Last Updated on 13 October 2026 IST | International Day for the Eradication of Poverty in Hindi: हर साल 17 अक्टूबर को मनाया जाने वाला गरीबी उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है जो गरीबी की वैश्विक समस्या पर ध्यान आकर्षित करता है और इसे समाप्त करने के लिए कार्रवाई का आह्वान करता है। इस दिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1992 में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी, जो 1987 में पेरिस में हुए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बाद हुआ था, जहाँ गरीबी को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना गया था। गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026 की थीम है “सभी के लिए सुरक्षित घर”।
International Day for the Eradication of Poverty [Hindi]: मुख्य बिंदु
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाये जाने की घोषणा की गयी।
- यह दिवस पहली बार 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था।
- यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया।
- गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026 की थीम है “सभी के लिए सुरक्षित घर“।
- इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
- इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।
- वैश्विक एमपीआई 2021 के अनुसार, भारत की रैंक 109 देशों में 66वें स्थान पर है।
- आइए जानें तत्वदर्शी बाखबर संत रामपाल जी महाराज कैसे खत्म कर रहे हैं दरिद्रता?
17 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रुप में क्यों मनाया जाता है?
प्रत्येक वर्ष संपूर्ण विश्व में 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस रूप में मनाये जाने की घोषणा की गयी। इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
गरीब कौन है?
गरीबी को एक ऐसी परिस्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति अथवा परिवार वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण अपने जीवन निर्वाह के लिये बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है।
समाजशास्त्री हेनरी बर्नस्टीन ने निर्धनता के चार आयाम बताए हैं-
- जीविका रणनीतियों का अभाव।
- संसाधनों (जैसे-धन, भूमि आदि) की अनुपलब्धता।
- असुरक्षा की भावना।
- संसाधनों के अभाव के कारण सामाजिक संबंध रखने और विकसित करने की अक्षमता।
ऐसे लोग जो देश में मौजूद बुनियादी जरूरतों से भी वंचित हैं और असुरक्षित आवास, खतरनाक काम की स्थिति, न्याय तक असमान पहुंच, राजनीतिक शक्ति द्वारा दबाए जाना और सीमित स्वास्थ्य देखभाल पाने वाले लोग गरीबी के साए में जीने को मजबूर हैं, गरीब है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण दक्षिण एशियाई और उप-सहारा क्षेत्रों से लगभग 88 से 115 मिलियन लोग गरीबी की ओर धकेल दिए गए हैं। माना जाता है कि यह संख्या 143 से 163 मिलियन के बीच बढ़ी है। ये आंकड़े मौजूदा 1.3 बिलियन लोगों के अतिरिक्त हैं जो महामारी से पहले गरीबी में जी रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का इतिहास क्या है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को अपना संकल्प 47/196 अपनाया और 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया। यह दिवस पहली बार 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) का उद्देश्य क्या है?
इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की 2026 में थीम [Theme] क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस 2026 की थीम “सभी के लिए सुरक्षित घर” (Safe Homes for All) रखी गई है, जो इस बात पर जोर देती है कि एक सुरक्षित, स्थिर और गरिमापूर्ण आवास (Housing) गरीबी से मुक्ति पाने की बुनियादी सीढ़ी है। आज दुनिया भर में करोड़ों लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित, असुरक्षित और अस्थायी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि जब तक किसी व्यक्ति के पास सिर छुपाने के लिए एक सुरक्षित छत नहीं होगी, तब तक उसके लिए बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार हासिल करना लगभग असंभव है। आवास की असुरक्षा न केवल इंसानी गरिमा को ठेस पहुँचाती है, बल्कि यह गरीबी के अंतहीन चक्र को और गहरा करती है। इसलिए, यह थीम वैश्विक नेताओं और समाज का आह्वान करती है कि वे बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ‘सुरक्षित आवास’ को अपनी नीतियों में प्राथमिकता दें, ताकि हर व्यक्ति एक सुरक्षित माहौल में सम्मान के साथ जीवन जी सके और गरीबी के जाल से बाहर निकल सके।
हम कहां खड़े हैं: आशा के साथ कठोर वास्तविकता
विश्व बैंक के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 81.1 से 82.4 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) में जीवन यापन कर रहे हैं—यानी प्रतिदिन $2.15 से कम पर जीवित रहना। यह वैश्विक आबादी का लगभग 9.8% से 10% हिस्सा है (यानी पृथ्वी पर हर दस में से लगभग एक व्यक्ति)।
उप-सहारा अफ्रीका (Sub-Saharan Africa) अब भी अत्यधिक गरीबी का सबसे भारी बोझ उठाता है, जहाँ दक्षिण सूडान, सोमालिया, नाइजीरिया और मेडागास्कर जैसे देशों में गरीबी दर सबसे अधिक बनी हुई है। वहीं, दक्षिण एशिया में लक्षित कार्यक्रमों और विकास पहलों के माध्यम से गरीबी दर में महत्वपूर्ण व नाटकीय सुधार देखा गया है।
लैंगिक अंतर असमानता की एक और परत जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर कुल अत्यधिक गरीबों में आधी से अधिक संख्या महिलाओं और लड़कियों की है। यूएन वीमेन (UN Women) की चेतावनी के अनुसार, वास्तविक और ठोस कार्रवाई के बिना 2030 तक करोड़ों महिलाएँ अत्यधिक गरीबी के जाल में फँसी रह सकती हैं।
International Day for the Eradication of Poverty: क्या भारत में वापस लौट चुकी है गरीबी?
भारत में गरीबी का आकलन नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा ‘राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक’ (National Multidimensional Poverty Index – MPI) और वैश्विक स्तर पर UNDP द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।
नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। जहाँ 2005-06 में बहुआयामी गरीबी 55.1% थी, वहीं नीति आयोग और UNDP के अद्यतन आंकड़ों (2019–2021/2024–25 डेटा) के अनुसार यह घटकर 11.28% से 16.4% के बीच रह गई है और लगभग 24.8 करोड़ लोग पिछले एक दशक में बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं।
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वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) में भारत का MPI स्कोर सुधरकर 0.069 हो गया है। इसके अलावा, केरल जैसे राज्यों ने खुद को अत्यधिक गरीबी से मुक्त (Extreme Poverty Free) घोषित करने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
देश के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत किस प्रकार के अनुदान दिए जा रहे हैं?
गरीबी उन्मूलन के नाम से संचालित एक दर्जन से अधिक योजनाएं आज भी संचालित की जा रही हैं। चाहे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनुदान पर खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा हो या फिर खाद्य बीज, रसोई गैस, केरोसिन, चीनी आदि पर अनुदान दिया जा रहा है। आत्मा योजना के तहत किसानों को कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दिए जाने तथा गरीबों के बच्चों को मानदेय आदि के बाद भी गरीबों की संख्या में वृद्धि हो रही है।
गरीबी से बचने के लिए प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ
1. मानवाधिकार के रूप में गरीबी: गरीबी केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। यह भोजन, आवास, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंच को सीमित करती है। गरीबी को संबोधित करने के लिए एक ऐसे दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो मानवीय गरिमा का सम्मान करे और सभी के लिए समानता सुनिश्चित करे।
2. सामाजिक और संस्थागत भेदभाव: जाति, लिंग और विकलांगता जैसे कारकों के आधार पर भेदभाव गरीबी को बढ़ाता है। संस्थानों के भीतर पक्षपातपूर्ण नीतियाँ और प्रथाएँ कमजोर वर्गों को और हाशिए पर धकेलती हैं। गरीबी समाप्त करने के प्रयासों में भेदभाव को समाप्त करने और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के उपाय शामिल होने चाहिए।
3. आर्थिक असमानता: गरीबी उन्मूलन में एक महत्वपूर्ण बाधा आर्थिक असमानता है। समृद्ध और गरीब के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है, जहाँ धन एक छोटे से समूह के व्यक्तियों के बीच अधिक केंद्रित होता जा रहा है। धन के पुनर्वितरण और उचित मजदूरी सुनिश्चित करने पर ध्यान देने वाली नीतियाँ इस असंतुलन को दूर करने में महत्वपूर्ण हैं।
4. शिक्षा और रोजगार तक पहुंच: गरीबी के चक्र को तोड़ने के लिए शिक्षा और रोजगार तक पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करना कि सभी लोगों, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभ्य काम के अवसरों तक पहुंच हो, टिकाऊ विकास के लिए आवश्यक है।
5. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: जलवायु परिवर्तन गरीब समुदायों को असमान रूप से प्रभावित करता है, जो उनकी परेशानियों को और बढ़ाता है। गरीबी से लड़ने में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को संबोधित करने वाली रणनीतियाँ शामिल होनी चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि पर्यावरणीय स्थिरता गरीबी उन्मूलन प्रयासों का एक प्रमुख घटक है।
गरीबी उन्मूलन के लिए रणनीतियाँ
1. समावेशी नीतियाँ और कार्यक्रम: सरकारों और संगठनों को सबसे कमजोर आबादी की जरूरतों को पूरा करने वाली नीतियाँ और कार्यक्रम लागू करने चाहिए। इसमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा उपायों तक पहुंच प्रदान करना शामिल है।
2. सामुदायिक जुड़ाव और भागीदारी: गरीबी को सफलतापूर्वक संबोधित करने के लिए निर्णय लेने में समुदायों को शामिल करना महत्वपूर्ण है। व्यक्तियों और समुदायों को नीतियाँ बनाने और लागू करने में भाग लेने के लिए सशक्त बनाना यह सुनिश्चित करता है कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनकी जरूरतें पूरी हों।
3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: गरीबी के मूल कारणों को संबोधित करने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज को संसाधनों, ज्ञान और प्रभावी प्रथाओं को साझा करने के लिए एक साथ काम करना चाहिए।
4. सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी): संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य, विशेष रूप से लक्ष्य 1 (कोई गरीबी नहीं), गरीबी से निपटने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं। स्थानीय और राष्ट्रीय नीतियों में एसडीजी को शामिल करने से गरीबी में कमी में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
5. नवीन समाधान: प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाना गरीबी को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डिजिटल वित्तीय सेवाएं, मोबाइल स्वास्थ्य समाधान और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म वंचित और दूरदराज के क्षेत्रों तक अवसर बढ़ा सकते हैं।
केस स्टडी और सफलता की कहानियाँ
1. सशर्त नकद हस्तांतरण (सीसीटी): ब्राजील का बोल्सा फैमिलिया और मेक्सिको का प्रोस्पेरा जैसे कार्यक्रम कम आय वाले परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करके गरीबी कम करने में सफल रहे हैं, जो स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी पर निर्भर करता है।
2. सूक्ष्म वित्त पहल: बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक जैसी सूक्ष्म वित्त संस्थाओं ने व्यवसाय शुरू करने के लिए छोटे ऋण प्रदान करके लाखों लोगों को सशक्त बनाया है, जिससे लोगों को अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करने और गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली है।
3. समुदाय-नेतृत्व वाला विकास: भारत में स्व-नियोजित महिला संघ (सेवा) जैसी पहल समुदाय-संचालित विकास की शक्ति को दर्शाती है। सेवा ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में महिलाओं को वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक पहुंच प्राप्त करने में मदद की है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।
4. सार्वजनिक-निजी साझेदारी: सरकारों, निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों के बीच साझेदारी के परिणामस्वरूप गरीबी कम करने के सफल प्रयास हुए हैं। उदाहरण के लिए, केन्याई सरकार और सफारीकॉम के एम-पेसा मोबाइल मनी सेवा के बीच सहयोग ने वित्तीय समावेश को बढ़ाया है और लाखों केन्याई लोगों के लिए आर्थिक अवसर पैदा किए हैं।
सरकार द्वारा गरीबी को कम किए जाने के लिए प्रयास क्या हैं?
- अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान द्वारा जनसांख्यिकी, स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर में आर्थिक असमानता की समीक्षा के लिये संपत्ति आधारित सूचकांकों का विकास किया गया है।
- साथ ही वर्ष 2005-06 से लगातार संपत्ति सूचकांक के माध्यम से सरकार को 400 से अधिक संकेतकों पर आँकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं।
- इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा सामाजिक असमानता को दूर करने और समाज के सभी वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिये कई महत्त्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की गई है।
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम अर्थात् मनरेगा (MGNREGA)
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan-Dhan Yojana- PMJDY)
- आयुष्मान भारत
- प्रधानमंत्री आवास योजना (Prime Minister Awas Yojana -PMAY)
- एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड (One Nation-One Ration Card)
वैश्विक भूख सूचकांक 2026 रिपोर्ट
2026 का वैश्विक भूख सूचकांक भारत के लिए पिछले वर्षों की तुलना में सुधार दर्शाता है, हालांकि चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। भारत 123 देशों में से 102वें स्थान पर है। भारत का स्कोर 25.8 है, जो इसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखता है। भारत की रैंक श्रीलंका (61), नेपाल (72) और बांग्लादेश (85) से नीचे है, लेकिन पाकिस्तान (106) और अफगानिस्तान (109) से ऊपर है। अफगानिस्तान (109) दक्षिण एशिया में इस सूचकांक पर सबसे निचले स्थान पर बना हुआ है।
गरीबी से जुड़े तथ्य और आँकड़े
- अद्यतन अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा: विश्व बैंक ने क्रय शक्ति समानता (PPP) के नए आंकड़ों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा (International Poverty Line) को $2.15 से बढ़ाकर 3.00 अमेरिकी डॉलर ($3.00/day) प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की आय के रूप में अद्यतन किया है।
- वर्तमान में वैश्विक स्तर पर लगभग 808 से 817 मिलियन (80.8 से 81.7 करोड़) लोग अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा ($3.00 प्रति दिन) से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
- वैश्विक तुलनात्मक श्रमिक आंकड़ों के अनुसार, विश्व के लगभग 6.9% श्रमिक और उनके परिवार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम सीमा से भी कम आय पर जीवन बिता रहे हैं।
- गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अधिकांश लोग दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्रों से संबंधित हैं।
- उच्च गरीबी स्तर अक्सर छोटे, अस्थिर और संघर्ष-प्रभावित देशों में पाए जाते हैं।
- रिपोर्टों के अनुसार, विश्व की लगभग 47.6% आबादी के पास अभी भी किसी भी एक सामाजिक सुरक्षा नकद लाभ (Social Protection Cash Benefit) तक पहुँच नहीं है।
भारत का वैश्विक भूख सूचकांक में स्कोर अब भी “गंभीर” श्रेणी में है, जहाँ एक बड़ी आबादी तक पौष्टिक भोजन नहीं पहुँच पाता। यह स्थिति केवल नीतिगत चुनौती ही नहीं, बल्कि समाज में संसाधनों के असमान वितरण को भी दर्शाती है। ऐसे माहौल में संत रामपाल जी महाराज द्वारा आरंभ की गई अन्नपूर्णा मुहिम वास्तविक सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम
अन्नपूर्णा मुहिम, संत रामपाल जी महाराज की प्रत्यक्ष प्रेरणा से संचालित सेवा योजना है, जिसका मूल उद्देश्य है — *“कोई भूखा न सोए।”* इस अभियान के तहत हजारों निर्धन और जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क राशन, आटा, दाल, चावल, तेल, मसाले, कपड़े और दैनिक उपयोग की सामग्री दी जाती है, जब तक वे आत्मनिर्भर न हो जाएँ। हर लाभार्थी को सम्मानपूर्वक सहायता दी जाती है, बिना किसी जाति, धर्म या क्षेत्रीय भेदभाव के।
जहाँ Global Hunger Index भारत की चिंताजनक स्थिति को उजागर करता है, वहीं संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस चुनौती से जमीनी स्तर पर मुकाबला कर रही है। यह मुहिम साबित करती है कि करुणा, संगठन और ईमानदार सेवा भावना से भूख जैसी समस्या का वास्तविक समाधान संभव है।
मनुष्य जीवन में क्या सतभक्ति का अभाव है गरीबी या दरिद्रता का मुख्य कारण?
जैसा कि हम पढ़ते और सुनते हैं कि बहुत से ऐसे भक्त हुए हैं जिन्होंने परमात्मा की प्राप्ति के लिए अरबों खरबों की संपत्ति और राजपाट त्याग कर गरीबी में जीवन जिया, सतभक्ति की और परमात्मा की प्राप्ति भी की। आज उन लोगों को बड़े बड़े रईस पैसे वाले लोग अपना आदर्श, गुरु, भगवान और अपना ईष्ट तक मानते हैं उदाहरण के लिए श्री गुरु नानक देव जी, भक्त नरसी, संत रविदास जी, नामदेव जी, भक्त मीराबाई, सुल्तान अधम, सिंकदर लोधी, वाजिद, तैमूरलंग, शेख फरीद, बीर देव सिंह बघेल, नामदेव, भक्त पीपा और सीता, मलूक दास, दादू दास इत्यादि।
इन सभी महापुरुषों ने बेहद ही साधारण जीवन जिया किंतु सतभक्ति की जिसके फलस्वरूप परमेश्वर ने हरदम इन भक्तों की रक्षा की। इन भक्तों ने अपना जीवन सुखमय जिया और अंततः जीवन और मरण के महा दुख से निवृत्ति पाकर मोक्ष को प्राप्त हुए। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 23, में प्रमाण है कि जो भी शास्त्रविधि त्याग कर मनमाना आचरण करता है उसे कोई सुख प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि वर्तमान में लोग दुखी ज्यादा हैं और महाकष्ट भोग रहे हैं क्योंकि वह गीता अध्याय 4 श्लोक 34 के अनुसार तत्वदर्शी संत से नाम दीक्षा लेकर पारब्रह्म परमेश्वर की भक्ति नहीं कर रहे हैं जिसके फलस्वरूप कष्ट पर कष्ट उठा रहे हैं।
कबीर परमेश्वर जी कहते हैं:-
कबीर सब जग निर्धना, धनवंता ना कोय।
धनवंता सोइ जानियो जापै राम नाम धन होय।।
सर्व सोने की लंका थी, रावण से रणधीरं।
एक पलक में राज नष्ट हुआ, जम के पड़े जंजीरं।।
अर्थात श्रीलंका के राजा रावण के पास इतना धन था कि उसने सोने (स्वर्ण) के महल बना रखे थे। जब विनाश हुआ तो एक रती (ग्राम) स्वर्ण भी रावण साथ नहीं ले जा सका।
कौन कर रहा हैं भारत और विश्व की गरीबी समाप्त?
जब पूर्ण परमात्मा कबीर जी गरीबदास जी को मिले तब उन्होंने उन्हे ज्ञान कराया कि यहां रहने वाले सब जीव मेरे बच्चे हैं इनको में सतभक्ति प्रदान करके और बुराइयों से दूर कर के धनी बनाऊंगा और सतलोक लेकर जाऊंगा। ऊंच-नीच, अमीरी गरीबी की खाई को सत्य ज्ञान से ही मिटाया जा सकता है जो कबीर साहेब जी के अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी बाखबर संत रामपाल जी महाराज बखूबी कर रहे हैं।
मानव शरीर प्राप्त प्राणी को चाहिए कि सर्वप्रथम पूर्ण गुरू संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में जाकर दीक्षा प्राप्त करें। फिर आजीवन गुरू जी की मर्यादा में रहकर साधना तथा सेवा, दान-धर्म करते रहें। अपना दैनिक कार्य भी करें परंतु सर्व बुराई त्याग दें। तब उसका कल्याण अवश्य होता है।
अध्यात्म ज्ञान के अभाव से मानव (स्त्री/पुरूष) केवल धन उपार्जन को अपना मुख्य लक्ष्य बनाकर जीवन सफर को तय करता है। यदि आपके पास अरब-खरब तक धन-संपत्ति है जो आपने पूरे जीवन में अट-पट, छल-कपट करके संग्रह की है। अचानक मृत्यु हो जाती है। सारे जीवन का जोड़ा धन तो यहीं रह गया, साथ तो शरीर भी नहीं गया, साथ गए तो वे पाप जो पूरे जीवन में माया के संग्रह में हुए थे। करोड़ों लोग तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से जुड़कर सुखमय और निरोगी जीवन जी रहे हैं । सभी से प्रार्थना है बहुचर्चित पुस्तक ज्ञान गंगा को पढ़ें, ज्ञान समझें, नाम दीक्षा लेकर, पूर्ण मर्यादा में रहकर, सत भक्ति करें, अपना और अपने परिवार का कल्याण कराएं।
FAQs about International Day for Eradication of Poverty
उत्तर : गरीबी उन्मूलन दिवस प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को मनाया जाता है।
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को अपना संकल्प 47/196 अपनाया और 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया। यह दिवस पहली बार 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया।
उत्तर : विश्व गरीबी उनमूलन दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
उत्तर : सरकार और मानव मात्र भी अनेकों वर्षों से दरिद्रता को समाप्त करने के लिए अपना हर संभव प्रयास कर रहे है। पर सफल नहीं हो पाए। एक कबीर परमेश्वर ही है जो किसी भी गरीब के भाग्य में लिखे को बदल सकते हैं । सतभक्ति दरिद्रता के उन्मूलन का एकमात्र, सहज और सटीक उपाय है।



