हरियाणा के हिसार जिले के गांव जगान असरावा स्थित श्री शिव कृष्ण गौशाला में इन दिनों राहत की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने गौशाला से जुड़े लोगों के चेहरों पर चिंता की जगह संतोष ला दिया। लगातार बारिश और मौसम की परिस्थितियों के कारण गौशाला में पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा तैयार नहीं हो पाया था। धीरे-धीरे चारे का भंडार समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया था और गौशाला में रह रहे सैकड़ों गौवंश के भोजन की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी।
बताया गया कि इस गौशाला में करीब 400 से 450 गौवंश की देखभाल की जा रही है। ऐसे में रोजाना बड़ी मात्रा में चारे की जरूरत होती है। मौसम खराब होने के कारण स्थानीय स्तर पर सूखे चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई तो गौशाला प्रबंधन के सामने आने वाले दिनों को लेकर सवाल खड़ा हो गया। इसी आवश्यकता को देखते हुए गांव जगान और असरावा की पंचायतों तथा गौशाला कमेटी से जुड़े लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की प्रार्थना रखी। गौशाला कमेटी के अनुसार, उनकी ओर से चारे की तत्काल आवश्यकता बताई गई, जिसके बाद सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला।
चार-पांच दिन पहले रखी गई प्रार्थना
गौशाला से जुड़े लोगों के मुताबिक, दोनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग मिलकर संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे थे। वहां उन्होंने गौशाला में सूखे चारे की कमी की समस्या बताई और सहायता का अनुरोध किया। कमेटी के लोगों के अनुसार, उनकी प्रार्थना के बाद संत रामपाल जी महाराज की ओर से 250 क्विंटल सूखा चारा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इसके बाद सहायता की व्यवस्था शुरू हुई और कुछ ही दिनों में चारे से भरे ट्रक गौशाला पहुंच गए।
मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह केवल चारे की खेप पहुंचने का दृश्य नहीं था। जिन लोगों के सामने कुछ दिन पहले यह सवाल था कि चारा खत्म होने के बाद गौवंश को भोजन कैसे मिलेगा, वे अब गौशाला के बाहर खड़े ट्रकों को देखकर राहत महसूस कर रहे थे। गौशाला कमेटी को 250 क्विंटल सूखा चारा सौंपे जाने की जानकारी दी गई। लोगों ने बताया कि इससे तत्काल तौर पर गौवंश के भोजन की चिंता कम हुई है।
बारिश ने बढ़ाई मुश्किल, सूखे चारे का भंडार लगभग खत्म होने की स्थिति में था
गौशाला प्रबंधन के अनुसार इस बार बारिश के कारण सामान्य परिस्थितियों में मिलने वाला सूखा चारा पर्याप्त मात्रा में तैयार नहीं हो पाया। बारिश के दौरान चारे की उपलब्धता और भंडारण दोनों प्रभावित हुए। गौशाला में रहने वाले 400 से 450 गौवंश के लिए रोजाना भोजन की व्यवस्था करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में जब उपलब्ध चारा तेजी से खत्म होने लगे तो चिंता स्वाभाविक थी।
गौशाला के लोगों ने बताया कि उनके सामने चारे की समस्या के अलावा बारिश के कारण अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी चुनौतियां रहीं। लेकिन सबसे जरूरी आवश्यकता गौवंश के लिए भोजन की थी। इसी बीच दोनों गांवों के प्रतिनिधियों और गौशाला कमेटी ने मिलकर सहायता की मांग रखी। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर लोगों से चंदा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी और चारा निशुल्क उपलब्ध कराया गया।
गौशाला प्रधान बोले—”जो मांग रखी, उसे कुछ ही दिनों में पूरा कर दिया गया”
मौके पर गौशाला प्रबंधन और ग्रामीणों ने इस सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। गौशाला से जुड़े एक प्रतिनिधि ने बताया कि कुछ दिन पहले चारे की कमी की जानकारी लेकर वे संत रामपाल जी महाराज के पास गए थे। उनके अनुसार, प्रार्थना रखने के बाद कुछ ही दिनों में चारा गौशाला तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि इससे गौशाला में काम करने वाले लोगों के साथ-साथ गौवंश के लिए भी राहत की स्थिति बनी है।
एक अन्य ग्रामीण ने सेवा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी संत रामपाल जी महाराज के विभिन्न सेवा कार्यों के बारे में सुना था, लेकिन वहां जाकर उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। उनके मुताबिक, गौशालाओं के लिए चारा, किसानों के लिए सहायता और जरूरतमंद लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाओं की जानकारी उन्हें वहां देखने और सुनने को मिली।
चारे से भरे वाहन गौशाला पहुंचे
जगान और असरावा गांव के लोगों ने बताया कि गौशाला में चारे की कमी लगातार चिंता का विषय बन रही थी। ऐसे में जब चारे से भरे वाहन गौशाला पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों में खुशी का माहौल दिखाई दिया। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों गांवों की पंचायत और गौशाला कमेटी ने मिलकर समस्या सामने रखी थी। इसके बाद सहायता मिलने से उन्हें यह भरोसा मिला कि जरूरत के समय समस्या को सामने रखकर समाधान की दिशा में काम किया जा सकता है।
एक ग्रामीण ने कहा कि उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की ओर से किए जा रहे अन्य सेवा कार्यों के बारे में सुना था, लेकिन अब चारा अपनी आंखों के सामने गौशाला में पहुंचते देखा है। दूसरे ग्रामीण ने कहा कि गौशाला की सेवा को वह महत्वपूर्ण कार्य मानते हैं और भविष्य में भी इस प्रकार की सहायता मिलने की उम्मीद जताई।
होम डिलीवरी जैसी सेवा
गौशाला में पहुंचे चारे को लेकर एक ग्रामीण ने अपने अंदाज में कहा कि यदि कोई सहायता कहीं से मिलती है तो उसे लाने की जिम्मेदारी भी सामने आती है, लेकिन यहां चारा सीधे गौशाला तक पहुंच गया।
उन्होंने इसे “होम डिलीवरी” जैसी सेवा बताते हुए कहा कि इससे गौशाला कमेटी को काफी सुविधा हुई। उनके अनुसार, चारा उपलब्ध होने से अब कुछ समय के लिए गौवंश के भोजन की व्यवस्था को लेकर राहत मिली है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि लगभग 250 क्विंटल चारा गौशाला को सौंपा गया है। चारे से भरे वाहनों को देखकर गौशाला के सेवादारों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों की ग्रामीणों ने की चर्चा
इस दौरान ग्रामीणों और गौशाला प्रतिनिधियों ने संत रामपाल जी महाराज से जुड़े विभिन्न सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। वक्ताओं ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पाइप और मोटर उपलब्ध कराने, किसानों के लिए खाद-बीज जैसी सहायता तथा जरूरतमंदों के लिए अन्य सेवाएं चलाने का काम किया जा रहा है।
कुछ वक्ताओं ने अन्नपूर्णा मुहिम का भी उल्लेख किया और कहा कि जरूरतमंद परिवारों, किसानों तथा अन्य लोगों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इन दावों को लेकर ग्रामीणों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव और सुनी गई जानकारी साझा की। उनका कहना था कि सेवा का महत्व उस समय और बढ़ जाता है, जब किसी जरूरतमंद या गौशाला के सामने तत्काल समस्या खड़ी हो और सहायता समय पर पहुंच जाए।
संत रामपाल जी महाराज की करुणा और सेवा-कार्य को लेकर समर्थकों ने जताया आभार
गौशाला में मौजूद संत रामपाल जी महाराज के समर्थकों ने उनके सेवा कार्यों को करुणा और समाजसेवा से जोड़कर देखा। उनका कहना था कि गौवंश के भोजन की आवश्यकता को देखते हुए इतनी बड़ी मात्रा में सूखा चारा उपलब्ध कराना सेवा की भावना को दर्शाता है।
समर्थकों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सहायता, किसानों के लिए खाद-बीज और अन्य सामाजिक सेवाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सेवा का उद्देश्य केवल किसी एक वर्ग या समूह तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जरूरत के समय हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचनी चाहिए। जगान असरावा की गौशाला में पहुंची 250 क्विंटल चारे की सहायता को समर्थकों ने इसी सेवा भावना का उदाहरण बताया। हालांकि इन व्यापक सेवा-कार्यों से जुड़े आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
गौशाला कमेटी ने कहा—गौवंश के लिए चारा मिलना सबसे जरूरी था
गौशाला कमेटी के अनुसार, फिलहाल सबसे बड़ी आवश्यकता गौवंश के भोजन की थी। बारिश के कारण सूखा चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाया था और मौजूदा भंडार तेजी से समाप्त हो रहा था। कमेटी के लोगों ने बताया कि चारा मिलने से तत्काल जरूरत पूरी हुई है। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। गौशाला के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस सहायता के लिए उनसे किसी प्रकार का भुगतान नहीं लिया गया। उनके मुताबिक, चारा निशुल्क उपलब्ध कराया गया।
सेवा का असर केवल चारे तक सीमित नहीं, गौशाला में लौटी राहत की भावना
किसी गौशाला में रहने वाले पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था रोज की जरूरत है। इसलिए चारे की कमी केवल एक दिन की समस्या नहीं होती। यदि भंडार खत्म होने लगे तो इसका सीधा असर गौशाला की पूरी व्यवस्था पर पड़ सकता है। जगान असरावा की गौशाला में चारा पहुंचने के बाद फिलहाल ऐसी चिंता में राहत दिखाई दे रही है। सेवादारों के सामने अब कुछ समय के लिए चारे की उपलब्धता का सहारा है और वे गौवंश की देखभाल पर अधिक ध्यान दे सकते हैं। गांव के लोगों के लिए भी यह घटना इस मायने में महत्वपूर्ण रही कि उनकी ओर से उठाई गई समस्या पर सहायता उपलब्ध हुई। पंचायत, गौशाला कमेटी और ग्रामीणों ने मिलकर आवश्यकता रखी और उसके बाद चारा गौशाला तक पहुंचा।
गौ सुरक्षा अभियान का तीसरा चरण—जरूरत के समय धरातल पर सहायता पहुंचाने का दावा
इस सहायता को गौ सुरक्षा अभियान के तीसरे चरण से जोड़कर बताया गया। अभियान के तहत समर्थकों के अनुसार अलग-अलग गौशालाओं की जरूरत के आधार पर सूखा चारा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। कहीं चारे की जरूरत है, कहीं गौवंश के लिए बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता है और कहीं गौशाला की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत होती है। ऐसे में वास्तविक जरूरत की पहचान कर सहायता पहुंचाना गौशाला प्रबंधन के लिए उपयोगी हो सकता है। जगान असरावा की गौशाला में 250 क्विंटल सूखा चारा पहुंचना इसी तरह की सहायता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
जहां कुछ दिन पहले चिंता थी, वहीं आज गौशाला के द्वार पर खड़े हैं चारे से भरे ट्रक
जगान असरावा की श्री शिव कृष्ण गौशाला में आज का दृश्य उन लोगों के लिए भावुक करने वाला रहा, जो पिछले कुछ दिनों से चारे की कमी को लेकर चिंतित थे। एक तरफ गौशाला में सैकड़ों गौवंश की देखभाल की जिम्मेदारी है और दूसरी तरफ बारिश के कारण सूखे चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई थी।
ऐसे समय में 250 क्विंटल सूखा चारा गौशाला तक पहुंचा। चारे से भरे ट्रकों को देखकर गौशाला के सेवादारों और ग्रामीणों ने राहत महसूस की। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यही रही कि जिस समस्या को लेकर कुछ दिन पहले प्रार्थना रखी गई थी, उसके बाद कुछ ही दिनों में सहायता गौशाला के द्वार तक पहुंच गई।
गौ सेवा का असली अर्थ तभी सामने आता है, जब जरूरत की घड़ी में चारा गौशाला तक पहुंचे—जगान असरावा में 250 क्विंटल सूखे चारे की यह सहायता सैकड़ों गौवंश के लिए फिलहाल राहत की एक बड़ी वजह बन गई है। अधिक जानकारी के लिए आप SA News YouTube Channel पर विजिट करें।



