हरियाणा के रोहतक जिले की तहसील कलानौर का एक छोटा-सा गांव है जिंदरान कला। सामान्य दिनों में यह गांव हरे-भरे खेतों, मेहनती किसानों और शांत ग्रामीण जीवन के लिए जाना जाता है। लेकिन कुछ महीनों पहले यहां की तस्वीर बिल्कुल बदल गई थी। चारों ओर पानी ही पानी था। खेतों में खड़ी फसलें डूब चुकी थीं, पशुओं के लिए चारा खत्म होने लगा था और किसानों के चेहरे पर भविष्य को लेकर गहरी चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
लगभग 1000 एकड़ खेती की जमीन पानी में डूबी हुई थी। खेतों में पानी इतना भर गया था कि अगली फसल बोने की उम्मीद भी खत्म होती नजर आ रही थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि तीन-चार महीने से पानी लगातार जमा था और निकलने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।
गांव के किसान पहले सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे—किसी ने डीसी के पास गुहार लगाई, किसी ने एसडीएम और बीडीओ से मिलकर समस्या बताई। लेकिन समाधान कहीं से नहीं मिला। धीरे-धीरे किसानों की उम्मीदें टूटने लगीं।
इसी निराशा के बीच गांव के कुछ लोगों ने आखिरी उम्मीद के रूप में संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अपनी प्रार्थना पहुंचाई। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही दिन हालात बदलने वाले हैं।
जब खेतों में खड़ा पानी किसानों की उम्मीदें डुबो रहा था
जिंदरान कला के किसानों के लिए खेती सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यहां का हर घर किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर है।
लेकिन जब खेतों में पानी भर गया तो किसान खुद को असहाय महसूस करने लगे। गांव के एक किसान ने भावुक होकर बताया:
“पहली फसल तो पहले ही खराब हो चुकी थी। अगर पानी नहीं निकलता तो अगली फसल भी नहीं बो पाते। हमारे लिए तो यह जीवन-मरण का सवाल बन गया था।”
पानी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं था। गांव की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होने लगी थी।
- पशुओं के लिए चारा नहीं बच रहा था
- कई रास्ते कीचड़ और पानी से बंद हो गए थे
- बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया था
- मजदूरों के घरों में भी रोज़गार का संकट पैदा हो गया था
एक बुजुर्ग किसान ने कहा:
“किसान की फसल डूब जाए तो सिर्फ किसान नहीं, पूरा गांव प्रभावित होता है। किसान के घर चूल्हा जलेगा तो मजदूर के घर भी जलेगा।”
ऐसे हालात में गांव के लोगों ने मिलकर समाधान खोजने की कोशिश की, लेकिन पानी निकालने के लिए जो संसाधन चाहिए थे, वह गांव के बस की बात नहीं थी।
आखिरी उम्मीद के तौर पर संत के दरबार में पहुंची गांव की पुकार
जब हर रास्ता बंद नजर आने लगा, तब गांव के कुछ प्रतिनिधि और पंचायत के लोग संत रामपाल जी महाराज के पास प्रार्थना लेकर पहुंचे।
उन्होंने एक पत्र के माध्यम से गांव की स्थिति बताई कि करीब 1000 एकड़ खेत पानी में डूबे हैं और अगर जल्द पानी नहीं निकला तो अगली फसल भी खत्म हो जाएगी। बताया जाता है कि जैसे ही यह प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, उसी समय राहत देने का निर्णय लिया गया। गांव के लोगों को शायद यकीन नहीं था कि इतनी जल्दी प्रतिक्रिया मिलेगी। लेकिन अगले ही दिन एक बड़ा राहत काफिला जिंदरान कला की ओर बढ़ रहा था।
राहत का काफिला गांव में पहुंचा तो खुशी में झूम उठे लोग

जब गांव के बाहर सड़क पर वाहनों का लंबा काफिला दिखाई दिया तो लोगों को पहले विश्वास ही नहीं हुआ। धीरे-धीरे खबर पूरे गांव में फैल गई कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से राहत सामग्री पहुंच रही है।
जब राहत सामग्री लेकर संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों का काफिला गांव जिंदरान कला की सीमा पर पहुंचा, तो पूरे गांव में मानो उत्सव का माहौल बन गया। गांव के लोग ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ स्वागत के लिए सड़क पर उमड़ पड़े। बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी खुशी से झूमते हुए काफिले के साथ चल रहे थे।
कई ग्रामीणों ने हाथ जोड़कर संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया, तो कुछ लोगों ने उनके स्वरूप पर फूल बरसाकर सम्मान प्रकट किया। ढोल की थाप और जयकारों के बीच ऐसा लग रहा था मानो गांव किसी बड़े पर्व का जश्न मना रहा हो।
जिन किसानों के चेहरे कुछ दिन पहले तक चिंता से भरे हुए थे, आज वही चेहरे राहत और कृतज्ञता की चमक से दमक रहे थे। यह स्वागत केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि उस संत के प्रति गांव की सच्ची भावना थी जिसने संकट की घड़ी में उनकी पुकार सुनकर मदद का हाथ बढ़ाया।
काफिले में आए सेवादारों के साथ गांव वाले भी जुलूस की तरह चलते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। कई लोगों की आंखों में राहत और कृतज्ञता के आंसू थे।
एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा:
“हमने तो सिर्फ मदद मांगी थी, लेकिन हमें उम्मीद से भी ज्यादा मिला। ऐसा लगा जैसे भगवान ने हमारी पुकार सुन ली।”
गांव को दी गई मदद: 12,000 फुट पाइप और दो विशाल मोटरें
राहत सामग्री देखकर गांव वाले हैरान रह गए।

संत रामपाल जी महाराज की ओर से गांव को दी गई सहायता में शामिल था:
- 12,000 फुट लंबी 8-इंच की पाइप लाइन
- दो शक्तिशाली 20 हॉर्स पावर की मोटरें
- मोटर से जुड़ी सभी जरूरी एक्सेसरी
- स्टार्टर और अन्य उपकरण
सबसे खास बात यह थी कि गांव वालों को एक नट-बोल्ट तक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। सारी सामग्री पूरी तरह तैयार अवस्था में भेजी गई थी ताकि तुरंत पानी निकालने का काम शुरू हो सके। एक किसान ने मुस्कुराते हुए कहा:
“हमने गेहूं अभी बोए भी नहीं थे, लेकिन महाराज जी ने हमारी थाली में रोटी पहुंचा दी।”
गांव के किसानों की आंखों में लौट आई उम्मीद
राहत सामग्री मिलने के बाद गांव में जैसे नई ऊर्जा आ गई। किसानों को भरोसा हो गया कि अब खेतों का पानी निकल जाएगा और अगली फसल बोने का मौका मिलेगा। एक किसान ने बताया: “हम महीनों से इधर-उधर भटक रहे थे। सरकार के दफ्तरों में भी गए, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। आज हमारी समस्या हल हो गई।” दूसरे ग्रामीण ने कहा: “जो काम सरकार नहीं कर सकी, वह संत रामपाल जी महाराज ने कर दिया। यह हमारे लिए बहुत बड़ा सहारा है।”
सेवा और करुणा का संदेश: संत रामपाल जी महाराज की प्रशंसा
जिंदरान कला की यह घटना केवल एक गांव की मदद की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस मानवीय भावना का उदाहरण है जो समाज को जोड़ती है। संत रामपाल जी महाराज लंबे समय से समाज सेवा के विभिन्न कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उनके अनुयायियों के अनुसार उनका स्पष्ट संदेश है कि सच्चा धर्म वही है जो जरूरतमंद की मदद करे।
बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना, गरीब परिवारों को राशन देना, जरूरतमंदों की मदद करना—ऐसे अनेक कार्यों के माध्यम से उन्होंने सेवा की एक परंपरा स्थापित की है। उनके अनुयायी बताते हैं कि देश के सैकड़ों गांवों में बाढ़ या अन्य संकट के समय सहायता पहुंचाई गई है और यह सेवा लगातार जारी है।
जिंदरान कला के लोगों के लिए यह मदद केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक संत की करुणा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई।
पारदर्शिता और जिम्मेदारी: ग्राम पंचायत को दिया गया पत्र

राहत सामग्री देने के साथ-साथ ग्राम पंचायत को एक औपचारिक पत्र भी सौंपा गया।
इस पत्र में कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की गईं:
- दी गई सामग्री का सही उपयोग किया जाए
- समय रहते गांव का पानी निकाला जाए
- अगली फसल की बुवाई सुनिश्चित की जाए
साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ड्रोन से गांव की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।
योजना यह है कि:
- एक वीडियो अभी का (जब गांव में पानी भरा है)
- दूसरा वीडियो पानी निकलने के बाद
- तीसरा वीडियो जब खेतों में फसल लहलहाएगी
इन वीडियो को भविष्य में कार्यक्रमों में दिखाकर यह बताया जाएगा कि लोगों के दान का सही उपयोग कैसे हुआ।
गांव की सहमति और सम्मान का प्रतीक
ग्राम पंचायत ने इस पहल का स्वागत किया और सामान प्राप्त करने की पुष्टि की।
सरपंच ने कहा: “पूरे गांव की तरफ से हम संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करते हैं। अब हमारी अगली फसल बच जाएगी।” गांव के बुजुर्गों ने सम्मान स्वरूप पगड़ी भेंट करके आभार व्यक्त किया, जो हरियाणा की परंपरा में सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
गांव में दिखने लगा सामाजिक बदलाव
इस घटना का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहा। गांव के लोगों में एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ। कई ग्रामीणों का कहना है कि संकट के समय समाज को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। एक ग्रामीण ने कहा: “किसान बचता है तो पूरा समाज बचता है। आज जो मदद मिली है, वह पूरे इलाके के लिए प्रेरणा है।”
संत रामपाल जी महाराज जी की दया से गांवों में ख़ुशी की लहर
जिंदरान कला की यह कहानी केवल 12,000 फुट पाइप और दो मोटरों की नहीं है। यह कहानी उस भरोसे की है जो संकट के समय पैदा होता है। जब खेतों में पानी भर गया था, तब किसानों को लग रहा था कि अब उनका भविष्य अंधेरे में है। लेकिन एक मदद ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया। आज गांव के लोग कहते हैं कि अगर समय पर पानी निकल गया तो अगली फसल जरूर होगी और गांव की जिंदगी फिर पटरी पर लौट आएगी।
जिंदरान कला के किसानों के लिए यह राहत केवल तकनीकी मदद नहीं, बल्कि एक संदेश है, कि मुश्किल समय केवल भगवान सुनता है और जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तब भी एक रास्ता भगवान का खुला होता है। और संत रामपाल जी महाराज जी वे अवतार हैं जिन्होंने एक नहीं दो नहीं हजारों किसानों और गांवों का हाथ अन्नपूर्णा मुहिम के तहत एक साथ थामा।



