जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के तहत सोनीपत के धनाना गांव के पांच किसानों को निःशुल्क उर्वरक, बीज और फसल सुरक्षा सामग्री मिली

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धनाना, सोनीपत: जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के अंतर्गत निःशुल्क उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक वितरण सेवा अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के तहत हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव के पांच पात्र किसानों को विस्तृत सर्वेक्षण, सत्यापन और ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ₹55,170 मूल्य के निःशुल्क उर्वरक, प्रमाणित बीज और फसल सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई गई।

Table of Contents

मुख्य बिंदु: किसान मजदूर बचाओ अभियान का तीसरा चरण

  • तीसरे चरण के तहत पात्र किसानों के लिए निःशुल्क उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक वितरण सेवा अभियान शुरू किया गया।
  • हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव में विस्तृत मैदानी सर्वेक्षण किया गया।
  • अभियान के तहत ऐसे किसानों को पात्र माना गया, जिनके पास दो एकड़ तक कृषि भूमि है, जो स्वयं खेती करते हैं तथा जिनकी आय का कोई प्रमुख वैकल्पिक स्रोत नहीं है।
  • सत्यापन के बाद पांच किसानों का चयन किया गया।
  • प्रत्येक किसान की कृषि आवश्यकताओं के अनुसार कुल ₹55,170 की सहायता प्रदान की गई।
  • भुगतान निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सीधे अधिकृत कृषि आदान केंद्र को हस्तांतरित किया गया।
  • किसानों ने अपनी जेब से कोई राशि खर्च किए बिना उर्वरक, प्रमाणित बीज और फसल सुरक्षा सामग्री प्राप्त की।

तीसरे चरण का अभियान बढ़ती खेती लागत पर केंद्रित

देश के छोटे और सीमांत किसानों को उर्वरकों, प्रमाणित बीजों और फसल सुरक्षा उत्पादों की बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत में लगातार वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के तहत आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के लिए निःशुल्क उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक वितरण सेवा अभियान शुरू किया।

अभियान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य पात्र किसानों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, ताकि उन्हें अपनी फसलों के लिए आवश्यक कृषि आदान बिना किसी वित्तीय कठिनाई के उपलब्ध हो सकें।

धनाना गांव में किया गया विस्तृत सर्वेक्षण

अभियान की शुरुआत हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव में विस्तृत मैदानी सर्वेक्षण से हुई। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार सर्वेक्षण टीमों ने गांव का दौरा कर घर-घर जाकर सत्यापन किया।

सर्वेक्षण के दौरान टीम ने निम्नलिखित पहलुओं का आकलन किया:

  • प्रत्येक किसान के स्वामित्व वाली कृषि भूमि
  • परिवार की आर्थिक स्थिति
  • किसान स्वयं खेती करता है या नहीं
  • आय का कोई वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध है या नहीं
  • वर्तमान फसल की आवश्यकताएं
  • उर्वरकों, प्रमाणित बीजों और फसल सुरक्षा उत्पादों की आवश्यकता

मैदानी सत्यापन पूरा होने के बाद सर्वेक्षण रिपोर्ट स्वीकृति के लिए प्रस्तुत की गई। मंजूरी मिलने के बाद प्रत्येक चयनित लाभार्थी की कृषि आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग बजट तैयार किया गया।

सर्वेक्षण के दौरान किसानों ने साझा की आर्थिक चुनौतियां

लाभार्थियों में शामिल किसान रतन ने बताया कि वह लगभग एक किल्ला कृषि भूमि पर धान और गेहूं की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आय मुख्य रूप से कुछ भैंसों से होने वाले डेयरी व्यवसाय पर निर्भर है तथा वे अक्सर उर्वरक और बीज उधार पर खरीदते हैं। बाद में दूध बेचने या फसल कटाई के बाद प्राप्त आय से उसका भुगतान करते हैं।

मैदानी दौरे के दौरान सर्वेक्षण टीम ने उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन करते हुए उनके रहन-सहन का भी दस्तावेजीकरण किया।

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एक अन्य लाभार्थी कर्मवीर ने सर्वेक्षण टीम को बताया कि वह लगभग पौने दो किल्ले कृषि भूमि पर खेती करते हैं और पांच सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि उर्वरक और बीज खरीदने के लिए धन की व्यवस्था करना लगातार कठिन होता जा रहा है तथा प्रत्येक फसल सीजन से पहले उन्हें अक्सर उधार लेना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि यदि उर्वरक, बीज और अन्य कृषि आदान उपलब्ध हो जाएं तो खेती से जुड़ा आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।

गांव के प्रतिनिधियों ने सर्वेक्षण निष्कर्षों का समर्थन किया

सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी चिन्हित लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति को लेकर अपनी राय साझा की।

गांव के सरपंच अनिल ने रतन को आर्थिक रूप से कमजोर किसान बताते हुए कहा कि उनका जीवनयापन सीमित कृषि भूमि और डेयरी आय पर निर्भर है। पूर्व सरपंच राम मेहर ने भी इस अनुशंसा का समर्थन करते हुए कहा कि संबंधित किसान अभियान के तहत निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।

मैदानी आकलन के आधार पर सर्वेक्षण टीम ने पुष्टि की कि स्वीकृति प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक पात्र किसान को उसकी वास्तविक कृषि आवश्यकताओं के अनुसार सहायता प्रदान की जाएगी।

अंतिम स्वीकृति से पहले पूरा किया गया सत्यापन

सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सभी चिन्हित किसानों की रिपोर्ट जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत की गई।

स्वीकृति मिलने के बाद चयनित किसानों को प्रक्रिया के अगले चरण के लिए सतलोक आश्रम धनाना धाम आमंत्रित किया गया।

अंतिम बजट तैयार करने से पहले प्रत्येक लाभार्थी की कृषि भूमि और खेती संबंधी आवश्यकताओं का एक बार फिर सत्यापन किया गया। उर्वरकों, प्रमाणित बीजों और फसल सुरक्षा सामग्री का सहायता पैकेज सभी किसानों को समान रूप से वितरित करने के बजाय प्रत्येक किसान की व्यक्तिगत कृषि आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारित किया गया।

अभियान के अनुसार, इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक चयनित किसान को उसकी वास्तविक खेती संबंधी जरूरतों के अनुरूप कृषि आदान उपलब्ध कराए जाएं।

सामग्री वितरण से पहले पूरी की गई ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक चयनित किसान की कृषि आवश्यकताओं के अनुसार अंतिम बजट तैयार किया गया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार उर्वरक, बीज और फसल सुरक्षा सामग्री के लिए स्वीकृत राशि निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सीधे अधिकृत कृषि आदान केंद्र के खाते में हस्तांतरित की गई।

प्रत्येक लाभार्थी को भुगतान की रसीद प्रदान की गई। इसके बाद इन्हीं रसीदों के आधार पर कृषि आदान केंद्र पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे किसान अपनी जेब से कोई भुगतान किए बिना स्वीकृत सामग्री प्राप्त कर सके।

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अभियान के प्रतिनिधियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से भुगतान सीधे लाभार्थियों के बजाय अधिकृत कृषि आदान केंद्र को किया गया।

अभियान के तहत पांच किसानों का चयन

सर्वेक्षण और सत्यापन के बाद धनाना गांव के पांच किसानों को किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के तहत सहायता के लिए स्वीकृत किया गया।

किसानप्रदान की गई सहायता
रतन सिंह₹11,415
कर्मवीर₹13,315
गुलाब सिंह₹11,415
कमल₹3,805
रोहतास₹15,220
कुल सहायता₹55,170

प्रत्येक लाभार्थी को दी गई सहायता राशि का निर्धारण सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित कृषि भूमि और खेती संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर किया गया।

कृषि आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध कराई गई सामग्री

भुगतान अधिकृत कृषि आदान केंद्र के खाते में जमा होने के बाद चयनित किसान अपनी भुगतान रसीद लेकर केंद्र पहुंचे।

स्वीकृत कृषि सामग्री उपलब्ध कराने से पहले पंजीकरण और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।

अभियान के अनुसार किसानों को उनकी व्यक्तिगत कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप निम्नलिखित कृषि आदान उपलब्ध कराए गए—

  • उर्वरक
  • प्रमाणित बीज
  • यूरिया
  • डीएपी अथवा समकक्ष पोषक उत्पाद
  • कीटनाशक
  • फफूंदनाशक
  • सूक्ष्म पोषक तत्व
  • जिंक
  • फसल सुरक्षा रसायन
  • पौधों की वृद्धि एवं जड़ों के विकास से संबंधित उत्पाद
  • वर्तमान धान सीजन के लिए आवश्यक अन्य फसल देखभाल सामग्री

अधिकृत कृषि आदान केंद्र ने पुष्टि की कि वितरण शुरू होने से पहले ही सभी पांच लाभार्थियों के लिए भुगतान प्राप्त हो चुका था।

किसानों ने कहा—सहायता से आर्थिक बोझ हुआ कम

कृषि सामग्री प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों ने अभियान के तहत मिली सहायता पर संतोष व्यक्त किया।

कर्मवीर ने कहा कि इस सहायता से खेती के लिए उर्वरक, बीज और कृषि दवाइयों की खरीद पर आने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। उन्होंने बताया कि आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता से फसल उत्पादन पर होने वाला खर्च घटेगा।

रतन ने भी स्वीकृत सामग्री प्राप्त करने के बाद प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उन्हें उर्वरक और फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए तत्काल धन की व्यवस्था करने के दबाव के बिना खेती जारी रखने में मदद मिलेगी।

लाभार्थियों के अनुसार, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि सर्वेक्षण से लेकर सामग्री वितरण तक की पूरी प्रक्रिया इतनी कम अवधि में पूरी हो जाएगी।

अभियान केवल एक फसल सीजन तक सीमित नहीं

अभियान के प्रतिनिधियों ने बताया कि निःशुल्क उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक वितरण सेवा अभियान केवल एक बार की सहायता तक सीमित नहीं है।

कार्यक्रम के दौरान साझा की गई जानकारी के अनुसार निर्धारित सर्वेक्षण और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर पात्र लाभार्थियों को भविष्य की फसलों के लिए भी उनकी कृषि आवश्यकताओं के अनुसार सहायता प्रदान की जा सकती है।

अभियान का उद्देश्य खेती की लागत कम करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को खेती के लिए आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध कराना है।

अभियान के तीसरे चरण के लिए पात्रता

कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुसार निम्नलिखित किसान सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं—

  • जिनके पास दो एकड़ या उससे कम कृषि भूमि हो।
  • जो स्वयं अपनी कृषि भूमि पर खेती करते हों।
  • जिनकी आय का खेती के अलावा कोई प्रमुख वैकल्पिक स्रोत न हो।
  • जो निर्धारित सर्वेक्षण एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी करें।

आवेदन सतलोक आश्रम धनाना धाम में जमा किए जाते हैं। इसके बाद पात्रता और कृषि आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण किया जाता है।

सर्वेक्षण आधारित सहायता की मुख्य जानकारी

विवरणजानकारी
अभियानकिसान मजदूर बचाओ अभियान का तीसरा चरण
पहलनिःशुल्क उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक वितरण सेवा अभियान
स्थानधनाना गांव, सोनीपत, हरियाणा
लाभार्थीपांच किसान
कुल सहायता₹55,170
वितरण प्रक्रियासर्वेक्षण, सत्यापन, अधिकृत कृषि आदान केंद्र को ऑनलाइन भुगतान तथा उसके बाद सामग्री वितरण
मुख्य उद्देश्यआर्थिक रूप से कमजोर किसानों की खेती की लागत कम करना

धनाना गांव में सर्वेक्षण से वितरण तक पूरी हुई प्रक्रिया

धनाना गांव में किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण का क्रियान्वयन एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया गया। इसकी शुरुआत मैदानी सर्वेक्षण, लाभार्थियों के सत्यापन और कृषि आवश्यकताओं के आकलन से हुई। स्वीकृति मिलने के बाद अधिकृत कृषि आदान केंद्र को ऑनलाइन भुगतान किया गया, जिसके माध्यम से चयनित पांच किसानों को अपनी जेब से कोई राशि खर्च किए बिना ₹55,170 मूल्य के उर्वरक, प्रमाणित बीज और फसल सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई गई। अभियान का उद्देश्य आवश्यकता आधारित कृषि सहायता के माध्यम से पात्र लघु किसानों की खेती की लागत कम करने में सहयोग देना है।

किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1. किसान मजदूर बचाओ अभियान का तीसरा चरण क्या है?
यह एक ऐसा अभियान है जिसके तहत सर्वेक्षण और सत्यापन के बाद पात्र किसानों को निःशुल्क उर्वरक, प्रमाणित बीज और फसल सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

प्रश्न 2. रिपोर्ट के अनुसार इस चरण का क्रियान्वयन कहां किया गया?
रिपोर्ट के अनुसार यह अभियान हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव में लागू किया गया।

प्रश्न 3. कितने किसानों को सहायता प्रदान की गई?
कुल पांच किसानों का चयन किया गया और उन्हें उनकी कृषि आवश्यकताओं के अनुसार सहायता प्रदान की गई।

प्रश्न 4. कुल कितनी वित्तीय सहायता प्रदान की गई?
पांचों लाभार्थियों को कुल ₹55,170 की सहायता प्रदान की गई।

प्रश्न 5. अभियान के तहत कौन आवेदन कर सकता है?
दो एकड़ तक कृषि भूमि रखने वाले, स्वयं खेती करने वाले तथा आय का कोई प्रमुख वैकल्पिक स्रोत न रखने वाले किसान निर्धारित सर्वेक्षण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवेदन कर सकते हैं।

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