हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित बेरी शहर की श्री श्री 108 ब्रह्मचारी जय रामदास पंचायती गौशाला में संत रामपाल जी महाराज ने गौशाला में बेजुबान गौवंश को धूप, बारिश और ठंड से बचाने तथा चारे को भीगने से सुरक्षित रखने के लिए दो विशाल शेड निर्माण कार्य की नींव रखवाई है।
समारोह की शुरुआत मंगलाचरण वाणी के पाठ से हुई। उपस्थित गौशाला समिति के सदस्यों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने संत रामपाल जी महाराज के दिव्य स्वरूप पर पुष्पमालाएं पहनाकर सम्मान व्यक्त किया।
नींव रखने की औपचारिक प्रक्रिया बेरी शहर के सबसे बुजुर्ग 93 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी द्वारा संपन्न की गई। इस अवसर पर निम्नलिखित प्रमुख व्यक्ति एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे:
- गौशाला उप प्रधान, जय भगवान जांगड़ा
- पूर्व गौशाला प्रधान, धर्मपाल पाली
- पूर्व गौशाला सचिव, राम धन जांगड़ा
- वर्तमान गौशाला सचिव, नरेश कादयान
गौशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक व्यवस्था
श्री श्री 108 ब्रह्मचारी जय रामदास पंचायती नई गौशाला बेरी, वर्ष 1885 में स्थापित मूल गौशाला की एक शाखा है। इस नई शाखा की स्थापना 10 वर्ष पूर्व ग्रामीणों द्वारा दान में दी गई पांच एकड़ भूमि पर की गई थी। यह गौशाला आसपास के 27 गांवों की संयुक्त पंचायत व्यवस्था से जुड़ी हुई है।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा शेड निर्माण की मंजूरी देने से पूर्व, इस गौशाला में शेड की कमी के कारण सैकड़ों गायें खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थीं। बारिश और तेज धूप के कारण चारा भी भीगकर खराब हो जाता था तथा पशुओं के बीमार होने की आशंका बनी रहती थी।
गौशाला सचिव नरेश कादयान और उप प्रधान जय भगवान जांगड़ा के अनुसार, समिति ने दो माह पूर्व धनाना आश्रम में आयोजित बैठक में संत रामपाल जी महाराज से शेड निर्माण के लिए प्रार्थना की थी। इसके बाद बालंद और गिरावड़ में आयोजित कार्यक्रमों में भी पुनः निवेदन किया गया था। संत रामपाल जी महाराज ने दो महीने की अवधि के भीतर गौशाला समिति की प्रार्थना स्वीकार करते हुए दो नए शेड निर्माण की अनुमति दी।
शेड निर्माण की तकनीकी विशेषताएं और निर्माण योजना
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गठित विशेष समिति की देखरेख में गौशाला परिसर में दो अलग-अलग शेडों का निर्माण शुरू किया गया है:
- प्रथम शेड (नई गौशाला परिसर): 105 फीट गुणा 98 फीट गुणा 120 फीट के भूखंड क्षेत्रफल में 100 फीट लंबाई, 18 फीट चौड़ाई और 15 फीट ऊंचाई वाला शेड बनाया जा रहा है।
- द्वितीय शेड (पुराना गौशाला परिसर): 90×25 फीट और 90×50 फीट के क्षेत्र में 40 फीट चौड़ाई और 100 फीट लंबाई का दूसरा शेड निर्मित किया जाएगा।
मंगलाचरण समाप्त होते ही ईंटें रखकर नींव का कार्य तत्काल प्रारंभ कर दिया गया। अनुकूल मौसम की स्थिति में इस संपूर्ण निर्माण कार्य को एक से दो माह के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित समाज कल्याण और कृषि राहत कार्य
बेरी गौशाला में शेड निर्माण का यह कार्य संत रामपाल जी महाराज द्वारा संपूर्ण भारत में चलाई जा रही व्यापक अन्नपूर्णा मुहिम का एक हिस्सा है। इस मुहिम और समाज कल्याण योजनाओं के तहत निम्नलिखित सेवाएं प्रदान की जा रही हैं:
- ढाई एकड़ तक की कृषि भूमि वाले छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त रासायनिक खाद और उन्नत बीज का वितरण
- बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को सीधी सहायता सामग्री
- विभिन्न क्षेत्रों की गौशालाओं में अवसंरचनात्मक विकास, जिसके तहत हुमायूं पुर गौशाला में शेड निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, डीघल गौशाला में पूर्व निर्मित शेड के साथ एक नया चारा गोदाम मंजूर किया गया है, तथा हिसार और मंडी चौकर गौशालाओं में शेड, हरा चारा, पेयजल व पक्के फर्श का निर्माण कराया गया है
बेरी गौशाला शेड निर्माण परियोजना का विवरण
| पैरामीटर | परियोजना का विवरण एवं आंकड़े |
| स्थान | श्री श्री 108 ब्रह्मचारी जय रामदास पंचायती गौशाला, बेरी, झज्जर, हरियाणा |
| प्रशासनिक क्षेत्र | 27 आसपास के गांव |
| गौशाला भूमि | 10 वर्ष पूर्व दान में मिली 5 एकड़ जमीन (मूल गौशाला की स्थापना 1885) |
| नींव रखने वाले प्रमुख व्यक्ति | बेरी के 93 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य बुजुर्ग |
| उपस्थित गौशाला पदाधिकारी | जय भगवान जांगड़ा, धर्मपाल पाली, राम धन जांगड़ा, नरेश कादयान |
| प्रस्तावित शेड माप | शेड 1 (नई गौशाला): 100 फीट x 12 फीट; शेड 2 (पुरानी गौशाला): 40 फीट x 100 फीट |
| अनुमानित निर्माण अवधि | 1 से 2 महीने |
27 गांवों के गौवंश के लिए स्थाई आश्रय और अवसंरचनात्मक सुरक्षा
संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्वीकृत दो विशाल शेडों के निर्माण से बेरी गौशाला की वर्षों पुरानी शेड की समस्या का स्थाई समाधान हो गया है। इस निर्माण से 27 गांवों से आने वाले सैकड़ों गौवंश को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होगी तथा चारे की बर्बादी पूरी तरह रुकेगी।



