हरियाणा के कई गांवों ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसी प्राकृतिक परिस्थितियों का सामना किया, जिसने किसानों की मेहनत, उम्मीदों और आजीविका को गहरे संकट में डाल दिया। खेतों में कई-कई फुट तक पानी भर गया, तैयार फसलें नष्ट हो गईं और किसानों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया कि आने वाले समय में खेती कैसे होगी। रोहतक के भेणी चंद्रपाल, हिसार के कोहली और रामायण गांव तथा भिवानी के बड़ेसरा गांव में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि हजारों किसान परिवारों के सामने आर्थिक संकट मंडराने लगा था।
ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम किसानों के लिए राहत और उम्मीद का माध्यम बनकर सामने आई। खेतों से पानी निकालने के लिए मोटरें, पाइपलाइन और आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए गए, जिससे हजारों एकड़ भूमि दोबारा खेती योग्य बन सकी और किसानों को समय रहते गेहूं की बिजाई करने का अवसर मिला।
जब जलभराव ने किसानों की जिंदगी को रोक दिया
हरियाणा के विभिन्न जिलों में स्थित इन गांवों में जलभराव की समस्या केवल कुछ खेतों तक सीमित नहीं थी। कहीं 3 से 4 फुट तो कहीं 5 से 6 फुट तक पानी जमा था। खेतों में महीनों से सड़ा हुआ पानी खड़ा था, जिससे फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी थीं।
किसानों की प्रमुख समस्याएं थीं—
- खरीफ फसलों का पूरी तरह नष्ट हो जाना।
- गेहूं की बिजाई का समय निकलने का खतरा।
- पशुओं के लिए चारे की कमी।
- खेतों और रास्तों तक पहुंचने में कठिनाई।
- परिवारों के सामने आर्थिक संकट।
- बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना।
- बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ना।
कई किसानों ने बताया कि यदि समय रहते समाधान नहीं होता, तो उन्हें खेती छोड़कर मजदूरी करने तक की नौबत आ सकती थी।
भेणी चंद्रपाल (रोहतक): 700 से 800 एकड़ भूमि जलमग्न
रोहतक जिले की महम तहसील का गांव भेणी चंद्रपाल गंभीर जलभराव की समस्या से जूझ रहा था। लगभग 700 से 800 एकड़ उपजाऊ भूमि 4 से 5 फुट गहरे सड़े हुए पानी में डूबी हुई थी। खरीफ की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और किसानों को डर था कि वे गेहूं की बिजाई भी नहीं कर पाएंगे।
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार सहायता मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला। गांव में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ रहा था, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा गया था।
प्रदान की गई सहायता
संत Ramपाल जी महाराज के निर्देश पर गांव में निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध करवाई गई—
- लगभग 6500 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
- दो 20 HP की मोटरें
- एक 10 HP की मोटर
- स्टार्टर और बिजली के केबल
- पाइप फिटिंग का पूरा सामान
- नट-बोल्ट एवं अन्य आवश्यक उपकरण
शक्तिशाली मोटरों की सहायता से खेतों का पानी बाहर निकाला गया और समय रहते गेहूं की बिजाई शुरू हो सकी।
कोहली (हिसार): जब प्रशासन ने कहा 6 महीने लगेंगे
हिसार जिले की आदमपुर तहसील के कोहली गांव में हजारों एकड़ भूमि जलमग्न थी। खेतों में 3 से 4 फुट तक पानी जमा था। धान और नरमे की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सहायता मांगी, लेकिन उन्हें बताया गया कि आवश्यक पाइप उपलब्ध होने में लगभग 6 महीने लग सकते हैं। किसानों के लिए यह इंतजार संभव नहीं था क्योंकि बिजाई का मौसम तेजी से निकल रहा था।
प्रदान की गई सहायता
कुछ ही दिनों के भीतर गांव में पहुंचाई गई सामग्री में शामिल थे—
- 10-10 HP की दो क्रोम्पटन मोटरें
- लगभग 8000 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
- स्टार्टर और बिजली के केबल
- पाइप फिटिंग का पूरा सामान
- फेविकोल, सुंडियां और छोटे से छोटे नट-बोल्ट तक
ग्रामीणों का कहना था कि व्यवस्था इतनी व्यवस्थित थी कि उन्हें बाजार से कोई अतिरिक्त सामान खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ी। लगातार जल निकासी के बाद खेतों में फिर से हरियाली लौटने लगी और किसानों ने गेहूं की बिजाई शुरू कर दी।
बड़ेसरा (भिवानी): 4000 एकड़ भूमि को मिला नया जीवन
भिवानी जिले का बड़ेसरा गांव सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में से एक था। लगभग 4000 एकड़ भूमि 4 से 6 फुट गहरे पानी में डूबी हुई थी। खेत तालाब जैसे दिखाई देते थे और कई मकानों तक पानी पहुंच चुका था। धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और किसानों को लगने लगा था कि आने वाली फसल भी हाथ से निकल जाएगी।
पंचायत की पहल और त्वरित सहायता
गांव के सरपंच भूप सिंह जी और पंचायत ने सहायता की गुहार लगाई। इसके बाद कुछ ही दिनों में गांव में राहत सामग्री पहुंचा दी गई।
प्रदान की गई सहायता
- 15 HP की 5 शक्तिशाली मोटरें
- लगभग 12,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
- स्टार्टर और बिजली के केबल
- मोटर संचालन हेतु आवश्यक उपकरण
- पाइप फिटिंग का पूरा सामान
बदली गांव की तस्वीर
ग्रामीणों के अनुसार कुछ समय पहले तक खेतों में नाव चलाने जैसी स्थिति थी। लेकिन लगातार जल निकासी के बाद उन्हीं खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे और गेहूं की बिजाई शुरू हो गई।
सरपंच भूप सिंह जी ने कहा—
“हमारे खेतों में 4 से 6 फुट तक पानी खड़ा था। आज उन्हीं खेतों में ट्रैक्टर चल रहे हैं और बिजाई हो रही है। हम संत रामपाल जी महाराज के बहुत आभारी हैं।”
एक किसान ने भावुक होकर कहा—
“एक फसल तो खत्म हो चुकी थी। अगर पानी नहीं निकलता तो गेहूं की फसल भी नहीं बो पाते। संत रामपाल जी महाराज ने हमारे घरों में दोबारा उम्मीद जगा दी।”
एक बुजुर्ग किसान ने कहा—
“अपने जीवन में पहली बार देखा है कि कोई संत लेने नहीं, बल्कि देने के लिए घर-घर पहुंच रहा है।”
रामायण (हिसार): जहां किसानों ने उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी थी
हिसार जिले का रामायण गांव भी लंबे समय तक जलभराव की समस्या से जूझता रहा। खेतों में 4 से 5 फुट तक पानी भरा हुआ था। फसलें सड़ चुकी थीं और कई किसानों ने खेतों में जाना तक छोड़ दिया था।
कई किसानों का मानना था कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें खेती छोड़कर मजदूरी करनी पड़ेगी।
अन्नपूर्णा मुहिम बनी सहारा
गांव की पंचायत द्वारा सहायता की मांग किए जाने पर निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध करवाई गई—
- 15 HP की 3 बड़ी मोटरें
- लगभग 11,000 फुट लंबी 8 इंच पाइपलाइन
- जल निकासी के लिए आवश्यक उपकरण
डेढ़ महीने तक चला अभियान
रामायण गांव में जल निकासी का कार्य लगभग डेढ़ महीने तक लगातार चलता रहा। मोटरें दिन-रात चलती रहीं और धीरे-धीरे खेतों से पानी बाहर निकलने लगा।
जहां पहले केवल ठहरा हुआ गंदा पानी दिखाई देता था, वहां बाद में जमीन नजर आने लगी। इसके बाद किसानों ने दोबारा खेत तैयार किए और गेहूं की बुवाई शुरू की।
गांव के लोगों के लिए यह केवल खेती का पुनः आरंभ नहीं था, बल्कि जीवन को फिर से पटरी पर लाने जैसा अनुभव था।
एक नजर में सहायता का विवरण
| गांव | जिला | प्रभावित क्षेत्र | पानी की गहराई | उपलब्ध कराई गई सहायता |
| भेणी चंद्रपाल | रोहतक | 700-800 एकड़ | 4-5 फुट | 6500 फुट पाइपलाइन, 2×20 HP व 1×10 HP मोटर |
| कोहली | हिसार | हजारों एकड़ | 3-4 फुट | 8000 फुट पाइपलाइन, 2×10 HP क्रोम्पटन मोटर |
| बड़ेसरा | भिवानी | लगभग 4000 एकड़ | 4-6 फुट | 12000 फुट पाइपलाइन, 5×15 HP मोटर |
| रामायण | हिसार | व्यापक जलभराव | 4-5 फुट | 11000 फुट पाइपलाइन, 3×15 HP मोटर |
केवल राहत नहीं, किसानों के भविष्य को बचाने का प्रयास
इन सभी गांवों में पहुंचाई गई सहायता केवल जल निकासी तक सीमित नहीं थी। इसका उद्देश्य किसानों की अगली फसल, पशुधन और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करना था। यदि समय रहते पानी नहीं निकाला जाता—
- गेहूं की बिजाई नहीं हो पाती।
- किसानों को मजदूरी करने पर मजबूर होना पड़ता।
- पशुओं के लिए चारे का संकट और बढ़ जाता।
- परिवार आर्थिक संकट में डूब जाते।
- हजारों एकड़ भूमि लंबे समय तक अनुपयोगी बनी रहती।
लेकिन समय पर हुई सहायता ने किसानों को दोबारा खेती करने का अवसर दिया और उनकी उम्मीदों को टूटने से बचा लिया।
संत रामपाल जी महाराज के अन्य मानवता सेवा कार्य
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में देशभर में अनेक समाजसेवी कार्य संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
- जरूरतमंद परिवारों को राशन सहायता
- रक्तदान शिविर
- निःशुल्क दहेजरहित विवाह
- गरीब बच्चों की सहायता
- पर्यावरण संरक्षण अभियान
- नशामुक्ति जागरूकता अभियान
- जरूरतमंद किसानों की सहायता
इन सेवाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाना और मानवता की भावना को मजबूत करना है।
गांवों में लौटी हरियाली और मुस्कान
आज भेणी चंद्रपाल, कोहली, बड़ेसरा और रामायण जैसे गांवों में स्थिति पहले से पूरी तरह बदल चुकी है। जहां कभी चारों ओर पानी, चिंता और निराशा दिखाई देती थी, वहीं अब खेतों में हरियाली, ट्रैक्टरों की आवाज और आने वाली अच्छी फसल की उम्मीद दिखाई देती है।
इन गांवों की कहानी केवल जल निकासी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन किसानों की कहानी है जिनकी डूबती उम्मीदों को फिर से जीवन मिला। समय पर मिली सहायता ने न केवल खेतों को बचाया, बल्कि हजारों किसान परिवारों के भविष्य को भी नई दिशा देने का कार्य किया।



