​हरियाणा का महा-राहत अभियान: जब 13,000 एकड़ के जहरीले समंदर को चीरकर सैमाण, खेड़ी बरकी, दाता, चानौत गांवों के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

Published on

spot_img

​हरियाणा के रोहतक और हिसार जिलों के ग्रामीण अंचल आज एक ऐसी अलौकिक कहानी के गवाह बन गए हैं, जो इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगी। यह कहानी कुदरत के खौफनाक कहर, पूरी प्रशासनिक विफलता और अंततः एक महान संत के असीम परोपकार की है। एक समय था जब सैमाण पाना टोडर, खेड़ी बरकी, दाता और चानौत ये 4 बड़े गांव भुखमरी, कर्जे और पलायन के डर से पूरी तरह उजड़ने की कगार पर आ गए थे। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की असीम कृपा ने इन डूबते हुए 13,000 एकड़ के समंदर को फिर से सोने जैसी फसलों में बदल दिया है।

​तबाही के चार बड़े और खौफनाक केंद्र

इन चारों गांवों का मंज़र इतना डरावना था कि उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है:

  • सैमाण पाना टोडर (रोहतक): यहां 6000 एकड़ ज़मीन 8 फुट गहरे पानी में डूब गई थी। लोग अपने ही घरों की छतों पर कैद हो गए थे और उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया था। इस संकट के समाधान के लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से चार 20 हॉर्सपावर की मोटरें तथा 10,000 फीट लंबी 8 इंच की पाइपें उपलब्ध कराई गईं, जिससे पानी निकासी और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता मिली।
  • खेड़ी बरकी (हिसार): 800 एकड़ जमीन 5 फुट सड़े हुए पानी में डूब गई थी। ज़हरीला पानी मकानों की नींव तक पहुंच गया, दीवारों में भयानक दरारें आ गईं और घर ढहने की कगार पर पहुंच गए। इस संकट के समाधान के लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से तीन 15 हॉर्सपावर की मोटरें तथा 8,000 फीट लंबी 8 इंच की पाइपें उपलब्ध कराई गईं, जिन्होंने पानी निकासी और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • चिन्दड़ (फतेहाबाद): 2500 एकड़ ज़मीन झील बन चुकी थी। सड़े हुए पानी से बीमारियां फैलने लगी थीं और मवेशी चारे के बिना तड़प-तड़प कर मर रहे थे। प्रशासन की छोटी मोटरें इस समस्या के सामने बेअसर साबित हो रही थीं। इस गंभीर संकट के समाधान के लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से पहले दो शक्तिशाली मोटरें तथा 21,000 फीट पाइप उपलब्ध कराए गए। इसके बाद राहत कार्यों को और गति देने हेतु पुनः 7,000 फीट लंबी 8 इंच की पाइपें उपलब्ध कराई गईं, जिनसे जल निकासी और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता मिली।
  • चानौत (हिसार): 4500 एकड़ ज़मीन डूबने से मुख्य सड़कें कट गईं। ढाणियों में पानी घुसने के कारण कई परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर भागना पड़ा। इस संकट के समाधान के लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से पहले चार शक्तिशाली मोटरें तथा 8,000 फीट पाइप उपलब्ध कराए गए। इसके बाद राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने हेतु पुनः एक 10 हॉर्सपावर की मोटर तथा 8,000 फीट लंबी 8 इंच की पाइपें उपलब्ध कराई गईं, जिनसे जल निकासी और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता मिली।

​इन चारों गांवों में खरीफ की फसल पूरी तरह गल चुकी थी। मज़दूर दाने-दाने को मोहताज थे और बिजाई का समय तेज़ी से निकल रहा था। सरकार की तरफ से बस ‘फोटो सेशन’ और खोखले वादे ही मिले।

​संत रामपाल जी महाराज से पुकार

लगातार भुखमरी और बेबसी से जूझ रहे इन गांवों की पंचायतों ने जब देखा कि इंसानी सरकारों से कोई उम्मीद नहीं है, तो उन्होंने एक आखिरी उम्मीद के साथ अपनी व्यथा लिख कर अपनी-अपनी अर्जियां संत रामपाल जी महाराज के पास भेजी। इसके बाद जो हुआ, उसने मानवीय सहायता और परोपकार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

​धरातल पर उतरा ‘परमेश्वर का सेवा अभियान’

सरकारी दफ्तरों की तरह यहां महीनों का इंतज़ार नहीं करना पड़ा। संत रामपाल जी महाराज के द्वारा एक ऐतिहासिक और विशाल राहत अभियान शुरू हुआ। संत रामपाल जी महाराज ने इन चारों गांवों के अथाह समंदर को सुखाने के लिए कुल मिलाकर 56,600 फुट (17 किलोमीटर से अधिक) लंबी उच्च गुणवत्ता वाली 8-इंची पाइपलाइनें और 15 HP से लेकर 20 HP तक की दर्जनों विशाल मोटरें बिल्कुल निशुल्क सौंप दीं! स्टार्टर, केबल से लेकर सॉल्यूशन तक सब कुछ मुफ्त दिया गया ताकि लाचार किसानों का एक रुपया भी खर्च न हो।

​यह मदद केवल एक भौतिक सहायता नहीं है, बल्कि यह “परमेश्वर की दया” का जीता-जागता और पवित्र रूप है। दुनिया की व्यवस्थाएं अक्सर बजट या राजनीतिक फायदे-नुकसान का हिसाब लगाती हैं। लेकिन परमेश्वर के लिए हर इंसान उसका बच्चा है। चाहे सैमाण में छतों पर फंसे लोग हों या खेड़ी बरकी में गिरते मकानों के साये में डरे हुए परिवार; पिता उनकी रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। संत रामपाल जी महाराज ने इसी ईश्वरीय विधान को लागू किया।

​मौत के समंदर से 100% बिजाई तक का चमत्कार

दर्जनों भारी मोटरों ने रोहतक से लेकर हिसार तक दिन-रात अपनी पूरी ताकत से काम किया और उस 13,000 एकड़ के समंदर को गांवों की सीमाओं से बाहर निकाल फेंका।

​आज इन चारों गांवों का नजारा पूरी तरह बदल चुका है। जिन ढाणियों में पानी भरा था, वहां परिवार वापस लौट आए हैं। दरकते मकान सुरक्षित हो गए हैं। सबसे बड़ा चमत्कार खेतों में हुआ है, असंभव माने जाने वाले हालात के बावजूद, आज खेत सूख चुके हैं और चारों गांवों में 100% गेहूं की बिजाई हो चुकी है।

​इन जिलों के बच्चे, किसान और मज़दूर आज एक ही बात कहते हैं कि अगर संत रामपाल जी महाराज से वह चमत्कारिक मदद नहीं आती, तो उनका वजूद हमेशा के लिए मिट जाता। उनके लिए संत रामपाल जी महाराज सिर्फ एक संत नहीं, बल्कि साक्षात भगवान हैं जिन्होंने मौत के समंदर को चीरकर उन्हें नया जीवन दिया है।

Latest articles

गौ सुरक्षा एवं सेवा क्रांति: संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में देशभर की गौशालाओं में नि:शुल्क सुविधाएं

देशभर में गौ वंश के संरक्षण, संवर्धन और बेसहारा गौ माताओं की उचित देखभाल...

Youth Uprising in Delhi: CJP Parliament March Clashes with Security Forces Amid Mass Crackdown

The national capital was thrown into severe logistical and security upheaval on July 20,...

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के गांव नगलाकंजा के किसानों की डूबती दुनिया को संत रामपाल जी महाराज ने किया आबाद

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील का गांव नगलाकंजा पिछले तीन-चार सालों...
spot_img

More like this

गौ सुरक्षा एवं सेवा क्रांति: संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में देशभर की गौशालाओं में नि:शुल्क सुविधाएं

देशभर में गौ वंश के संरक्षण, संवर्धन और बेसहारा गौ माताओं की उचित देखभाल...

Youth Uprising in Delhi: CJP Parliament March Clashes with Security Forces Amid Mass Crackdown

The national capital was thrown into severe logistical and security upheaval on July 20,...

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के गांव नगलाकंजा के किसानों की डूबती दुनिया को संत रामपाल जी महाराज ने किया आबाद

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील का गांव नगलाकंजा पिछले तीन-चार सालों...