संत रामपाल जी महाराज ने गुजरानी गाँव को जलभराव से दिलाई मुक्ति

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हरियाणा राज्य के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले गुजरानी गाँव में अत्यधिक वर्षा के कारण गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। गाँव का मुख्य जलघर (वाटर वर्क्स) 8 से 10 फुट गहरे गंदे पानी में पूरी तरह डूब चुका था, जिससे पेयजल की आपूर्ति पूर्णतः ठप हो गई थी। खेतों में 4 से 7 फुट तक पानी जमा होने के कारण लगभग 70 से 80 किले (एकड़) भूमि जलमग्न थी। 

ग्रामीणों के अनुसार, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया था और वे पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए थे। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई मोटरें अप्रभावी सिद्ध हो रही थीं क्योंकि वे पानी को पास की ड्रेन में डाल रही थीं, जो पहले से ही ओवरफ्लो होकर पड़ोसी गाँवों के लिए संकट उत्पन्न कर रही थी।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के तहत त्वरित सहायता

जब सरकारी सहायता के प्रयास विफल रहे, तब सरपंच प्रतिनिधि विजय शर्मा और ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु अर्जी लगाई। गुजरानी की पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने तत्काल राहत सामग्री भिजवाई। अर्जी देने के मात्र 2 दिन के भीतर सहायता सामग्री गाँव पहुँच गई। इस सहायता के अंतर्गत निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध कराए गए:

  • 14,000 फीट लंबी उच्च गुणवत्ता वाली 8 इंची पाइप लाइन।
  • 20-20 एचपी की दो शक्तिशाली मोटरें।
  • मोटरों के साथ आवश्यक स्टार्टर, केबल, सुंडिया और नट-बोल्ट।

सेवादारों ने यह स्पष्ट किया कि यह समस्त सामान अब गाँव की स्थायी अमानत है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटा जा सके।

कृषि भूमि की पुनर्बहाली और बिजाई के आंकड़े

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई मशीनों ने दिन-रात कार्य करके खेतों और जलघर से पानी को सीधे नहर में निष्कासित किया। इसके परिणामस्वरूप गाँव की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है:

  • बिजाई का प्रतिशत: वर्तमान में गाँव की लगभग 97% से 98% भूमि पर गेहूँ की बिजाई सफल हो चुकी है।
  • अंकुरण की स्थिति: खेतों में गेहूँ अंकुरित होकर बाहर निकल आया है।
  • प्रभावित क्षेत्र: लगभग 100 से 150 एकड़ क्षेत्र जो 4.5 फुट पानी में डूबा था, अब पूरी तरह सूख चुका है और जुताई के लिए तैयार है।
  • समय सीमा: शेष 2% भूमि पर भी आगामी 7 से 10 दिनों में बिजाई पूर्ण होने की संभावना है।

सहायता और प्रभाव का संक्षिप्त विवरण

विवरणसांख्यिकीय डेटा / जानकारी
पाइप लाइन की लंबाई14,000 फीट (8 इंची)
मोटरों की क्षमता20-20 एचपी की 2 मोटरें
प्रभावित कृषि भूमि100 – 150 एकड़
जल स्तर (अधिकतम)8 – 10 फुट (जलघर में), 4.5 फुट (खेतों में)
बिजाई की सफलता98% पूर्ण
अनुमानित लागतकरोड़ों रुपये (ग्रामीणों के अनुसार)
सहायता का समयअर्जी के 2 दिन के भीतर

आवासीय क्षति और सामाजिक प्रभाव

लंबे समय तक जलभराव के कारण गाँव के लगभग 20% घरों में संरचनात्मक क्षति हुई है। भूजल स्तर (चोहा) ऊपर आने के कारण घरों के फर्श फट गए और दीवारों में दरारें आ गईं। 

गाँव निवासी महेश शर्मा ने बताया कि पानी के दबाव के कारण कुछ मकानों की दीवारें और छतें भी गिर गईं। किसान सुनील कुमार ने जानकारी दी कि धान की फसल में 100% नुकसान हुआ था और सरकार की ओर से कोई मुआवजा या सहायता प्राप्त नहीं हुई थी। 

यदि संत रामपाल जी महाराज सहायता प्रदान नहीं करते, तो आगामी एक वर्ष तक बिजाई संभव नहीं होती, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति झेलनी पड़ती।

प्रशासनिक विफलता और ग्रामीण प्रतिक्रिया

सरपंच प्रतिनिधि विजय शर्मा के अनुसार, प्रशासन ने इस संकट के समय व्यवस्था नहीं की। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत वाला यह कार्य एक सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं था। ग्रामीणों का मानना है कि संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उन्हें “जीवन दान” दिया है। 

गाँव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि जहाँ सरकारी व्यवस्था ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था, वहाँ संत रामपाल जी महाराज ने एक रक्षक के रूप में उनकी सहायता की।

गुजरानी गाँव की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में गुजरानी गाँव के खेतों में पानी पूरी तरह निकल चुका है और मिट्टी जुताई के लिए उपयुक्त हो गई है। ड्रोन व्यू के माध्यम से देखा जा सकता है कि पूरा क्षेत्र अब जलमुक्त है और गेहूँ की फसल लहलहा रही है। ग्रामीणों ने इस परिवर्तन के लिए संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त किया है।

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