सिंधु जल समझौते पर बढ़ा भारत-पाक तनाव: पाकिस्तान के बयानों के बीच भारत ने दोहराया – आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित

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भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने समझौते को लेकर अलग-अलग बयान दिए हैं। वहीं भारत ने दोहराया है कि पाकिस्तान जब तक विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौता स्थगित रहेगा। यह पूरा घटनाक्रम अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा लिए गए फैसले की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

सिंधु जल समझौते से जुड़े प्रमुख अपडेट

  • पाकिस्तान की सेना ने कहा कि वह सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
  • बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते पर कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर युद्ध के लिए भी तैयार है।
  • भारत ने 3 जुलाई को दोहराया कि पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन बंद होने तक सिंधु जल समझौता स्थगित रहेगा।
  • भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित किया था।
  • समझौते के स्थगित रहने के कारण भारत अब संधि के तहत जानकारी साझा करने या बैठकों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं है।

सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की सेना का बयान

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की अध्यक्षता में रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। इस बैठक के बाद पाकिस्तान सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने बयान जारी किया।

बयान में कहा गया कि भारत के सिंधु जल समझौते संबंधी बयानों पर ध्यान देते हुए फोरम ने 24 अप्रैल 2025 की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (NSC) के निर्देशों का समर्थन किया और पाकिस्तान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प दोहराया।

पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में भारत पर पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि भारत समर्थित आतंकवादी समूह अफगान तालिबान सरकार के नियंत्रण वाले क्षेत्रों का उपयोग कर रहे हैं। बयान में यह भी कहा गया कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब ऐसे तत्वों को अफगान क्षेत्र का उपयोग करने से रोका जाए।

इसके अलावा पाकिस्तान की सेना ने कश्मीर मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई और क्षेत्र में स्थायी शांति को कश्मीर मुद्दे के समाधान से जोड़ा गया।

बिलावल भुट्टो जरदारी ने क्या कहा?

गिलगित में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु नदी को पाकिस्तान के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते की रक्षा करेगा और भारत को जवाब देगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समझौते पर कोई सौदा करने को तैयार नहीं है और यदि जरूरत पड़ी तो युद्ध लड़ने के लिए भी तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को नाकाम करेंगे।

एक अन्य रिपोर्ट में बिलावल भुट्टो के वायरल वीडियो का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि भारत के साथ युद्ध लड़ना पड़ा तो पाकिस्तान इसके लिए तैयार है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित रैली कब हुई थी, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।

इसहाक डार ने क्या कहा था?

इससे पहले 30 जून को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कहा था कि पाकिस्तान भारत के साथ किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को ‘युद्ध जैसी कार्रवाई’ माना जाएगा।

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित करने का कोई आधार नहीं है और अंतरराष्ट्रीय कानून में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है।

भारत ने क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्रालय ने 3 जुलाई को स्पष्ट किया कि सिंधु जल समझौते पर भारत का रुख पहले जैसा ही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के कारण सिंधु जल समझौता स्थगित है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन छोड़ना होगा।

भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इसके बाद भारत अब संधि के तहत पाकिस्तान के साथ कोई जानकारी साझा नहीं करेगा और न ही इससे संबंधित बैठकों में हिस्सा लेगा।

बीते वर्ष नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) की बैठक में यह फैसला लिया गया था।

आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त संदेश: क्यों स्थगित हुई सिंधु जल संधि?

भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी ढांचे को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक संधि का सामान्य संचालन बहाल नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते,” जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर आवश्यक कदम उठाएगा। भारत का कहना है कि यह निर्णय देश की सुरक्षा, बदलती परिस्थितियों और आतंकवाद के खिलाफ उसके दृढ़ रुख को दर्शाता है।

पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति का रुख

पहलगाम हमले के बाद अप्रैल 2025 में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) ने कहा था कि भारत की ओर से पाकिस्तान का पानी रोकने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को ‘युद्ध जैसी कार्रवाई’ माना जाएगा।

हालिया 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में भी पाकिस्तानी सेना ने 24 अप्रैल 2025 के इसी NSC निर्देश का समर्थन दोहराया।

सिंधु जल समझौता क्या है?

विश्व बैंक की मध्यस्थता में वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। यह समझौता सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करता है।

नदीअधिकार
सिंधुपाकिस्तान
झेलमपाकिस्तान
चिनाबपाकिस्तान
रावीभारत
ब्यासभारत
सतलुजभारत

समझौते के अनुसार भारत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के जल का अधिकांश उपयोग कर सकता है। वहीं पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के जल पर पाकिस्तान का अधिकार तय किया गया, हालांकि भारत को इन नदियों पर सीमित उपयोग, जैसे जलविद्युत उत्पादन और सीमित सिंचाई, की अनुमति दी गई।

संधि में दोनों देशों के बीच जानकारी साझा करने, परियोजनाओं पर आपत्ति दर्ज कराने, स्थायी सिंधु आयोग के माध्यम से बैठकें करने, विवाद होने पर पहले आपसी बातचीत, फिर तटस्थ विशेषज्ञ अथवा कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन तक जाने का भी प्रावधान रखा गया है।

संधि स्थगित होने के बाद क्या बदला?

समझौते के स्थगित रहने के कारण भारत अब मानसून के दौरान बाढ़ संबंधी जानकारी साझा करने के लिए बाध्य नहीं है। साथ ही भारत सिंधु बेसिन में सावलकोट, रातले, बुरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू तथा किर्थाई-I और किर्थाई-II जैसी जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की लगभग 80 से 90 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। उसकी जल भंडारण क्षमता लगभग एक महीने के प्रवाह तक सीमित बताई गई है। तरबेला और मंगला जैसे प्रमुख जलाशयों के ‘डेड स्टोरेज’ के करीब होने का भी उल्लेख किया गया है।

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का उल्लेख

पाकिस्तान ने भारत द्वारा संधि स्थगित किए जाने के फैसले को स्वीकार नहीं किया और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का रुख किया। नीदरलैंड के द हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने कहा था कि भारत इस संधि को एकतरफा निलंबित नहीं कर सकता। हालांकि भारत ने इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया और संधि के निलंबन को जारी रखने का फैसला बरकरार रखा।

क्यों चर्चा में है सिंधु जल समझौता?

पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा संधि स्थगित किए जाने के फैसले के बाद यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल के दिनों में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार, पाकिस्तानी सेना और बिलावल भुट्टो जरदारी के बयानों ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया। दूसरी ओर भारत ने दोहराया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौते पर उसका रुख नहीं बदलेगा।

आध्यात्मिक ज्ञान से ही स्थायी शांति

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर जारी घटनाक्रम यह भी याद दिलाता है कि स्थायी शांति केवल समझौतों से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, सत्य और आध्यात्मिक ज्ञान से आती है। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज मानव जीवन का उद्देश्य परमात्मा की भक्ति बताते हैं। उनके अनुसार सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं, इसलिए वैमनस्य, हिंसा और घृणा के स्थान पर प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का मार्ग अपनाना चाहिए। 

वे सतलोक को आत्मा का वास्तविक एवं शाश्वत धाम बताते हैं तथा मानव जीवन को उस परम धाम की प्राप्ति का दुर्लभ अवसर बताते हैं। उनके आध्यात्मिक उपदेश लोगों को सत्य, सदाचार और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जिससे समाज में शांति और सौहार्द की भावना मजबूत हो सकती है।

अधिक जानकारी के लिए:

Website: www.jagatgururampalji.org
YouTube: Sant Rampal Ji Maharaj
Facebook: Spiritual Leader Saint Rampal Ji
X (Twitter): @SaintRampalJiM

FAQs on सिंधु जल समझौता

Q1. सिंधु जल समझौता कब हुआ था?


उत्तर: विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में यह समझौता हुआ था।

Q2. भारत ने सिंधु जल समझौता क्यों स्थगित किया?


उत्तर: भारत ने पहलगाम हमले के बाद अप्रैल 2025 में यह कदम उठाया और इसे सीमा-पार आतंकवाद से जोड़ा।

Q3. पाकिस्तान की सेना ने क्या कहा है?


उत्तर: पाकिस्तानी सेना ने कहा कि वह सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

Q4. भारत का वर्तमान रुख क्या है?


उत्तर: भारत ने कहा है कि पाकिस्तान जब तक सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।

Q5. सिंधु जल समझौते में किन नदियों का बंटवारा है?


उत्तर: पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान के लिए तथा पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलुज भारत के लिए निर्धारित हैं।

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