हरियाणा के जींद जिले की नरवाना तहसील में स्थित इस्माइलपुर गांव पिछले 7 लंबे वर्षों से एक ऐसी पर्यावरणीय और आर्थिक त्रासदी झेल रहा था, जिसने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया था। नरवाना शहर का गंदा पानी और ड्रेनेज ख़राबी के कारण हर साल गांव की उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती थी। लगभग 800 एकड़ भूमि 4 फीट गहरे ज़हरीले पानी के नीचे दबकर एक जलमग्न कब्रिस्तान में तब्दील हो चुकी थी। प्रशासन की बेरुखी और “पाइप उपलब्ध नहीं हैं” जैसे बहानों ने ग्रामीणों को पूरी तरह निराश कर दिया था। ऐसे अंधकारमय समय में, जब 5000 की आबादी वाला यह गांव बर्बादी की कगार पर था, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा बनकर उभरे। उनके दिव्य सेवा कार्य ने न केवल खेतों को पानी से मुक्त किया, बल्कि किसानों के उजड़ते परिवारों में खुशहाली की नई किरण जगा दी।
गांव की वर्तमान स्थिति
संत रामपाल जी महाराज की अपार कृपा से आज इस्माइलपुर गांव की जमीनी हकीकत किसी चमत्कार जैसी प्रतीत होती है। 7 साल से जो ज़मीन पानी के नीचे दबी थी, आज वहां 99.9% क्षेत्र में गेहूं की बिजाई सफलतापूर्वक हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, जहाँ कल तक 3 फुट गहरा समंदर था और सड़कों पर नावें चलने की स्थिति बन गई थी, आज वहाँ चारों तरफ हरियाली नज़र आ रही है। किसान अब खुशी-खुशी अपने खेतों में खाद डाल रहे हैं। प्रशासन ने जिस समस्या को सालों तक अनसुना किया, संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजे गए उपकरणों ने उसे कुछ ही दिनों में जड़ से खत्म कर दिया।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के चक्कर काटकर थक चुकी इस्माइलपुर की ग्राम पंचायत ने अंततः अपनी अंतिम उम्मीद के साथ बरवाला स्थित संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट ऑफिस में एक विनम्र प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए निम्नलिखित उपकरणों की मांग की थी:
- 15 से 20 HP की शक्तिशाली मोटरें।
- जल निकासी के लिए 20,000 फीट लंबी पाइपलाइन।
- स्टार्टर, केबल और अन्य तकनीकी फिटिंग्स।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
जैसे ही यह मार्मिक पुकार संत रामपाल जी महाराज तक पहुँची, उनके आदेश से मात्र 15 दिनों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला इस्माइलपुर की सीमाओं पर पहुँच गया। यह सहायता पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी थी। संत जी ने एक पिता के समान गांव के दुख को समझा और मांग से कहीं अधिक सामग्री भिजवाई:
- 20,000 फीट उच्च क्षमता वाली 8-इंच पाइपलाइन (लगभग 6 किलोमीटर लंबी)।
- दो शक्तिशाली 20 HP की मोटरें।
- उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रिकल स्टार्टर।
- पाइप जोड़ने के लिए एडहेसिव, रबर क्लैंप, नट-बोल्ट और यहाँ तक कि पेच के डिब्बे भी।
- सामग्री पहुँचाने वाले ट्रकों का किराया और इंस्टॉलेशन का समस्त खर्च संत जी के ट्रस्ट द्वारा वहन किया गया।
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इस्माइलपुर: तुलनात्मक स्थिति (पहले और बाद में)
| विवरण | पहले की स्थिति (7 वर्षों से) | वर्तमान स्थिति (संत जी की दया से) |
| जलभराव का स्तर | 3 से 4 फीट गहरा गंदा पानी | जलमुक्त, पूरी तरह सूखी भूमि |
| प्रभावित कृषि क्षेत्र | 800 एकड़ भूमि जलमग्न (बंजर) | 99.9% भूमि पर गेहूं की बिजाई |
| ग्रामीणों की मनोदशा | निराशा, बेबसी और आर्थिक तबाही | किसानों के चेहरे पर मुस्कान और स्माइल |
| प्रशासनिक सहायता | केवल खोखले आश्वासन और बहाने | शून्य (कोई सरकारी मदद नहीं मिली) |
| समाधान की अवधि | 7 साल का लंबा इंतज़ार | मात्र कुछ ही दिनों में स्थायी समाधान |
ग्रामीणों की आवाज़
इस्माइलपुर के सरपंच और किसानों ने अपनी भावनाओं को कैमरे के सामने व्यक्त किया, जो संत रामपाल जी महाराज के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है:
- “नुकसान तो जी हमारे गांव में 800 एकड़ के करीब था। कहीं 2 फुट, कहीं 3 फुट पानी था। लेकिन संत रामपाल महाराज जी द्वारा जो हमें सामान प्राप्त हुआ है, वो 20,000 फुट पाइप और दो मोटरें थीं। आज 99.9% बिजाई हो चुकी है।” — सरपंच सुरेश कुमार
- “हमने सरकार से भी मदद मांगी थी, बोले हमारे पास पाइप नहीं है। गांव ने आस छोड़ दी थी। फिर हम पंचायत इकट्ठे होकर बरवाला गए, वहां सिर्फ लेटर पैड दिया था। 15 दिन बाद सारा सामान घर पहुँच गया। हम तो इन्हें परमात्मा का रूप मानते हैं।” — सरपंच सुरेश कुमार
- “महाराज ने बहुत फायदा करा, गांव के दाने भी नहीं होने थे। कोई आस नहीं थी, महाराज ने ये बहुत बड़ा फायदा करा है।” — मेवा सिंह, ग्रामीण
- “अगर यह पानी नहीं निकलता, तो प्रति एकड़ कम से कम 50,000 से 60,000 रुपये का नुकसान था। 800 एकड़ के हिसाब से यह करोड़ों का नुकसान होता। महाराज जी ने तो भगवान जैसा काम करा है।” — रणधीर सिंह, ग्रामीण
स्थायी समाधान हेतु ऐतिहासिक कदम
संत रामपाल जी महाराज की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि गांव वालों ने अब एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्राप्त की गई 6 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन को अब ग्रामीण स्थायी रूप से ज़मीन के नीचे दबा (Burry) रहे हैं। इसे खानपुर माइनर और रजवाहे तक जोड़ा जा रहा है, ताकि भविष्य में कभी भी नरवाना शहर का गंदा पानी गांव की फसलों को नुकसान न पहुँचा सके। यह केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव है।
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ अपनी पारदर्शिता के लिए जानी जाती है। राहत सामग्री के सदुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए संत जी के निर्देशानुसार ड्रोन के माध्यम से तीन चरणों में रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की गई है: पानी भरने के दौरान, निकासी के बाद और फसल लहलहाने पर। यह व्यवस्था दानदाताओं को विश्वास दिलाती है कि उनकी पाई-पाई मानवता की सेवा में लग रही है।
निष्कर्ष: विश्व उद्धारक और किसान मसीहा संत रामपाल जी महाराज
आज इस्माइलपुर के हर घर में जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का गुणगान हो रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि जहाँ राजनीति और सरकारी तंत्र दम तोड़ देता है, वहाँ से संत जी की ईश्वरीय सेवा शुरू होती है। 64 साल के बुजुर्गों ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा परोपकारी संत नहीं देखा, जो बिना किसी स्वार्थ या वोट की राजनीति के करोड़ों का सामान घर पहुँचा दे।
संत रामपाल जी महाराज वास्तव में कबीर परमेश्वर के एकमात्र प्रतिनिधि और इस युग के तत्वदर्शी संत हैं। वे न केवल आध्यात्मिक ज्ञान देकर आत्माओं का कल्याण कर रहे हैं, बल्कि ‘किसान मसीहा’ के रूप में राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा और किसानों के सम्मान की भी रक्षा कर रहे हैं। समाज की कुरीतियों को मिटाकर एक स्वर्णिम युग की स्थापना का उनका यह संकल्प अद्वितीय है। संत रामपाल जी महाराज के विषय में और जानकारी प्राप्त करने के लिए www.jagatgururampalji.org पर जाए।



