International Day for the Eradication of Poverty: संसार की गरीबी कैसे दूर होगी?

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International Day for the Eradication of Poverty: कोरोना काल में भारत में गरीबों की तादाद बहुत अधिक बड़ गई है। कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में गरीब हुए लोगों में 60 फीसदी भारतीय हैं। एक रिसर्च के मुताबिक बढ़ी बेरोजगारी के चलते भारत के मिडिल क्लास में 3.2 करोड़ लोग कम हुए है और गरीबों की संख्या साढ़े सात करोड़ बढ़ी है। विश्वबैंक ने कहा कोविड-19 के कारण 2021 तक 15 करोड़ लोगों के गरीबी के दलदल में फंसने के आसार बन गये हैं।

Table of Contents

International Day for the Eradication of Poverty: मुख्य बिंदु

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाये जाने की घोषणा की गयी।
  • यह दिवस पहली बार 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था।
  • यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया। 
  • इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
  • इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।
  • 15 अक्टूबर को वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 जारी किया गया। भुखमरी सूचकांक में भारत को 101वां स्थान मिला है। भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पीछे है।
  • आइए जानें तत्वदर्शी बाखबर संत रामपाल जी महाराज कैसे खत्म कर रहे हैं दरिद्रता?

17 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रुप में क्यों मनाया जाता है?

प्रत्येक वर्ष संपूर्ण विश्व में 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 दिसम्बर 1992 को प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस रूप में मनाये जाने की घोषणा की गयी। इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है।

International day for the eradication of poverty: जानिए गरीब कौन है?

गरीबी को एक ऐसी परिस्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति अथवा परिवार वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण अपने जीवन निर्वाह के लिये बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है।

समाजशास्त्री हेनरी बर्नस्टीन ने निर्धनता के चार आयाम बताए हैं-

  1. जीविका रणनीतियों का अभाव।   
  2. संसाधनों (जैसे-धन, भूमि आदि) की अनुपलब्धता। 
  3. असुरक्षा की भावना।  
  4. संसाधनों के अभाव के कारण सामाजिक संबंध रखने और विकसित करने की अक्षमता। 

ऐसे लोग जो देश में मौजूद बुनियादी जरूरतों से भी वंचित हैं और असुरक्षित आवास, खतरनाक काम की स्थिति, न्याय तक असमान पहुंच, राजनीतिक शक्ति द्वारा दबाए जाना और सीमित स्वास्थ्य देखभाल पाने वाले लोग गरीबी के साए में जीने को मजबूर हैं, गरीब है।

■ Read in English: International Day For The Eradication Of Poverty: Sat-Bhakti Is A Powerful Spiritual Means To Eradicate Any Other Form Of Poverty

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण दक्षिण एशियाई और उप-सहारा क्षेत्रों से लगभग 88 से 115 मिलियन लोग गरीबी की ओर धकेल दिए गए हैं। माना जाता है कि यह संख्या 143 से 163 मिलियन के बीच बढ़ी है। ये आंकड़े मौजूदा 1.3 बिलियन लोगों के अतिरिक्त हैं जो महामारी से पहले गरीबी में जी रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का इतिहास क्या है?

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को अपना संकल्प 47/196 अपनाया और 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया। यह दिवस पहली बार 1987 में फ्रांस में मनाया गया जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी द्वारा आरंभ किया गया। 

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) का उद्देश्य क्या है?

इस दिवस का उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की 2021 में थीम क्या है?

इस वर्ष महामारी और गरीबी से निजात पाने के लिए theme है “Building Forward Together: Ending Persistent Poverty, Respecting all People and our Planet”. (Building Forward) आगे बढ़ने का अर्थ है प्रकृति के साथ अपने संबंधों को बदलना, भेदभाव की संरचनाओं को नष्ट करना और मानव अधिकारों के नैतिक और कानूनी ढांचे पर निर्माण करते रहना। आगे बढ़ने का मतलब है कि गरीबी में रहने वाले लोगों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें सामने आने के लिए समर्थन दिया जाता है।

2021 के भुखमरी इंडेक्स Global Hunger Index में भारत  किस स्थान पर है?

वैश्विक भुखमरी सूचकांक के आंकड़ें सामने आ गए हैं और इनमें भारत की स्थिति अच्छी नहीं है। बता दें कि 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत फिसलकर 101वें स्थान पर आ गया है। भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल भी इस सूचकांक में भारत से बेहतर स्थिति में हैं।

International Day for the Eradication of Poverty: क्या भारत में वापस लौट चुकी है गरीबी?

भारत में गरीबी का आकलन नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा ‘बहुआयामी गरीबी सूचकांक’ (Multidimensional Poverty Index- MPI) जारी कर किया जाता है। आजादी के समय हमारे देश की कुल आबादी 32 करोड़ थी और इसमें से 20 करोड़ लोग गरीब थे। आजादी के बाद तमाम आर्थिक विकास और गरीबी निवारण योजनाओं के बावजूद गरीबों की संख्या कम नहीं हुई, बल्कि यह बढ़कर आज 40 करोड़ पहुंच गई है। भारत में 45 साल के बाद पिछले एक साल में सबसे ज्यादा गरीब बढ़े हैं। 

इसके साथ ही 1970 के बाद से गरीबी हटाने की ओर बढ़ रही देश की निर्बाध यात्रा भी बाधित हो चुकी है। पिछली बार आजादी के बाद के पहले 25 सालों में गरीबी दर में बढ़त दर्ज की गई थी। तब, 1951 से 1954 के दौर में गरीबों की कुल आबादीे 47 फीसद से बढ़कर 56 फीसद हो गई थी। वैश्विक एमपीआई 2020 के अनुसार, एनएफएचएस 4 (2015/16) के आंकड़ों के आधार पर भारत 107 देशों में 62वें स्थान पर था और उसका एमपीआई स्कोर 0.123 अंक है और हेडकाउंट अनुपात 27.91 प्रतिशत है। भारत में अब भी 37 करोड़ लोग गरीब, हैं संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार।

देश के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत किस प्रकार के अनुदान दिए जा रहे हैं?

गरीबी उन्मूलन के नाम से संचालित एक दर्जन से अधिक योजनाएं आज भी संचालित की जा रही हैं। चाहे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनुदान पर खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा हो या फिर खाद्य बीज, रसोई गैस, केरोसिन, चीनी आदि पर अनुदान दिया जा रहा है। आत्मा योजना के तहत किसानों को कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण दिए जाने तथा गरीबों के बच्चों को मानदेय आदि के बाद भी गरीबों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

सरकार द्वारा गरीबी को कम किए जाने के लिए प्रयास क्या हैं?

  • अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान द्वारा जनसांख्यिकी, स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर में आर्थिक असमानता की समीक्षा के लिये संपत्ति आधारित सूचकांकों का विकास किया गया है। 
  • साथ ही वर्ष 2005-06 से लगातार संपत्ति सूचकांक के माध्यम से सरकार को 400 से अधिक संकेतकों पर आँकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं। 
  • इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा सामाजिक असमानता को दूर करने और समाज के सभी वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिये कई महत्त्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की गई है।   
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम अर्थात् मनरेगा (MGNREGA)
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan-Dhan Yojana- PMJDY)
  • आयुष्मान भारत 
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (Prime Minister Awas Yojana -PMAY) 
  • एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड (One Nation-One Ration Card)

मनुष्य जीवन में क्या सतभक्ति का अभाव है गरीबी या दरिद्रता का मुख्य कारण?

जैसा कि हम पढ़ते और सुनते हैं कि बहुत से ऐसे भक्त हुए हैं जिन्होंने परमात्मा की प्राप्ति के लिए अरबों खरबों की संपत्ति और राजपाट त्याग कर गरीबी में जीवन जिया, सतभक्ति की और परमात्मा की प्राप्ति भी की। आज उन लोगों को बड़े बड़े रईस पैसे वाले लोग अपना आदर्श, गुरु, भगवान और अपना ईष्ट तक मानते हैं उदाहरण के लिए श्री गुरु नानक देव जी, भक्त नरसी, संत रविदास जी, नामदेव जी, भक्त मीराबाई, सुल्तान अधम, सिंकदर लोधी, वाजिद, तैमूरलंग, शेख फरीद, बीर देव सिंह बघेल, नामदेव, भक्त पीपा और सीता, मलूक दास, दादू दास इत्यादि।

इन सभी महापुरुषों ने बेहद ही साधारण जीवन जिया किंतु सतभक्ति की जिसके फलस्वरूप परमेश्वर ने हरदम इन भक्तों की रक्षा की। इन भक्तों ने अपना जीवन सुखमय जिया और अंततः जीवन और मरण के महा दुख से निवृत्ति पाकर मोक्ष को प्राप्त हुए। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 23, में प्रमाण है कि जो भी शास्त्रविधि त्याग कर मनमाना आचरण करता है उसे कोई सुख प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि वर्तमान में लोग दुखी ज्यादा हैं और महाकष्ट भोग रहे हैं क्योंकि वह गीता अध्याय 4 श्लोक 34 के अनुसार तत्वदर्शी संत से नाम दीक्षा लेकर पारब्रह्म परमेश्वर की भक्ति नहीं कर रहे हैं जिसके फलस्वरूप कष्ट पर कष्ट उठा रहे हैं।

कबीर परमेश्वर जी कहते हैं:-

कबीर सब जग निर्धना, धनवंता ना कोय।

धनवंता सोइ जानियो जापै राम नाम धन होय।।

सर्व सोने की लंका थी, रावण से रणधीरं।

एक पलक में राज नष्ट हुआ, जम के पड़े जंजीरं।।

अर्थात श्रीलंका के राजा रावण के पास इतना धन था कि उसने सोने (स्वर्ण) के महल बना रखे थे। जब विनाश हुआ तो एक रती (ग्राम) स्वर्ण भी रावण साथ नहीं ले जा सका।

कौन कर रहा हैं भारत और विश्व की गरीबी समाप्त?

जब पूर्ण परमात्मा कबीर जी गरीबदास जी को मिले तब उन्होंने उन्हे ज्ञान कराया कि यहां रहने वाले सब जीव मेरे बच्चे हैं इनको में सतभक्ति प्रदान करके और बुराइयों से दूर कर के धनी बनाऊंगा और सतलोक लेकर जाऊंगा। ऊंच-नीच, अमीर गरीबी की खाई को सत्य ज्ञान से ही मिटाया जा सकता है जो कबीर साहेब जी के अवतार जगतगुरु तत्वदर्शी बाखबर संत रामपाल जी महाराज बखूबी कर रहे हैं।

मानव शरीर प्राप्त प्राणी को चाहिए कि सर्वप्रथम पूर्ण गुरू संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में जाकर दीक्षा प्राप्त करें। फिर आजीवन गुरू जी की मर्यादा में रहकर साधना तथा सेवा, दान-धर्म करते रहें। अपना दैनिक कार्य भी करें परंतु सर्व बुराई त्याग दें। उसका कल्याण अवश्य होता है। 

अध्यात्म ज्ञान के अभाव से मानव (स्त्री/पुरूष) केवल धन उपार्जन को अपना मुख्य लक्ष्य बनाकर जीवन सफर को तय करता है। यदि आपके पास अरब-खरब तक धन-संपत्ति है जो आपने पूरे जीवन में अट-पट, छल-कपट करके संग्रह की है। अचानक मृत्यु हो जाती है। सारे जीवन का जोड़ा धन तो यहीं रह गया, साथ तो शरीर भी नहीं गया, साथ गए तो वे पाप जो पूरे जीवन में माया के संग्रह में हुए थे। करोड़ों लोग तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से जुड़कर सुखमय और निरोगी जीवन जी रहे हैं । सभी से प्रार्थना है बहुचर्चित पुस्तक ज्ञान गंगा को पढ़ें, ज्ञान समझें, नाम दीक्षा लेकर, पूर्ण मर्यादा में रहकर, सत भक्ति करें, अपना और अपने परिवार का कल्याण कराएं।

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