Phase-II: जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने हरियाणा के जोहरखेड़ा गांव को जलभराव से राहत के लिए बढ़ाया सहयोग, तकनीकी सर्वे के बाद 11,000 फीट पाइपलाइन स्वीकृत

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हरियाणा के पलवल जिले के जोहरखेड़ा गांव ने दशकों पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। ग्रामीणों द्वारा सहायता की अपील किए जाने के बाद किसान मज़दूर बचाओ अभियान – Phase-II के तहत तकनीकी सर्वे कराया गया। सर्वे के आधार पर प्रभावित कृषि भूमि से जल निकासी के लिए 11,000 फीट पाइपलाइन और उससे संबंधित सामग्री ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराई गई।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों तक सरकार और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की। अनुरोध मिलने पर उनके निर्देशानुसार सर्वे टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर जल निकासी के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था का आकलन किया।

मुख्य बिंदु: जोहरखेड़ा गांव जलभराव राहत – Phase-II

  • हरियाणा के पलवल जिले का जोहरखेड़ा गांव लगभग 60 वर्षों से जलभराव की समस्या से जूझ रहा है।
  • करीब 150–200 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित रही, जबकि लगभग 60 एकड़ भूमि वर्षों से बंजर पड़ी हुई है।
  • तकनीकी सर्वे में जल निकासी के दो बिंदुओं की पहचान की गई।
  • किसान मज़दूर बचाओ अभियान – फेज़-II के तहत कुल 11,000 फीट 8 इंच की पाइपलाइन स्वीकृत की गई।
  • पाइपलाइन बिछाने के बाद दो 10 एचपी मोटर लगाने की भी स्वीकृति दी गई।
  • ग्रामीणों के अनुसार, अनुरोध के 24 घंटे के भीतर सर्वे और सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

दशकों पुराने जलभराव से प्रभावित रही कृषि भूमि

जोहरखेड़ा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि लगभग छह दशक से जलभराव गांव की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल रहा है। मानसून के दौरान कई खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भर जाता है, जबकि एक अन्य प्रभावित क्षेत्र में दो से तीन फीट तक जलभराव बना रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय तक पानी भरे रहने के कारण लगभग 150–200 एकड़ भूमि की कृषि उत्पादकता प्रभावित हुई, जबकि करीब 60 एकड़ भूमि वर्षों से खेती के लिए अनुपयुक्त बनी हुई है। उनका कहना है कि लगातार जलभराव के कारण मिट्टी में लवणता भी बढ़ गई, जिससे खेती करना और अधिक कठिन हो गया।

किसानों ने बताया कि कई बार लगभग 10 एकड़ भूमि के मालिक किसानों को भी लगातार फसल खराब होने के कारण अपने परिवार और पशुओं के लिए स्थानीय मंडियों से अनाज खरीदना पड़ा।

दो स्थानों पर किया गया तकनीकी सर्वे

ग्रामीणों के अनुरोध के बाद सर्वे टीम ने जोहरखेड़ा गांव पहुंचकर दो अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी निरीक्षण किया।

सर्वे बिंदुप्रभावित क्षेत्रपाइपलाइन की लंबाई
बिंदु-1लगभग 60 एकड़4,000 फीट
बिंदु-2लगभग 100 एकड़7,000 फीट
कुलप्रभावित कृषि भूमि11,000 फीट

सर्वे टीम के सदस्यों ने बताया कि पहले बिंदु पर नाले तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 4,000 फीट पाइपलाइन की आवश्यकता है, जबकि दूसरे बिंदु पर लगभग 7,000 फीट पाइपलाइन की ज़रूरत होगी। इस प्रकार कुल 11,000 फीट पाइपलाइन का प्रस्ताव तैयार किया गया।

सर्वे टीम ने दो 10 एचपी मोटरों की भी स्वीकृति दी, जिन्हें योजना के अनुसार भूमिगत पाइपलाइन बिछने के बाद स्थापित किया जाएगा।

ग्रामीणों ने बताई समस्या की गंभीरता

सर्वे के दौरान कई ग्रामीणों और किसानों ने जलभराव से होने वाली वर्षों पुरानी परेशानी साझा की।

गांव के सरपंच मनोज ने बताया कि वर्षों से सरकार के समक्ष कई बार मांग उठाई गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि मानसून की पहली बारिश के साथ ही प्रभावित खेत बड़े जलाशय का रूप ले लेते हैं और महीनों तक पानी भरा रहता है।

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72 वर्षीय एक किसान ने बताया कि वह लगभग 60 वर्षों से इस समस्या को देख रहे हैं। उनके अनुसार, खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने और मिट्टी की बढ़ती लवणता के कारण खेती करना बेहद कठिन हो गया है तथा कुछ खेत पूरे वर्ष खाली पड़े रहते हैं।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव के लगभग 70 से 75 प्रतिशत परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जलभराव की समस्या से प्रभावित हैं।

स्वीकृति के बाद ग्राम पंचायत को सौंपी गई सामग्री

सर्वे टीम के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद ग्राम पंचायत को निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध कराई गई—

  • 11,000 फीट 8 इंच की पाइपलाइन
  • पाइपलाइन स्थापना के लिए आवश्यक सहायक सामग्री
  • एयर वाल्व
  • बेंड और फिटिंग
  • प्लेटें
  • टी-जॉइंट
  • नट-बोल्ट
  • रबर शीट
  • फेविकोल तथा अन्य संबंधित सामग्री

सर्वे टीम ने ग्रामीणों को बताया कि भूमिगत पाइपलाइन का कार्य पूरा होने और पुनः निरीक्षण के बाद स्वीकृत दोनों 10 एचपी मोटर भी उपलब्ध करा दी जाएंगी।

गांव में सामग्री पहुंचने पर ग्रामीणों ने किया स्वागत

राहत सामग्री गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने सार्वजनिक स्वागत किया। इस दौरान ट्रैक्टर, फूल-मालाओं और पाइपलाइन लेकर पहुंचे वाहनों के काफिले के साथ स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सरपंच ने बताया कि गांव के प्रतिनिधिमंडल ने एक दिन पहले ही अपनी मांग रखी थी और उसी दौरान आश्रम में रहते हुए सर्वे टीम का उनके पास फोन आ गया। उनके अनुसार, अगले ही दिन सुबह सामग्री गांव पहुंच गई।

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कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहले आसपास के गांवों में भी इसी प्रकार की सहायता देखी थी, जिसके बाद उन्होंने भी तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता का अनुरोध करने का निर्णय लिया।

दो जल निकासी बिंदुओं पर शुरू होगा पाइपलाइन कार्य

ग्राम पंचायत ने बताया कि जल्द ही खुदाई का कार्य शुरू किया जाएगा और कुछ दिनों के भीतर दोनों स्थानों पर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

स्वीकृत योजना के अनुसार, भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क तैयार होने के बाद दोनों 10 एचपी मोटर स्थापित की जाएंगी, जिनकी सहायता से दूसरे सर्वे बिंदु से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित नाले तक जमा पानी पहुंचाया जाएगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित जल निकासी व्यवस्था लागू होने के बाद प्रभावित कृषि भूमि पर खेती की स्थिति में सुधार होगा।

वीडियो देखें:  कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 7

जोहरखेड़ा गांव के लिए इस पहल का महत्व

ग्रामीणों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान किया गया 11,000 फीट लंबा भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क लगभग 200 एकड़ प्रभावित कृषि भूमि से जलभराव की समस्या दूर करने में सहायक होगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसान मज़दूर बचाओ अभियान – फेज़-II के तहत संत रामपाल जी महाराज से अनुरोध करने के बाद सर्वे, स्वीकृति और सामग्री उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया लगभग 24 घंटे के भीतर पूरी कर दी गई। आज गांव संत रामपाल जी महाराज का खूब धन्यवाद कर रहा है। अधिक जानकारी के लिए SA News यूट्यूब चैनल पर विज़िट करें।

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