हरियाणा के जिला जींद की तहसील जुलाना का छोटा-सा गांव करसोला इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां खेतों की हरियाली के साथ-साथ किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान दिखाई दे रही है। बरसों से खाद की कमी, लंबी लाइनों, बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ से जूझ रहे छोटे किसान इस बार राहत की सांस लेते नजर आए। वजह बनी संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाया जा रहा “किसान मजदूर बचाओ अभियान (फेज-3)”, जिसके तहत पात्र किसानों तक निशुल्क यूरिया, डीएपी और फसल के अनुसार आवश्यक कीटनाशक दवाइयों की व्यवस्था की गई।
सबसे खास बात यह रही कि यह सहायता केवल एक बार नहीं पहुंची। जिन किसानों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, उनके लिए दोबारा, फिर तीसरी और उसके बाद चौथी बार भी कृषि सामग्री गांव तक पहुंचाई गई। इस पूरी प्रक्रिया ने यह संदेश दिया कि कोई भी पात्र किसान केवल कागजी प्रक्रिया की वजह से सहायता से वंचित न रहे।
छोटे किसानों की सबसे बड़ी चिंता थी खेती की बढ़ती लागत
करसोला गांव के अधिकांश छोटे किसान दो या ढाई एकड़ तक की जमीन पर खेती करते हैं। खेती ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। हर सीजन में खाद, डीएपी और दवाइयों की व्यवस्था करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता था।
कई किसानों ने बताया कि पहले उन्हें सरकारी केंद्रों पर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था। कई बार नंबर आने से पहले ही खाद खत्म हो जाती थी। मजबूरी में बाजार से महंगी कीमत पर सामान खरीदना पड़ता या फिर ब्याज पर पैसे लेकर खेती करनी पड़ती थी।
गांव के एक किसान ने बातचीत में कहा—
“पहले तो पूरा दिन लाइन में निकल जाता था। कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता था। फिर उधार लेकर महंगी खाद खरीदनी पड़ती थी। इस बार पहली बार ऐसा हुआ कि खाद और दवाई खुद गांव में आ गई।”
एक अन्य किसान ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि अब खेत की तैयारी समय पर हो जाएगी। पैसे भी बचेंगे और कर्ज लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इन किसानों की बातें केवल आर्थिक परेशानी नहीं बतातीं, बल्कि उस मानसिक दबाव को भी सामने लाती हैं जिससे छोटे किसान हर खेती के मौसम में गुजरते हैं।
गांव में लगा शिविर, आवेदन से लेकर सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई
किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत सबसे पहले गांव करसोला में शिविर लगाया गया। ग्राम पंचायत द्वारा मुनादी कराकर किसानों को इसकी सूचना दी गई। निर्धारित दिन पर पात्र किसान अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचे।
शिविर में किसानों के आवेदन भरे गए। उनकी भूमि, फसल और आवश्यकता का पूरा विवरण दर्ज किया गया। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई ताकि वास्तव में जरूरतमंद किसानों तक सहायता पहुंचे। सेवादारों ने बताया कि प्रत्येक किसान की जमीन और फसल के अनुसार अलग-अलग सहायता किट तैयार की गई। किसी किसान को आधा एकड़ के हिसाब से सामग्री मिली तो किसी को एक या दो एकड़ के अनुसार यूरिया, डीएपी और आवश्यक कृषि दवाइयां उपलब्ध करवाई गईं।
पहले वितरण में ही गांव पहुंचे खाद, डीएपी और दवाइयों से भरे वाहन
सत्यापन पूरा होने के तुरंत बाद गांव में सहायता सामग्री से भरे वाहन पहुंचे। किसानों को किसी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े और न ही परिवहन का कोई खर्च उठाना पड़ा। पहले वितरण में पात्र किसानों को बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और कृषि दवाइयों की किट निशुल्क प्रदान की गई। किसानों ने बताया कि आवेदन करने के कुछ ही समय बाद सामग्री गांव तक पहुंच जाना उनके लिए किसी राहत से कम नहीं था।
गांव के एक किसान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा—
“इतनी जल्दी मदद मिलेगी, हमने सोचा भी नहीं था। पहले खाद लेने के लिए पूरा दिन खराब होता था, अब सामान सीधे गांव में मिल गया।”
जो किसान पहली बार सहायता से वंचित रह गए, उनके लिए दूसरी, तीसरी और चौथी बार भी गांव पहुंची सामग्री। इस अभियान की सबसे उल्लेखनीय बात इसकी निरंतरता रही। जिन किसानों की प्रक्रिया पहली बार पूरी नहीं हो सकी, उन्हें सहायता से बाहर नहीं छोड़ा गया। सत्यापन पूरा होते ही दूसरी बार फिर वाहन गांव पहुंचे और पात्र किसानों को खाद एवं कृषि दवाइयों की किट प्रदान की गई। इसके बाद मात्र दस दिनों के भीतर तीसरी बार भी कृषि सामग्री गांव पहुंची। तीसरे वितरण में भी किसानों को उनकी भूमि और फसल के अनुसार यूरिया, डीएपी और कीटनाशक दवाइयां उपलब्ध करवाई गईं। बाद में जिन किसानों का सत्यापन पूरा हुआ, उनके लिए चौथी बार भी सामग्री गांव भेजी गई। इस तरह सहायता केवल घोषणा बनकर नहीं रही, बल्कि हर पात्र किसान तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
किसानों ने खुलकर साझा की अपनी राय
गांव के कई किसानों ने बताया कि खेती की तैयारी के लिए पहले उन्हें रिश्तेदारों या साहूकारों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। एक किसान ने कहा कि पहले खाद और दवाई खरीदने में हजारों रुपये लग जाते थे। अब यह खर्च बच जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि हमें किसी से कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। एक अन्य किसान ने भी भावुक होकर कहा कि पहले चिंता रहती थी कि खाद मिलेगी भी या नहीं। अब समय पर सब मिल गया है। इससे फसल भी अच्छी होगी और मन भी शांत है। कई किसानों ने बताया कि यदि खेती की शुरुआत समय पर हो जाए तो पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच और ग्रामीणों ने भी जताई खुशी
गांव के सरपंच ने कहा कि छोटे किसानों तक इस प्रकार सीधे सहायता पहुंचना उनके लिए बड़ी राहत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे गांव के गरीब किसानों को खेती करने में काफी मदद मिलेगी।
पूर्व सरपंच ने भी इसे किसानों के हित में महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि आज तक उन्होंने इस प्रकार खाद, बीज और दवाइयां गांव में पहुंचाकर वितरित होते नहीं देखी थीं। ग्रामीणों का कहना था कि जब किसान की सबसे बड़ी जरूरत समय पर पूरी हो जाए तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और परिवार भी राहत महसूस करता है।
संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों की ग्रामीणों ने की सराहना
गांव के अनेक किसानों और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की खुलकर प्रशंसा की। उनका कहना था कि छोटे किसानों तक समय पर खाद, बीज और कृषि दवाइयां पहुंचाना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता को कम करने का प्रयास है। ग्रामीणों ने बताया कि सेवा का वास्तविक अर्थ वही है, जब जरूरतमंद व्यक्ति तक बिना किसी स्वार्थ के सहायता पहुंचे। किसानों का मानना है कि खेती से जुड़े परिवारों की समस्याओं को समझते हुए इस प्रकार की सहायता ने उनमें नया विश्वास जगाया है। कई किसानों ने भावुक होकर कहा कि जब कोई कठिन समय में साथ खड़ा होता है तो उसका महत्व केवल सामान से नहीं, बल्कि उसके पीछे की संवेदना से भी समझा जाता है।
गांव में दिखाई देने लगा सामाजिक बदलाव
करसोला गांव में इस अभियान के बाद केवल खाद और दवाइयों का वितरण ही नहीं हुआ, बल्कि किसानों के बीच एक सकारात्मक माहौल भी देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर सहायता मिलने से खेती की तैयारियां आसान हुई हैं। कई किसानों ने बताया कि अब वे बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के अपनी फसल की देखभाल कर सकेंगे। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि जब छोटे किसान मजबूत होंगे तो गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। खेती केवल किसान का काम नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज की जीवनरेखा है।
अभियान से जुड़े सेवादारों ने जानकारी दी कि पात्र किसानों के लिए सहायता की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। जिन किसानों के पास निर्धारित सीमा तक कृषि भूमि है, जो स्वयं खेती करते हैं और अन्य आय का साधन नहीं रखते, वे आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के बाद सत्यापन किया जाएगा और पात्र पाए जाने पर आवश्यकता के अनुसार खाद, बीज और कृषि दवाइयों की व्यवस्था करवाई जाएगी। साथ ही सामग्री किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
जब किसान के घर पहुंची राहत, तब उम्मीद ने फिर से ली अंगड़ाई
करसोला गांव की यह कहानी केवल खाद, डीएपी और कीटनाशक दवाइयों के वितरण की कहानी नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जो तब जन्म लेता है जब किसी छोटे किसान की सबसे बड़ी चिंता समय पर दूर हो जाती है। जिन परिवारों के लिए हर खेती का मौसम आर्थिक संघर्ष लेकर आता था, उनके लिए यह सहायता राहत का संदेश बनकर पहुंची।
गांव के लोगों का कहना है कि समय पर मिली सहायता से खेती आसान होगी, कर्ज का दबाव कम होगा और किसान पूरे मन से अपनी फसल पर ध्यान दे सकेगा। लगातार चार चरणों में गांव तक सहायता पहुंचने से ग्रामीणों में यह विश्वास भी मजबूत हुआ कि पात्र किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा।
करसोला की गलियों से लेकर खेतों की मेड़ों तक आज यही चर्चा है कि जब जरूरत के समय सहायता घर तक पहुंचे तो उसका असर केवल खेतों पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन पर दिखाई देता है। यही इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा संदेश बनकर सामने आया है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डॉउनलोड करें।



