​मामनपुरा गांव: जब उजड़ते परिवारों के लिए ईश्वरीय ढाल बने संत रामपाल जी महाराज

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​हरियाणा के हिसार जिले का मामनपुरा गांव एक ऐसी भयावह त्रासदी का गवाह रहा है, जिसने पूरे गांव को उजाड़ने के कगार पर ला खड़ा किया था। 5 महीने तक यह गांव सिर्फ पानी में नहीं डूबा था, बल्कि निराशा, कर्जे और पलायन के खौफनाक दलदल में धंसता जा रहा था। जब सरकारों ने फाइलों और बजट का बहाना बनाकर मुंह मोड़ लिया, तब संत रामपाल जी महाराज की असीम करुणा ने न केवल इस डूबते गांव को बचाया, बल्कि उन दर्जनों परिवारों को फिर से उनके घरों में बसा दिया जो दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर थे।

​पलायन और बेबसी का खौफनाक दौर

आज से कुछ हफ्ते पहले मामनपुरा का मंजर दिल दहला देने वाला था। गांव की लगभग 400 एकड़ उपजाऊ जमीन 4 से 5 फुट गहरे सड़े हुए पानी में कैद थी। खरीफ की फसल तो पूरी तरह गल कर खत्म हो चुकी थी, लेकिन मुसीबत का असली दौर तब शुरू हुआ जब पानी गांव की ढाणियों और घरों में घुसने लगा।

​जमीन का जलस्तर (Water Level) इतना ऊपर आ गया कि पीने के पानी के कुएं भी प्रदूषित हो गए। रास्ते बंद होने के कारण बच्चों का स्कूल जाना पूरी तरह ठप हो गया। सबसे बड़ा दर्द उन 100 परिवारों का था जिन्हें अपने पुश्तैनी घरों पर ताला लगाकर, अपने छोटे बच्चों और पशुओं के साथ शहरों में किराए के कमरों में शरण लेनी पड़ी। पूर्व बीडीसी मेंबर दिलबाग यादव बताते हैं, “हम डीसी और एसडीएम से लेकर हर नेता के पास गए। लेकिन हमें सिर्फ कोरे आश्वासन मिले, धरातल पर मदद की एक ईंट भी नहीं आई।”

​आधी रात का चमत्कार

लगातार 5 महीने की पीड़ा सहने के बाद, जब ग्रामीणों को एहसास हुआ कि अब उनका गांव कभी नहीं बचेगा, तब उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के राहत कार्यों के बारे में सुना। गांव के सरपंच, पूर्व चेयरमैन और अन्य मौजिज लोगों ने तुरंत एक प्रार्थना तैयार की और उसे मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ऑफिस (बरवाला) लेकर पहुंचे।

​इसके बाद जो हुआ, वह किसी सुखद चमत्कार से कम नहीं था। सरकारी दफ्तरों में जहां एक फाइल पास होने में महीनों लग जाते हैं, वहीं संत जी के दरबार में अर्जी लगते ही एक्शन हो गया। आधी रात को गांव की चौपाल पर राहत सामग्री से भरे सात बड़े ट्रक पहुंचे। संत रामपाल जी महाराज ने 14,000 फुट लंबी 8-इंची पाइपलाइन और 15-15 HP की दो अति शक्तिशाली मोटरें गांव को निशुल्क सौंप दीं।

​धरातल पर उतरा ‘परमेश्वर का संविधान’

यह मदद केवल एक भौतिक सहायता नहीं थी; यह असल में “परमेश्वर का संविधान” का जीता-जागता रूप था। दुनियावी व्यवस्थाएं लाभ-हानि देखकर काम करती हैं, लेकिन परमेश्वर हर इंसान को अपना बच्चा मानता है। संत रामपाल जी महाराज ने बिना यह देखे कि कौन किस जाति या धर्म का है, सिर्फ मानवता की पुकार सुनी। उन्होंने न केवल पाइप और मोटरें दीं, बल्कि उन्हें जोड़ने का सामान, केबल, और नट-बोल्ट तक अपनी तरफ से दिए, ताकि कर्जे में डूबे किसानों का एक भी रुपया खर्च न हो।

​उजड़े हुए घरों में लौटी खुशियां

मोटरों ने दिन-रात काम किया और उस जिद्दी गहरे पानी को गांव की सीमाओं से बाहर निकाल फेंका। पानी की गहराई को देखते हुए संत जी ने बाद में और भी पाइपें और एक अतिरिक्त मोटर भिजवाई, जिससे एक-एक बूंद पानी बाहर निकल गया। गांव वालों ने भविष्य की सुरक्षा के लिए इस 3 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) दबा दिया है।

​आज मामनपुरा गांव में खुशी के आंसू हैं। जो 100 परिवार अपना घर छोड़कर किराए पर रहने को मजबूर थे, वे आज वापस लौट आए हैं। उनके घरों के चूल्हे फिर से जल उठे हैं। स्कूल के रास्ते सूख चुके हैं और बच्चे वापस अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।

​किसानों के असली भगवान

जिन खेतों में 5 फुट पानी खड़ा था, वहां आज किसान जोरों-शोरों से गेहूं की बिजाई कर रहे हैं। किसान रामनिवास भावुक होकर कहते हैं, “अगर संत रामपाल जी महाराज मदद नहीं करते, तो हम पूरी तरह बर्बाद हो जाते। उन्होंने हमारे खेतों का पानी नहीं निकाला, बल्कि हमारी ज़िंदगी बचाई है। हमारे लिए वे साक्षात् भगवान के रूप में उतर कर आए हैं।”

​मामनपुरा को मिली मदद यह साबित करती है कि असली संत वही है जो मुसीबत के समय बिना किसी स्वार्थ के इंसान का हाथ थाम ले। संत रामपाल जी महाराज ने इस उजड़ते हुए समाज में फिर से जीने की आस जगाकर यह साबित कर दिया है कि वह केवल एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि मानवता के सच्चे और अमर मसीहा हैं।

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