नदियों के उफान और बारिश की बूंदों से उपजी बाढ़ जब किसी गांव की दहलीज लांघती है, तो वह केवल फसलों को नहीं डुबोती, बल्कि हजारों सपनों और उम्मीदों को भी गर्क कर देती है। कुछ ऐसा ही मंजर हरियाणा के भिवानी जिले के प्रेमनगर गांव में था। यह कहानी केवल 5-6 फुट गहरे पानी की नहीं है, बल्कि उन आंसुओं और रातों की है जो चिंता में बीत गईं। एक महिला किसान, जिसने अपनी तीन बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ठेके पर जमीन ली थी, उसकी सारी जमा पूंजी और हिम्मत पानी के साथ बहने लगी थी। प्रशासन की बेरुखी ने घाव पर नमक का काम किया, जब उन्होंने स्पष्ट कह दिया— “इतनी बड़ी व्यवस्था हमारे बस की बात नहीं है।” लेकिन कहते हैं न कि जहाँ इंसानी कोशिशें दम तोड़ देती हैं, वहाँ से ईश्वरीय कृपा और सच्चे संत का आशीर्वाद शुरू होता है।
बेबसी का वो दौर और प्रशासन की लाचारी
बाढ़ का प्रकोप इतना भयावह था कि प्रेमनगर की लगभग 400-500 एकड़ भूमि जलमग्न हो चुकी थी। खेतों में जहाँ हरियाली होनी चाहिए थी, वहाँ केवल विनाश का पानी खड़ा था। गांव के सरपंच राजेश कुमार जी बताते हैं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर थी। सैकड़ों किसानों की पहली फसल (धान) पूरी तरह तबाह हो चुकी थी और अगली फसल (गेहूं) की बिजाई का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। ग्रामीणों की कमर टूट चुकी थी। जब गांव की पंचायत और किसान गुहार लगाने प्रशासन के पास पहुंचे, तो उन्हें केवल निराशा हाथ लगी। प्रशासन ने कनेक्टिविटी की कमी और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। वह दौर गांव के लिए किसी अंधेरी सुरंग जैसा था, जहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।
संत रामपाल जी महाराज बने निराशा के बीच उम्मीद की किरण
जब हर तरफ अंधेरा था, तब प्रेमनगर के ग्रामीणों ने अपनी आखिरी उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई। गांव की बेबसी और किसानों का दर्द देखकर महाराज जी ने बिना किसी देरी के तुरंत सहायता का आदेश दिया। संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि मानव सेवा ही परम धर्म है और उनके आदेश पर प्रेमनगर में न केवल एक बार, बल्कि दो बार विशाल राहत सामग्री भेजी गई। सेवादारों की टीम ने सर्वे किया और सुनिश्चित किया कि किसानों को ₹1 का सामान भी बाहर से न खरीदना पड़े।
संत रामपाल जी महाराज की मेहरबानी: पाइप से लेकर नट-बोल्ट तक सब कुछ मिला
महाराज जी की सहायता की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह आधी-अधूरी नहीं थी। अक्सर लोग सामान दे देते हैं लेकिन छोटी चीजों के लिए गरीब को भटकना पड़ता है। यहाँ पाइपों और मोटरों के साथ-साथ स्टार्टर, केबल, फेविकोल और यहाँ तक कि नट और बोल्ट जैसी सूक्ष्म सामग्री भी मुफ्त उपलब्ध कराई गई।
राहत सामग्री का विवरण
| क्रम संख्या | सामग्री | विवरण |
| 1. | कुल पाइपलाइन | 8,000 फुट (सक्शन और डिलीवरी पाइप) |
| 2. | शक्तिशाली मोटरें | दो 15-15 HP की और एक 10 HP की मोटर |
| 3. | अन्य सहायक उपकरण | स्टार्टर, बिजली की केबल, फेविकोल, नट-बोल्ट |
| 4. | अतिरिक्त पाइपलाइन | 6,000 फुट (दूरदराज के क्षेत्रों के लिए) |
चमत्कारिक बदलाव: संत के आशीर्वाद से पानी गया, हरियाली आई
आज करीब दो महीने बीत चुके हैं और प्रेमनगर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई मोटरों ने दिन-रात काम किया और उस पानी को खेतों से खदेड़ दिया। किसान जयवीर सिंह और गांव के अन्य युवा बेहद उत्साहित हैं। जिस जमीन पर बिजाई की कोई उम्मीद नहीं थी, आज वहाँ गेहूं की फसल लहलहा रही है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि किसानों का कहना है कि उनकी फसल अब उन ऊंचे खेतों से भी बेहतर खड़ी है जहाँ बाढ़ का असर नहीं था। गांव की 100% जमीन पर बिजाई पूरी हो चुकी है। वही पाइप और मोटरें जो कभी काल बने पानी को निकालने के काम आ रहे थे, आज गेहूं की सिंचाई (सिंझाई) के लिए जीवनदायिनी अमृत बन गए हैं।
सच्चे संत की निस्वार्थ सेवा से प्रभावित हुआ प्रेमनगर गाँव
आज पूरा प्रेमनगर गांव संत रामपाल जी महाराज का नतमस्तक होकर धन्यवाद कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहाँ बड़े-बड़े धर्मगुरुओं ने उनकी सुध नहीं ली, वहाँ एक सच्चे संत ने मसीहा बनकर उनका हाथ थामा। यह केवल पाइप और मोटर की मदद नहीं थी, बल्कि यह उन हजारों चेहरों पर मुस्कान लौटाने का प्रयास था जो भूख और कर्ज के डर से सहमे हुए थे।
संत रामपाल जी महाराज के कार्यों ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। आज प्रेमनगर का हर खेत और हर किसान यही कह रहा है— “वह तो धरती का भगवान रे प्राणी, हर मुश्किल को कर देता आसान।’ इस ऐतिहासिक मदद ने साबित कर दिया है कि जब निस्वार्थ सेवा और नेक नियत मिलती है, तो बड़ी से बड़ी आपदा भी खुशहाली में बदल जाती है।



