New year आ गया है। साल केआखिरी दिन को यादगार मनाने और New Year मनाना आज से लगभग 4,000 वर्ष पहले बेबीलीन नामक स्थान सेशुरू हुआ था। Generally, 365-366 दिनमिलाकर एक वर्ष बनता है ,प्रत्येक महीनेमें लगभग 30-31 दिन होते हैं। नया वर्ष मनाने की मान्यता ग्रेगोरियन कैलेंडर परआधारित है।

हर साल की तरह लोग New Year पर क्या-क्या करना है, पहले से ही डिसाइड कर लेते हैं। नौकरीपेशा लोग छुट्टी के लिए एप्लाई करके विदेशी और स्वदेश यात्रा पर निकल जाते हैं। Youngsters friends के साथ मां-बाप से आंख बचा कर पार्टी करते हैं जिसमें हर तरह का नशा (Intoxication) करने का मौका भी नहीं छोड़ते। हर मौके पर मांस खाना तो बहुत ही आम बात हो नए साल को वैलकम करने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं इसके लिए हमने कुछ लोगों से बात की।

गुड़गांव की रहने वाली, दिप्ती, 31 दिसंबर को यादगार बनाने के लिए अपने हसबैंड और खास दोस्तों के साथ गुड़गांव के ही एक फाइव स्टार होटल में डीनर ,डांस एंड फन पार्टी एंजाय करेंगी। We will have lots of drinks , food and dance all night.

दिल्ली के रहने वाले ,धर्मेंद्र, बच्चों की स्कूल की छुट्टी होने के कारण परिवार और खास दोस्तों के साथ इस दिन मसूरी में बर्फबारी के साथ एंजॉय करेंगे।दिल्ली के ही रहने वाले ,आशू , अपने दोस्तों के साथ गोआ में इस दिन को यादगार मनाएंगे।

बच्चे और नौजवानों से लेकर हर उम्र के लोग 31 दिसंबर ( गुजरते साल का आखिरी दिन) को भरपूर एंजाय करना चाहते हैं। आशू का कहना है , I just want to enjoy the 31st December’s Eve at the fullest, after all this is the last day of the year. I will wish all my family and friends the good, happy and healthy life ahead.

On the other hand, Sweety who works in a Multinational company in Noida, says I would be dancing all night on the tunes of my favourite DJ in town with my colleagues and peers.

हम में से बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो 31 दिसंबर को तो खूब पार्टी ,नाच गाना ,एक-दूसरे को New Year wishes देना ,बंब पटाखे जलाकर नए साल का स्वागत करते हैं और अगले दिन सुबह या शाम को समय के अनुसार मंदिर, चर्च ,गुरूद्वारे और मस्जिद में जाकर भगवान के सामने हाथ जोड़कर आते हैं। ऐसे ही एक भगत शंटी से हमने बात की जिन्होंने बताया मैं हर साल 1st January को मंदिर ज़रूर जाता हूं क्योंकि इस दिन मेरा जन्मदिन होता है तो it’s a ritual for me to thank God that I am still alive to live for some more years..Thank you god.

प्रत्येक महीने में तरह तरह के खास दिन होते हैं पूरा साल कैसे सुख दुख की धूप-छांव में बीत जाता है पता ही नहीं चलता। लोगों की मानसिकता केवल life को कैसे एंजॉय करना है यहीं तक सीमित हो चुकी है। हिंदू के लिए भगवान के मंदिर तक पहुंच कर घंटा बजाना, हाथ जोड़ना, शिव पर जल चढ़ाना और अपने और अपने परिवारजनों के लिए शारीरिक,भौतिक और आर्थिक सुविधाएं मांगना ही सब कुछ है। सिखों के लिए गुरूद्वारे जाकर गुरूग्रंथ साहिब जी के आगे शीष नवाना,जगह जगह लंगर कर देना या गुरु द्वारे में सेवा करके आना बहुत है। ईसाईयों के लिए गिरिजाघर में जाकर कैंडल जलाना ,प्रेयर करना और अपने पापों को कंफैस करना is more than enough . मुस्लिम भाई बहनों के लिए पांच समय की नमाज़ पढ़ लेना ,दान के लिए अपनी कमाई में से दसवां हिस्सा निकाल कर मस्जिद तक हो आना बहुत है। सच तो यह है कि हम ज़िंदगी और परमात्मा दोनों की अहमियत नहीं समझते। आप स्वयं विचार कीजिए क्या हम सब के इंसान होने का केवल इतना ही फ़र्ज़ है। 84 लाख योनियों के जीवन में जन्मते मरने के बाद एक बार यह दुर्लभ मनुष्य जीवन मिलता है और वो भी हम सभी नाच गाकर ,नशा करके ,जीव हत्या करके पेट भरके और मनमानी भक्ति को सही मानकर बर्बाद कर देते हैं और हमें पता भी नहीं लगता कि हम गलत को सही समझ कर भूल में अपना अनमोल जीवन व्यर्थ गंवा रहे हैं।

मनुष्य जीवन क्यों मिलता है

जब आप मां के गर्भ में थे तो दिन रात यही कहा करते थे कि परमात्मा मुझे इस जेल से बाहर निकालो मैं आजीवन आपकी भक्ति करूंगा। अपना कल्याण करवाऊँगा। परंतु यहां धरती पर आने के बाद आप मनमानी भक्ति और आचरण करते हो और जीवन यूं ही व्यर्थ चला जाता है। मृत्यु के बाद जब आप उस परमात्मा के दरबार में पहुंचते हो तब आपके पूर्व के जन्मों की फिल्म चलाई जाएगी जिनमें आप प्रत्येक बार जब-जब मानव जीवन प्राप्त हुआ था, आपने यही कहा था कि परमात्मा एक मानव जीवन और दे दो, कभी बुराई नहीं करूंगा। आजीवन आपकी भक्ति भी करूंगा। पूर्ण सतगुरू से दीक्षा लेकर कल्याण करवाऊँगा। जो गलती आपको न ढूंढ कर अबके मानव जीवन में हुई है, कभी नहीं दोहराऊँगा। निवेदन है कि इस मानव जीवन में आप अपने मानव जीवन का मूल उद्देश्य न भूलें। सतगुरू तत्वदर्शी संत की खोज करें उनके बताए अनुसार आध्यात्मिक रूचि को अपने अंदर पैदा करें। परमात्मा को पहचानें। केवल फिल्मी धुनों पर नाचना गाना,धन कमाना,कौठी बंगले बनाना ,मान ,पद ,प्रतिष्ठा अर्जित कर ,शादी ब्याह कर्म कांड में उलझ कर जीने को जीवन जीना नहीं कहते।  मानव जीवन प्राप्ति का मूल उद्देश्य ही परमात्मा प्राप्ति है। परमात्मा केवल मानव शरीर में रहकर ही मिल सकता है क्योंकि भक्ति तो केवल मानव शरीर से ही होगी।

‘‘कलयुग में मानवका व्यवहार‘‘अति गंदा औरपशुतुल्य हो गया है

प्रत्येक मनुष्य यहां स्वयं को सामने वाले से अधिक श्रेष्ठ समझता है। परमेश्वर कबीर जी ने अपने प्रिय शिष्य  धर्मदास जी को बताया ! कलयुग में कोई बिरला ही भक्ति करेगा अन्यथा पाखण्ड तथा विकार करेंगे।  कलयुग में मनुष्य भक्ति का स्वाँग करके भी जीवन-जन्म नष्ट करके जाएगा।

।।धर्मदास सुन बचन हमारा। कलयुग में साधुन के व्यवहारा।। चौंका बैठ करैं बहु शोभा। नारी देख बहु मन लोभा।। देख नारी सुंदर नैना। ताको दूर से मारें सैना।। जिसको अपना जानै भाई। ताको दें प्रसाद अधिकाई।। मुक्ति-मुक्ति सब संत पुकारें। सारनाम बिन जीवन हारें।। निःअक्षर वाकि है बाटि। बिना मम अंश न पावै घाटि।। दया धर्म औरां बतलावैं। आप दयाहीन करद चलावैं।। कलयुगी साधु ऐसे बेशर्मा। करावैं पाप बतावैं धर्मा।। और कहु भगतन की रीति। मम अंश से द्रोह काल दूत से प्रीति।। जो कोई नाम कबीर का गहही। उनको देख मन में दहही।।(जलते हैं।) लोभ देय निज सेव दृढ़ायी। चेला चेली बहुत बनाई।। पुनि तिन संग कुकर्म करहीं। कर कुकर्म नरक में परहीं।। जो कोई मम संत शब्द प्रकटाई। ताके संग सभी राड़ बढ़ाई।। अस साधु महंतन करणी। धर्मदास मैं तोसे वर्णी।। अम्बुसागर तुम सन भाषा। समझ बूझ तुम दिल में राखा।। धर्मदास सुनाया ज्ञाना। कलयुग केरैं चरित्रा बखाना।। जब आवै ठीक हमारी। तब हम तारैं सकल संसारी।। आवै मम अंश सत्य ज्ञान सुनावै। सार शब्द को भेद बतावै।। सारनाम सतगुरू से पावै। बहुर नहीं भवजल आवै।।

यह ‘‘मन कैसेपाप-पुण्य करवाता है‘‘

यह जीव विकारों के अधीन है यहां जीव को विकार नचा रहे हैं। काम , क्रोध, मोह, लोभ तथा अहंकार।  यह जीव को नचाता है। सुंदर स्त्री को देखकर उससे भोग-विलास करने की उमंग मन में उठाता है। स्त्री भोगकर आनन्द मन (काल निरंजन) ने लिया, पाप जीव के सिर रख दिया।

वर्तमान में सरकार ने सख्त कानून बना रखा है। यदि कोई पुरूष किसी स्त्री से बलात्कार करता है तो उसको दस वर्ष की सजा होती है। यदि नाबालिक से बलात्कार करता है तो आजीवन कारागार की सजा होती है। आनन्द दो मिनट का मन की प्रेरणा से तथा दुःख पहाड़ के समान। इसलिए पहले ही मन को ज्ञान की लगाम से रोकना हितकारी है। इन सर्व विकारों से बचकर मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र मार्ग तत्त्वज्ञान है ।

कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि :-

कबीर, साधक के लक्षण कहूँ, रहै ज्यों पतिव्रता नारी। कह कबीर परमात्मा को, लगै आत्मा प्यारी।। पतिव्रता के भक्ति पथ को, आप साफ करे करतार। आन उपासना त्याग दे, सो पतिव्रता पार।।

भक्ति करने से पाप नष्ट हो जाते हैं जो भक्ति की राह में रोड़े बनते हैं। यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा पापी से भी पापी व्यक्तियों के भी सम्पूर्ण पापों का नाश करके भयंकर रोग से भी मुक्त कर देते हैं।

यह जीवन नव वर्ष और मंगलमय होगा यदि सतगुरु में विश्वास दृढ़ होगा। सभी से निवेदन है कि तत्वदर्शी संत की खोज करें और अपनी आत्मा का कल्याण करवाएं। केवल भोग-विलास और सेलिब्रेशन को जीवन जीना न समझें। जीवन की महत्ता को समझने के लिए तत्वज्ञान और तत्वदर्शी संत का मार्ग दर्शन आवश्यक है। जीवन जीने की राह खोजने के लिए एक बार अवश्य पढ़ें पुस्तक ‘जीने की राह’ लेखक संत रामपाल जी महाराज जी।