हरियाणा के जलमग्न भैणी महाराजपुर, ढाणी प्रेमनगर, खैरमपुर और मुजादपुर गांवों में किसानों की उम्मीद बने संत रामपाल जी महाराज: लौटी हरियाली, बुवाई और नया विश्वास

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हरियाणा के विभिन्न जिलों के कई गांवों ने पिछले वर्षों में भीषण जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना किया। खेतों में 3 से 5 फुट तक पानी भर गया, खरीफ फसलें नष्ट हो गईं और किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट यह खड़ा हो गया कि यदि समय रहते पानी नहीं निकला तो गेहूं की बिजाई भी संभव नहीं हो पाएगी।

रोहतक के भैणी महाराजपुर तथा हिसार जिले के ढाणी प्रेमनगर, खैरमपुर और मुजादपुर गांव ऐसे ही क्षेत्रों में शामिल थे, जहां सैकड़ों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई थी। कई परिवार आर्थिक संकट में डूब गए, पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया और किसानों को अपनी आजीविका खत्म होती दिखाई देने लगी।

ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम किसानों के लिए राहत और उम्मीद का माध्यम बनकर सामने आई। मोटरें, पाइपलाइन और जल निकासी के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए गए, जिससे खेतों का पानी बाहर निकाला जा सका और किसानों को दोबारा खेती करने का अवसर मिला।

जब जलभराव ने किसानों की जिंदगी बदल दी

इन सभी गांवों में किसानों को लगभग समान चुनौतियों का सामना करना पड़ा—

  • खरीफ फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं।
  • गेहूं की बिजाई संकट में पड़ गई थी।
  • पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई थी।
  • खेतों और रास्तों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।
  • कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए थे।
  • घरों और ढाणियों तक पानी पहुंच गया था।
  • लोगों को भविष्य की चिंता सताने लगी थी।

कई किसानों ने बताया कि यदि समय रहते पानी नहीं निकलता तो उन्हें खेती छोड़कर मजदूरी करनी पड़ती।

भैणी महाराजपुर (रोहतक): जहां जलभराव ने पैदा कर दिया था तनाव

रोहतक जिले की महम तहसील स्थित भैणी महाराजपुर गांव में लगभग 250 से 300 एकड़ भूमि जलभराव की चपेट में थी। खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी जमा था और धान सहित खरीफ फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि किसानों के बीच विवाद होने लगे। गांव में तनाव बढ़ गया और हालात संभालने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी। गांव के सरपंच प्रतिनिधि अतर सिंह के अनुसार किसान मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके थे।

उपलब्ध कराई गई सहायता

  • लगभग 21,000 फुट लंबी 8 इंची पाइपलाइन
  • दो शक्तिशाली 20 HP मोटरें
  • पूर्ण पंप सेट
  • जल निकासी के लिए आवश्यक उपकरण

लगभग 3 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी को नहरों और ड्रेनों तक पहुंचाया गया। दिन-रात चलाए गए अभियान के बाद खेत दोबारा खेती योग्य बने और गांव में गेहूं की बिजाई शुरू हो गई।

ढाणी प्रेमनगर (हिसार): जहां घरों तक पहुंच गया था पानी

हिसार जिले की बरवाला तहसील स्थित ढाणी प्रेमनगर गांव में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र जलभराव से प्रभावित था। खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी जमा था और पानी सड़ने के कारण जमीन पर सफेद लवण की परतें जमने लगी थीं।

पूर्व सरपंच राजेंद्र सिंह के अनुसार गांव के घरों तक पानी पहुंच चुका था और पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया था। किसानों को डर था कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें पलायन करना पड़ सकता है।

उपलब्ध कराई गई सहायता

  • 4500 फुट पाइपलाइन
  • 10 HP की शक्तिशाली मोटर
  • 50 मीटर केबल
  • स्टार्टर
  • पाइप फिटिंग का पूरा सामान

ग्रामीणों ने लगभग 15 से 20 दिनों तक लगातार मोटरें चलाकर खेतों से पानी निकाला। इसके बाद गांव के अधिकांश खेतों में गेहूं की बिजाई संभव हो सकी।

पंचायत सदस्य राजेश ने बताया कि जहां पहले केवल पानी दिखाई देता था, वहां आज फिर से खेती शुरू हो चुकी है।

खैरमपुर (हिसार): जहां किसानों ने खेतों में जाना छोड़ दिया था

हिसार जिले की मंडी आदमपुर तहसील का खैरमपुर गांव लंबे समय तक जलभराव की समस्या से जूझता रहा। खेतों में 3 से 5 फुट तक पानी जमा था और कपास, बाजरा, धान तथा ग्वार जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं।

स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि कई किसानों ने खेतों में जाना तक बंद कर दिया था। कुछ परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े क्योंकि पानी ढाणियों और मकानों तक पहुंच चुका था।

उपलब्ध कराई गई सहायता

  • 33,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
  • दो 20 HP की शक्तिशाली मोटरें
  • जल निकासी के लिए आवश्यक उपकरण

मोटरें कई सप्ताह तक लगातार चलती रहीं। धीरे-धीरे खेतों से पानी बाहर निकला और जमीन फिर से खेती योग्य बनने लगी। इसके बाद किसानों ने दोबारा गेहूं की बिजाई शुरू की।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल राहत कार्य नहीं था, बल्कि उन किसानों को दोबारा खड़ा करने का प्रयास था जो लगातार बर्बादी का सामना कर रहे थे।

मुजादपुर (हिसार): जहां सैकड़ों परिवारों को घर छोड़ने पड़े

हिसार जिले की हांसी तहसील का गांव मुजादपुर लगभग 300 एकड़ क्षेत्र में फैले गंभीर जलभराव से प्रभावित था। खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी जमा था और कपास, बाजरा तथा ज्वार जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं।

हालात इतने खराब हो गए थे कि सैकड़ों लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। गांव में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया था और पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा गया था।

उपलब्ध कराई गई सहायता

  • लगभग 12,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
  • दो 15 HP की शक्तिशाली मोटरें
  • स्टार्टर और बिजली का सामान
  • पाइप फिटिंग सामग्री
  • नट-बोल्ट और अन्य आवश्यक उपकरण

गांव के किसान नरेश कुमार ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पानी कभी उतर पाएगा। वहीं ग्रामीण अशोक के अनुसार हालात इतने खराब थे कि बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा था। जल निकासी के बाद लगभग 100 परिवार दोबारा अपने घरों में लौट सके। आज गांव में गेहूं और चारे की बिजाई फिर से शुरू हो चुकी है।

एक नजर में सहायता का विवरण

गांवजिलाप्रभावित क्षेत्रपानी की गहराईसहायता
भैणी महाराजपुररोहतक250-300 एकड़4-5 फुट21,000 फुट पाइपलाइन, 2×20 HP मोटर
ढाणी प्रेमनगरहिसारलगभग 200 एकड़4-5 फुट4500 फुट पाइपलाइन, 10 HP मोटर
खैरमपुरहिसारव्यापक क्षेत्र3-5 फुट33,000 फुट पाइपलाइन, 2×20 HP मोटर
मुजादपुरहिसारलगभग 300 एकड़4-5 फुट12,000 फुट पाइपलाइन, 2×15 HP मोटर

केवल राहत नहीं, किसानों के भविष्य को बचाने का प्रयास

इन गांवों में पहुंचाई गई सहायता केवल जल निकासी तक सीमित नहीं थी। इसका उद्देश्य किसानों की अगली फसल, पशुधन और पूरे परिवार के भविष्य को सुरक्षित करना था।

यदि समय रहते पानी नहीं निकाला जाता—

  • गेहूं की बिजाई नहीं हो पाती।
  • किसानों को खेती छोड़नी पड़ सकती थी।
  • पशुओं के लिए चारे का संकट बढ़ जाता।
  • परिवार आर्थिक संकट में डूब जाते।
  • भूमि लंबे समय तक अनुपयोगी बनी रहती।

लेकिन समय पर हुई सहायता ने किसानों को दोबारा खेती करने का अवसर दिया और उनकी उम्मीदों को टूटने से बचा लिया।

गांवों में लौटी हरियाली और मुस्कान

आज भैणी महाराजपुर, ढाणी प्रेमनगर, खैरमपुर और मुजादपुर जैसे गांवों में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जहां कभी चारों तरफ पानी, चिंता और निराशा दिखाई देती थी, वहीं आज खेतों में हरियाली, ट्रैक्टरों की आवाज और आने वाली अच्छी फसल की उम्मीद दिखाई देती है।

इन गांवों की कहानी केवल जल निकासी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन किसानों की कहानी है जिनकी डूबती उम्मीदों को फिर से जीवन मिला। अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से पहुंची समय पर सहायता ने न केवल खेतों को बचाया, बल्कि सैकड़ों किसान परिवारों के भविष्य को भी नई दिशा देने का कार्य किया।

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