रोहतक जिले के गांव बालंद में इन दिनों एक अलग ही उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। गांव के बीच स्थित सतगामा खाप चबूतरा पार्क, जो लंबे समय से बिना मुख्य द्वार के अपनी पहचान और सुरक्षा दोनों के लिए संघर्ष कर रहा था, अब एक मजबूत और भव्य प्रवेश द्वार के साथ नई पहचान पा चुका है। यह केवल निर्माण कार्य नहीं था, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी मांग और आवश्यकता का समाधान था। कुछ महीने पहले इसी स्थान पर लगभग 100 से अधिक ग्राम पंचायतों और विभिन्न खाप प्रतिनिधियों ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के किसान हित, अन्नपूर्णा मुहिम और जनकल्याणकारी कार्यों के सम्मान में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया था। उसी कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और सतगामा खाप के पदाधिकारियों ने पार्क की सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार बनाए जाने का आग्रह रखा था।
ग्रामीणों की इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए संत रामपाल जी महाराज ने कुछ ही दिनों में मजबूत लोहे का विशाल मुख्य द्वार तैयार करवाकर उसे ग्राम पंचायत और सतगामा खाप को समर्पित कर दिया। अब गांव के लोगों का कहना है कि यह केवल एक गेट नहीं, बल्कि पूरे गांव के सम्मान और सुरक्षा की नई पहचान बन गया है।
वर्षों से खुला पड़ा था पार्क, आवारा पशुओं से होता था भारी नुकसान
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सतगामा खाप चबूतरा पार्क कई वर्षों से बिना मुख्य द्वार के था। पार्क में चारों तरफ से आवारा पशु आसानी से प्रवेश कर जाते थे। गाय, बैल, भैंस, गधे और अन्य पशु अंदर लगे पेड़-पौधों, फूलों और हरियाली को नुकसान पहुंचा देते थे। इसके अलावा पार्क की साफ-सफाई बनाए रखना भी मुश्किल हो गया था। कई बार ग्रामीणों ने इस समस्या को दूर करने की कोशिश की, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
जब संत रामपाल जी महाराज के सम्मान समारोह के दौरान इस समस्या का उल्लेख किया गया, तब उन्होंने ग्रामीणों की आवश्यकता को समझते हुए तुरंत मुख्य द्वार बनवाने की सहमति दे दी। महज कुछ ही दिनों में मजबूत लोहे का विशाल गेट तैयार हो गया, जिसमें एक बड़ा मुख्य प्रवेश द्वार और दोनों ओर छोटे प्रवेश द्वार बनाए गए ताकि लोगों की आवाजाही भी आसान बनी रहे।
लोकार्पण समारोह बना गांव की एकता और सम्मान का प्रतीक
मुख्य द्वार के निर्माण पूर्ण होने के बाद गांव बालंद में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके बाद सतगामा खाप, ग्राम पंचायत और गांव के गणमान्य लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर पुष्पमालाएं अर्पित कर उनका सम्मान किया। इसके बाद मुख्य द्वार की चाबी औपचारिक रूप से सतगामा खाप और ग्राम पंचायत को सौंपी गई। जैसे ही गेट खोला गया, पूरे परिसर में जयकारों की गूंज सुनाई दी और उपस्थित ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए गौरव का क्षण बताया।
ग्रामीण बोले—”पांच पीढ़ियों में पहली बार मिला ऐसा सम्मान”
गांव के वरिष्ठ नागरिक और पूर्व सैनिक दिलबाग सिंह ने भावुक होकर कहा,
“हम कई पीढ़ियों से कहते आ रहे थे कि इस चबूतरे की पहचान बने, यहां एक अच्छा गेट बने, लेकिन कभी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। संत रामपाल जी महाराज ने हमारी बात सुनी और बहुत कम समय में यह सपना पूरा कर दिया। अब पार्क सुरक्षित भी रहेगा और इसकी पहचान भी बनेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि अब बच्चों, बुजुर्गों और गांव के लोगों को भी एक सुरक्षित और सुंदर स्थान मिलेगा।
ग्रामीणों का कहना—अब सुरक्षित रहेंगे पेड़-पौधे और पार्क की संपत्ति
कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले पशु पार्क के अंदर घुसकर पेड़ों को नुकसान पहुंचा देते थे। अब मजबूत गेट लगने से पार्क में अनावश्यक प्रवेश पूरी तरह बंद हो जाएगा।
ग्रामीण नरेश दास ने कहा कि पहले यहां जानवर घुस जाते थे। पेड़ टूट जाते थे। अब गेट लग गया है तो ताला लगेगा और पार्क सुरक्षित रहेगा। गांव वाले बहुत खुश हैं। उनका कहना था कि अब पार्क की देखभाल भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।
सतगामा खाप के पदाधिकारियों ने जताया आभार
कार्यक्रम में मौजूद सतगामा खाप के पदाधिकारियों ने कहा कि यह गेट केवल लोहे का ढांचा नहीं बल्कि पूरे समाज के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां और भी विकास कार्य होंगे ताकि यह स्थान सामाजिक बैठकों, भाईचारे और सामुदायिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र बन सके। खाप प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि आगे चलकर यहां एक बड़ा सामुदायिक हॉल भी बने ताकि ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के अन्य सेवा कार्यों का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान गांव के अनेक लोगों ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब संत रामपाल जी महाराज ने जनहित का कार्य किया हो। ग्रामीणों ने बताया कि उनके द्वारा पहले भी गांवों में आरओ प्लांट, स्कूलों में सुविधाएं, गरीब परिवारों के लिए मकान, किसानों को सिंचाई सामग्री, जरूरतमंदों के इलाज, राशन सहायता और अन्य सामाजिक कार्य किए गए हैं। कई लोगों ने कहा कि उनकी संस्था जरूरतमंद परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाने का लगातार प्रयास करती है। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे कार्य समाज में विश्वास और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
ग्रामीणों की नजर में केवल निर्माण नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण
गांव के लोगों का कहना है कि किसी भी गांव का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होता, बल्कि समाज की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक होती है। उनके अनुसार जब किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा गांव की वास्तविक जरूरत को समझकर समाधान किया जाता है, तब उसका प्रभाव वर्षों तक दिखाई देता है। मुख्य द्वार बनने के बाद अब गांव के लोगों में पार्क के संरक्षण और रखरखाव को लेकर भी नई जागरूकता आई है।
कार्यक्रम के दौरान लगभग हर वक्ता ने संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों का उल्लेख किया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने केवल आध्यात्मिक संदेश देने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता को भी अपने कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। किसानों के हित में सहायता, गरीब परिवारों के लिए आवास, जरूरतमंदों को राशन, चिकित्सा सहयोग, शिक्षा से जुड़े प्रयास और गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए लोगों ने कहा कि उनकी सेवा-भावना अनेक परिवारों के लिए आशा का स्रोत बनी है। उपस्थित ग्रामीणों ने माना कि समाज में करुणा, सहयोग और मानव सेवा की भावना जितनी मजबूत होगी, गांव और देश दोनों उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेंगे।
गांव में बढ़ा भाईचारा और सेवा की भावना
इस पूरे कार्यक्रम ने गांव के लोगों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया। बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—सभी ने इस अवसर को गांव के विकास और एकता के उत्सव के रूप में देखा। ग्रामीणों का कहना था कि जब समाज मिलकर किसी अच्छे कार्य के लिए आगे आता है तो उसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। अब पार्क पहले से अधिक सुरक्षित, सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देता है।
जब समाज साथ खड़ा होता है, तब बदलती है तस्वीर
गांव बालंद की यह कहानी केवल एक मुख्य द्वार के निर्माण की नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जहां ग्रामीणों की आवश्यकता को समझते हुए एक ऐसी पहल की गई जिसने पूरे गांव को नई पहचान दी। आज सतगामा खाप चबूतरा पार्क का यह भव्य मुख्य द्वार गांव की सुरक्षा, सम्मान और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों की मुस्कान और उनके शब्द इस बात की गवाही देते हैं कि छोटे-छोटे जनहित के कार्य भी लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
जब समाज की आवाज़ सुन ली जाती है, तब सेवा केवल निर्माण नहीं करती—उम्मीद भी जगाती है
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गांव बालंद में बनाया गया यह मुख्य द्वार केवल लोहे और सीमेंट से तैयार एक संरचना नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और सामुदायिक भावना का जीवंत प्रतीक बन गया है। जब किसी गांव की वर्षों पुरानी आवश्यकता पूरी होती है, तो केवल एक निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, बल्कि लोगों के मन में विश्वास भी मजबूत होता है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।



