उजड़ते परिवारों को जीवनदान देने से लेकर प्यासे गांवों की पुकार सुनने तक, संत रामपाल जी महाराज का निस्वार्थ मिशन मानवता की अद्भुत मिसाल पेश कर रहा है।
गाँव मल्हाना: उजड़े परिवार का सहारा बने संत रामपाल जी, “पैसे की कमी से बेटा नहीं मरेगा”
गाँव मल्हाना से एक अत्यंत हृदय विदारक मामला सतलोक आश्रम पहुंचा, जहाँ एक बेबस पिता ने संत रामपाल जी महाराज से मदद की गुहार लगाई। पिता ने अपनी दर्दनाक स्थिति साझा करते हुए बताया कि उनके बेटे की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। बेटे को बचाने के लिए उन्होंने अपनी जमीन बेच दी, यहाँ तक कि गाँव की पंचायत ने भी चंदा इकट्ठा कर मदद की, लेकिन सब कम पड़ गया। इसके बाद बेटे की जान बचाने के लिए माँ ने अपनी किडनी दान की, परंतु वह भी फेल हो गई। अब बेटा अस्पताल में बिस्तर पर पड़ा है, माँ बीमार है, और पिता स्वयं दिव्यांग (हैंडीकैप) हैं। इस मार्मिक पीड़ा को सुनकर संत रामपाल जी ने दृढ़तापूर्वक आश्वस्त किया कि “पैसे की कमी से तुम्हारा बेटा नहीं मरेगा।” संत जी ने परिवार के राशन और भोजन की व्यवस्था ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत करने की घोषणा की और इलाज के लिए मौके पर ही ₹1 लाख दिए, साथ ही भविष्य के सम्पूर्ण खर्च का जिम्मा भी लिया।
खरक जाटान (रोहतक) में जल संकट
रोहतक जिले के खरक जाटान गांव की पंचायत और भारी संख्या में ग्रामीण (विशेषकर महिलाएं) सरपंच अजमेर सिंह के नेतृत्व में सतलोक आश्रम पहुंचे। ग्रामीणों ने गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत से संत रामपाल जी महाराज को अवगत कराया। इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को देखकर संत जी ने उनकी पीड़ा को गहराई से समझा और कहा, “इतने लोग आए हो, इसका मतलब दुख घना है।” उन्होंने दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि “हो गया काम थारा, चाहे पाताल से पानी लाना पड़े” इस त्वरित मदद से ग्रामीण इतने भावुक हुए कि उन्होंने संत जी को किसानों का मसीहा बताया।
हुड्डा खाप के प्रधानों और गणमान्य व्यक्तियों ने कहा: “जो सरकार नहीं कर सकी, वह संत जी ने किया”
हुड्डा खाप के पूर्व प्रधान रामदिया हुड्डा, सेक्रेटरी कृष्ण लाल हुड्डा और अन्य गणमान्य युवा नेताओं व किसानों ने सतलोक आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। खाप प्रतिनिधियों ने आश्रम में ‘अन्नपूर्णा मुहिम’, मुफ्त खाद-बीज वितरण, और बाढ़ राहत कार्यों को देखकर गहरा आभार व्यक्त किया। खाप के पूर्व प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “जो मदद सरकारें भी नहीं कर सकीं, वह संत रामपाल जी ने की है।” आश्रम की अद्भुत व्यवस्था और युवाओं को नशामुक्त करने के सफल मॉडल से प्रभावित होकर खाप प्रधानों ने संत रामपाल जी महाराज को समाज के लिए साक्षात ‘भगवान का स्वरूप’ बताया।
उरलाना खुर्द (पानीपत) की लड़कियों के लिए बस की सौगात: संत रामपाल जी का ‘बेटी बचाओ’ अभियान
पानीपत जिले के मतलौडा ब्लॉक के ग्राम पंचायत उरलाना खुर्द के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण सतलोक आश्रम पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके गांव की लड़कियों को आवागमन में भारी परेशानी होती है, इसलिए उन्होंने लड़कियों के लिए एक बस की सुविधा की मांग रखी। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति देखकर संत रामपाल जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “इतने लोग आए हो, अब तो देनी ही पड़ेगी।” उन्होंने कहा कि “बेटियों की सुरक्षा और ‘बेटी बचाओ’ भी हमारे मिशन का एक अहम हिस्सा है,” और तुरंत बस मंजूर कर दी।
भीमसाना (चूरू) की गौशाला को 750 क्विंटल चारे का आश्वासन
राजस्थान के चूरू जिले के गांव भीमसाना की गौशाला के अध्यक्ष राजकुमार ने बताया कि उनके पास गायों के लिए बिल्कुल भी सूखा चारा नहीं बचा है। उन्होंने 750 क्विंटल चारे की मदद की गुहार लगाई। गौमाता की दयनीय स्थिति को सुनकर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत अर्जी स्वीकार की और चारे की पूरी व्यवस्था करवाने का पक्का आश्वासन दिया, साथ ही सत्य भक्ति से जुड़ने की भी प्रेरणा दी।
राजस्थान के प्रतापगढ़ (बाबा खेड़ा) के सरपंच और ग्रामीणों की संत रामपाल जी से भेंट
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले (गांव बाबा खेड़ा) के सरपंच और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात की। सरपंच ने उनसे ‘नाम’ (दीक्षा) ले ली है। इस पर संत जी ने स्पष्ट सीख दी कि सत्य भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए राजनीति से दूर रहना आवश्यक है। उन्होंने सरपंच से कहा कि वे वर्तमान कार्यकाल पूरा करें, लेकिन भविष्य में चुनाव न लड़ें। ग्रामीणों ने बताया कि वे सोशल मीडिया के जरिए जन-कल्याणकारी कार्यों से प्रभावित होकर दर्शन करने आए हैं।
कुताना (रोहतक) के पूर्व सरपंच ने संत रामपाल जी के दर्शन को बताया परम सौभाग्य
रोहतक जिले के कुताना गांव के पूर्व सरपंच बलराज सिंह नांदल और आईएमटी इंचार्ज राजीव डागर ने संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात की। संवाद के दौरान जब संत जी ने विनम्रतापूर्वक स्वयं को ‘सेवक’ और अपनी जगह को ‘गरीब की झोपड़ी’ बताया, तो पूर्व सरपंच ने श्रद्धाभाव से कहा कि साक्षात दर्शन पाकर हम धन्य हो गए हैं और आपके कार्यों से समाज का हौसला बढ़ता है।
रुस्तमगढ़ (अलीगढ़, UP) में जलभराव व आपसी विवाद का स्थायी समाधान
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले (तहसील खैर) की ग्राम पंचायत रुस्तमगढ़ के प्रधान बहादुर सिंह और कई ग्रामीण सतलोक आश्रम पहुंचे। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज का अभिनंदन करते हुए उनके व्यापक समाज सेवा कार्यों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, ग्राम प्रधान ने गांव की एक गंभीर समस्या सामने रखी और बोले “मैं प्रधान होते हुए कुछ नहीं कर पाया, थक गया हूँ” और बताया कि गांव के तालाब और 25-30 बीघा गरीब किसानों के खेतों में जल-निकासी की कोई व्यवस्था न होने से पानी भरा रहता है। इस जलभराव के कारण ग्रामीणों के बीच आए दिन आपसी विवाद और अशांति की स्थिति बनी रहती है, जिसका वे तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं कर पाए थे। इस समस्या का लिखित पत्र स्वीकार करते हुए संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों को तुरंत आश्वस्त किया और कहा, “यो तो हो गया थारा।” संत जी के इस त्वरित आश्वासन से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और उनका कोटि-कोटि धन्यवाद किया।
सुकृत और बंदगी
सतलोक आश्रम से उठ रही यह जनसेवा की लहर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज का मिशन केवल उपदेशों तक सीमित नहीं है। यह ‘सुकृत’ (परोपकार) और ‘बंदगी’ (सत्यभक्ति) का वह अमूल्य महासंगम है जो टूटते परिवारों को आर्थिक व मानसिक संबल दे रहा है। एक तरफ जहां उनका आध्यात्मिक ज्ञान समाज को व्यसनों से मुक्त कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनकी जमीनी मदद, चाहे वह किडनी मरीज का इलाज हो, प्यासे गांवों तक पानी पहुंचाना हो या बेटियों की शिक्षा के लिए बस देना हो, समाज में मानवता का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रही है।



