असम के कामरूप जिले के केवटपारा गांव में जहाँ वैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे हुए फेल वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने निकाला पानी

Published on

spot_img

​असम राज्य के कामरूप जिले के अंतर्गत अजारा तहसील में स्थित मटिया ऊपर केवटपारा गांव पिछले छह से सात दशकों से गंभीर पेयजल संकट की विभीषिका झेल रहा था। यह गांव एक पहाड़ी और सूखे क्षेत्र में बसा हुआ था, जिसके कारण यहाँ पानी की व्यवस्था करना हमेशा से एक अत्यंत कठिन चुनौती बना रहा था। वर्षों तक प्रशासनिक स्तर पर कोई भी स्थायी समाधान न निकल पाने के कारण विवश होकर ग्रामीणों ने जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी इस विकट समस्या को रखा। संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार शुद्ध पेयजल सेवा अभियान के तहत सेवा कार्य आरंभ हुआ और जिस स्थान पर वैज्ञानिकों और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे द्वारा पानी मिलना असंभव घोषित कर दिया गया था, वहीं पर संत रामपाल जी की दया से शुद्ध पेयजल की अभूतपूर्व व्यवस्था कर दी गई।

​असम के कामरूप जिले के मटिया ऊपर केवटपारा गांव में ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से लगाई मदद की गुहार

​जब सरकारी दफ्तरों और वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के तमाम प्रयास विफल हो गए, तब इस गांव की पीड़ित जनता ने दीनदयाल परमेश्वर संत रामपाल जी महाराज की शरण ली। गांव के प्रतिनिधियों और सेवादारों ने सोनापुर स्थित नामदान केंद्र पर जाकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी लिखित अर्जी प्रस्तुत की। जैसे ही यह करुणा भरी पुकार जगतपालक परमेश्वर संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि इस गांव की पानी की समस्या का यथाशीघ्र निवारण किया जाए। संत रामपाल जी महाराज के निर्देश मिलते ही कुछ ही दिनों के भीतर सेवादारों की टीम मटिया ऊपर केवटपारा गांव पहुँच गई और वीडियो कॉल के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज को घटनास्थल की स्थिति से अवगत कराया गया। संत रामपाल जी महाराज ने वीडियो कॉल पर ही बोरिंग के लिए सटीक स्थान का मार्गदर्शन किया और आशीर्वाद दिया कि मीठा जल अवश्य प्राप्त होगा।

​दशकों पुराने जल संकट का दंश और महिलाओं का संघर्ष

​मटिया ऊपर केवटपारा गांव के इतिहास का आकलन किया जाए तो वर्ष 2016 के दौरान सरकार द्वारा नदी के कटाव से विस्थापित हुए लोगों को यहाँ बसाया गया था, किंतु इस क्षेत्र में पानी की समस्या दशकों पुरानी थी। यहाँ की माताओं और बहनों की दिनचर्या अत्यंत कष्टदायक थी। प्रतिदिन सुबह दो से तीन बजे जब संपूर्ण विश्व गहरी नींद में होता था, तब इस गांव की महिलाएं हाथ में लालटेन और सिर पर बर्तन रखकर पैदल कई किलोमीटर नीचे घने जंगलों में जाती थीं।

यह भी पढ़ें: संत रामपाल जी महाराज ने फेज़ 2 में जसौर खेड़ी झज्जर में जलभराव हेतु सामग्री भेजी

 उन रास्तों पर जंगली हाथियों के झुंड, सियार और जहरीले सांपों का भयंकर खतरा रहता था। पहाड़ी और पथरीला तथा फिसलन भरा रास्ता होने के कारण कई महिलाओं का संतुलन बिगड़ जाता था, जिससे उनके पैरों और घुटनों में गंभीर चोटें आती थीं तथा वे गठिया और कमर दर्द जैसी शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त हो जाती थीं। इसके अतिरिक्त, सतह के दूषित जल के सेवन से डायरिया और पीलिया जैसी जल जनित बीमारियाँ आम थीं, और यहाँ तक कि स्तन कैंसर व यूट्रस कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले भी सामने आए थे।

​बच्चों की शिक्षा पर गहरा प्रभाव और सरकारी सर्वेक्षणों की असफलता

​पानी की इस विकट समस्या ने न केवल वयस्कों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी अंधकारमय बना दिया। जिस दिन सरकारी जलापूर्ति का पानी आता था, उस दिन बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते थे क्योंकि यदि वे उस दिन पानी का संचय नहीं करते तो अगले 10-15 दिनों तक उन्हें पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं होती थी। स्कूल की मुख्य अध्यापिका ने भी इस बात की पुष्टि की कि पानी की किल्लत के कारण बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ता था। इस समस्या के समाधान हेतु दो वर्ष पूर्व सरकार द्वारा हाइड्रोलॉजिकल सर्वे करवाया गया था और 800 फीट गहरा बोरिंग भी करवाया गया था, किंतु उसमें पानी की एक बूंद भी नहीं निकली थी, जिससे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इसे सूखा क्षेत्र मानकर अपनी हार मान ली थी।

​संत रामपाल जी महाराज के आदेश से असंभव का संभव होना

​जब चारों ओर से निराशा हाथ लग चुकी थी, तब संत रामपाल जी महाराज की शरण में पहुँचने के बाद सेवादारों द्वारा भारी स्टील के पाइप मंगवाए गए और बोरिंग का कार्य प्रारंभ किया गया। यद्यपि गाँव के कुछ लोगों और स्वयं 11 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत अनु मंडल जी को इस बात का पूर्ण संदेह था कि इस सूखे पहाड़ पर पानी निकल सकता है, क्योंकि वे पहले ही सरकारी प्रयासों की विफलता देख चुकी थीं। इसके बावजूद, सेवादारों का अटूट विश्वास सतगुरु संत रामपाल जी महाराज के वचनों पर अडिग था। जब मशीन ने धरती की खुदाई शुरू की, तो पहली और दूसरी लेयर के बाद आखिरकार लगभग 1055 फीट की गहराई पर चार लेयरों में प्रचुर मात्रा में शुद्ध, मीठा और उच्च गुणवत्ता वाला मिनरल वाटर प्राप्त हुआ, जिसका टीडीएस स्तर 1 प्रतिशत से भी कम पाया गया।

​जल प्राप्ति के आंकड़ों का विवरण (सारणीबद्ध रूप)

विवरणपूर्व स्थिति (सरकारी सर्वे एवं प्रयास)वर्तमान स्थिति (संत रामपाल जी महाराज की कृपा से)
बोरिंग की गहराई800 फीट (विफल प्रयास)1055 फीट (सफल बोरिंग)
जल स्तर की परतेंशून्य स्रोत / सूखा क्षेत्रचार लेयर में प्रचुर जल स्रोत
जल की गुणवत्ताअनुपलब्ध / दूषित सतही जलमिनरल वाटर जैसी शुद्धता (टीडीएस < 1%)
भराव की क्षमताकई दिनों का समय10,000 लीटर की टंकी मात्र 3 घंटे में पूर्ण
लाभान्वित परिवारपेयजल के लिए मीलों की भटकनवर्तमान में 95+ परिवार (कुल 320+ परिवारों के लिए पर्याप्त)

जल प्राप्ति के उपरांत ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और उत्सव का वातावरण

​1055 फीट की गहराई पर जब अमृत रूपी जल की प्राप्ति हुई, तो पूरा गांव अचरज और आनंद से भर गया। ग्रामीणों को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस पहाड़ को वैज्ञानिकों ने सूखा घोषित कर दिया था, वहाँ इतनी प्रचुरता से पानी निकल आया है। इस खुशी में ग्रामीणों ने अपनी वार्षिक पारंपरिक पूजा को जो कि तीन महीने बाद होनी थी, तुरंत ही आरंभ कर दिया और उत्सव जैसा माहौल बना लिया। महिलाओं के सिर से मीलों दूर पानी लाने का भारी बोझ उतर गया, जिससे उन्हें अब अपने स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय मिलने लगा। ग्राम प्रधान और समस्त ग्रामीणों ने हाथ जोड़कर संत रामपाल जी महाराज के प्रति असीम कृतज्ञता व्यक्त की और उन्हें भगवान का स्वरूप मानकर बारंबार नमन किया।

​मटिया ऊपर केवटपारा के भाग्य को स्वर्णिम बनाने वाले जगतपालक संत रामपाल जी महाराज

​यह संपूर्ण घटना इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि जब संसार के सभी साधन और वैज्ञानिक प्रयास दम तोड़ देते हैं, तब दीन-दुखियों के एकमात्र सहारे पूर्ण ब्रह्म परमात्मा संत रामपाल जी महाराज अपनी असीम अनुकंपा से असंभव कार्यों को भी सहज ही पूर्ण कर देते हैं। 

मटिया ऊपर केवटपारा, अजारा, कामरूप, असम के निवासियों के जीवन में उतरी यह जलधारा केवल जल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह उस परमेश्वर के प्रेम का जीवंत प्रतीक है, जो बिना किसी भेदभाव, टैक्स या राजनीतिक स्वार्थ के संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में पिरो रहा है। संत रामपाल जी महाराज की इस निष्काम सेवा और परमार्थ लीला से कलयुग के संताप का अंत होकर धरा पर सतयुग के पावन प्रभात का श्रीगणेश हो चुका है। असंभव को संभव कर दिखाने वाले युगदृष्टा संत रामपाल जी महाराज को शत-शत नमन।

Latest articles

Ganesh Chaturthi 2026: Discover the True Adi Ganesha Beyond Idols!

Last Updated on 9 September 2026 IST | Ganesh Chaturthi 2026: Ganesh Chaturthi is...

आदि सनातन धर्म, शास्त्र प्रमाण और समाज सुधार: जगदीप शर्मा का संत रामपाल जी महाराज से विशेष साक्षात्कार

वर्तमान समय में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक परंपराओं को लेकर समाज में अनेक धारणाएं,...
spot_img

More like this

Ganesh Chaturthi 2026: Discover the True Adi Ganesha Beyond Idols!

Last Updated on 9 September 2026 IST | Ganesh Chaturthi 2026: Ganesh Chaturthi is...