हरियाणा के सिरसा जिले की रानियां तहसील स्थित गांव खाजाखेड़ा में श्री कृष्ण गौशाला में 200 से अधिक गौवंश के लिए सूखे चारे (तूड़ी) को सुरक्षित रखने की गंभीर समस्या बनी हुई थी। पहले से बना शेड छोटा पड़ने के कारण चारे को खुले में रखना पड़ता था, जिससे बारिश और धूप में चारा खराब हो जाता था। गौवंश की इस आवश्यकता को देखते हुए गौशाला समिति व ग्रामीणों ने धनाना धाम जाकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना रखी)। इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए संत रामपाल जी महाराज की ओर से गौशाला में 50×90 फीट आकार और 18 फीट ऊंचे तूड़ी गोदाम (शेड) के निर्माण कार्य का शुभारंभ करवाया गया
चारे के अभाव और खराब होने के संकट से जूझती गौशाला
गांव खाजाखेड़ा स्थित श्री कृष्ण गौशाला में 200 से अधिक गायें मौजूद हैं। गौशाला प्रबंधन के पास चारे को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त गोदाम उपलब्ध नहीं था। सीमित व्यवस्था के कारण काफी मात्रा में सूखा चारा खुले आसमान के नीचे डालना पड़ता था। बारिश होने पर सारा चारा भीगकर सड़ जाता था, जिससे बेसहारा गौवंश के सामने भुखमरी और चारे की भारी किल्लत पैदा हो जाती थी। स्थानीय स्तर पर छोटा गांव होने और सीमित संसाधनों के कारण ग्रामीण इतना बड़ा शेड स्वयं बनवाने में असमर्थ थे। इस विकट परिस्थिति ने गौवंश के संरक्षण के लिए बाहरी मानवीय सहायता की आवश्यकता को अनिवार्य बना दिया।
संत रामपाल जी महाराज की ओर से 50×90 फीट गोदाम निर्माण की सहायता
संत रामपाल जी महाराज से जुड़ी मानवीय पहल और गौ सुरक्षा अभियान के अंतर्गत गांव खाजाखेड़ा की गौशाला में इस संकट के स्थायी समाधान का निर्णय लिया गया। गौशाला का स्थल पर सर्वे कराने के बाद 50×90 फीट के विशाल गोदाम निर्माण को मंजूरी दी गई। इस गोदाम की ऊंचाई 18 फीट निर्धारित की गई है। स्थानीय वक्ताओं के अनुसार इस पूरे निर्माण कार्य पर अनुमानित 20 से 25 लाख रुपये की लागत आएगी। निर्माण स्थल पर जेसीबी मशीन, ईंटें और आवश्यक सामग्री पहुंचाई गई। विधिवत मंगलाचरण के साथ कार्य का शुभारंभ किया गया, जहां नींव खुदाई और निर्माण में सहयोग के लिए बड़ी संख्या में सेवादार व ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने बयां की राहत की बात
गांव के प्रतिनिधियों और गौशाला समिति के सदस्यों ने इस सहायता पर अपने विचार व्यक्त किए:
- सरपंच रवि मेहता (कागड़ा/खाजाखेड़ा क्षेत्र): उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज ने गांव की गौशाला को बहुत बड़ी दया बख्शी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले कभी ऐसा संत नहीं देखा जो समाज के लिए इतना बड़ा दान और सहयोग करता हो।
- श्रवण कुमार (गौशाला प्रधान): उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 22 मार्च 2026 को धनाना धाम गए थे और प्रार्थना रखी थी। गौशाला में 200 से ज्यादा गायें हैं और सूखा चारा भीगकर नष्ट हो जाता था। 50×90 फीट और 18 फीट ऊंचे गोदाम की मांग तुरंत पूरी होने से चारे का संकट हमेशा के लिए हल हो जाएगा।
- पूर्व सरपंच एवं गणमान्य प्रतिनिधि: उन्होंने बताया कि वे कई राजनीतिक व सामाजिक पदों पर रहे हैं, लेकिन पहली बार देखा कि एक ही बार मांग रखने पर 25 लाख रुपये की अनुमानित लागत का इतना बड़ा शेड तुरंत मंजूर कर दिया गया।
- हरियाणा राज्य गौशाला संघ प्रतिनिधि: उन्होंने कहा कि गौ सुरक्षा अभियान के तहत राजस्थान और हरियाणा की अनेक गौशालाओं में सहायता पहुंचाई जा रही है। खाजाखेड़ा में 50×90 का शेड मिलना गौशालाओं के लिए बहुत बड़ा संबल है।
- बंसीलाल (नंबरदार, खाजाखेड़ा): उन्होंने बताया कि गांव छोटा होने के कारण तूड़ी शेड की भारी समस्या थी। संत रामपाल जी महाराज की तरफ से इस बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत होने से ग्रामीणों को भारी राहत मिली है।
त्वरित प्रक्रिया और जवाबदेही से पूरा हुआ संकल्प
गौशाला समिति ने 22 मार्च 2026 को धनाना धाम में अपनी अर्जी प्रस्तुत की थी। प्रतिनिधियों के अनुसार वहां पहुंचने पर उनकी समस्या को गंभीरता से सुना गया और कुछ ही समय के भीतर इस आवेदन को मंजूरी प्रदान कर दी गई। इसके बाद मौके का सर्वे कर निर्माण सामग्री, जेसीबी और तकनीकी व्यवस्थाएं गांव में भेज दी गईं। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि संत रामपाल जी महाराज से जुड़े सेवा कार्य जनसहयोग और सेवा भावना से संचालित होते हैं तथा आम जनता से किसी प्रकार का व्यक्तिगत चंदा या धन नहीं लिया जाता। अन्नपूर्णा मुहिम और गौ सुरक्षा अभियान के तहत बिना किसी प्रशासनिक विलंब के जरूरतमंद स्थल पर सीधे कार्य शुरू कराया जाना इस सेवा प्रणाली की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका
खाजाखेड़ा में गौशाला शेड निर्माण की यह पहल केवल एक भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकटग्रस्त मूक पशुओं और ग्रामीण समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है। संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में चलने वाले अभियानों में आपदा के समय जल निकासी हेतु पाइप और मोटरें उपलब्ध कराना, जरूरतमंदों के लिए आवास निर्माण, निर्धन किसानों को सहायता तथा गौ संवर्धन के कार्य प्रमुखता से शामिल हैं।
उनके अनुयायी और ग्रामीण उन्हें एक मार्गदर्शक व समाज सुधारक के रूप में देखते हैं जो नशामुक्ति, दहेज उन्मूलन और जातिगत भेदभाव से परे मानव सेवा की शिक्षा देते हैं। परमेश्वर कबीर साहेब की भक्ति और सेवा भावना से ही समाज का वास्तविक उत्थान संभव है। खाजाखेड़ा की इस सहायता ने साबित किया कि संतों की सामाजिक चेतना धरातल पर उतरकर मानवीय और मूक प्राणियों के कष्टों को दूर करने में सक्षम है।



