध नहीं थे। उनके अनुसार, प्रस्तावित पाइपलाइन से पानी को गांव से लगभग ढाई से तीन किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान तक ले जाने की योजना है।

किसानों के लिए खेती बचाने की उम्मीद, परिवारों पर भी पड़ेगा असर

जाखौदा में जलभराव का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ा। किसान की आमदनी सीधे खेत से जुड़ी होती है और जब खेत में पानी खड़ा रहे तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ा। गेहूं और धान जैसी फसलों पर जलभराव का असर पड़ा और कई खेतों में अपेक्षित उत्पादन नहीं हो सका।

एक किसान ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि ऐसे समय भी आए जब उसे परिवार की जरूरत के लिए बाजार से गेहूं खरीदना पड़ा। उसके अनुसार, अगर खेतों से पानी निकलता है और जमीन दोबारा खेती के योग्य बनती है तो इससे केवल एक किसान नहीं, बल्कि उससे जुड़े मजदूरों और अन्य ग्रामीण परिवारों को भी लाभ होगा। यही वजह है कि ग्रामीण प्रस्तावित जलनिकासी व्यवस्था को खेती के साथ-साथ रोजगार और गांव की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं। यदि खेतों में नियमित रूप से खेती हो पाती है, तो कृषि मजदूरों को भी काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

ग्रामीणों ने कहा—पहले भी प्रयास हुए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला

जाखौदा के लोगों ने बातचीत में बताया कि सरकारी स्तर पर पहले भी मोटर लगाने और जलनिकासी की व्यवस्था करने के प्रयास हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ समय तक मोटर चली, लेकिन बाद में व्यवस्था बंद हो गई।

एक ग्रामीण ने कहा कि समस्या केवल मोटर लगाने से हल नहीं होती, बल्कि पानी को लगातार बाहर निकालने के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी है। इसी कारण इस बार लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना को ग्रामीण महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

ब्लॉक समिति से जुड़े एक प्रतिनिधि ने भी कहा कि उन्होंने पहले विभिन्न स्तरों पर समस्या उठाई थी। उनके अनुसार, संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना करने के बाद सर्वे और सामग्री पहुंचने की प्रक्रिया बहुत कम समय में आगे बढ़ी। उनका कहना था कि उनके लिए यह व्यक्तिगत अनुभव था कि कुछ ही दिनों में सर्वे और सहायता सामग्री गांव तक पहुंच गई।

गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्य की सराहना की

जाखौदा में राहत सामग्री पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्य की प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि वर्षों से चली आ रही समस्या के बीच किसी संस्था या सेवा अभियान की ओर से इस तरह सामग्री उपलब्ध कराना उनके लिए बड़ी मदद है।

संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान को उनके समर्थक किसान और मजदूरों की समस्याओं को प्राथमिकता देने वाला सेवा प्रयास बताते हैं। जाखौदा के ग्रामीणों के अनुसार, पाइपलाइन, मोटर और संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने से उन्हें उम्मीद मिली है कि उनके खेतों की स्थिति सुधर सकती है। यहां यह भी स्पष्ट है कि किसी भी राहत कार्य की वास्तविक सफलता उसके स्थायी परिणाम से तय होगी। यदि पाइपलाइन और मोटर व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम करती है तथा लंबे समय तक जलभराव कम होता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ किसानों की जमीन और उनकी आजीविका को मिलेगा।

ग्रामीणों में दिखी नई उम्मीद, सामाजिक स्तर पर भी बना चर्चा का विषय

राहत सामग्री के पहुंचने से जाखौदा में केवल किसानों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरे गांव में चर्चा का माहौल बना। अलग-अलग बिरादरियों और वर्गों के लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया। ग्रामीणों का कहना था कि किसान की परेशानी केवल किसान की परेशानी नहीं होती। खेती अच्छी होगी तो खेत मजदूरों को काम मिलेगा, स्थानीय बाजार में गतिविधियां बढ़ेंगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

इसी वजह से ग्रामीण इस प्रयास को व्यापक सामाजिक प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। वर्षों से पानी के कारण प्रभावित जमीन यदि दोबारा खेती के योग्य होती है तो इसका असर आने वाले समय में कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

जब खेतों में पानी नहीं, उम्मीद दिखाई देने लगे

जाखौदा की कहानी केवल पाइप और मोटरों की कहानी नहीं है। यह उन किसानों की कहानी है जिन्होंने लंबे समय तक अपनी आंखों के सामने खेतों को पानी में डूबते देखा और फिर भी समाधान की उम्मीद नहीं छोड़ी।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1995 के बाद से चली आ रही जलभराव की समस्या ने उनकी खेती को लगातार प्रभावित किया। अब करीब 12,700 से 13,000 फीट 8 इंच पाइपलाइन और प्रस्तावित पांच मोटरों की सहायता से उन्हें उम्मीद है कि पानी की निकासी का रास्ता तैयार होगा।

गांव की गलियों में निकला काफिला, किसानों के चेहरे पर दिखाई दी खुशी और खेतों को दोबारा आबाद करने की उम्मीद—ये सभी दृश्य बताते हैं कि किसी लंबे संकट के बीच छोटी-सी मदद भी लोगों के लिए कितनी बड़ी उम्मीद बन सकती है।

जाखौदा के किसान अब यही चाहते हैं कि प्रस्तावित व्यवस्था जल्द पूरी हो और वर्षों से पानी में फंसी उनकी जमीन फिर से फसल लहलहाते खेतों में बदल सके। अगर जलनिकासी की यह व्यवस्था सफल रहती है, तो यह गांव के लिए केवल एक राहत कार्य नहीं, बल्कि खेती और आजीविका को दोबारा पटरी पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।

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