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आज हम आपको कबीर साहेब के चमत्कार के बारे में बताएँगे. कबीर साहेब लगभग आज से 600 वर्ष पहले इस धरती पर आये और बहुत सी लीलाएं करके चले गए। कबीर साहेब की लीलाओं का जिक्र कबीर सागर में भी मिलता है। कबीर साहेब के 64 लाख शिस्य थे, यह आपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। तो चलिए आज हम आपको कबीर साहेब की कुछ लीलाओं के बारे में बताते हैं।

सेऊ को जीवित करना

एक बार कबीर साहेब अपने दो सेवकों (कमाल और फरीद) के साथ अपने शिष्य सम्मन के घर गए। सम्मन वैसे तो बहुत निर्धन था, लेकिन उसकी आस्था कबीर साहेब में बहुत थी। सम्मन इतना निर्धन था कि बहुत बार तो उसके पास खाने के लिए खाना भी नहीं होता था, उस दिन भी कुछ ऐसा ही था। जब नेकी (सम्मन की पत्नी) ने देखा कि उधार मांगने पर भी कोई आटा उधार नहीं दे रहा तो उसने सेऊ और सम्मन को कहा कि तुम चोरी कर आओ, जब हमारे पास आटा होगा तो हम वापिस कर देंगे। जब सेऊ चोरी करने गया तो पकड़ा गया और सम्मन ने बदनामी के डर से सेऊ की गर्दन काट दी। सुबह होते ही नेकी ने भोजन तैयार किया और कबीर साहेब को एहसास तक नहीं होने दिया कि सेऊ मर चुका है। कबीर साहेब तो परमात्मा थे उन्होंने सिर्फ इतना कहा था

आओ सेऊ जीम लो, यह प्रसाद प्रेम।
शीश कटत हैं चोरों के, साधों के नित्य क्षेम।।

इतना कहते ही सेऊ भागा चला आया और खाना खाने लगा

स्वामी रामानंद को जीवित करना

जब सिकंदर लोधी के हाथों रामानंद का कत्ल हो गया तो सिकंदर लोधी बहुत उदास हो गया और कबीर साहेब के चरणों में पड़कर रोने लगा। कबीर जी कुटिया के अंदर गए और केवल इतना कहा था कि उठो गुरुदेव आरती का समय हो गया, उसी वक़्त रामानंद जी का शीश धड़ पर जुड़ गया। यह लीला देखकर सिकंदर लोधी और बाकी सब हैरान रह गए।

कबीर साहेब द्वारा शिष्यों की परीक्षा लेना

कबीर साहेब के चमत्कार: कबीर साहेब से नाम दीक्षा लेने के बाद सभी को अद्भुत लाभ हुए, लेकिन कबीर साहेब यह देखना चाहते थे कि उनके शिष्यों ने उनको कितना समझा है। कबीर साहेब, रविदास जी और एक वैश्या जो अब उनकी शिष्य बन गई थी, को साथ लेकर बीच बाजार में से निकल गए, यह देखकर सभी कबीर साहेब की निंदा करने लगे। इस पर कबीर साहेब कहते हैं

कबीर, गुरू मानुष कर जानते, ते नर कहिए अंध। होवें दुःखी संसार में, आगे यम के फंद।।
कबीर, गुरू को मानुष जो गिनै, और चरणामृत को पान। ते नर नरक में जाएंगे, जुग जुग होवैं श्वान।।

कबीर साहेब तो सिर्फ लीला कर रहे थे, लेकिन सभी लोग यह भी भूल गए यह वही कबीर जी हैं, जिन्होंने उनको इतने सुख दिये हैं।

भैसें से वेद मंत्र बुलवाना

bhese se mantra bulwana

कबीर साहेब के चमत्कार: कहते हैं एक बार तोताद्री नाम के स्थान पर एक सत्संग हो रहा था और कबीर साहेब भी रामानंद जी के साथ पहुंचे। वहाँ पर भंडारे में चार- चार मंत्र सुनाकर सभी ब्राह्मण भोजन भंडारे में शामिल हो रहे थे। जब कबीर जी की बारी आई तो परमेश्वर कबीर जी ने थोड़ी दूरी पर खड़े भैसें को बुलाया और कहा इनको वेदों के मंत्र सुना। भैसें ने मंत्र सुनाए और कबीर साहेब ने कहा जा भैसां राम भोजन करले। जब सभी पंडितो ने यह लीला देखी तो बहुत शर्मिंदा हुए।

जगन्नाथ मंदिर की पुरी (उड़ीसा) में स्थापना

कबीर साहेब के चमत्कार: कहते हैं उड़ीसा के इन्द्रदमन राजा को कृष्ण जी ने दर्शन देकर मंदिर बनाने को कहा लेकिन उसको समुंदर किसी कारण से बनने नहीं दे रहा था l कृष्ण जी ने यह भी कहा था कि मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं करनी केवल एक पंडित वहाँ रहेगा जो इसका इतिहास बतायेगा। कबीर जी ने वह जगन्नाथ पुरी मंदिर भी बनवाया और समुंदर की लहरों को मंदिर तक नहीं पहुँचने दिया, इससे पहले पांच बार समुंदर वो मंदिर गिरा चुका था।

नल और नील को शरण में लेना

एक बार एक गाँव में नल और नील नाम के मौसी के पुत्र रहते थे और दोनों मानसिक रोग से ग्रस्त थे। उन्होंने बहुत वैद्य को दिखाया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। एक दिन उन्होंने कबीर साहेब (जो कि त्रेता युग में मुन्निंदर् ) का सत्संग सुना तो उन्होंने कबीर जी से दीक्षा ले ली जिससे उनका मानसिक रोग ठीक हो गया।

समुंदर पर पुल बनवाना

कबीर साहेब के चमत्कार: जब सीता जी का हरण हुआ तो श्री राम चंद्र जी समुंदर पर पुल बनवा रहे थे, लेकिन बन नहीं रहा था। इसपर श्री राम चंद्र जी ने परमात्मा से अर्ज की और परमात्मा कबीर साहेब ने उनकी मदद की। कबीर साहेब ने मुनींद्र रूप में अपनी सौटी से एक पहाड़ी के आस- पास रेखा खीचकर सभी पत्थर हल्के कर दिये। फिर बाद में उन पत्थरों को तराशकर समुंदर पर पुल बनाया गया। इस पर धर्मदास जी कहते हैं :-

रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरू से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिन्धु पर शिला तिराने वाले।
धन-धन सतगुरु सत कबीर, भक्त की पीर मिटाने वाले।

रंका और बंका की कथा

रंका और बंका परमात्मा कबीर साहेब के बहुत अच्छे भक्त थे और उन्होंने कबीर जी का ज्ञान अच्छे से समझ रखा था। लेकिन वह बहुत गरीब थे, उनको परमात्मा कबीर जी ने बहुत बार धन देने की कोशिश की लेकिन वह मना कर देते थे। एक दिन वह बैठे सत्संग सुन रहे थे और उनकी बेटी अंबिका भागी हुई आई कहने लगी झोंपड़ी को आग लग गयी है। इस पर माता बंका ने पूछा क्या बचा है? अंबिका ने कहा एक चारपाई बची है, बंका ने कहा उसे भी उस आग मे फूक आ, उस चारपाई की वजह से हमारा सत्संग से ध्यान टूटा।

सिकंदर लोधी का जलन का रोग ठीक करना

कबीर साहेब की मगहर लीला

कबीर जी काशी से मगहर (maghar) कब और क्यों

मगहर के बारे में उस वक़्त यह धारणा फैला रखी थी कि वहाँ मरने वाले की मुक्ति नही होती। परमात्मा कबीर जी ने कहा में वहाँ प्राण त्याग करूँगा। बीर सिंह बघेल और बिजली खां पठान इस बात पर लड़ने लगे कि हम कबीर साहेब का संस्कार करेंगे। लेकिन कबीर साहेब की मगहर लीला के दौरान शरीर नही मिला सिर्फ सफेद चादर के नीचे गुलाब के फूल मिले थे। जब सभी ने यह देखा तो हैरान रह गए , बिजली खां पठान और बीर सिंह बघेल को अपनी गलती का एहसास हुआ। यह फूल दोनों ने आधे – आधे बाँट लिए।

आज संत रामपाल जी महाराज के रूप में कबीर साहिब ने अपना नुमाइंदा भेजा हुआ है आज उनके अनुयायियों को वही लाभ हो रहे हैं जो पहले कबीर साहेब अपने शिष्यों को दिया करते थे। आप भी संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले। संत रामपाल जी महाराज के बारे में अधिक जानने के लिए आप उनका सत्संग साधना TV पर रात 7:30 pm